Mandu Utsav 2019 : धरोहर की गोद में दिखे कला- संस्कृति के रंग


Mandu Utsav 2019: पर्यटन नगरी मांडू में पांच दिवसीय खोजने में खो जाओ विचार पर आधारित मांडू उत्सव का शुभारंभ शनिवार को हुआ।

मांडू। Mandu Utsav 2019 मांडू में पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ मां नर्मदा आरती के साथ हुआ। शनिवार शाम पर्यटन मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल ने रेवा कुंड पहुंचकर महाआरती की। रात में देश के जाने-माने बैंड दल प्रेम जोशून ने प्रस्तुति देकर श्रोताओं को आनंदित कर दिया। कला और संस्कृति का नया अध्याय उत्सव के माध्यम से शुरू हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद एडवेंचर स्पोर्ट्स हुए। प्रभारी मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ और पर्यटन मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल ने उत्सव के तहत आर्ट एंड कल्चरल डिस्ट्रिक्ट का उद्घाटन किया।

भोज उत्सव की शुरुआत

धार में दो दिवसीय भोज उत्सव की शुरुआत प्रदेश सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने शनिवार रात किया। पहले दिन शोध संगोष्ठी हुई और रविवार को अंतिम राजा भोज पर आधारित नाटक का मंचन होगा।

पर्यटन नगरी मांडू में पांच दिवसीय खोजने में खो जाओ विचार पर आधारित मांडू उत्सव का शुभारंभ शनिवार को जिले के पर्यटन मंत्री सुरेंद्रसिंह हनी बघेल एवं जिले की प्रभारी व संस्कृति मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने किया। कारवां सराय में लगे हैंडीक्रॉफ्ट एवं स्थानीय वस्तुओं पर आधारित प्रदर्शनी मेले का फीता काटकर शुभारंभ करते हुए प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मेले में देशभर के 40 से अधिक कलाकारों ने अनूठे तरीके से प्रदर्शनी को संजोया। शाम को मां रेवा कुंड पर मां नर्मदा की आरती की गई। कारवां सराय में जिले के दोनों मंत्री व विधायकों ने ढोल-मांदल पर जमकर नृत्य किया। वहीं देर शाम इंडियन ओशियन बैंड दल ने शानदार प्रस्तुति दी। मां रेवा… जैसे ही गूंजा, पूरा परिसर झूम उठा। इस बार पर्यटन मंत्री की विशेष रुचि के चलते मांडू उत्सव को महा उत्सव का रूप दिया गया है। यही वजह है कि उत्सव के पहले ही दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

उत्सव का औपचारिक शुभारंभ दोपहर 3.30 बजे कारवां सराय में टाट का फीता काटकर कि या गया। इसके पूर्व कारवां सराय में मंत्रियों एवं अतिथियों की अगवानी पारंपरिक भगोरिया नृत्य के साथ की गई। ढोल-मांदल नृत्य दल ने समूचे क्षेत्र में भगोरिया की मादकता घोल दी। कारवां सराय में अतिथियों का आगमन कि या गया। प्रदर्शनी का अतिथियों ने करीब डेढ़ घंटे तक अवलोकन किया। इस दौरान धरमपुरी विधायक पांचीलाल मेड़ा, मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा, सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल आदि मौजूद थे।

गूंजा रेवा कुंड परिसर

पर्यटन मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल एवं धरमपुरी विधायक पांचीलाल मेड़ा की उपस्थिति में ओंकारेश्वर के पं. गिरजाशंकर ने रेवा कुंड पर पहले मां नर्मदा का कलश पूजन करवाया। पश्चात गणेश पूजन कर 21 दीपकों से आरती की गई। 108 दीपक की महाआरती कर पुष्पांजलि अर्पित की।

यहां मां नर्मदा की आरती

मां नर्मदा की आरती अमरकंटक से शुरू की जाती है। मुख्य रूप से अमरकंटक, जबलपुर के ग्वारीघाट, आंवली घाट, होशंगाबाद के सेठानी घाट, ओंकारेश्वर के खेड़ी घाट, महेश्वर, खलघाट, गुजरात के भरुच में नर्मदा आरती के बाद मांडू के रेवा कुंड में भी नर्मदा आरती शुरू हो चुकी है।

मांडू के रेवा कुंड का इतिहास

मां नर्मदा के महत्व के बारे में नर्मदा महापुराण में मांडू का वर्णन दिया गया है कि यहां मार्कंडेय ऋषि ने तपस्या कर मां रेवा को प्रसन्न् कि या था। मां रेवा ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। मार्कंडेय ऋषि ने मां रेवा की अखंड परिक्रमा की है और मार्कंडेय ऋषि की कोई भी कालगणना अब तक नहीं की गई। रेवा कुंड का महत्व नर्मदा परिक्रमा में भी आता है। जब तक रेवा कुंड को परिक्रमा में नहीं लिया जाता, परिक्रमा अधूरी मानी जाती है। इसीलिए परिक्रमावासी मां रेवा की परिक्रमा करने के दौरान मांडू रेवा कुंड के दर्शन करने के लिए भी आते हैं। मार्कंडेय ऋषि द्वारा मांडू का नाम मंडप दुर्ग रखा गया था, जो कि प्राचीन नाम है।

Manmohan Pawar (Sampadak) Khabr News send kare WhatsApp no.- 9753903839

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