अंराष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला कुली का सम्‍मान


दुर्गा की जीवनी विशेष अवशर पर

दुर्गा बोरवार बैतूल स्टेशन की पहली महिला कुली  है  का भी सम्‍मान किया गया

दुर्गा ने कुली का बिल्ला पाने चार साल तक किया संघर्ष / दुर्गा ने कुली का बिल्ला पाने चार साल तक किया संघर्ष

Betul News – पिता बीमारी से बिस्तर पर पड़े थे। परिवार के खाने के भी लाले पड़ गए थे। ऐसे में परिवार की बेटी ने पिता की जगह कुली बनना…

दुर्गा ने कुली का बिल्ला पाने चार साल तक किया संघर्ष
कुली का काम करते हुए दुर्गा रेलवे स्‍टेशन बैतूल में एक मात्र महिला

पिता बीमारी से बिस्तर पर पड़े थे। परिवार के खाने के भी लाले पड़ गए थे। ऐसे में परिवार की बेटी ने पिता की जगह कुली बनना तय किया। रेलवे अधिकारियों ने ताने दिए लड़की कैसे कुली का काम कर सकती है। चार साल तक रेलवे अधिकारियों के चक्कर काटते हुए संघर्ष किया और आखिरकार रेलवे ने उसे बिल्ला दिया और वह कुली बनकर दुनिया के साथ घर का भी बोझ उठा रही है।

यह कहानी है बैतूल स्टेशन पर कुली का काम करने वाली दुर्गा बोरवार की। दुर्गा के पिता मुन्ना बोरवार बैतूल स्टेशन पर कुली का काम करते थे। अचानक पिता को पैर की बीमारी ने जकड़ लिया और उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। परिवार की पूरी जिम्मेदारी दुर्गा पर आ गई। दुनिया की परवाह नहीं करते हुए दुर्गा ने स्टेशन पर पिता की जगह कुली बनने का फैसला लिया। 2007 से 2011 तक स्टेशन पर कुली का बिल्ला पाने के लिए संघर्ष किया। इसमें सभी ने सहयोग किया। साल 2011 में दुर्गा को कुली नंबर 11 का बिल्ला मिला। इसके बाद से वह लगातार कुली का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही है।

लड़की कैसे करेगी कुली का काम

दुर्गा ने बताया कुली का बिल्ला हासिल करने के लिए बैतूल से नागपुर स्टेशन तक गुहार लगाई। नागपुर के रेलवे अधिकारियों ने कहा लड़की कैसे कुली का काम करेगी। उसे बिल्ला देने में आनाकानी करने लगे। बैतूल के समाजसेवी सहित स्टेशन के अधिकारियों ने उसे कुली बनने में मदद की। पहले जब स्टेशन पर वह सामान ढोने का काम करने लगी तो यात्री भी हिचकिचाते थे लड़की कैसे सामान ढोएगी, लेकिन धीरे-धीरे यात्री भी उससे सामान ढुलवाने लगे।

मेहनत आैर लगन

दुर्गा बोरवार

बैतूल स्टेशन की पहली महिला कुली है दुर्गा, पिता की बीमारी के कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए बनी कुली

बैतूल. रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बोझ उठाती कुली दुर्गा।

बड़ी बहन व बच्चों की है जिम्मेदारी

दुर्गा ने बताया 2017 में उसके माता-पिता का निधन हो गया। इसके बाद से बड़ी बहन राजकुमारी तथा उसके दो बच्चों की जिम्मेदारी उस पर आ गई है। यात्रियों का सामान ढोकर वह बड़ी बहन व उसके बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाल रही है। दुर्गा ने बताया स्टेशन पर 6 से 7 हजार रुपए प्रतिमाह कमा लेती है। इसमें परिवार का खर्चा चल जाता है। दुर्गा ने बताया बड़ी बहन के बच्चे ही उसके लिए सब कुछ हैं। वह शादी नहीं करना चाहती।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s