पाच दिन से लापता महाराष्ट्र के युवक का सड़ा गला शव MP में मिला


महाराष्ट्र के धनोड़ी वरुड निवासी युवक का सोमगढ घाट में मिला सड़ा गला शव

महाराष्ट्र के धनोड़ी वरुड निवासी युवक का सोमगढ घाट मध्‍यप्रदेश में मिला सड़ा गला शव

चार दिन से लापता था युवक

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मुलताई।       महाराष्ट्र के वरुड तहसील के ग्राम धनोडी निवासी युवक का सड़ा गला शव प्रभातपट्टन ब्लाक के ग्राम सोमगढ़ के पास घाट क्षेत्र में मार्ग की पुलिया के नीचे पड़ा मिला है। युवक बीते 24 जुलाई से घर से लापता था। युवक की गुमशुदगी की रिपोर्ट महाराष्ट्र के शेंदुरजना घाट के पुलिस थाने में परिजनों ने दर्ज कराई थी। प्रभातपट्टन पुलिस सहायता केंद्र में पदस्थ प्रधान आरक्षक अशोक आठवले ने बताया सोमवार को मार्ग से आने जाने वाले ग्रामीणों को सोमगढ़ के पास सात मोड़ की पुलिया पर से बदबू आने लगी तो उन्होंने पुलिया से नीचे झांक कर देखा जहां एक व्यक्ति का शव पड़ा दिखा तो पुलिस को सूचना दी। वही युवक के लापता होने के बाद उसके परिजन भी खोजबीन कर रहे थे। खोजबीन करते हुए मृतक का भाई राहुल गायकी भी 

प्रभातपट्टन से सोमगढ़ जाने वाले मार्ग से गुजरा तो उसे भी पुलिया के पास बदबू आई। तो उसने पुलिया के नीचे झांक कर देखा तो सड़ा गला शव देखने पर वह ग्रामीणों के साथ शव के पास पहुंचा और कपड़े चप्पल से मृतक की शिनाख्त कर बताया कि मृतक उसका भाई विक्रम पिता उत्तमराव गायकी 28 साल निवासी ग्राम धनोडी है। जो 24 जुलाई को संतरे का बगीचा देखकर आता हूं कहकर घर से निकला था । लेकिन घर वापस नहीं लौटा। राहुल गायकी की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम किया है। युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई पुलिस इसकी जांच कर रही है। 

प्रथम दृष्टया हत्या का मामला 

लापता युवक का सड़ा गला शव मिलने के मामले में पुलिस  प्रथम दृष्टया हत्या का मामला मान रही हैं। युवक का सिर बुरी तरह कुचला हुआ है। शव को जंगल में पुलिया के नीचे गड्ढे में फेका गया है। फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिस परिजनों के बयान लेने के साथ मृतक युवक के मोबाइल के काल डिटेल खंगाल रही है। मृतक अविवाहित हैं इस स्थिति में पुलिस प्रेम प्रसंग के मामले सहित अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही है।

भारत में प्रदूषण की वजह से 5 साल तक कम हो रही है उम्र


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नई दिल्ली । भारत में प्रदूषण की स्थिति भयावह होती जा रही है। प्रदूषण की वजह से भारत में आदमी की औसत आयु में 5.2 वर्ष (डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुरूप) और राष्ट्रीय मानकों के अनुसार 2.3 वर्ष कम हो रही है। यह खुलासा शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 1.4 अरब की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसी जगहों पर रहता है, जहां पर्टिकुलेट प्रदूषण का औसत स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों से अधिक है, जबकि 84 फीसदी लोग ऐसी जगहों पर रहते हैं, जहां प्रदूषण का स्तर भारत द्वारा तय मानकों से अधिक है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 1998 से 2018 तक भारत के प्रदूषण में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट में चेताया गया है कि प्रदूषण का स्तर अगर इसी तरह से बढ़ता रहा तो उत्तर भारत में रहने वाले लोगों की औसत आयु 8 साल तक कम हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एक-चौथाई आबादी प्रदूषण के जिस स्तर का सामना कर रही है, वैसा कोई अन्य मुल्क नहीं कर रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक उम्र कम हो रही है। लखनऊ में प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों से 11.2 अधिक है। अगर प्रदूषण का यही स्तर जारी रहा तो लखनऊ में प्रदूषण के कारण 10.3 वर्ष आयु कम होगी। भारत की राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक है। ऐसे में अगर यही स्तर जारी रहा तो औसतन 9.4 साल आयु कम हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदूषण के स्तर को डबल्यूएचओ के मानक के अनुसार, बिहार औऱ पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी आम जन के जीवन को सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं, हरियाणा के लोगों का जीवन आठ साल तक बढ़ाया जा सकता है।

मिल्टन फ्रीडमैन प्रोफेसर और एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन कहते हैं कि कोरोना वायरस का खतरा काफी है। इसपर गंभीरता से ध्यान देने आवश्यकता है, लेकिन कुछ जगहों पर इतनी ही गंभीरता से वायु प्रदूषण पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि करोड़ों-अरबों लोगों को अधिक समय तक स्वस्थ जीवन जीने का हक मिले। माइकल ग्रीनस्टोन ने ही शिकागो यूनिवर्सिटी में ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) में अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर एक्यूएलआई की स्थापना भी की है।

भारत बना रहा है नीति

शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सालों में भारत के लोगों ने वायु प्रदूषण की समस्या को पहचाना है और सरकार ने भी इसे कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। 2019 में केंद्र सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ युद्ध छेड़ा था और नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया था। इस प्रोग्राम का मकसद पर्टिकुलेट प्रदूषण को आने वाले पांच सालों में 20 से 30 फीसदी कम करना था। रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर भारत अपने अभियान में कामयाब नहीं हो पाया तो इसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं। प्रदूषण का स्तर कम होने से देश के लोगों की औसत जीवन दर 1.6 साल (अगर 25 प्रतिशत कम होने पर) बढ़ जाएगी और दिल्ली के लोगों की 3.1 साल बढ़ जाएगी।

मिल्टन फ्रीडमैन प्रोफेसर और एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के निदेशक और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन कहते हैं कि वास्तविकता यह है कि फिलहाल जो उपाय और संसाधन भारत के पास हैं, उनमें वायु प्रदूषण के स्तर में खासा सुधार के लिए मजबूत पब्लिक पॉलिसी कारगर उपाय है। एक्यूएलआई रिपोर्ट के माध्यम से आम लोगों और नीति निर्धारकों को बताया जा रहा है कि कैसे वायु प्रदूषण उन्हें प्रभावित कर रहा है। साथ ही, प्रदूषण को कम करने के लिए इस रिपोर्ट का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

शिकागो यूनिवर्सिटी के साथ गुजरात में चल रहा है शोध

भारत में राज्य सरकारें वायु गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में पहले से ही प्रयासरत हैं। पार्टिकुलेट मैटर (कण प्रदूषण) के लिए दुनिया का पहला एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम (ईटीएस) शिकागो यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर गुजरात में चल रहा है, जहां शिकागो यूनिवर्सिटी और गुजरात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के साथ अन्य लोग मिलकर काम कर रहे हैं। सूरत में चल रहे इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत औद्योगिक संयंत्रों से निकलने वाले कण प्रदूषण को कम करने पर शोध चल रहा है।

ग्रीनस्टोन कहते हैं कि इतिहास उदाहरणों से भरा है कि कैसे मजबूत नीतियां प्रदूषण को कम कर सकती हैं, लोगों के जीवन को लंबा कर सकती हैं। उनके मुताबिक, भारत और दक्षिण एशिया के नेताओं के लिए अगली सफलता की कहानी बुनने का एक बहुत ही शानदार अवसर है, क्योंकि वे आर्थिक विकास और पर्यावरण गुणवत्ता के दोहरे लक्ष्यों को संतुलित करने के लिए काम करते हैं। सूरत ईटीएस की सफलता बताती है कि बाजार-आधारित लचीला दृष्टिकोण से दोनों लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है।

पर्टिकुलेट मैटर

पर्टिकुलेट मैटर या कण प्रदूषण वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है। हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते हैं। कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है। कण प्रदूषण में पीएम 2.5 और पीएम 10 शामिल हैं, जो बहुत खतरनाक होते हैं। पर्टिकुलेट मैटर विभिन्न आकारों के होते हैं और ये मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारण से हो सकते हैं। स्रोत प्राइमरी और सेकेंडरी हो सकते हैं। प्राइमरी स्रोत में ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल और खाना पकाने का धुआं शामिल हैं। प्रदूषण का सेकेंडरी स्रोत सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रिया हो सकता है। ये कण हवा में मिश्रित हो जाते हैं और इसको प्रदूषित करते हैं। इनके अलावा, जंगल की आग, लकड़ी के जलने वाले स्टोव, उद्योग का धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल वायु प्रदूषण आदि और स्रोत हैं। ये कण आपके फेफड़ों में चले जाते हैं, जिनसे खांसी और अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं। उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है।  

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MP Betul के जज की मौत का बडा खुलासा: फूड पॉइजनिंग से नहीं, जहर से हुई मौत, जादू टोना की बात सामने आने पर आटा देने वाली महिला को रीवा से किया अरेस्ट


बैतूल एडीजे की मौत फूड पॉइजनिंग से नहीं, जहर से हुई; तंत्र-मंत्र की बात सामने आने पर आटा देने वाली महिला को रीवा से किया अरेस्ट

मुलतापी समाचार

बैतूल अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र त्रिपाठी (नीली टी शर्ट में) अपने परिवार के साथ। त्रिपाठी के परिवार में दो बेटे और दो बेटियां थीं।
  1. पुलिस ने महिला समेत पांच लोगों को हिरासत में लिया, इस महिला ने ही जज को आटा दिया था, कहा था- इसे घर के आटे में मिला देना
  2. 20 जुलाई को एडीजे और उनके दो बेटों की खाना खाने के बाद तबीयत बिगड़ी थी, 25 जुलाई को एडीजे और बड़े बेटे की मौत हो गई थी

Betul MP मध्य प्रदेश के बैतूल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एडीजे महेंद्र त्रिपाठी और उनके बेटे अभियान राज की मौत जहर से हुई है। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हो गया है। ये पता नहीं चला है कि जहर कौन सा था? लेकिन, पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिसने भी आटे में जहर मिलाकर दिया, उसकी साजिश पूरे परिवार को खत्म करने की थी।

किस्मत से एडीजे की पत्नी ने उस दिन रोटी नहीं खाई और छोटे बेटे को दो रोटी खाने के बाद उल्टी हो गई इसलिए वे बच गए। 20 जुलाई को त्रिपाठी और उनके दो बेटों को फूड पॉइजनिंग की शिकायत होने पर बैतूल के अस्पताल में भर्ती कराया था।

रीवा की महिला से होगी पूछताछ
मामले में पूछताछ के लिए रीवा निवासी एक महिला को बैतूल लाया गया है। पुलिस ने 5 संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है। इस महिला ने ही जज को आटानुमा कुछ दिया था और कहा था कि इसे घर के आटे में मिला देना। घटना के बाद से ही महिला का फोन बंद आ रहा था। 25 जुलाई को एडीजे त्रिपाठी और उनके बेटे की मौत हो गई थी। पुलिस ने अस्पताल में एडीजे के बयान लिए थे। उनसे किसी पर शक होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि आटे की जांच जरूर करा लेना।

महिला ने संकट टालने के लिए आटा दिया गया
शुरुआती जांच में सामने आया कि 19 जुलाई की दोपहर में एडीजी की संध्या नाम की महिला से मुलाकात हुई। उसी दौरान उन्हें आने वाले संकट को टालने के लिए आटा दिया गया था। 20 जुलाई को त्रिपाठी के घर में पत्नी को छोड़कर परिवार के बाकी सदस्यों ने इसी आटे से बनी रोटी खाई थी। छोटे बेटे को तत्काल उल्टी हो जाने से उस पर असर नहीं हुआ। इधर, 20 जुलाई के बाद से रीवा की मूल निवासी महिला का फोन बंद आ रहा था। 25 जुलाई को उसने जैसे ही फोन ऑन किया, पुलिस को उसकी लोकेशन रीवा में मिली। स्थानीय पुलिस की टीम ने देर रात महिला को ढूंढ़ निकाला।

महिला की कार से सामान निकालती बैतूल पुलिस। कार में तंत्र-मंत्र का सामान और इसी से जुड़ी हुईं किताबें बरामद हुई हैं।

महिला की कार में मिली तंत्र-मंत्र की किताबें और सामान
सूत्रों के मुताबिक, रीवा से महिला को देर रात कार समेत बैतूल लाया गया। कार में रखे बैग और अन्य सामान को पुलिस ने जब्त कर लिया है। पर्स से पुलिस ने तंत्र-मंत्र की सामग्री भी जब्त की है। सूत्रों का कहना है कि परिवार के सदस्य अभी भी कुछ छिपा रहे हैं। घर में ऐसा क्या था कि एडीजे महिला के चक्कर में आ गए।

छोटे बेटे आशीष राज का कहना है कि संध्या सिंह नामक महिला ने पापा को आटा दिया था, जिसकी रोटी खाने के बाद उन तीनों की तबीयत बिगड़ी। संध्या सिंह पिछले 10 सालों से उनके पापा के संपर्क में थी। कई तरीकों से उनके परिवार को खत्म करने की पहले भी साजिश रच चुकी है। संध्या सिंह ने पापा से कहा था कि यह आटा अपने घर के आटे में मिला दीजिए। इससे सबका स्वास्थ्य अच्छा होगा और समृद्धि होगी।

अस्पताल से महिला को फोन लगा रहे थे एडीजे
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, एडीजे अस्पताल से महिला को बार-बार फोन लगा रहे थे। उससे वे पूछ रहे थे कि आखिर कौन-सी चीज खाने को दी है। उसका नाम बता दो, ताकि डॉक्टर उसका एंटीडाेज दे सकें। लेकिन, दूसरी ओर से महिला बार-बार उनका फोन काट दे रही थी।

जब महिला ने कुछ नहीं बताया तो उसके ड्राइवर को फोन लगाया
एडीजे तीन दिन बैतूल अस्पताल में भर्ती रहे। दो दिन तक वे फोन लगाकर महिला से आटे के बारे में पूछते रहे। जब महिला ने फोन उठाना बंद कर दिया तो उन्होंने उसके ड्राइवर को फोन लगाकर जानकारी लेनी चाही। सूत्रों का कहना है कि एडीजे ने ड्राइवर से यहां तक कहा था कि भगवान की खातिर उससे पूछकर बता दो कि आटे में क्या मिला है।

एडीजे से मिलने आती थी महिला
सूत्रों के अनुसार, एडीजे इस महिला से करीब 10 साल से ज्यादा समय से परिचित थे। दो साल उनके बैतूल में तैनाती के हो चुके थे। इस बीच, कई बार महिला मिलने आई। उसके बारे में कई बातें सामने आ रहीं है। कोई उसे सिंगरौली का तो कोई छिंदवाड़ा का रहने वाला बता रहा। ये भी कहा जा रहा है कि महिला का पति उससे अलग रहता है। महिला एनजीओ और कपड़े का व्यवसाय करती है। हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि महिला किस तरह जज के संपर्क में आई थी।

एडीजे महेंद्र त्रिपाठी की मौत के मामले में पुलिस ये जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह थी कि महिला जज के पूरे परिवार को खत्म करना चाह रही थी।

बैतूल के वकीलों की चर्चा के अनुसार, एडीजे उन जजों से नाखुश थे, जो अन्य राज्य के निवासी हैं। बीते कुछ दिन से उनका आध्यात्म की तरफ ज्यादा झुकाव हो गया था। बातचीत भी वे आध्यात्म की ज्यादा करने लगे थे। एडीजे का बड़ा बेटा कुछ दिन पहले ही इंदौर से बैतूल आया था।

लेन-देन की जांच चल रही है
सूत्रों का कहना है कि एडीजे के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई। महिला के खाते में भी काफी पैसा जमा हुआ है। इसकी जांच चल रही है। सूत्रों से ये भी पता चला है कि महिला की लाइफस्टाइल हाई सोसायटी जैसी है। आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में कई बड़े लोगों का हाथ भी हो सकता है।

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Multai – मुस्लिम महिला नागपुर में कोरोना पजेटिव, मस्जिद के सामने की दुकानें बंद कराई


मुलताई बजरंग चौक से बैंक तक दुकाने बंंद कराई

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Betul, मुलताई । नगर के इंदिरा गांधी वार्ड निवासी 22 वर्षीय मुस्लिम महिला की नागपुर के मेयो अस्पताल में कोरोना पाजेटिव रिपोर्ट आई है । उक्त महिला गर्भवती होने से 2 दिन पूर्व मुलताई अस्पताल से रेफर किया गया था जहां डिलेवरी के दौरान सेम्पल लेने पर मंगलवार कोरोना पाजेटिव रिपोर्ट आई है ।

प्रशासन द्वारा सतर्कता बतौर फव्वारा चौक मस्जिद के सामने महिला के रिश्तेदार सहित अन्य दुकानें बंद करा दी गई है । BMO डॉ पल्लव ने बताया कि महिला की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री के अनुसार वह उसके 9 परिजनों के सम्पर्क में आई है जिसमे से मस्जिद के सामने की दुकान वाले परिजन शामिल हैं । फिलहाल महिला और कितने परिजनों के सम्पर्क में आई है इसकी भी प्रशासन द्वारा जानकारी ली जा रही है ताकि सतर्कता की दृष्टि से आगे की कार्यवाही की जा सके

Multai: भोपाल से आया युवक निकला कोरोना पॉजिटिव, अस्‍पताल के पास से बस स्टैंड तक कराया बंद


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Betul, मुलताई। नगर के भगत सिंग वार्ड में भोपाल से 25 वर्षीय युवक की सैंपल रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है  यह युवक नगर के बस स्टैंड पर मार्ग के किनारे स्थित सरकारी अस्पताल की सुरक्षा दीवार से सटे  पान ठेले पर भी पहुंचा था और पान ठेला संचालक  के  साथ बाईक से भी घुमा था इस स्थिति में नगरीय क्षेत्र में कोरोना का संक्रमण बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है


बीएमओ डॉक्टर पल्लव अमृत फले ने बताया कि युवक  भोपाल से 24  जुलाई को रात में टवेरा जीप से मुलताई आया था उसके साथ में   मुलताई  निवासी जीप चालक   ग्राम सिरसा वाड़ी  निवासी एक ग्रामीण सहित अन्य दो लोग टवेरा जीप में सवार थे 25 जुलाई को युवक का सैंपल जांच के लिए भेजा था जिसकी मंगलवार को रिपोर्ट  कोरोना  पॉजिटिव आई है  डॉक्टर पल्लव ने बताया कि युवक को कोविड केयर सेंटर में उपचार के लिए भर्ती कराया है एसडीएम सी एल चनाप ने बताया कि युवक भगत सिंह वार्ड में जिस मकान में निवास करता है उस मकान के आसपास कंटेनमेंट  क्षेत्र घोषित कर लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगाई गई है

होम क्वॉरेंटाइन होने के निर्देश,सैंपल देने के बाद भी युवक घूमते रहा युवक


सैंपल लेने के बाद युवक को होम क्वॉरेंटाइन होने के निर्देश दिए थे लेकिन युवक नगर में घूमते रहा युवक  बस स्टैंड पर स्थित पान ठेले पर पहुंचा था और  पान ठेला संचालक के साथ बाइक से भी घूमते रहा  युवक के संपर्क में उसके चार परिजन भी आए हैं बीएमओ डॉक्टर पल्लव ने बताया कि परिजनों को होम क्वॉरेंटाइन रहने के  निर्देश दिए हैं युवक के संपर्क में सभी लोगों के सैंपल जांच के लिए  भेजे जाएंगे

तुलसीदास जी ने राम नाम लेते हुये अपने शरीर का परित्याग किया


तुलसीदास जी की जयंती

तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर विशेष प्रकाशित


गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती
हमे निज धर्म पर चलना सिखाती रोज रामायण,
सदा शुभ आचरण करना सिखाती रोज रामायण


गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म 1554 संवत मेंश्रावण माह की सप्तमी को प्रयाग के
पास बांदा जिले के राजापुर ग्राम में हुआ। आपको यह जानकर आष्चर्य होगा तुलसी
दास जी का अपनी मां के गर्भ में 12 माह रहने के बाद अमुक्त मूल नक्षत्र में हुआ जब
तुलसीदास पैदा हुये तब उनके मुख में 32दांत थे बालक का डील-डौल पांच साल के
बालक जैसा प्रतीत हो रहा था, उनके जन्म पर वे रोये नहीं उनके मुख से राम नाम
निकला इस प्रकार के अद्भुद बालक को देख कर उनके मां हुलसी और पिता
आत्माराम दुबे के मन में भांती-भांती के विचार आने लगे लोग उन्हें अनिष्ठ,अमंगल की
शंका होने लगी उनकी मां ने तीन दिन बाद दसमी की रात को अपनी दासी चुनियाॅ के
साथ अपने ससुराल भेज दिया और दूसरे ही दिन वे इस संसार को छोडकर चलबसी।
चुनियाॅ बडे प्रेम से उनका पालन पोषण करने लगी तुलसीदास जी 5 वर्ष के हुये समय
के चक्र ने उस दासीमाॅ का साया भी उनसे छीन लिया तुलसीदास फिर अनाथ हो गये वे
द्वार-द्वार भटकने लगे। लोग कहते है जा को राखे साईयां मार सके न कोय जिसको
कोई नहीं उसका तो ईष्वर है यारो आदिषक्ति मां जग्तजननी माॅ पार्वती को उनपर दया
आई वे प्रति दिन ब्राहम्णी का वेषरख कर उस बालक को भोजन कराने आती थी।
इधर भगवान शंकर जी की प्रेरणा से रामशैल पर रहने वाले श्री अन्तानंदा जी के
प्रिय षिष्य श्री परहर्रानंद जी ने इस बालक को ढूंढ निकाला और उसे अयोध्या ले जा
कर अपना षिष्य बनाकर उसका नाम रामबोला रखा।

रामबोला ने यग्योपवीत संकार के तुरतं पष्चात बिना सीखे ही गायत्री मंत्र का उच्चारण करने लगा। अयोध्या में ही उनकी शि‍क्षा दीक्षा पूर्ण हुई बालक राम बोल सुतीक्षण, प्रखर एवं तेजस्वी षिष्य के रूप गुरूकुल में प्रसिघ्द हो गये। कुछ ही दिनो पष्चात गुरू-षिष्य शुकर क्षेत्र(सोरो) पहुंंचे वहां गुरू श्री नरहरीदास जी ने उन्हें रामचरित सुनाया कासी में रहकर तुलसी दास जी ने 15 वर्ष तक वेदो का अध्ययन किया। कुछ समय बाद उन्हों ने अपनी जन्म भूमि पर लोगो को भगवान राम की कथा सुनाने लगे। वहीं उनका विवाह हुआ वे अपनी पत्नि को अत्यधिकप्रेम करते थे एक बार उनकी पत्नि मायके जाने पर वे बडे अधीर हो कर उनके पीछे-पीछे ससुरला जा पंहुचे पत्नि ने उन्हें देखकर बडी लज्जा के साथ उनसे कहा लाज न लागत आपको,दौरे आयहुं साथ धिक-धिक ऐसे प्रेम को कहा कहहुं मै नाथ मेरे इस हाडमास के शरीर में जितनी तुम्हारी आषक्ति है, उससे आधी भी यदि भगवान
राम मे होती तो तुम्हारा बेडापार हो गया होता तुलसीदास जी को अपनी पत्नि की बात दिल को इतनी छू गई की वे तुरंत ही वहां से प्रयाग आकर ग्रहस्थवेष का परित्याग कर साधुवेष ग्रहण कर सन्यासी बनगये । उन्हें तीर्थ के दौरान मानसरोवर में कागभुषुण्डिजी के दर्षन हुये।

उनके राम के दर्षन की अभिलाषा चित्रकूट में आकर पूर्ण हुई।
चित्रकूट से अयोध्या की ओर बढते हुये माघ मेले उन्हे वटवृक्ष के नीचे भरद्वाज
एवं याज्ञवल्क्य मुनि के दर्षन हुये जहां राम की कथा हो रही थी वहाॅ से उनके अंदर
कवित्व का स्फूरण हुआ और वे संस्कृत में पद्यरचना करने लगे परन्तु वे दिन में जितनी
भी पद्यरचना करते रात्रि में सब लुप्त हो जाती यह घटना रोज घटित होती 8वे दिन
भगवान शंकर ने उन्हें स्वप्न में आदेष दिया की तुम अपनी भाषा में काव्य रचना रचो
उनकी नींद खुलते ही षिव पार्वती ने उन्हें दर्षन दिये और कहा कि तुम अयोध्या में जा
कर रहो और हिन्दी में काव्य रचना करो मेरे आर्षिवाद से तुम्हारी कविता शामवेद के
समान फलवती होगी।


संवत 1633 के प्रारंभ में रामनवमी के दिन प्रायःवैसा ही योग था जैसा त्रेतायुग में
रामजन्म के दिन था उस दिन से उन्होने श्रीरामचरित मानस की रचना प्रारंभ की दो
वर्ष,7 महिने, 26 दिन में राम चरित्र ग्रन्थ पूर्ण हुआ संवत 1633के मार्गषीष के शुक्लपक्ष
में राम विवाह के दिन सातो कांड (राम चरित मानस जिसमें 16 श्लोक, 1029 दोहे एंवं
1060 चैपाईयाॅ )पूर्ण हुये । सबसे पहले उन्होने भगवान विष्वनाथ एवं माता अन्नपूर्णा को
श्रीराम चरित मानस सुनाया रात को पुस्तक श्री विष्वनाथ जी के मंदिर में रख दी गई
सबेरे जब पट खुला तो ग्रंथ पर ‘‘सत्यंम षिवम सुन्दरम’’ लिखा हुआ था। और नीचे
भगवान शंकर जी की सही थी। यह देखकर काषी के पंडितो को उनसे ईर्षा होने लगी।
वे उस ग्रंथ को नष्ट करने का प्रयास करने लगे उसे चुराने के लिये चोरो को भेजा
उनकी कुटिया के पास दो नवयुवक वीर धनुष लिये पहरा दे रहे थे वे बडे ही सुन्दर
श्याम,गौर वर्ण के थे उनके दर्षन से चोरो की बुघ्दि शुघ्द हो गई।अंत में श्री हनुमान जी की प्रेरणा से उन्हों विनय पत्रिका लिखि और भगवान के चरणो में समर्पित कर दी। संवत1680 श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को असीघाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम नाम लेते हुये अपने शरीर का परित्याग किया ।

‘‘राम राम रटते रहो धरे रहो मनधीर कारज वे ही सवारेंगें श्री रामचन्द्र रघुवीर’’

जय श्री राम

अषोक श्री(बैतूल)

भीषण सड़क हादसा, 8 लोगों की गई जान


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

छतरपुर: जिले के बमीठा थाना क्षेत्र अंतर्गत पन्ना रोड पर जखीरा टेख मंदिर के पास सोमवार को दोपहर में एक तेज रफ्तार कार ने सामने से आ रही तीन बाइक को जबरदस्त टक्कर मार दी और उसके बाद कार अनियंत्रित होकर पलट गई। बताया जा रहा है कि इस हादसे में 8 लोगों की मौत हुई है।

राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज कर जांच शुरू कर दी है। मृतकों में एक छोटी बच्ची भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक सोमवार को दोपहर करीब 1:00 बजे छतरपुर से पन्ना की तरफ जा रही एक तेज रफ्तार कार ने छतरपुर की तरफ आ रही तीन बाइकों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना खतरनाक था कि देखने वाले के रोंगटे खड़े हो गए। तीन बाइकों के परखच्चे उड़ गए और उन पर सवार लोगों के शव खून से लथपथ सड़क पर बिखर गए। अभी मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है।

मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

जिले में कोरोना 200 के पार , लापरवाही का भुगतना पड़ सकता है खामियाजा


जिले में कोरोना 200 के पार, आज फिर 9 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव, लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है पूरे जिले को।

जिले में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 206 हो चुकी है।

जिले में कोरोना संक्रमण का कहर कम होने का नाम नही ले रहा है। प्रतिदिन जिलें में लगभग पांच से दस लोगों के संक्रमित होने की खबर की पुष्टि होती आ रही है। इस प्रकार से जिले में अब तक कुल 206 लोगों के संक्रमितों और तीसरी मौत की पुष्टि हो गई है।

लॉकडाउन के बीच रविवार को जिले में 9 अन्य लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है जिससे अब तक जिले में कुल 206 लोग कोरोना संक्रमित, 149 लोग स्वस्थ, एक्टिव केस 54 है

बैतूल जिले में कहाँ-कहाँ कोरोना का कहर

आज बढ़े 9 नए पॉजिटिव

57 वर्षीय शिवाजी वार्ड बैतूल निवासी पुरुष(पॉजिटिव का प्राथमिक संपर्क ),
28 वर्षीय कुप्पा निवासी युवक,
28 वर्षीय सारणी घोड़ाडोंगरी निवासी युवक(ग्वालियर से लौटा),
25 वर्षीय साकादेही सेहरा बैतूल निवासी युवक (उस्मानाबाद महाराष्ट्र से लौटा ),
44 वर्षीय प्रताप वार्ड टिकारी बैतूल निवासी पुरुष(पुणे से लौटा ),
30 वर्षीय गौनापुर निवासी युवक(पॉजिटिव का प्राथमिक संपर्क ),
63 वर्षीय गौठाना बैतूल निवासी महिला(पॉजिटिव की प्राथमिक संपर्क ),
10 वर्षीय बालिका मुलताई (पॉजिटिव की प्राथमिक संपर्क ),
28 वर्षीय भीमपुर निवासी युवक (ग्वालियर से लौटा )

बैतूल के जज एवं उनके बड़े बेटे की फूड प्वाइजनिंग से मौत


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

भोपाल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री महेंद्र कुमार त्रिपाठी और उनके बड़े बेटे की मृत्यु हो गई। पुलिस को संदेह है कि उनके खाने में फूड प्वाइजनिंग हुई है। पुलिस ने एडीए के आवास को सील कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।वह कटनी जिले के रहने वाले थे उनका अंतिम संस्कार कटनी में किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि चार-पांच दिन पहले एडीजे और उनके दोनों बेटों की तबीयत अचानक खराब हो गई । तीनों ने घर पर ही भोजन किया था। डॉक्टर ने बताया कि तीनों फूड प्वाइजनिंग के शिकार हुए हैं। घर पर ही प्राथमिक उपचार के बाद छोटे बेटे की तबीयत ठीक हो गई परंतु एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री महेंद्र कुमार त्रिपाठी एवं उनके बड़े बेटे अभियान राज त्रिपाठी की हालत बिगड़ती चली गई। इसके बाद दोनों को शनिवार को नागपुर के एलेक्सिस अस्पताल ले जाया जा रहा था कि रास्ते में बड़े बेटे की मौत हो गई और अस्पताल में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री महेंद्र कुमार त्रिपाठी की भी मौत हो गई।

एडिशनल एसपी श्रद्धा जोशी के मुताबिक फूड प्वाइजनिंग के बाद एडीजे और उनके बेटे को 23 जुलाई को पाढर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां हालत बिगड़ने पर नागपुर रेफर किया गया। एएसपी के मुताबिक परिवार ने 20 जुलाई की रात में जो भोजन किया था, उसके बाद तबीयत बिगड़ी।

पुलिस को संदेह है कि मजिस्ट्रेट परिवार ने जो चपातियां खाई थी उससे फूड प्वाइजनिंग हुई है। क्योंकि पत्नी ने चपातियां नहीं खाई थी। उन्होंने चावल खाया था। जिसके कारण वे पाइजनिंग का शिकार नहीं हुई।

मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

दमोह: बिना मास्क लगाए युवक ने पुलिस को देखा तो बांध लिया पत्नी का पेटीकोट


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

दमोह: रविवार सुबह जिले के बांदकपुर में पुलिस ने जब बिना मास्क लगाए घूम रहे एक युवक को रोका तो घबराहट में युवक ने झोले में रखा पत्नी का पेटीकोट ही अपने चेहरे पर बांध लिया।

प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह दमोह जिले की पुलिस भी सोशल डिस्टेंसिंग और लोगों को चेहरे पर मास्क लगाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से मैदान में उतरी हुई है। रविवार सुबह जिले के बांदकपुर कस्बे में पुलिस के जवान मास्क चेक कर रहे थे, उसी दौरान एक युवक बिना मास्क लगाए दिखा तो पुलिस ने उससे जैसे ही बिना मास्क के घूमने की वजह पूछी तो युवक घबरा गया। उसने जल्दी से अपने बैग में हाथ डाला और पत्नी के लिए खरीदा गया पेटीकोट बाहर निकाल कर उसे ही चेहरे पर बांध लिया। युवक को ऐसा करते देख पुलिसकर्मी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। इसके बाद पुलिस ने उसे रेडीमेड मास्क लगाने की सलाह दी।

मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल