21 सरहदों पर जाएगी बैतूल की बहनों की हाथ से बनी राखियां


21 सरहदों पर जाएगी बैतूल की बहनों की हाथ से बनी राखियां, करगिल युद्ध के बाद से जारी है राष्ट्र रक्षा मिशन का संकल्प

बैतूल। जिले की बहनें रक्षा बंधन के एक महीने पहले से फौजी भाईयों के लिए राखी बनाने में जुट गई है। यह राखियां देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों के लिए बनाई जा रही है। बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के राष्ट्र रक्षा मिशन को यह राखियां अलग-अलग संगठनों एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी छात्राओं द्वारा भेंट की जाएगी।

जिले के अग्रणी कोचिंग संस्थान दृष्टि एजुकेशन की छात्राओं ने भी सैकड़ों राखियां देश की सीमाओं पर तैनात फौजियों के लिए बनाई गई है। यह राखियां पूर्व सैनिक विजय नरवरे, संजय नरवरे एवं कोचिंग संचालक श्री कमलेश निरापुरे के मार्गदर्शन में तैयार की गई है। अंतिम सांस तक चलेगा राष्ट्र रक्षा मिशन करगिल युद्ध के बाद से देश की 20 सरहदों पर बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के सदस्य प्रत्यक्ष रुप से पहुंचकर रक्षा बंधन का पर्व मनाते आए है। वर्ष 2020 में कोरोना की वजह से बैतूल की बेटियां सरहदों पर भले ही नहीं पहुंची लेकिन सैनिकों की कलाई उन्होंने सूनी नहीं रहने दी। गत वर्ष 20 सरहदों पर राखियां पोस्ट की गई थी और इस वर्ष भी संस्था द्वारा आमला सहित 21 सरहदों पर सैनिकों के लिए राखियां भिजवाई जाएगी। संस्था प्रमुख गौरी भारत पदम ने बताया कि राष्ट्र रक्षा मिशन अंतिम सांस तक चलता रहेगा। संस्था के इस मिशन से पूरा बैतूल जुड़ा है। हर बैतूलवासी को बैतूल की इन बेटियों पर नाज है जिन्होंने मुश्किल से मुश्किल हालात में सेना की हौसला अफजाई के लिये लिया संकल्प निभाया है।

दृष्टि एजुकेशन की छात्राओं ने बनाई सैकड़ों राखियांसदर क्षेत्र में संचालित दृष्टि एजुकेशन कोचिंग संस्थान के छात्र-छात्राओं में सेना के प्रति अटूट जज्बा है। इस संस्थान का संचालन में भी पूर्व सैनिकों द्वारा ही श्री निरापुरे को मार्गदर्शन किया जा रहा है। जब कोचिंग संचालक एवं पूर्व सैनिकों ने हाथ से बनाई राखियां सैनिकों के लिए भेंट करने की मंशा जाहिर की तो राष्ट्र रक्षा मिशन की बहनों ने सहर्ष राखियां सरहद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमेशा की तरह ली। इस वर्ष भी देश की सरहदों पर तैनात हजारों सैनिकों की कलाई पर बैतूल की राखी सजेगी। कोचिंग की छात्रा भारती राऊत, विशाखा यादव, टीना दीवान, हर्षलता खाकरे, साक्षी माकोड़े, शिवानी धुर्वे, सरस्वती काकोड़िया, प्रियंका गीद, स्वाती निरापुरे ने मिलकर सैकड़ों राखियां फौजियों के लिए बनाई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में करेंगे पोस्टराष्ट्र रक्षा मिशन का दल प्रयासरत है कि कोरोना गाईडलाईन का पालन करते हुए उन्हें सरहद पर जाने की अनुमति मिल जाए। गत वर्ष अनुमति न मिलने और रेल यातायात बंद होने की वजह से आमला में एयर फोर्स के जवानों को राखियां सौंपी गई थी। इस वर्ष हमेशा की तरह प्रत्यक्ष रुप से जाने के प्रयास किए जा रहे है।

समिति की कोषाध्यक्ष जमुना पंडाग्रे ने बताया कि जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में सभी राखियां सरहदों के लिए पोस्ट कर दी जाएगी। गत वर्ष कुछ सरहदों पर राखियां देर से पहुंची थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। उन्होंने अनुरोध किया है कि जो भी बहने राखियां भेंट करना चाहती है वह संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से सम्पर्क कर सकती है। 

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

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