माटी का तिलक लगाऊं मैं- नरवरे बंधुआलेख प्रस्तुति- एस ब्राह्मणे


माटी का तिलक लगाऊं मैं- नरवरे बंधु
आलेख प्रस्तुति- एस ब्राह्मणे

“भारत माता का वीर सपूत हूं मैं
रणभूमि का तिलक लगाऊंगा मैं
मातृभूमि पर आंच नहीं आने दूंगा
चाहे तिरंगे में लपेटकर आऊंगा मैं
राष्ट्रभक्ति मेरा धर्म है निभाऊंगा में
वतन के लिए भले मिट जाऊं मैं
भारत माता का वीर सपूत हूं -मैं.”

आइए
मैं आपको वर्तमान समय में पूरा विश्व जब आज जीवन और मृत्यु के बीच में संघर्ष करते हुए नजर आ रहा है ऐसे समय में कुछ योद्धा अपने कर्तव्य के मार्ग पर डटे हुए हैं ऐसे योद्धाओं की व्याख्या मेरे शब्दों के द्वारा, मेरे विचारों के द्वारा , मेरी लेखनी के द्वारा किया जा रहा है
क्योंकि किसी ने कहा है
“कुछ योद्धाओं की चमक नहीं जाती
कुछ यादों की कसक नहीं जाती कुछ लोगों से होता है गहरा रिश्ता दूर रहकर भी उनकी महक नहीं जाती”……
एक ऐसे राष्ट्र प्रेमी ,देशभक्त अदम्य साहस और वीरता के पर्याय जिन्होंने सेना में अपनी सेवाएं देते हुए देश प्रेम की भावना का का पालन किया , जांबाज योद्धा स्वरूप सेवाएं दी और सेना में नौकरी करने के बाद जब उनकी योद्धा के बतौर घर सकुशल वापसी हुई , रिटायरमेंट के बाद अपने लोगों के बीच में हुई तो वे कहां चुप बैठने वाले थे, उनके पास अदम्य साहस और वीरता वाला पराक्रम ,हिम्मत ,हौसला देश प्रेम की भावना ,लोगों की मदद करना ,लोगों के सुख दुख में काम आना ,बिना किसी स्वार्थ के बिना किसी लोभ प्रलोभन के ,वे देशभक्ति की खातिर ,राष्ट्रप्रेम के खातिर ,निरंतर सेवा भाव से जनता की सेवा में लगे हुए हैं , वे आज भी कोरोना काल में पुलिस प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर डटे हुए हैं साथ ही स्वास्थ्य विभाग में जहां दल बल की आवश्यकता होती है वे अपना योगदान दे रहे हैं वे निरंतर वैक्सिंग के लिए लोगों को तैयार कर रहे हैं और सेंटरों पर व्यवस्था बनाए हुए हैं लोगों को रक्त दान देने के लिए भी हमेशा आगे खड़े रहते हैं
आइए मैं उनसे आपका परिचय करवाते हुए मैं आपको बताना चाहूंगा की किस तरह से दो फौजी भाइयों की कर्मठता , देश प्रेम वीरता साहस पराक्रम जन सेवा, राष्ट्र सेवा ,मानव सेवा जिनके दिलों में हो, ऐसे जांबाज योद्धा के बारे में दो शब्द लिखकर मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूं ,धन्यवाद का पात्र समझता हूं आज दो भाइयों की वीरगाथा को अपने शब्दों में बयां करने का जो सौभाग्य मिला है ऐसा लगता है मानो मेरी लिखनी ने आज अमरत्व को प्राप्त कर लिया है .
आइए इन दोनों भाइयों की वीर गाथा को बयां करने से पहले उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि से मैं तुम्हें अवगत कराना चाहूंगा

इन दोनों भाइयों के नाम विजय नरवरे एवं संजय नरवरे है इनके पिता जी का नाम_ लखनलाल नरवरे, माता का नाम_ श्रीमती काशीबाई नरवरे है एक मध्यम एवं साधारण परिवार में जन्म लेने के पश्चात परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण माता पिता ने दोनों बच्चों को शिक्षा प्राप्त करवाई माता-पिता से प्रेरणा लेकर दोनों ही बेटों में एक जुनून एक जज्बा हिम्मत हौसला देश के प्रति अपनी जवाबदेही निश्चित की सबसे पहले सेना में भर्ती हुए
एक ही दिन दोनों भाइयों की जॉइनिंग हुई 2003 में हुई लेकिन जज्बा जुनून और जन सेवा बिल्कुल किसी बहादुर योद्धा से कम नहीं था और सफलता भी हाथ लगी देश प्रेम की भावना इनकी दिलों मे विराजमान थी दोनों ही बेटे विजय ( बेटा) भारतीय सेना में शामिल होकर अपने परिवार के लिए इतिहास बना दिया ,
बड़े भाई विजय नरवरे के बारे में बात करते हैं तो हमें जानकारी प्राप्त होती है कि इन्होंने अपने स्कूली जीवन में ही एनसीसी लेकर बीएलसी मे लीडरशिप प्राप्त की और 12वीं क्लास में मात्र 17 वर्ष 6 महिने की आयु में सेना ज्वाइन कर ली, सरल सहज मिलनसार व्यवहार कुशल के साथ-साथ अनुशासन के पक्ष में अपने जीवन को व्यतीत करने वाले बेदाग छवि और कर्तव्य पालन के साथ-साथ अनुशासन का पालन करते रहे हमेशा दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में कभी पीछे नहीं रहे, इन्होंने दुश्मनों की कई बार छक्के छुड़ाए है इसी प्रयास में एक बार आतंकवादी हमले की शिकार हुए थे लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था स्वस्थ होकर अपने कर्तव्य मार्ग पर डटे रहे
अब मैं उनके छोटे बेटे संजय नरवरे के व्यक्तित्व के बारे में बताना चाहूंगा हष्ट पुष्ट आकर्षण युक्त व्यक्तित्व सादगी और सरलता के पुजारी अनुशासन का अपने जीवन में कड़ाई से पालन कर अपने जीवन को बड़े ही सहज रूप से जीने वाले संजय बचपन से ही मेधावी छात्रों के रूप में अपना विशिष्ट स्थान रखते थे परिवार की आर्थिक ना होने के कारण , देश के प्रति उनकी लगन और समर्पण भाव को देखते हुए सेना में भर्ती हो गए आप भी बड़े सहज सरल आकर्षक सुडोल व्यक्तित्व वाणी की मिठास विशिष्ट कार्य शैली से लोगों के दिलों पर राज करने वाले जांबाज योद्धा के रूप में सेना में नौकरी की और आप बचपन से ही स्काउट के शौकीन रहे है और कई जगह कैंप लगाए और लोगों की मदद की स्कूली जीवन में ही मात्र ग्यारहवीं क्लास पढ़ते पढ़ते 16 वर्ष 6 महीने की आयु में आपने सेना ज्वाइन कर ली
यह अजीब संयोग है, इसे ईश्वर का संयोग ही कहा जा सकता है, देश प्रेम की भावना दोनों ही भाइयों में कूट-कूट कर भरी हुई थी साथ ही जनसेवा एवं परमार्थ के कार्य को करने में इन्हें जो आनंद मिलता है उसे शब्दों में बयां कर पाना बड़ा मुश्किल है ,लेकिन हां
2003 में दोनों ही भाइयों ने एक ही दिन एक ही साथ सेना में भर्ती होकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे
2010 में दोनों ही सैनिक योद्धाओं की शादी भी एक ही दिन हुई,
इनके दोनों पुत्रों का जन्म भी एक ही दिनांक को हुआ
इसके अलावा सेना से सेवानिवृत्ति भी एक ही दिन हुई,

दोनों ही भाइयों की कार्य करने की इच्छा शक्ति, विशिष्ट शैली से और लोगों की मदद करना, लोगों के काम आना, बिना किसी स्वार्थ के बिना , बिना किसी प्रलोभन के लोगों के लिए एक आदर्श स्थापित करते हुए इन दोनों भाइयों का जो व्यक्तित्व लोगों के बीच में उभर कर सामने आया है निसंदेह हुआ तारीफ के काबिल है , हम सब के लिए गौरव का विषय है, गर्व महसूस होता है, आज भी इन दोनों जांबाज योद्धाओं के दिलों में देश के लिए, समाज के लिए ,राष्ट्र के लिए, मानव समाज एवं जन कल्याण, मातृभूमि की रक्षा के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना, इनके दिलों में है
के दर्शन हमें तब होते हैं जब उनके द्वारा किए जाने वाले सृजनात्मक एवं रचनात्मक कार्यों की गतिविधियों पर हम प्रकाश डालते हैं
अवगत है कि बैतूल पुलिस ग्राउंड में बीते साल से 5:30 बजे से सुबह सुबह 7:30 तक महिलाओं एवं बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला सशक्तिकरण (नारी शक्ति) अभियान चलाते हैं एवं उन्हें शारीरिक प्रशिक्षण देते हैं साथ ही गांव एवम शहर के युवा नौजवान हो, जो सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहता है , उनके व्यक्तित्व के निर्माण के लिए, रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य को लेकर रोज शारीरिक शिक्षा जो कि सेना में भर्ती होने के लिए मुख्य परीक्षा कहलाती है को प्रशिक्षित करते हैं, इसके अलावा भी अनेक जनकल्याणकारी, सृजनात्मक एवं रचनात्मक कार्यों को करते है महिलाओं को उनके अधिकार एवं उनके कर्तव्य नारी का मान सम्मान और अभिमान को लेकर उनके ऊपर हो रहे अत्याचार , अन्याय एवं शोषण घरेलू हिंसा, दुराचार ,बालिका शिक्षा को बढ़ावा के साथ-साथ समय-समय पर जागरूकता रैली, उनके लिए योग शिक्षा को बढ़ावा ,आत्मरक्षा के गुर सिखाना आदि उपायों की जानकारी शिविर के माध्यम से उनको देना ,उन्हें जागरूक करते आ रहे हैं ,आज के इस वैश्विक महामारी के दौर में जब लोग अपने अपने घरों में आराम से रह कर के अपने जीवन चर्या को सीमित कर रहे हैं लेकिन आज भी “नरवरे- बंधु” दोनों भाई कोरोना योद्धा की तरह कोरोना कॉल में भी शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनसेवा में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निडरता, साहस, हौसला ,हिम्मत के साथ कर्तव्य मार्ग पर डटे है, लोगों की मदद के लिए, सेवा के लिए ,लोगों के सुख दुख में काम आने के लिए, लोगों को जागरुक करने के लिए ,दृढ़ संकल्प के साथ-साथ जनसेवा , मानव सेवा की भावना का सम्मान करते हुए बिना किसी लोभ या प्रलोभन के पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने राष्ट्र धर्म का पालन कर रहे हैं देशभक्ति की भावना जो इनके दिलों में है वह काबिले तारीफ है उन्हें अपने परिवार की चिंता नहीं है उन्हें चिंता है देश की दुनिया की, हम लोगों की, इसीलिए रात दिन 24 घंटे अनवरत रूप से जन सेवा कर रहे हैं, मानव की सेवा कर रहे हैं, मानव धर्म के साथ राष्ट्र धर्म का पालन कर रहे हैं, इसके अलावा” रक्तदान” है महादान अभियान के तहत भी समय-समय पर इनके द्वारा लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से रक्त कैंप का आयोजन भी किया जाता रहा है कई बार इन्होंने जिन्हें रक्त की आवश्यकता होती है उस समय इन्होंने लोगों को रक्तदान करके उनकी जिंदगी यूं को संवारा है बचाया है, धन्य है ऐसे वीर योद्धा जिनके जन्म से हमारा जिला हमारा शहर हमारा बैतूल अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है बैतूल की धरती मां उनका अभिनंदन करती है ऐसे सेना के जांबाज योद्धाओं को इनकी सकारात्मक सोच ,देश प्रेम की भावना ,त्याग, तपस्या, संकल्प के साथ ,राष्ट्र धर्म का पालन करते हैं पूरी निडरता से बेबाक तरीके से बिना किसी की चिंता किए बिना, परिवार की चिंता किए बिना आज कोरोना योद्धा के रूप में वॉलिंटियर्स के रूप में निरंतर कल्याणकारी एवं जन उपयोगी कार्य करते हुए नजर आ रहे हैं वंदन करते हैं अभिनंदन करते हैं ऐसे वीर पुत्रों को मेरे शब्दों के द्वारा उनका सम्मान किया जाना उनकी कार्यशैली का सम्मान किया जाना उनकी देशभक्ति का सम्मान उनके साहस पराक्रम का सम्मान उनकी लगन कर्तव्य परायणता का सम्मान किया जाना बहुत नितांत आवश्यक है क्योंकि किसी कवि ने कहा है ..
“वह खून कहो किस मतलब का जिसमें उबाल का नाम नहीं ,
वह इंसान भी किसी मतलब का नहीं
जिसमें स्वदेश के प्रति प्यार नहीं”

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि इन दोनों सैनिक बंधुओं से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए, हमें इनसे सीखना चाहिए, देशभक्ति का पाठ , मानव सेवा ,जन कल्याण के कार्य ,सतत सेवा भाव आदि को अपने जीवन में उतार कर हम अपने जीवन को सार्थक और कामयाब बना सकते हैं, मातृभूमि की रक्षा के लिए हम काम आ सकते हैं ,देश की शहादत में, देश की एकता और अखंडता में हम देश के सच्चे सपूत होने का हमें गौरव प्राप्त हो सकता है, बस शर्त यह है कि हम पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे ,वंदन करता हूं ,अभिनंदन करता हूं ,समाज ,राष्ट्र एवं जन कल्याण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए प्रयासों को मैं प्रणाम करता हूं
पंडित श्रीकृष्ण सरल कवि के द्वारा रचित इन भावों के साथ अपनी लेखनी को यहां पर विराम देते हुए कहता हूं, इन दोनों सैनिक बंधुओं से…
मत ठहरो ,सैनिक बंधुओं तुमको आगे चलना है
वतन की राह पर चलने से तुम्हें नहीं डरना है
तुम चलो आगे और जमाना अपने साथ चलाओ
जो पिछड़ गए हैं प्रेरित कर उन्हें आगे बढ़ाओ
तुमको प्रतीक बनना है विश्व शांति और प्रगति का
तुमको जनहित के सांचे में ढलना है
मत ठहरो सैनिक बंधुओं तुम्हें आगे बढ़ना है”
आगे बढ़ने से तुमको नहीं डरना है
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना हैह

आलेख एवं संकलन-
एस.ब्राह्मणे “सरल”
लेखक साहित्यकार कवि एवं चिंतक, मानस नगर बैतूल
मोबाइल नंबर 78282 86 568
Syamdevbrahmane0404@gmai

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

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