जिला पंचायत अध्यक्षों का 18 को होने वाला आरक्षण स्थगित


जिला पंचायत अध्यक्षों का 18 को होने वाला आरक्षण भी स्थगित, पंचायत राज संचालनालय ने सभी कलेक्टरों को जारी किए आदेश

मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए आगामी 18 दिसंबर को रखी गई आरक्षण की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। इस संबंध में संचालक पंचायत राज आलोक कुमार सिंह ने सभी कलेक्टरों और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को आदेश जारी कर दिए हैं।

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 32 एवं मध्यप्रदेश पंचायत निर्वाचन नियम 1995 के अनुसार अध्यक्ष जिला पंचायत के पदों के आरक्षण की कार्यवाही दिनांक 18 दिसंबर 2021 दिन शनिवार नियत की गई थी। उक्त कार्यवाही अपरिहार्य कारणों से स्थगित की जाती है। इस संबंध में आगामी तिथि की सूचना पृथक से दी जावेगी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के पंचायत निर्वाचन को लेकर आज सुनाए गए फैसले को लेकर यह कदम उठाया गया है।

पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया स्टे


पंचायत चुनाव में नहीं मिलेगा ओबीसी आरक्षण

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव पर स्टे लगा दिया है। इस मामले पर 27 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि ओबीसी आरक्षण आधार पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जाएं। वहीं निर्देश को न मानने पर पंचायत चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं।

इससे पहले मप्र हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनाव अंतर्गत परिसीमन और आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई, अर्जेंट हियरिंग से इन्कार कर दिया। गुरूवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से मामले पर शीघ्र सुनवाई का निवेदन किया गया।

मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस विजय शुक्ला की युगलपीठ ने साफ कर दिया कि शीतकालीन अवकाश के बाद मामले पर अगली सुनवाई की जाएगी। जबकि दमोह निवासी डॉ. जया ठाकुर द्वारा अधिवक्ता वरुण ठाकुर के माध्यम से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दायर की गई अन्य याचिका पर सुनवाई की अगली तिथि शीतकालीन अवकाश से पूर्व 21 दिसंबर निर्धारित कर दी गई थी।

पंचायत चुनाव के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि एक मामले में दो कोर्ट को शामिल नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता अपना पक्ष हाई कोर्ट में ही रखें।

इस याचिका के जरिये मध्य प्रदेश शासन पर मनमाने तरीके से पंचायत चुनाव संपन्न कराने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। साथ ही कहा गया है कि राज्य सरकार ने जानबूझकर संवैधानिक त्रुटियां की हैं, जिससे पंचायत चुनाव मामला सुलझने के बजाए और उलझता जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि नौ दिसंबर को हाई कोर्ट ने मामले पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था और सरकार के अध्यादेश पर सथगन नहीं दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 243 (ओ) में निहित प्रविधान के तहत चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाने के बाद अदालत को उसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं रहता।