फिर मिले दो सैकड़ा कोरोना मरीज


बैतूल। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ए.के.तिवारी द्वारा 207 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की जानकारी इस प्रकार दी गई है—-
शहरी क्षेत्र बैतूल के अंतर्गत 49, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सेहरा के अंतर्गत 32, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शाहपुर के अंतर्गत 10, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घोड़ाडोंगरी के अंतर्गत 5, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भीमपुर के अंतर्गत 3 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भैंसदेही के अंतर्गत 13, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चिचोली के अंतर्गत 6, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आठनेर के अंतर्गत 13, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमला के अंतर्गत 48, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई के अंतर्गत 20 एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र प्रभात पट्टन के अंतर्गत 8 मरीज सम्मिलित हैं।

बलराम तालाब योजनांतर्गत कृषकों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित


बलराम तालाब

बैतूल। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाईं योजनांतर्गत बलराम तालाब योजना जिले में संचालित है। इस योजनांतर्गत वर्ष 2021-22 में वर्गवार बलराम तालाब के लक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

उप संचालक कृषि श्री केपी भगत ने बताया कि बलराम तालाब योजनांतर्गत सामान्य वर्ग हेतु लक्ष्य 39, अनुसूचित जाति वर्ग हेतु लक्ष्य 06 एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग हेतु 19, इस तरह जिले को कुल 64 बलराम तालाब बनाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। बलराम तालाब का आकार 30 मीटर लंबाई, 30 मीटर चौड़ाई एवं 3 मीटर गहराई कुल 900 घन मीटर तथा 36 मीटर लंबाई, 25 मीटर चौड़ाई एवं 3 मीटर गहराई कुल 900 घन मीटर आकार के तैयार करने पर सामान्य कृषकों को लागत का 40 प्रतिशत या अधिकतम राशि 80 हजार रुपए एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को लागत का अधिकतम 75 प्रतिशत या अधिकतम राशि एक लाख रुपए अनुदान की पात्रता होगी। वर्तमान में सामान्य वर्ग के 4, अनुसूचित जनजाति वर्ग के 7 तथा अनुसूचित जाति वर्ग के 2, इस प्रकार कुल 13 बलराम तालाबों की तकनीकी स्वीकृति जारी की गई है। इनमें से कुछ का काम पूर्ण हो चुका है एवं कुछ में कार्य जारी है।

जिन कृषकों द्वारा पूर्व दो-तीन वर्षों में स्प्रिंकलर पाइप लाइन लिए गए हैं, वे ही कृषक इस योजना में पात्र होंगे एवं आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर किए जाएंगे। कृषकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में ऑनलाइन पंजीयन कराकर योजना का लाभ लें। बलराम तालाब से वर्षा के जल को संचय कर भूमिगत जल के स्तर में वृद्धि के साथ-साथ सिंचाई में उपयोग कर सकते हैं। साथ ही मछली पालन आदि करके कृषक अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।