किसान संघर्ष समिति ने मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन प्रेषित कर समस्याओं के निराकरण की अपील की।


किसान संघर्ष समिति क कार्यकारीे अध्यक्ष और मुलताई के पूर्व विधायक डॉ.सुनीलम

किसान संघर्ष समिति मध्य प्रदेश में कोरोना संकट के चलते मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन पत्र सौंपकर 13 सूत्री मांगों के निराकरण की अपील की है 

श्री शिवराज सिंह चैहान,
मध्य प्रदेश शासन, 
भोपाल 

विषय : किसान संघर्ष समिति का ज्ञापन पत्र 

माननीय मुख्यमंत्री महोदय,

कोरोना संक्रमण को रोकने और देश के नागरिकों के बचाव के  लिये देश और प्रदेश में 21 दिन का  लॉक-डाउन किया गया है।
 परन्तु आप कोरोना वायरस को अंगूठा बताते हुए ,विधायकों की खरीद फरोख्त के जरिये  मुख्यमंत्री बन गये हैं। हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।
 आप किसान के बेटे  हैं , इसलिये किसानों की विशेष अपेक्षा आपसे है। किसान संघर्ष समिति की ओर से आपको यह ज्ञापन पत्र इस अपेक्षा से भेजा जा रहा है कि आप किसानों की तकलीफों को दूर करने के लिये तत्काल कदम उठायेंगे। 
जब कांग्रेस की सरकार थी तथा प्रदेश में अतिवृष्टि हुई थी तब आपने घुटने तक पानी में खड़े होकर फसलों का मुआवजा तथा फसल बीमा देने की मांग मुख्यमंत्री कमलनाथ से की थी,  ठीक ही किया  था,जरूरी था । 

 1 आप देख ही रहे हैं कि खड़ी फसल अतिवृष्टि से बर्बाद हो रही  है। ऐसी स्थिति में सभी पीड़ित किसानों को अंतरिम राहत देना जरूरी है ,हर किसान को 10 हज़ार रुपये की अंतरिम राहत राशि प्रदान की जाए।   
 क्राप-कटिंग सर्वे किसानों के परामर्श से किया जाये। क्राप-कटिंग सर्वे की रिपोर्ट  बनने के तुरंत बाद किसान को  (व्हाट्सअप  के माध्यम से) उपलब्ध कराई जाये। फसल बीमा के  क्लेम को प्रोसेस करने वाले कर्मचारी का फोन नंबर संबंधित किसान को मैसेज के जरिये उपलब्ध कराया जाये। आप यह सुनिश्चित करें कि एक माह के भीतर किसान को फसल बीमा कंपनी द्वारा मुआबजा  राशि किसान के खाते में डाल दिया जाये। जिन किसानों ने कोओपरेटिव या अन्य बैंकों से कर्जा लिया था उनकी बीमा राशि तो कटी है लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जिनका फसल बीमा नहीं हैं। ऐसे किसानों को भी फसल खराब होने के कारण एक मुश्त मुआबजा  राशि प्रदान की जानी चाहिये। 

 2. कांग्रेस सरकार ने किसानो के दो लाख रुपये तक के कर्जे माफ करने को लेकर सरकार बनाई थी। लेकिन एक भी किसान का दो लाख रुपये का कर्जा माफ नहीं हुआ। हमारी जानकारी में पचास हजार रुपये तक के कर्जे माफ किये गये। कर्जा माफी न होने के कारण किसान डिफाल्टर घोषित कर दिये गये हैं। आपकी सरकार को किसानों का कर्जा माफ कर उन्हें नये कर्जे लेने की सुविधा तुरंत उपलब्ध करानी चाहिये। यदि आप यह नहीं करना चाहते (क्योंकि आपको ऐसा लगता है कि आपकी सरकार अब बन ही गई है) फिर भी कम से कम किसानों से कर्जा वसूली तथा ब्याज एक साल के लिये स्थगित कर दिया जाना चाहिये।

3.आपने घोषणा की है कि किसानों से गेहूं की खरीद 2000 रुपये प्रति क्विंटल की जायेगी तथा 100 रुपये बोनस दिया जायेगा। जिन किसानों ने जल्दी बोनी की थी उनका गेहूं आ गया है। मंडी कोरोना संक्रमण के चलते बंद है। व्यापारियों द्वारा गांव-गांव में 1500 रुपये क्विंटल तक खरीद की जा रही है। यह जरूरी है कि प्रदेश की सभी कृषि मंडियों स्वाथ्य संबंधी समुचित व्यवस्था  बनाकर जल्द से जल्द खोली जायें। टोकन देकर किसानों को बुलाया जा सकता है। मंडियां 24 घंटे काम कर सकती हैं। ट्रैक्टर के साथ ट्रैक्टर चालक और  किसान परिवार के दो व्यक्तियों को अनुमति दी जा सकती है। उन्हें व्हट्सऐप पर पास जारी किये जा सकते हैं। किसानों और उन्हें लाने वाले वाहनों को भी पास जारी किये जायें। 

4 सरकार को पंचायत स्तर पर अनाज खरीदने तथा जन वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन गांव में ही उपलब्ध कराने की व्यवस्था इस विपदा काल में बनानी चाहिये। जैसा तेलगांना और कर्नाटक में किया जा रहा है।

5 जिन व्यापारियों द्वारा गांव में 2100 रुपये क्विंटल से कम पर खरीद की जा रही है उनपर तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिये। संकट के समय में किसानों की लूट को रोकना सरकार की विशेष जिम्मेदारी है। 

6 आप जानते ही हैं कि किसानों की फसल पक चुकी है तथा तुरंत काटने का काम शुरू किया जाना जरूरी है। आपके इलाके में हारवेस्टर से कटनी कराई जाती है लेकिन प्रदेश के अधिकतर( 80%)  छोटे और मझोले किसान, 1 हेक्टेयर से छोटी जोत के कारण तथा चारे की जरूरत को पूरा करने के लिये खेतिहर मजदूरों से कटाई कराते हैं। कटनी के लिये मजदूर प्रदेश के आठ-दस जिलों से प्रदेश भर में जाते हैं। लॉक-डाउन होने के कारण मजदूरों का खेतों तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिये यह जरूरी है कि गांव में मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को इस काम में लगाया जाये। सरकार द्वारा मनरेगा के अंतर्गत कटाई का कार्य कराया जाना चाहिये इससे मजदूरों को भी काम मिलेगा तथा किसानों की समस्या का हल भी होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के मुताबिक एक मीटर की जगह दो मीटर की दूरी भी यदि तय कर दी जाये तब भी कटनी का कार्य सुचारू रूप से किया जा सकता है। यदि आपकी सरकार हारवेस्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करे तब भी किसानों को तत्काल राहत मिल सकती है। असल में स्थिति यह है कि सरकार किसानों को मदद करने को तैयार भी नहीं है तथा किसान जो कुछ खुद करना चाहता है ,कर सकता है,करता रहा है, सरकार उसको भी नहीं करने दे रही है।

7आप जानते ही हैं कि हर किसान परिवार हाथ खर्चे के लिये खेत में पैदा हुई सब्जी तथा दूध बिक्री पर निर्भर है। पूरे प्रदेश में हाट बाजार बंद कर दिये गये हैं। हाट बाजारों को तत्काल शुरू किया जाना आवश्यक है। किसान हाट बाजार में वैसे भी एक-दो बोरी सब्जी लेकर जाता है तथा एक मीटर से अधिक दूरी पर बैठता है। सब्जी लेने वालों की दूरी बनी रहे इसका प्रबंध स्थानीय पंचायत( स्थानीय निकायों ) द्वारा किया जा सकता है। यदि सरकार हाट बाजार अभी चालू नहीं करना चाहती तो उसे खेतों से सब्जी की खरीद, बाजार दामों पर सुनिश्चित करनी चाहिये। यह काम पंचायतों के माध्यम से भी किया जा सकता है। पंचायतें ट्रैक्टर-ट्राली से सब्जियां गांव से शहर में पहुंचा सकती हैं। उससे सब्जी तोड़ने वालों , सब्जी ट्रोली में भरने वालों को, ट्रैक्टर वालों को सभी को काम मिलेगा तथा शहरों में बिना हाट बाजार के मोहल्लों में सब्जियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। 

8. आपकी जानकारी में आया होगा कि खपत के अभाव में सभी प्राइवेट दूध डेयरियां बंद हैं। जिसके चलते मुलतापी जैसे इलाकों में जहां किसान कहीं हद तक दूध की बिक्री पर आर्थिक तौर पर निर्भर हैं वो बड़े संकट में फंस गया है। प्राइवेट डेयरी चालू रखने के लिये उचित निर्देश आवश्यक हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दूध, दही,घी  और पनीर का वितरण भी किया जा सकता है। यह गांव के स्तर पर ही संभव है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए पोष्टिक भोजन आवश्यक है।

9 आपको भी यह सूचना मिल रही होगी कि शहरों में दूध और सब्जी लेकर जाने वाले किसानों को पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है इसके लिए जरूरी है कि शहर आने वाले किसानों को पास वितरित करने का अधिकार पंचायतों को दिया जाये, इसकी निगरानी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जाये। गृह मंत्रालय सभी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करे। दूध, सब्जी , फल और अनाज को अति आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया जाना चाहिये। 

10  किसानों को सभी अन्न दाता के रूप में स्वीकारते हैं परन्तु यदि लॉक-डाउन लंबा चलता है तो किसानों के सामने भी खाद्य सुरक्षा का संकट पैदा हो जायेगा। ऐसी स्थिति में किसानों को राशन उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ेगी। कम से कम गैस, बिजली, खाने का तेल और शक्कर की उपलब्धता किसानों के लिये भी कम से कम तीन माह के लिये निःशुल्क  की जानी चाहिये। किसानों के लिये पी एम किसान योजना के तहत 2000 रुपये की घोषणा गत लोकसभा चुनाव के  पहले प्रधानमंत्री द्वारा की गई थी। एक लाख पिचहतर हज़ार करोड़   का जो पैकेज प्रधानमंत्री ने घोषित किया है ,उसमें किसानों को  2000 रुपये की राशि देने की बात दोहराई है। किसानों के लिए अलग से कोई राहत पैकेज नहीं दिया गया है । कम से कम यह तो हो ही सकता  था कि हर वर्ष किसानों को दी जाने वाली 6000 रुपये की सालाना राशि एक मुश्त किसानों के खाते में अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक ट्रांसफर कर दी जाती। आपसे अनुरोध है कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से 6000 रुपये की राशि हर किसान को  शीघ्र उपलब्ध कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजें । केन्द्र सरकार से आपके रिश्तों को देखते हुये यह भी अपेक्षा की जाती है कि आप मध्यप्रेदश के लिये केन्द्र सरकार से 50,000 करोड़ का  विशेष पैकेज  ला पायेंगे।गत 6 वर्षों में आपकी पार्टी की केंद्र सरकार 14 लाख करोड़ की माफी कॉर्पोरेट को दे सकती है तो मध्यप्रदेश को 50 हज़ार करोड़ क्यों नहीं दे सकती।

11. किसान संघर्ष समिति मानती है कि यदि मोदी सरकार ने चीन से शुरू हुई महामारी को गंभीरता से लिया होता तो जनवरी से लेकर अब तक विदेश से आने वाले सभी यात्रियों को क्वारनटाइन  में भेजकर तथा आवश्यकता पड़ने पर इलाज कर देश और प्रदेश को इस आपदा से बचाया जा सकता था। आपराधिक लापरवाही के बाद अब अचानक लॉक-डाउन किये जाने से गांव से शहरों में रोजगार के लिये गये गरीब, मजदूर, महिला और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हुये हैं। उन्हें शहर छोड़कर बिना किसी व्यवस्था के गांव में आने को मजबूर होना पड़ा है। शहर की बीमारी गांव तक पहुंचा दी गई है। हम मानते हैं कि शारीरिक दूरी बनाये रखना जरूरी है लेकिन कुछ विदेशी यात्रियों की वजह से पूरे देश को परेशान करना उचित नहीं माना जा सकता। 

12. मुलतापी, बैतूल और मध्य प्रदेश में डॉक्टरों, नर्सों ,पैरामेडिकल स्टाफ,कोरोना टैस्टिंग किट, वैंटीलेटर, अस्पताल में बिस्तरों का अभाव है।आपको ग्रामीण इलाकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हम जानते  हैं कि सरकारें इसे दूर करने की कोशिश कर रही है परन्तु यह जरूरी है कि वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समझते हुये स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त-दुरस्त करने को सरकार प्राथमिकता दे, इसके लिए स्वास्थ्य बजट को कई गुणा बढ़ाया जाना जरूरी है। तत्काल प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग को अधिकतम राशि उपलब्ध करायी जानी चाहिए ।

13. वर्तमान विपदा से हम सब मिलकर निपटेंगे लेकिन वर्तमान स्थिति से भविष्य के लिये सबक भी लेंगे। ताकि हमारा प्रदेश स्वास्थ्य , सुखी और  समृद्ध  होकर  आगे बढ़ सके । 

डॉ. सुनीलम 
कार्यकारी अध्यक्ष
किसान संघर्ष समिति
संलग्न -जनांदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय -भूमि अधिकार आंदोलन- अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति

आंसू बहाती गई, इतिहास रचता गया….


आत्‍मकथा

मैं अकेली थी और वे चार थे

आंसू बहाती गई इतिहास रचिता गया इस लंबे सफ़र में 2651 दिन घुट घुट के आंसू बहाती गई इतिहास रचता गया मैंने ठान रखा था

मैं टूटूगींं तो इन चारों हत्यारों को लेकर टूटूगींं निर्भया की सिसकती आहें मुझे सोने नहीं देती थी

मेरी तो अंतिम इच्छा ही यह थी मैं तो इन चारों हत्यारों को लेकर ही टूटूगींं आगे पढि़ए

आंसू बहाती गई इतिहास रचा गया

मैं अपने पुराने दिनों को याद करती हैं, तो आश्चर्य होता है कि जब में बिना पिये दो-चार कदम भी नहीं चल पाती थी. अब तो मैं समय के साथ-साथ इतनी बदल गई है, जैसे रेगिस्तान में ऊँट एक-एक माह का पानी एक साथ पीकर लगातार चलता जाता है।

वैसे में अपनी व्यथा क्या सनाऊँ मैं तो वो मनचली हूँ, जिसने मुझे थामा बस उसकी ही उंगलियों थामें उसके भविष्य को संवारने में लग जाती हूँ। मेरे लिये न तो कोई उम्र की सीमा है. ना जाति का बंधना मुझे न तो कोई अमीर से लगाव है और न गरीब से परहेज, मैं तो स्वच्छन्द विचारों वालों के हाथों की कठपुतली हूँ, जो उसकी खुशी, गम, जज़बात, भावना और विचारों के अनुसार नाचती, आँसू बहाती जाती हूँ और इतिहास रचती जाती हूँ।

अक्सर मुझे लोग अपने दिल से लगाकर रखते हैं, हर कोई अपने दिल-दिमाग को संतुलित कर मुझे अपने हाथों में थामे अपनी कहानी, व्यथा सुनाता जाता है और मैं उसकी उंगलियाँ थामे आँसू बहाती चलती जाती हूँ। मैं तो वह दिवानी हूँ, जिसकी पनाह में जाती हूँ, उसका ही अस्तित्व बनकर रह जाती हूँ। ऋषि-मुनियों के हाथों लगी तो वेद और शास्त्र बन गये। न्याय के पुजारी ने छुआ तो न्याय का इतिहास रचती चली गई। कमजोर गरीब असहाय की तो अर्जी बन न्याय का दरवाजा खट-खटाती चली आ रही हूँ। किसी कलाकार की इच्छा अनुसार उसकी कलाकृति, किसी शायर की मनचाही शायरी और किसी कवि की भावनात्मक कविता, कल्पना और साहित्यकार की रचना रचकर लोगों का दिल जीत रही हूँ। मजे की बात तो यह है कि मैं तो राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री, नेता, राजनेता, आई.ए.एस., आई.पी.एस. की वो ताकत हूँ, जिस रास्ते चली गई, गानों पत्थर की लकीर, तब तो लोग मुझे पूजते हैं, सम्मान देते हैं। नन्हें-मुन्ने बच्चे बड़े ही लगाव से अपनी नाजुक, नन्हीं-नन्हीं कोमल उंगलियों में थामे मुझे चलाने का प्रयास करते हैं और मैं उनका भविष्य संवारने में पूरा-पूरा सहयोग देती हूँ। गाँवों में कुछ महिला, बड़े-बूढ़े जब कभी पहली-पहली बार शर्माते हुए अपने हाथों में मुझे लेते हैं, तो उनके हाथ कांपने लगते हैं. तब मुझे बड़ा ही अजीब अहसास होता है। मुझे थामने वालों को, सभी को अपना सम्राट मानती हूँ और उसके इशारों पे नाचती हूँ, पर जब मैं लोगों को मेरे इशारे पर नाचता देखती हूँ तो मुझे बेहद खुशी के साथ-साथ पूर्ण तृप्ति मिलती है और मुझे अपनी अहमियत का पता चलता है। मेरी तो सदा उनके प्रति आस्था (श्रद्धा) रहती है, जो मुझे सही राह पर चलाते हैं।

मुझे अपने आप पर फक्र है, मैं टूटती भी हूँ तो पहले किसी हत्यारे के नाम मौत का पैगाम (Hanging till Death ) “हैगिंग टिल डैथ” लिख मेरे न्यायप्रिय सम्राट के हाथों मेरा रार-कलग कर दिया जाता है। वॉह रे मेरी किस्मत, मैं कोई और नहीं आपके हाथों की ही एक कलम हूँ।

कलमकार लेखक-श्रीवास अशोक (सम्राट), बैतूल

Mr Ashok Shrivash, Betul