पुलिस के नोटिस के विरोध में विधायकों से मिले पत्रकार


पुलिस के नोटिस का विरोध, पत्रकारों ने दो विधायकों से मिलकर जताई नाराजगी

जांच का मिला आश्वासन, अधिकारियों से करेंगे चर्चा
पुलिस के नोटिस का विरोध, पत्रकारों ने विधायकों से मिलकर जताया विरोध


बैतूल। बैतूल से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के संपादक द्वारा गुप्तगू कॉलम में शीर्षक प्रकाशित करने के बाद शाहपुर एसडीओपी द्वारा दो नोटिस दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. शुक्रवार को सांसद और आईजी को ज्ञापन सौंपने के बाद शनिवार को स्थानीय पत्रकारों ने आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे और बैतूल विधायक निलय डागा को भी ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने पुलिस के रवैये की आलोचना कर इसे पत्रकारों की आवाज दबाने का कृत्य बताया। डॉ पण्डागरे ने कहा कि छठे स्तम्भ को बिना दबाव में काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वे इस सम्बंध में अधिकारियों से बात करेंगे। बैतूल विधायक श्री डागा ने पत्रकारों को आश्वसत किया है कि वे इस बारे में पुलिस विभाग के अधिकारियों से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और बीजेपी को भी पत्र लिखकर विरोध जताएंगे. पत्रकारों को इस तरह के नोटिस दिया जाना सरासर गलत है। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला मुख्यालय के दर्जनों पत्रकार मौजूद थे। इनमें पत्रकार रामकिशोर पवार, आनंद सोनी, इरशाद हिन्दुस्तानी, अकील अहमद, रिशू नायडू, लक्ष्मीनारायण साहू, घनश्याम राठौर, सतीश साहू, राजेश भाटिया, सत्येंद्र सिंह परिहार, अनिल वर्मा, पिंटू मंशूरे, अमिताभ तिवारी, गोलू पवार, सूर्यदीप त्रिवेदी, मफ्फू खान, अनिल कजोड़े, रामदास पाटिल, अरूण सूर्यवंशी, राज कवड़कर, तक्षित सोनारे,गोलू पवार, अरुण सूर्यवंशी, वाजिद खान, शशांक सोनकपुरिया, अशोक झरबड़े, सुनील अतुलकर , सचिन जैन समेत अन्य पत्रकार मौजूद थे।

आप ने भी जताई नाराजगी

आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय सोनी ने भी पत्रकार पंकज सोनी को गाशिप पर आधारित कॉलम गुप्तगू में शीर्षक प्रकाशित करने पर विरोध जताया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों को नोटिस देने का अधिकार कोई कानून नहीं देता। पुलिस प्रशासन द्वारा हिटलरशाही के तर्ज पर पत्रकारों को जवाब देने के लिए मजबूर किया जाना गलत है। श्री सोनी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस तरह की कार्रवाई करने वालों पर कार्रवाई की जाए और संपादक के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश अधिकारियों को दें।

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