भजन – उनके हंथो में लगजे तालउनके हंथो में लगजे ताल


देवी भजन हिंदी लियरिक्स

उनके हंथो में लगजे ताल
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मैय्या जी की ताली ना बजाये


उनके हंथो में लगजे ताल
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मैय्या जी की ताली ना बजाये

माता के दरबार में देखो
भीद लगी है अपार
जो माता की जय ना बोले उन्को है धिक्कार

उनकी जिव्हा में लग जाए ताल
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मैय्या जी की ताली ना बजाये

माँ की मूरत ममता वाली
पवन दिव्या स्वरूप
सामने आके जो ना देखे
माँ का प्यारा रूप
उनकी आंखों में लग जाए ताल
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मैय्या जी के दर्शन को ना जाए

उनकी जिव्हा में लग जाए ताल
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मैय्या जी की ताली ना बजाये

माके द्वारे आए लेकिन भक्ति झुके ना शीश
ऐसा लोगो को अम्बे का कहा मिले आशीषो
उनके मस्तक पे लग जाए ताला
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मां के आगे शीश ना झुके

उनकी जिव्हा में लग जाए ताल
अलीगढ़ वाला सावा मन वाला
जो मैय्या जी की ताली ना बजाये

Unke Hantho Me Lagjaye Taala
Aligarh Wala Sava Mann Wala
Jo Maiyya Ji Ki Taali Naa Bajaye

Unke Hantho Me Lagjaye Taala
Aligarh Wala Sava Mann Wala
Jo Maiyya Ji Ki Taali Naa Bajaye

Maata Ke Darbar Mein Dekho
Bheed Lagi Hai Apar
Jo Mata Ki Jai Naa Bole Unko Hai Dhikkar

Unki Jivha Mein Lag Jaye Taala
Aligharh Wala Sava Mann Wala
Jo Maiyya Ji Ki Taali Naa Bajaye

Maa Ki Moorat Mamta Wali
Pawan Divya Swaroop
Saamane Aake Jo Naa Dekhe
Maa Ka Pyara Roop
Unki Ankho Mein Lag Jaye Taala
Aligarh Wala Sava Mann Wala
Jo Maiyya Ji Ke Darshan Ko Naa Jaye

Unki Jivha Mein Lag Jaye Taala
Aligharh Wala Sava Mann Wala
Jo Maiyya Ji Ki Taali Naa Bajaye

Maake Dware Aaye Lekin Bhakti Jhuke Naa Sheesh
Aese Logo Ko Ambe Ka Kaha Mile Aasheesh
Unke Mastak Pe Lag Jaye Taala
Aligarh Wala Sava Mann Wala
Jo Maa Ke Aage Sheesh Naa Jhukaye

Unki Jivha Mein Lag Jaye Taala
Aligharh Wala Sava Mann Wala
Jo Maiyya Ji Ki Taali Naa Bajaye

रोंढा की माटी के लाल श्री रामकिशोर पवार पत्रकार की “पुस्तक मेरा बैतूल” का विमोचन आज


बैतूल। जिले में बीते 40 वर्षो से सक्रिय एवं लगातार समाचार पत्रो एवं पत्रिकाओ में छपते चले आ रहे रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढावाला की पुस्तक मेरा बैतूल का विमोचन आज गुरुवार 11 बजे मीडिया सेंटर में किया जाएगा। इस पुस्तक की खास बात यह है कि इसमें बैतूल के 200 वर्ष के इतिहास की जानकारी है। उल्लेखनीय है कि ग्राम रोंढा में 23 मई 1964 को जन्मे रामकिशोर पंवार बीते चार दशक से जिले से सक्रिय पत्रकार लेखक, सत्यकथा लेखक एवं कहानीकार रहे है। उनके अनेक सत्यकथाए और कहानियां पूरे देश में विभिन्न भाषाओं के समाचार पत्रो एवं पत्रिकाओं मे छपती चली आ रही है। वर्ष 2004 से जिला मुख्यालय पर दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्र पंजाब केसरी के बैतूल ब्यूरो रहे रामकिशोर पंवार के द्वारा भोपाल से हिन्दी साप्ताहिक समाचार पत्र ताप्ती हलचल का प्रकाशन किया जा रहा है। बैतूल जिले की पत्रकारिता पर उनकी पहली किताब प्रकाशित हुई है। श्री पंवार की तीन अन्य किताबे नदियों का ननिहाल, बेतूल और मेरी जन्मभूमि प्रिंट हो रही है। बैतूल जिले की पत्रकारिता को करीब से जानने वाले रामकिशोर पवार की इस किताब में जिले के गावो और जिले की विशेषता और आजादी के आंदोलन से जुड़े लोगो की जानकारी एवं कई बीती घटनाओ का भी उल्लेख पढऩे को मिलेगा। श्री पंवार की इस किताब में बैतूल जिले में गुरु नानक देव से लेकर महात्मा गांधी के आने तक की घटनाओं की जानकारी पढऩे को मिलेगी। बैतूल जिले की जानकारी और जिले का पर्यटक एवं इतिहासिक मानचित्र को भी जानने का मौका इस किताब में मिलेगा। श्री पंवार ने जिले की इतिहास पुरातत्व धार्मिक भूगोलिक के साथ साथ जिले के 200 साल का लेखा जोखा भी हैं। जिला मुख्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों में आए बदलावो एवं घटनाक्रमो को भी शामिल किया है। मीडिया सेंटर में आयोजित विमोचन समारोह में जिले के सभी पत्रकारो को श्री पंवार ने आमंत्रण पत्र भेजा है।