PM Modi के फोटो से छेड़छाड़ करने पर कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी पर केस


प्रधानमंत्री के फोटो से छेड़छाड़ करने पर कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी पर केस

इंदौर। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के खिलाफ प्रधानमंत्री के फोटो में छेड़छाड़ कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में इंदौर के छत्रीपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। विधायक के खिलाफ धारा 188 सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ छेड़खानी कर अपने ट्विटर अकाउंट पर फोटो शेयर करने वाले विधायक पटवारी के खिलाफ भाजपा नेताओं ने शनिवार रात डीआइजी से शिकायत की थी। हालांकि बाद में पटवारी ने ट्वीट डिलीट कर दिया था।

अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के समय प्रधानमंत्री की तस्वीर में छेड़छाड़ कर कांग्रेस विधायक पटवारी ने अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी को लेकर टिप्पणी की थी। शनिवार रात को भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, मधु शर्मा, जेपी मूलचंदानी सहित अन्य नेता डीआइजी से उनके कार्यालय में जाकर मिले और ज्ञापन देकर विधायक पटवारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की थी। नेताओं का कहना है कि पटवारी लगातार सोशल मीडिया पर सरकार और संगठन को लेकर अभद्र टिप्पणी करते हैं।

उधर इस मामले विधायक पटवारी का कहना था कि उनके ट्वीट में कुछ भी गलत नहीं था, जो अपराध की श्रेणी में आए। बेरोजगारी, किसान और अर्थ व्यवस्था पर सवाल उठाना भाजपा की दुखती रग है। इस तरह की शिकायत कर वे आम आदमी की आवाज दबाना चाहते हैं।

August 2020: जानिए इसी महीने कौन कौन सेे त्‍याेेेेेहार है …


KRISHNA JANMASHTAMI और GANESH CHATURTHI, नोट कर लीजिए ये तारीखें

August 2020: अगस्त का महीना शुरू हो चुका है। 3 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया गया है। उसी दिन सावन समाप्त हो गया। अगस्त के महीने में कई अहम तीज और त्योहार आ रहे हैं। इनमें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2020) और गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2020) अहम हैं। गणेश चतुर्थी के बाद ही हरतालिका तीज आएगी। इसके अलावा इसी महीने कजरी तीज, संकष्टी चतुर्थी भी मनाई जा रही है। हालांकि इस बार सभी तीज त्योहारों के उत्साह पर कोरोना संक्रमण की मार पड़ी है। कहीं भी भीड़ जमा नहीं हो सकेगी। लोगों से यही अपील की जा रही है कि वे घरों में रहकर ही उत्सव बनाएं। जानिए इन सभी त्योहारों की तारीख

जन्माष्टमी (12 अगस्त, बुधवार): पूरी दुनिया भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन 12 अगस्त को मनाएगी। जगह-जगह मटकी फोड़ आयोजन होते हैं। मंदिरो में श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों में लिखा है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था।

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, शनिवार): देश की आजादी का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा। कोरोना संक्रमण के कारण इस जश्न पर भी असर पड़ेगा। सरकार गाइडलाइन जारी कर कह चुकी है कि किस तरह नियमों का पालन करते हुए स्वतंत्रता दिवस मनाना है।

हरतालिका तीज (21 अगस्त, शुक्रवार): महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण और कठिन व्रत हरतालिका तीज का त्योहार भाद्रपद मास की तृतीया को मनाया जाएगा। इस बार 21 अगस्त को महिलाएं और लड़कियां पूरे दिन निर्जल रह कर सौभाग्यवती रहने का वरदान मांगती हैं।

गणेश चतुर्थी (22 अगस्त, शनिवार): गणपति बप्पा का जन्मदिन इस साल 22 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, प्रथमपुज्य गणेश जी का जन्म भादप्रद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। गणेश मंदिरों को तो सजाया ही जाएगा, जगह-जगह गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।

Krishna Janmashtami पर्व बांकेबिहारी मंदिर, मथुरा, वृंदावन, नंदगांव में इन तारीखों को मनेगी जनमाष्‍टमी, TV पर कर सकेंगे LIVE दर्शन


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Krishna Janmashtami 2020 : हर साल की तरह इस बार भी श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी की तैयारियां चल रही हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते प्रतिवर्षानुसार जैसी धूमधाम देखने को नहीं मिलेगी लेकिन भगवान कृष्‍ण के जन्‍म के दर्शन टीवी पर LIVE देखने की व्‍यवस्‍था रहेगी। श्रीकृष्‍ण के जन्‍मस्‍थान मथुरा एवं नंदगांव में अलग-अलग तारीखों पर जन्‍मोत्‍सव मनाया जाएगा। तिथियों के आधार पर इस बार जन-जन के आराध्य गोविद का ये 5247वां जन्मोत्सव होगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान मथुरा में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा, तो नंदबाबा के गांव नंदगांव में एक दिन पहले 11 अगस्त को मनाएंगे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा के मुताबिक जन्मस्थान पर 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। रात 12 बजे प्राकट्यय दर्शन होंगे और प्राकट्‌य आरती होगी। 12.10 बजे से 12.20 बजे तक जन्म महाभिषेक होगा। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव के दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंदिरों में केवल प्रबंधन से जुड़े लोग ही मौजूद रहेंगे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से महाभिषेक का टीवी चैनलों के जरिए लाइव प्रसारण होगा।

नंदगांव में 11 को मनेगी जनमाष्‍टमी

नंदगांव के नंदबाबा मंदिर में 11 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर के सेवायत हरिमोहन गोस्वामी कहते हैं कि नंदबाबा मंदिर में खुर गिनती (उंगलियों पर गिने जाने वाली) के हिसाब से रक्षाबंधन के आठवें दिन जन्मोत्सव मनाया जाता है। रक्षाबंधन से आठवां दिन 11 अगस्त को पड़ रहा है।

यहां 11 सितंबर को जन्मोत्सव

वृंदावन के रंगजी मंदिर में एक माह बाद 11 सितंबर को जन्मोत्सव मनेगा। सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि उत्तरभारत में केवल तिथि को ही महत्व देते हैं। दक्षिण भारत में तिथि और नक्षत्र दोनों एकसाथ होने पर ही उत्सव मनाया जाता है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र 11 सितंबर को एक साथ हैं।

यहां भोर में मनेगी जन्माष्टमी

वृंदावन के ठा. राधारमण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सुबह मनाई जाती है। मंदिर सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि ठा. राधारमणलाल जू आचार्य गोपालभट्ट की साधना से प्रसन्न होकर भोर में शालिग्राम शिला से प्रकट हुए थे। इसलिए आचार्य गोपाल भट्ट ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी भी मंदिर में सुबह मनाए जाने की परंपरा डाली।

मंगला आरती में श्रद्धालु नहीं होंगे शामिल

ठाकुर बांकेबिहारी की साल में एक दिन जन्माष्टमी पर होने वाली मंगला आरती में इस बार श्रद्धालु शामिल नहीं होंगे। 12 अगस्त को रात 12 बजे ठाकुर जी का महाभिषेक होगा, लेकिन इसके दर्शन नहीं होते हैं। मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि इसके बाद रात 1.55 बजे मंगला आरती होगी, लेकिन कोरोना से बचाव के तहत केवल मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग ही रहेंगे।

12 को यहां भी धूमधाम से मनेगा जन्मोत्सव

-नंदभवन, गोकुल ।

-प्रेम मंदिर वृंदावन ।

-चौरासी खंभा, महावन।

-ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन।

-द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा।

इसलिए मनती है दो दिन तक अष्टमी

वृंदावन के पंडित बनवारीलाल गौड़ बताते हैं कि सनातन धर्म में पुराणों के अनुसार दो मतों पर आधारित पर्व मनाए जाते हैं। स्मार्त और वैष्णव मत में पर्व मनाने की तिथि में अंतर होता है। स्मार्त मत में जन्माष्टमी 11 अगस्त को मनेगी। वैष्णव मत में 12 को। इसके पीछे कारण है कि ब्रह्म मुहूर्त में जो तिथि होती है, वैष्णव उसी दिन उत्सव मनाते हैं। 12 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त में अष्टमी तिथि होने के कारण वैष्णव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाएंगे। 12 अगस्त को बुधवार और रोहिणी नक्षत्र भी पड़ रहा है। इसी दिन अधिकतर स्थानों पर उत्सव मनेगा।

क्या है स्मार्त और वैष्णव मत

स्मार्त मत

जो स्मृतियों और वेदों को मानते हैं। पूर्ण रूप से संन्यासी हैं। स्मार्त मत से जुड़े लोग किसी भी पर्व की शुरुआत की तिथि को मानते हैं। एकादशी भी स्मार्त मत के लोग एक दिन पहले मनाते हैं।

वैष्णव मत

वह मत जिसे हमारे आचार्यों ने प्रारंभ किया है। वैष्णव मत के लोग किसी भी पर्व की सूर्योदय की तिथि को मानते हैं।

निशीथ बेला में हुआ था कृष्ण का जन्म

ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के मुताबिक द्वापर युग में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि बुधवार को रात 12 बजे निशीथबेला में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। वैष्णव इस वर्ष 12 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव मनाएंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग व बुधवार भी है। उच्च राशि (वृषभ) के चंद्रमा हैं, निशीथ बेला में 11ः 43 बजे वृषभ लग्न भी आ जाएगी। मथुरा के पूर्व क्षितिज पर चंद्रमा का उदय रात 11ः40 बजे हो रहा है स्मार्त जन 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।

भारत छोड़ो आंदोलन कर शुरूआत कब और किसलिए किया गया? पर विशेष


भारत छोड़ो आंदोलन पर विशेष मुलतापी समाचार

भारत छोड़ो आन्‍दोलन पर विशेष पढे़ और जाने इतिहास भारत की वीर गाथाा

एक लम्बे समय तक भारतवर्ष अंग्रेजों के आधीन रहा है. भारत को आजाद कराने में कई क्रांतिकारियों ने अपनी जान गवाई है और इसके लिए कई प्रकार कि क्रांतियाँ भी हुई हैं। जिनमे से एक है भारत छोड़ो आन्दोलन. आइये जानते हैं भारत छोड़ो आन्दोलन के बारे में।

“भारत छोड़ो आंदोलन” देश का सबसे बड़ा आन्दोलन था जिसकी वजह से अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए थे. यह आन्दोलन ऐसे समय प्रारंभ किया गया जब दुनिया काफी बदलावों के दौर से गुजर रही थी। पश्चिम में युद्ध लगातार जारी था और पूर्व में साम्राज्‍यवाद के खिलाफ आंदोलन तेज होते जा रहे थे। एक तरफ भारत महात्मा गाँधी के नेतृत्व कि आशा कर रहा था और दूसरी तरफ सुभाष चंद्र बोस भारत को आजाद करने के लिए फौज तैयार कर रहे थे. ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि जन आन्दोलन से भारत की आजादी की मजबूत जमीन तैयार हो चुकी थी बस उसमें अब स्वतंत्रता के बीजों को बोना बचा था।

क्या आप जानते हैं कि आखिर “भारत छोड़ो आंदोलन” था क्या, किसने इसको शुरू किया था और कब?

“भारत छोड़ो आंदोलन” के बारे में

अप्रैल 1942 में क्रिप्स मिशन के असफल होने के लगभग चार महीने बाद ही स्वतंत्रता के लिए भारतीयों का तीसरा जन आन्दोलन आरम्भ हो गया| इसे भारत छोड़ो आन्दोलन के नाम से जाना गया। 8 अगस्त, 1942 को बम्बई में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की बैठक में भारत छोड़ो आंदोलन प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में यह घोषित किया गया था कि अब भारत में ब्रिटिश शासन की तत्काल समाप्ति भारत में स्वतंत्रता तथा लोकतंत्र की स्थापना के लिए अत्यंत जरुरी हो गयी है।

भारत छोड़ो आन्दोलन, द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 9 अगस्त 1942 को आरम्भ किया गया था जिसे अगस्त क्रांति भी बोला जाता है। इस आन्दोलन का लक्ष्य भारत से ब्रितानी साम्राज्य को समाप्त करना था। यह आंदोलन महात्मा गांधी द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुम्बई अधिवेशन में शुरू किया गया था। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विश्वविख्यात काकोरी काण्ड के ठीक सत्रह साल बाद 9 अगस्त सन 1942 को गांधीजी के आह्वान पर समूचे देश में एक साथ आरम्भ हुआ। यह भारत को तुरन्त आजाद करने के लिये अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एक सविनय अवज्ञा आन्दोलन था। भारत छोडो का नारा युसुफ मेहर अली ने दिया था।

क्रिप्स मिशन का आगमन और असफलता

विश्व में दुसरे विश्वयुद्ध की शुरुवात हो चुकी थी और इसमें ब्रिटिश फ़ौजों की दक्षिण-पूर्व एशिया में हार होने लगी थी। एक समय यह भी निश्चित माना जाने लगा कि जापान भारत पर हमला कर ही देगा। मित्र देश, अमेरिका, रूस व चीन ब्रिटेन पर लगातार दबाव डाल रहे थे, कि इस संकट की घड़ी में वह भारतीयों का समर्थन प्राप्त करने के लिए पहल करें। अपने इसी उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए उन्होंने स्टेफ़ोर्ड क्रिप्स को मार्च, 1942 ई. में भारत भेजा। ब्रिटेन सरकार भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देना नहीं चाहती थी। वह भारत की सुरक्षा अपने हाथों में ही रखना चाहती थी और साथ ही गवर्नर-जनरल के वीटो अधिकारों को भी पहले जैसा ही रखने के पक्ष में थी। भारतीय प्रतिनिधियों ने क्रिप्स मिशन के सारे प्रस्तावों को एक सिरे से ख़ारिज कर दिया।

क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद ‘भारतीय नेशनल कांग्रेस कमेटी’ की बैठक 8 अगस्त, 1942 ई. को बम्बई में हुई। इसमें यह निर्णय लिया गया कि अंग्रेज़ों को हर हाल में भारत छोड़ना ही पड़ेगा। भारत अपनी सुरक्षा स्वयं ही करेगा और साम्राज्यवाद तथा फ़ाँसीवाद के विरुद्ध रहेगा। यदि अंग्रेज़ भारत छोड़ देते हैं, तो अस्थाई सरकार बनेगी। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध ‘नागरिक अवज्ञा आन्दोलन’ छेड़ा जाएगा और इसके नेता गाँधी जी होंगे।

भारत छोड़ो आन्दोलन (अगस्त क्रांति) की शुरुवात

8 अगस्त, 1942 को बम्बई में हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में यह घोषित किया गया था कि अब भारत में ब्रिटिश शासन की तत्काल समाप्ति भारत में स्वतंत्रता तथा लोकतंत्र की स्थापना के लिए अत्यंत जरुरी हो गयी है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र के देश फासीवादी जर्मनी, इटली और जापान से लड़ रहे हैं। यह प्रस्ताव भारत से ब्रिटिश शासन की समाप्ति के लिए लाया गया था। इसमें कहा गया कि एक बार स्वतंत्र होने के बाद भारत अपने सभी संसाधनों के साथ फासीवादी और साम्राज्यवादी ताकतों के विरुद्ध लड़ रहे देशों की ओर से युद्ध में शामिल हो जायेगा।

इस प्रस्ताव में देश की स्वतंत्रता के लिए अहिंसा पर आधारित जन आन्दोलन की शुरुआत को अनुमोदन प्रदान किया गया। इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद गाँधी ने कहा था कि एक छोटा सा मंत्र है जो मै आपको देता है। इसे आप अपने ह्रदय में अंकित कर लें और अपनी हर सांस में उसे अभिव्यक्त करें। यह मंत्र है-“करो या मरो”। अपने इस प्रयास में हम या तो स्वतंत्रता प्राप्त करेंगें या फिर जान दे देंगे। भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान ‘भारत छोड़ो’ और ‘करो या मरो’ भारतीय लोगों का नारा बन गया।

9 अगस्त 1942 की सुबह ही कांग्रेस के अधिकांश नेता गिरफ्तार कर लिए गए और उन्हें देश के अलग अलग भागों में जेल में डाल दिया गया साथ ही कांग्रेस पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। देश के प्रत्येक भाग में हड़तालों और प्रदर्शनों का आयोजन किया गया। सरकार द्वारा पूरे देश में गोलीबारी, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां की गयीं। लोगों का गुस्सा भी हिंसक गतिविधियों में बदल गया था। लोगों ने सरकारी संपत्तियों पर हमले किये, रेलवे पटरियों को उखाड़ दिया और डाक व तार व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया। अनेक स्थानों पर पुलिस और जनता के बीच संघर्ष भी हुए। सरकार ने आन्दोलन से सम्बंधित समाचारों के प्रकाशित होने पर रोक लगा दी। अनेक समाचारपत्रों ने इन प्रतिबंधों को मानने की बजाय स्वयं बंद करना ही बेहतर समझा।

1942 के अंत तक लगभग 60,000 लोगों को जेल में डाल दिया गया और कई हजार मारे गए।मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। बंगाल के तामलुक में 73 वर्षीय मतंगिनी हाजरा, असम के गोहपुर में 13 वर्षीय कनकलता बरुआ, बिहार के पटना में सात युवा छात्र व सैकड़ों अन्य प्रदर्शन में भाग लेने के दौरान गोली लगने से मारे गए। देश के कई भाग जैसे, उत्तर प्रदेश में बलिया, बंगाल में तामलूक, महाराष्ट्र में सतारा, कर्नाटक में धारवाड़ और उड़ीसा में तलचर व बालासोर, ब्रिटिश शासन से मुक्त हो गए और वहां के लोगों ने स्वयं की सरकार का गठन किया। जय प्रकाश नारायण, अरुणा आसफ अली, एस.एम.जोशी.राम मनोहर लोहिया और कई अन्य नेताओं ने लगभग पूरे युद्ध काल के दौरान क्रांतिकारी गतिविधियों का आयोजन किया।

युद्ध के साल लोगों के लिए भयानक संघर्ष के दिन थे। ब्रिटिश सेना और पुलिस के दमन के कारण पैदा गरीबी के अलावा बंगाल में गंभीर अकाल पड़ा जिसमे लगभग तीस लाख लोग मरे गए। सरकार ने भूख से मर रहे लोगों को राहत पहुँचाने में बहुत कम रूचि दिखाई।

मुलतापी समचार

“भारत छोड़ो आंदोलन” की वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों का राष्‍ट्रपति सम्मान से सम्‍मानित


“भारत छोड़ो आंदोलन” की वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान

स्‍वतंत्रता सेनानी का राष्‍ट्रपति सम्‍मान सेे सम्‍मानित SDM चनाप मुलताई

राष्‍ट्रपति सम्‍मान ने आज मुलताई को गौरव की अनुभूति का अहसास करा रही

Multapi samachar

भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर SDM मुलताई श्री सीएल चनाप ने तहसील प्रभातपट्टन के ग्राम तिवरखेड़ उनके घर पहुँचकर वरिष्ठ केन्द्रीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री लक्ष्मण उर्फ बद्री पिता श्री गोविंद बढ़ई को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए अंगवस्त्रम एवं शाल से सम्मानित किया.

भारत छोड़ो आंदोलन

भारत छोड़ो आन्दोलन विश्वविख्यात काकोरी काण्ड के ठीक सत्रह साल बाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 9 अगस्त सन 1942 को गांधीजी के आह्वान पर समूचे देश में एक साथ आरम्भ हुआ। यह भारत को तुरन्त आजाद करने के लिये अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एक सविनय अवज्ञा आन्दोलन था। क्रिप्स मिशन की विफ़लता के बाद महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ अपना तीसरा बड़ा आंदोलन छेड़ने का फ़ैसला लिया। 8 अगस्त 1942 की शाम को बम्बई में अखिल भारतीय काँगेस कमेटी के बम्बई सत्र में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नाम दिया गया था।

भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को मुलतपाी समाचार परिवार शत – शत् नमन करता है

मनमोहन पंवार

पुमख संपादक मुलतापी समाचार

मुलताई प्रभात पट्टन मार्ग पे नरखेड़ गांव में हुआ दर्दनाक हादसा 4 लोगो की मौत 12 लोगों के घायल- देखें वीडियों


प्रभातपट्टन  मार्ग पर ग्राम नरखेड़ के पास मोड़ पर   विपरित दिशा से आ रहे ट्रक और बस में  भिड़ंत हो गई।  भिड़ंत  में चार लोगों की मौत हो गई एवं 12 लोग घायल हुए है | नारखेड़ के पास बस और ट्रक की जोरदार भिड़ंत में  दोनो वाहन  पलट गए  दुर्घटना में  बस में सवार … Continue reading मुलताई प्रभात पट्टन मार्ग पे नरखेड़ गांव में हुआ दर्दनाक हादसा 4 लोगो की मौत 12 लोगों के घायल- देखें वीडियों


Live VIDEO pm modi सरकार एक देश एक मंडी किसान हित में एक पहल


PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री मोदी ने जारी की 17 हजार करोड़ रुपए की छठी किस्त

मोदी सरकार के ‘एक देश, एक मंडी’ के अध्यादेश का किसानों ने किया स्वागत

मुलतापी समाचार

किसान सम्‍मान निधी

PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी (Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (Agricultural Infrastructure Fund) के तहत 1 लाख करोड़ रुपए की फाइनेंसिंग सुविधा की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने इसी अवसर पर PM Kisan Yojana के तहत 8.5 करोड़ किसानों को 17,000 करोड़ रुपए की छठी किस्त भी जारी की। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी इस मौके पर मौजूद थे।

इस समारोह में देश भर के लाखों किसान, सहकारी समितियां और नागरिक शामिल हुए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपए के ‘कृषि अवसंरचना कोष’ के तहत फाइनेंस की सुविधा को मंजूरी दी है। इस फंड के जरिए कटाई के बाद फसल के बेहतर प्रबंधन के लिए Infrastructure और Community Agricultural Assets जैसे कि कोल्ड स्टोरेज, कलेक्शन सेंटर, प्रॉसेसिंग यूनिट बनाने में मदद की जाएगी।

इन सुविधाओं के शुरू होने से किसानों को अपनी फसल की अच्छी कीमत मिल सकेगी। किसान अपनी फसल को स्टोर कर सकेंगे और सही कीमत मिलने पर अपने माल को बेच सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी।

सरकार कई लोन देने वाली संस्थाओं के साथ एग्रीमेंट करके ये एक लाख करोड़ रुपए की फाइनेंस की स्कीम शुरू कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों में से 11 बैंकों ने पहले ही कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग के साथ एमओयू साइन कर लिया है। इस स्कीम का फायदा ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिले और उनकी आय बढ़े इसके लिए सरकार ने इस स्कीम के लाभार्थियों को 3% ब्याज सब्सिडी और 2 करोड़ रुपए तक की लोन गारंटी देने की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज किसान सम्मान निधि की छठी किस्त जारी की। इसके जरिए 8.5 करोड़ किसानों के खाते में 17 हजार करोड़ रुपए जमा हो गए। किसानों के खाते में दो हजार रुपए की किस्त जमा हुई। रबी सत्र शुरू होने से पहले किसानों के खाते में यह रकम जमा की गई है।