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NCERT: 15 साल बाद देश के स्कूली शिक्षा के सिलेबस में होगा बदलाव


NCERT: भारत के स्कूलों के सिलेबस में 15 साल बाद बदलाव होने जा रहा है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा स्कूली शिक्षा पर नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) की अंतरिम रिपोर्ट दिसंबर तक पेश की जाएगी। स्कूली शिक्षा का नया सिलेबस मार्च 2021 तक तैयार हो जाएगा।

स्कूली शिक्षा के NCF पर काम शुरू हो चुका है और इसके अनुसार NCERT स्कूल की किताबों में बदलाव करेगी। हर विषय का विशेषज्ञ इस प्रक्रिया पर निगरानी रखेगा और दिसंबर तक इसकी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा कि मार्च 2021 तक नया करिकुलम तैयार हो जाएगा। HRD मंत्रालय ने NCERT को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नई किताबें डिजाइन करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि कोर कंटेट शामिल रहना चाहिए। इसके अलावा क्रिएटिव थिंकिंग, लाइफ स्किल्स, आर्ट जैसे अतिरिक्त क्षेत्रों को भी इसमें स्थान मिलना चाहिए। ये किताबें नए करिकुलम के हिसाब से होगी और एनसीईआरटी इनकी डिजाइनिंग और ले आउट का काम पहले ही शुरू कर देगी। अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों के सिलेबस और दिनचर्या में यह बदलाव लागू हो जाएगा।

पांचवीं बार होगा सिलेबस में बदलाव:

नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क में इससे पहले चार बार बदलाव किया जा चुका है और बदलाव किए जाने का यह पांचवां मौका होगा। इससे पहले साल 1975, 1988, 2000 और 2005 में NCF में बदलाव किया जा चुका है।

CS Exam 2020 : सीएस विद्यार्थियों को सौगातें, बदल सकेंगे सेंटर, मॉड्यूल और मीडियम


इदौर।कोरोना महामारी के कारण जहां हर ओर चिंता व भय का माहौल है, वहीं कंपनी सेक्रेटरी बनने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए कई राहत भरी सुविधाएं इंस्टीट्यूट द्वारा दी जा ही है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज (आइसीएसआइ) के इतिहास में पहली बार कई ऐसे निर्णय लिए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए फायदे का सौदा साबित होंगे। सबसे बड़ा निर्णय तो परीक्षा की तारीख जून से बढ़ाकर अगस्त करने का लिया गया था। इसके अलावा परीक्षा केंद्र बदलने की छूट, अगस्त के बजाय दिसंबर में होने वाली परीक्षा में शामिल होने की आजादी सहित कई रियायत विद्यार्थियों को दी गई है।

इंस्टीट्यूट में इस वर्ष अपना रजिस्ट्रेशन कराने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर नजर डालें तो देशभर के करीब 3 लाख विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें इंदौर के करीब 6 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। ओल्ड सिलेबस वाले विद्यार्थियों को यह आखरी मौका मिलने वाला था जब वे अटेम्प्ट में शामिल हो सकें पर अब ऐसा नहीं है। अगस्त के साथ अब दिसंबर में भी ओल्ड सिलेबस की परीक्षा वे दे सकेंगे। मतलब उन्हें दोहरा मौका मिल गया है। यही नहीं यदि कोई अपना ग्रुप भी बदलवाना चाहता है तो उसे भी आजादी मिलेगी। ग्रुप ही नहीं बल्कि विद्यार्थी अब मीडियम भी बदल सकते हैं। यदि कोई अपना मीडियम हिंदी से अंग्रेजी या अंग्रेजी से हिंदी कराना चाहता है तो उसे उसकी भी आजादी दी जा रही है। इसकेअलावा कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

अब कहीं भी दे सकेंगे परीक्षा

पुराने नियमों के मुताबिक विद्यार्थी परीक्षा देने के लिए जो सेंटर चुनते थे उसे बदलने की अनुमति उन्हें नहीं होती थी लेकिन इस बार यह सुविधा भी उन्हें दी जा रही है। विद्यार्थी आवेदन कर अपने परीक्षा केंद्र को बदलने की मांग कर सकते हैं। अब वे जिस शहर में हैं और यदि उस शहर में एग्जाम सेंटर है तो परीक्षा वहीं दे सकेंगे भले ही विद्यार्थी ने रजिस्ट्रेशन किसी भी शहर में करा रखा हो। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि संक्रमण के इस दौर में स्टूडेंट्स को परीक्षा के लिए लंबी दूरी तय नहीं करना पड़े।

परीक्षा फीस भी हो सकेगी कैरी फॉरवर्ड

एक अहम निर्णय यह भी लिया गया है कि जो विद्यार्थी अगस्त में होने वाली परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते वे दिसंबर में होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए उन्हें इंस्टीट्यूट को सूचित करना होगा। अभी तक यह नियम था कि यदि कोई विद्यार्थी तय तिथि पर परीक्षा नहीं देता है और दूसरी बार होने वाली परीक्षा में शामिल होता है तो उसे दोबारा परीक्षा फीस देना पड़ती थी। पर इस वर्ष इस नियम को भी शिथिल किया गया है। अभी जिन्होंने परीक्षा फीस जमा कर दी थी और अब वे अगस्त के बजाय दिसंबर में परीक्षा देना चाहते हैं उनकी परीक्षा फीस दिसंबर के लिए कैरी फॉरवर्ड हो जाएगी। स्टूडेंट्स को दोबारा फीस जमा नहीं करना होगी। पर इसके लिए भी स्टूडेंट्स को इंस्टीट्यूट को सूचित करना होगा।

हर तरह से स्टूडेंट्स के हित का रखा ध्यान

इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएस आशीष गर्ग के अनुसार तमाम तरह के परिवर्तन इसलिए किए गए हैं ताकि सभी विद्यार्थी परीक्षा दे सकें। परीक्षा की तारीख आगे बढ़ने से विद्यार्थियों को तैयारी करने का और भी मौका मिल गया है साथ ही इसका फायदा उन्हें भी होगा जो एक साथ ही कई ग्रुप की परीक्षा देना चाहते हैं। इससे वे अपना वर्ष भी बचा सकते हैं। यही नहीं जो विद्यार्थी अगस्त में होने वाली परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सकेंगे वे दिसंबर में होने वाली परीक्षा में शामिल होकर वर्ष बचा सकेंगे। इंस्टीट्यूट द्वारा जो भी सुविधा विद्यार्थियों को दी जा रही है यदि वे उसका लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें 30 जून तक संबंधित बदलाव व रजिस्ट्रेशन इंस्टीट्यूट में कराना होगा। यह कार्य ऑनलाइन प्रकिया से हो रहा है ऐसे में विद्यार्थियों को घर से बाहर निकलने की भी जरूरत नहीं।

MPBSE की हेल्पलाइन पर आ रहे कॉल, कब आएगा 10वीं-12वीं का रिजल्ट?


MPBSE Exam Result : भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जुलाई में घोषित होगा। 10वीं का रिजल्ट जुलाई के पहले सप्ताह में और 12वीं का जुलाई के तीसरे सप्ताह में जारी हो सकता है। रिजल्ट को लेकर मंडल की हेल्पलाइन में कॉल की संख्या चार गुनी हो गई है। अभी हर रोज करीब 2000 कॉल आ रहे हैं।

10वीं व 12वीं के विद्यार्थी एक ही सवाल कर रहे हैं कि रिजल्ट किस तारीख को जारी होगा। वहीं कई विद्यार्थियों ने पूछा है कि कुछ पेपर अच्छे नहीं गए हैं तो फेल होने की आशंका है। इस पर काउंसलर ने समझाया कि घबराएं नहीं, बल्कि फिर से तैयारी में जुट जाएं। अभिभावकों को भी सलाह दी जा रही है कि बच्चों का ध्यान रखें। उनका अंकों से आंकलन न करें। ज्ञात हो कि 1 जनवरी से अब तक हेल्पलाइन में 91 हजार कॉल आए है।

हेल्पलाइन प्रभारी ने बताया कि लॉकडाउन में विद्यार्थियों में परीक्षा को लेकर तनाव अधिक था। उस दौरान तीन माह में 60 हजार विद्यार्थियों के कॉल आए। इन सभी की काउंसिलिंग की गई।

मप्र में स्नातक प्रथम, द्वितीय तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षाथियों को अगली कक्षा में प्रवेश


भोपाल। कोरोना संकट के मद्देनजर मध्‍य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। अब स्नातक प्रथम एवं द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षार्थियों को, बिना परीक्षा दिए, उनके गत वर्ष/सेमेस्टर के अंकों/आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/सेमेस्टर में प्रवेश दिया जाएगा।

साथ ही स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षार्थियों के पूर्व वर्षों/ सेमेस्टर्स में से सर्वाधिक अंक प्राप्त परीक्षा परिणाम को प्राप्तांक मानकर अंतिम वर्ष/सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम घोषित किये जाएंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो परीक्षा देकर अपने अंकों में सुधार चाहते हैं, उनके पास परीक्षा देने का विकल्प भी रहेगा। वे आगामी घोषित तिथि पर ऑफलाइन परीक्षा दे सकेंगे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय में कोरोना के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के संचालन तथा शालाओं को प्रांरभ करने के संबंध में आयोजित बैठक में यह जानकारी दी। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी आदि उपस्थित थे।

शालाएं खोलने के संबंध में 31 जुलाई को समीक्षा उपरांत निर्णय

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में शालाओं को खोलने के संबंध में 31 जुलाई को समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा। 12वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी जो किसी कारणवश 12वीं की परीक्षा नहीं दे पाए हैं उनके लिए एक बार फिर परीक्षा आयोजित होगी। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि अगले हफ्ते से बच्चों को किताबों का वितरण कराने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रदेश में स्नातक, स्नातकोत्तर के 17 लाख 77 हजार परीक्षार्थी

प्रदेश में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर कुल 17 लाख 77 हजार परीक्षार्थी हैं। इनमें स्नातक प्रथम वर्ष में 5 लाख 25 हजार 200, स्नातक द्वितीय वर्ष में 5 लाख 7 हजार 269, स्नातक तृतीय वर्ष में 4 लाख 30 हजार 298, स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर में 01 लाख 72 हजार 634, स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर में 01 लाख 41 हजार 599 परीक्षार्थी हैं। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में परीक्षार्थियों की कुल संख्या 03 लाख 47 हजार 554, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर में 2 लाख 63 हजार 05, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में 01 लाख 83 हजार 37, रानी दुर्गावतीविश्वविद्यालय जबलपुर में 2 लाख 25 हजार 197, महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय छतरपुर में 01 लाख 52 हजार 230, देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय में 3 लाख 55 हजार 379, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में 01 लाख 97 हजार 901 तथा छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में 54 हजार 697 विद्यार्थी हैं।

10वीं एवं 12वीं के परिणाम जुलाई में अपेक्षित

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि प्रदेश में 10वीं एवं 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी है, 10वीं के परिणाम जुलाई के प्रथम सप्ताह में तथा 12वीं के परिणाम जुलाई के तृतीय सप्ताह में अपेक्षित है। प्रदेश में लॉकडाउन की अवधि में रेडियो, टी.वी. एवं मोबाइल के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हैं।

मध्य प्रदेश में अगले तीन दिन अच्छी बारिश के आसार | Mon, 22 Jun 2020


भोपाल में रविवार मौसम साफ रहा। दिन में उमस के साथ तेज गर्मी का अहसास हुआ। शाम को मौसम बदल और रात 8 बजे के बाद तेज हवा चली और 15 मिनट तक बारिश भी हुई। मंगलवार से तीन दिन तक भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश के आसार हैं। यह उड़ीसा के ऊपरी हिस्से में बने सिस्टम के कारण होगा। यह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जो बारिश कराएगा। इसके पहले रविवार को तापमान में 4.8 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। दिन का पारा 33.4 डिग्री दर्ज हुआ

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मंगलवार से राजधानी सहित पूरे मध्य प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट है। उड़ीसा के 5.6 किमी की ऊंचाई पर हवा का चक्रवात बना है। दूसरा चक्रवात पूर्वी उप्र पर बना हुआ है। इससे वातावरण में नमी आ रही है। सोमवार-मंगलवार को इस सिस्टम की वजह से राजधानी सहित प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश होगी। यह सिस्टम तीन से चार दिन तक सक्रिय रहेगा

मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को रीवा, शहडोल संभाग और छिंदवाड़ा, बालाघाट, बैतूल, होशंगाबाद, रायसेन और सीहोर जिले में कहीं-कहीं भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग में गरज-चमक और तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है।

Madhya Pradesh News: अब और महंगी होगी रेत एवं भंडारण भी नहीं कर पाए ठेकेदार


Madhya Pradesh News : अब और महंगी होगी रेत, भंडारण भी नहीं कर पाए ठेकेदार

Madhya Pradesh News : अब और महंगी होगी रेत, भंडारण भी नहीं कर पाए ठेकेदार

Madhya Pradesh News : भोपाल। प्रदेश में मकान, दुकान सहित अन्य निर्माण शुरू कर चुके लोगों के लिए बुरी खबर है। रेत के दाम अभी और रुलाएंगे। बारिश जल्द आने से ठेकेदार रेत का भंडारण नहीं कर पाए, इसलिए पिछले दो माह से रेत इकट्ठी कर रहे बिचौलियों का साम्राज्य कायम रहेगा और रेत के दाम 65 से 70 रुपये फीट तक जाने की आशंका है।

वर्तमान में दो से ढाई गुना अधिक दाम में रेत बिक रही है। हालात यह हैं कि छोटे निर्माण कार्यों के लिए बाजार में रेत मिल ही नहीं रही है। दिसंबर 2019 में खनिज विभाग ने बोली लगाकर 19 जिलों में तीन साल के लिए लीज पर खदान लेने वाले ठेकेदारों को 12 जून तक खदानें सौंपी थीं। विभाग पांच से 11 जून के बीच ठेकेदारों को खदानें सौंपने की ताबड़तोड़ कार्यवाही करता रहा। जानकार बताते हैं कि जिन ठेकेदारों को उत्खनन की अनुमति मिल गई। उन्होंने 12 जून से उत्खनन कर रेत का भंडारण शुरू किया था और 16 जून से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश शुरू हो गई।

राजधानी और आसपास के जिलों में रेत उपलब्‍ध कराने वाले होशंगाबाद, सीहोर और रायसेन जिले में चार दिन पहले करीब डेढ़ घंटे तेज बारिश हुई है। इसका असर खदानों और खदानों तक जाने वाले रास्तों पर पड़ा है। रास्तों में कीचड़ होने से जहां डंपर खदानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं कुछ खदानों में पानी भी भर गया है। सूत्र बताते हैं कि 12 से 16 जून तक चार दिन में प्रदेशभर में ठेकेदार 18 लाख घनमीटर रेत का ही भंडारण कर पाए हैं। जबकि हर माह करीब 12 लाख घनमीटर रेत की जरूरत होती है।

ऐसे में ठेकेदारों ने जो रेत का भंडारण किया है, वह अधिकतम डेढ़ माह ही चल पाएगी और फिर पूरा बाजार बिचौलियों के हाथों में होगा। ज्ञात हो कि वर्तमान में 50 से 60 रुपये फीट में रेत बिक रही है। वह भी सिर्फ बड़े विक्रेताओं के पास है। पिछले साल ही तय हो गई थी दामों में बढ़ोतरी रेत के दामों में बढ़ोतरी तो पिछले साल तभी तय हो गई थी, जब कमल नाथ सरकार ने छह गुना अधिक दाम में रेत खदानें नीलाम की थीं।

रही-सही कसर ठेकेदारों और खनिज विभाग के अधिकारियों की लापरवाही ने पूरी कर दी। लॉकडाउन में रेत नहीं बिकेगी। यह सोचकर ठेकेदारों ने मार्च से मई तक उत्खनन शुरू नहीं किया। उन्हें डर था कि खदान की सुपुर्दगी लेते ही सरकार पैसा मांगना शुरू कर देगी और फिलहाल रेत बिकना नहीं है। वे छूट मिलने की कोशिशों में लगे रहे और रेत का संकट खड़ा हो गया।

इसके लिए विभाग के अधिकारी भी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। उन्हें बाजार की स्थिति देखते हुए व्यवस्था बनानी थी पर वह प्रदेश के सियासी संग्राम के मजे लेते रहे। सरकार के पास कोई योजना नहीं रेत को लेकर इतनी हायतौबा के बाद भी सरकार के पास दाम कम कराने की कोई योजना नहीं है।

सरकार ने सिर्फ ठेकेदारों को खदानें सौंपकर जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया है। अब चाहे बिचौलिए ठगी करें या ठेकेदार, सरकार को कोई लेना-देना नहीं है। इस संबंध में खनिज विभाग के सचिव सुखवीर सिंह को मोबाइल फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

ऐसे बढ़े रेत के दाम वर्ष — दाम 2016 — 18 से 19 रुपये 2017 — 20 से 22 रुपये 2018 — 21 से 25 रुपये 2019 — 24 से 48 रुपये 2020 — 28 से 60 रुपये (मई अंत तक) (नोट- दाम प्रति फीट के हिसाब से)।

सीमा पर बढ़े भारत-चीन तनाव के बीच Zoom, TikTok और Helo जैसे चीनी ऐप हटाने लगे लोग


कोरोना काल में भले ही अनलॉक वन आ गया हो, लेकिन अभी भी लॉकडाउन माना जा सकता है। तमाम कंपनियां अपने कर्मचारियों से घर से ही काम लेने (Work From Home) में जुटी हैं। ऑफिस की मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिग, असाइनमेंट पूरा करने, ऑनलाइन क्लास जैसे तमाम काम ऑनलाइन ही किये जा रहे हैं। इसमें चीनी ऐप काफी मदद कर रहे थे, लेकिन सीमा पर चीन से तनाव बढ़ा। उसका गुस्सा मोबाइल यूजर्स पर आसानी से देखा जा सकता है। नोएडा के लोगों ने चीन को चुनौती देते हुए उसकी कंपनियों के ऐप अपने मोबाइल से हटाना शुरू कर दिया है। लोग रिमूव चाइना ऐप गूगल प्ले स्टोर से डाउन लोड कर आसानी से इसे अंजामदे रहे हैं। एक ही झटके में जूम, टिक टॉक, कैम स्कैनर, हैलो, लाइकी जैसे ऐप को मोबाइल से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। इसके विकल्प में जो स्वदेशी ऐप मौजूद हैं, उन्हें डाउनलोड कर रहे हैं।

लोगों के इस कार्य से गृह मंत्रालय के उस मकसद को भी बल मिलेगा जिसके लिए हाल ही में चीनी कंपनियों के ऐप को न इस्तेमाल करने की गाइड लाइन जारी की गई थी। इसमें साफ कहा गया था कि चीनी ऐप Zoom सुरक्षित प्लेटफॉर्म नहीं है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने भी इसे लेकर लोगों को आगाह किया था।

नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश कोहली कहते हैं कि शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने एनइए कार्यालय पर आया था। गुस्सा इतना ज्यादा था कि मौके पर रिमूव चाइना एप प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सारे चीनी एप को मोबाइल से बाहर कर दिया।

वहीं, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्रॉफ्ट के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश कुमार जैन का कहना है कि सभी सदस्यों और अपने साथियों से अपील की जा रही है कि वह चीनी ऐप का इस्तेमाल करना बंद करें और उन्हें अपने मोबाइल से बाहर करें। अपील का तत्काल असर दिख रहा है। हालांकि ये जरूरी ऐप थे, लेकिन अब भारतीय एप्लीकेशन डाउनलोड हो रहे हैं।

युनिवर्सिटी मध्यप्रदेश : अब विशवविद्यालयो मे दी जाएगी डिजिटल डीग्री और अंकसूची


यूनिवर्सिटी मध्यप्रदेश: विश्वविद्यालय अब देंगे डिजिटल डिग्री और अंकसूची

Universities in Madhya Pradesh : विश्वविद्यालय अब देंगे डिजिटल डिग्री और अंकसूची

Updated: | Thu, 18 Jun 2020 08:28 AM (IST)Universities in Madhya Pradesh : अब तक छात्रों को प्रिंटेड (छपाई वाली) डिग्री और मार्कशीट दी जाती है।

Universities in Madhya Pradesh : भोपाल। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के सरकारी विश्वविद्यालय अब छात्रों को डिजिटल डिग्री और अंकसूची देंगे। अब तक छात्रों को प्रिंटेड (छपाई वाली) डिग्री और मार्कशीट दी जाती है। राजभवन के निर्देश के बाद अब डिजिटल मार्कशीट और डिग्री देने की व्यवस्था दी जाने की तैयारियां शुरू की गई हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की डिग्री और मार्कशीट एक ही सॉफ्टवेयर के जरिए मिल सकेगी। इसके लिए सॉफ्टवेयर एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था अगले सत्र से लागू कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से छात्रों को मार्कशीट और डिग्री के लिए विश्वविद्यालय नहीं आना होगा।

नई व्यवस्था के लागू होने से डिग्री और मार्कशीट के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। फर्जी डिग्री और मार्कशीट नहीं बन सकेगी। इसके साथ ही मार्कशीट और डिग्री का वेरिफिकेशन न सिर्फ आसानी से हो सकेगा बल्कि इसमें तेजी भी आएगी। डिग्री और मार्कशीट अंग्रेजी के साथ ही हिंदी भाषा में भी रहेगी।

हालांकि कुछ विश्वविद्यालयों ने दो भाषा में डिग्री और मार्कशीट देने की व्यवस्था लागू भी कर दी है। सॉफ्टवेयर तैयार करने की जिम्मेदारी राजीव गांधी विश्वविद्यालय को दी गई है। इस मामले में आरजीपीवी के कुलपति प्रो सुनील कुमार का कहना है कि अब सॉफ्टवेयर की प्रक्रिया चल रही है। जल्द इसके फायदे सभी को मिलने लगेंगे। गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से कॉलेजों में परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। उधर डिग्री और विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों के अन्य काम भी रूक कर गए हैं। डिजिटल डिग्री दिए जाने से विद्यार्थियों को इसे प्राप्त करने में आसानी होगी।

बढ़ सकती है शहीदों की संख्या, चीन के साथ झड़प के बाद 4 जवानों की हालत गंभीर


India China Boarder Tension Live Updates: भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव उस समय बढ़ गया जब 14-15 जून की रात चीनी सैनिकों ने गलवन घाटी में भारतीय सैनिकों पर अचानक हमला कर दिया। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं, जबकि चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं। भारत के चार सैनिकों की हालत गंभीर है। आशंका जताई जा रही है कि शहीदों की संख्या 24 पहुंच सकती है। इसके बाद से पूरी दुनिया में भारत चीन के इस तनाव की चर्चा है। दिल्ली में मोदी सरकार एक्शन में हैं

India China Boarder Tension : बढ़ सकती है शहीदों की संख्या, चीन के साथ झड़प के बाद 4 जवानों की हालत गंभीर

India China Boarder Tension Live Updates: बढ़ सकती है शहीदों की संख्या, चीन के साथ झड़प के बाद 4 जवानों की हालत गंभीर

Updated: | Wed, 17 Jun 2020 09:54 AM (IST)India China Boarder Tension Live Updates: खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं, जबकि चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं। भारत के चार सैनिकों की हालत गंभीर है।

India China Boarder Tension Live Updates: भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव उस समय बढ़ गया जब 14-15 जून की रात चीनी सैनिकों ने गलवन घाटी में भारतीय सैनिकों पर अचानक हमला कर दिया। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं, जबकि चीन के 43 सैनिक मारे गए हैं। भारत के चार सैनिकों की हालत गंभीर है। आशंका जताई जा रही है कि शहीदों की संख्या 24 पहुंच सकती है। इसके बाद से पूरी दुनिया में भारत चीन के इस तनाव की चर्चा है। दिल्ली में मोदी सरकार एक्शन में हैं। हाईलेवल बैठकों का दौर जारी है और चीन को जवाब देने की रणनीति बनाई जा रही है।

विपक्ष ने उठाए सवाल, राहुल गांधी ने पीएम मोदी से पूछा यह सवाल: चीन के मुद्दे पर भले ही अमेरिका और कनाडा समेत अन्य देश भारत के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन देश का प्रमुख विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर पीएम मोदी से पूछा है कि आखिर वे चुप क्यों हैं और क्या छूपा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारतीय सैनिकों की शहादत बहुत ही चौंकाने वाली, डरावनी और अस्वीकार्य स्थिति है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस घटना का पूरा ब्योरा मांगा है। उसने इस बारे में देश को विश्वास में लेने को कहा है। साथ ही जमीनी हालात की जानकारी सभी राजनीतिक दलों के नेतृत्व को देने की मांग की है। कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने भारतीय क्षेत्र में चीन के कब्जे की बात पर अब तक चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि भारत के सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के गलवन और पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में चीन के आक्रामक रवैये पर भी उन्होंने मौन रखा है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना ने पूर्वी लद्द्‌ाख में भारतीय और चीनी सेना के बीच हिसक झड़प पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही कहा कि केंद्र सरकार को निर्वाचित विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए। शिवसेना की उपनेता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया कि सरकार को मीडिया के जरिये अपना प्रचार नहीं करना चाहिए। भारत सरकार अपने हितों को देख रही है, लेकिन हम स्पष्टता चाहते हैं। देश आपके साथ है लेकिन उन्हें भी जानने का हक है।

India China Boarder Tension पर चीनी सेना का बयान: चीनी सेना की कोशिश थी कि पीछे से वार कर भारतीय सैनिकों को नुकसान पहुंचाया जाए, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। भारतीय सैनिकों के पलटवार में चीन को अपने 43 जवानों की जान से हाथ धोना पड़ा गया। अब चीनी सेना की ओर से बयान आया है। चीनी सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत बॉर्डर पर तैनात अपने जवानों को नियंत्रण में रखें। जाहिरतौर पर मुंह की खाने के बाद चीन और उसकी सैना बैकफूट पर है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को मिलते समर्थन से भी चीन पीछे हटने को मजबूर हो रहा है।

India China Boarder Tension में अमेरिका की एंट्री: भारत चीन तनाव पर अमेरिका का बयान आ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश मिलकर विवाद का शांतिपूर्ण हल निकाल लेंगे। बता दें, कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि भारत चीन विवाद पर उनकी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात हुई है और यदि दोनों देश (भारत चीन) चाहें तो वे (ट्र्म्प) मध्यस्थता करने को तैयार हैं। हालांकि भारत और चीन, दोनों देशों ने ट्रम्प का यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र


संक्रमण फैलने के डर से उच्च शिक्षा विभाग ने यूजी फाइनल ईयर और पीजी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। परीक्षाएं स्थगित होने से प्रवेश प्रक्रिया फिर दो महीने के लिए टल चुकी है। इससे अगला शिक्षा सत्र अक्टूबर-नवंबर के पहले शुरू होता नहीं दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, सत्र 2020-21 चार महीने पिछड़ चुका है, जिसका असर पूरे सत्र में पड़ेगा। यही वजह है कि अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।

जुलाई से होने वाली परीक्षाएं महीनेभर के लिए स्थगित की गई हैं। 31 जुलाई के बाद विभाग नई तारीख घोषित करेगा। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा का टाइम टेबल दोबारा बनाना होगा। यहां तक कि विद्यार्थियों को आने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में परीक्षाएं 15 अगस्त से पहले होना संभव नहीं है। बीए, बीकॉम और बीएससी समेत अन्य यूजी कोर्स फाइनल ईयर व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने में 45 दिन लगेंगे। इसके चलते सत्र 2020-21 के लिए फर्स्ट ईयर में प्रवेश अक्टूबर से पहले शुरू होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन लगेंगे। ऑनलाइन आवेदन बुलाने के साथ ही फीस जमा करनी होगी। जुलाई में लगने वाली क्लासेस अगले सत्र में नवंबर से पहले शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह से सत्र काफी पिछड़ चुका है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अधिकारी भी अगले साल अप्रैल में परीक्षा होना संभव नहीं बता रहे हैं।

तैयार होगी नई रणनीति

फाइनल ईयर व सेमेस्टर को छोड़कर अब हर कोई यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग कर रहा है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू कर दिया है। यहां तक एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। जबकि अब सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के बजाए जनरल प्रमोशन पर चर्चा कर रहे हैं

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MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

Updated: | Wed, 17 Jun 2020 08:16 AM (IST)MP Higher Education Exam 2020 : अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।null

MP Higher Education Exam 2020 : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। संक्रमण फैलने के डर से उच्च शिक्षा विभाग ने यूजी फाइनल ईयर और पीजी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। परीक्षाएं स्थगित होने से प्रवेश प्रक्रिया फिर दो महीने के लिए टल चुकी है। इससे अगला शिक्षा सत्र अक्टूबर-नवंबर के पहले शुरू होता नहीं दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, सत्र 2020-21 चार महीने पिछड़ चुका है, जिसका असर पूरे सत्र में पड़ेगा। यही वजह है कि अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।

1 जुलाई से होने वाली परीक्षाएं महीनेभर के लिए स्थगित की गई हैं। 31 जुलाई के बाद विभाग नई तारीख घोषित करेगा। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा का टाइम टेबल दोबारा बनाना होगा। यहां तक कि विद्यार्थियों को आने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में परीक्षाएं 15 अगस्त से पहले होना संभव नहीं है। बीए, बीकॉम और बीएससी समेत अन्य यूजी कोर्स फाइनल ईयर व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने में 45 दिन लगेंगे। इसके चलते सत्र 2020-21 के लिए फर्स्ट ईयर में प्रवेश अक्टूबर से पहले शुरू होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन लगेंगे। ऑनलाइन आवेदन बुलाने के साथ ही फीस जमा करनी होगी। जुलाई में लगने वाली क्लासेस अगले सत्र में नवंबर से पहले शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह से सत्र काफी पिछड़ चुका है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अधिकारी भी अगले साल अप्रैल में परीक्षा होना संभव नहीं बता रहे हैं।null

तैयार होगी नई रणनीति

फाइनल ईयर व सेमेस्टर को छोड़कर अब हर कोई यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग कर रहा है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू कर दिया है। यहां तक एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। जबकि अब सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के बजाए जनरल प्रमोशन पर चर्चा कर रहे हैं। बताया जाता है कि विभाग ने भी इस पर सोचना शुरू कर दिया है। इसे लेकर अगले महीने तक नई रणनीति बन सकती है। शिक्षाविद से राय बुलाई जा रही है। निजी कॉलेज प्राचार्य संघ के डॉ. राजीव झालानी ने बताया कि फर्स्ट-सेकंड ईयर की परीक्षा पर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों के पिछले रिजल्ट और वर्तमान वर्ष के इंटरनल व प्रोजेक्ट मार्क्स और नए असाइनमेंट का आकलन किया जा सकता

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MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

Updated: | Wed, 17 Jun 2020 08:16 AM (IST)MP Higher Education Exam 2020 : अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।null

MP Higher Education Exam 2020 : इंदौर | संक्रमण फैलने के डर से उच्च शिक्षा विभाग ने यूजी फाइनल ईयर और पीजी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। परीक्षाएं स्थगित होने से प्रवेश प्रक्रिया फिर दो महीने के लिए टल चुकी है। इससे अगला शिक्षा सत्र अक्टूबर-नवंबर के पहले शुरू होता नहीं दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, सत्र 2020-21 चार महीने पिछड़ चुका है, जिसका असर पूरे सत्र में पड़ेगा। यही वजह है कि अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।

1 जुलाई से होने वाली परीक्षाएं महीनेभर के लिए स्थगित की गई हैं। 31 जुलाई के बाद विभाग नई तारीख घोषित करेगा। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा का टाइम टेबल दोबारा बनाना होगा। यहां तक कि विद्यार्थियों को आने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में परीक्षाएं 15 अगस्त से पहले होना संभव नहीं है। बीए, बीकॉम और बीएससी समेत अन्य यूजी कोर्स फाइनल ईयर व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने में 45 दिन लगेंगे। इसके चलते सत्र 2020-21 के लिए फर्स्ट ईयर में प्रवेश अक्टूबर से पहले शुरू होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन लगेंगे। ऑनलाइन आवेदन बुलाने के साथ ही फीस जमा करनी होगी। जुलाई में लगने वाली क्लासेस अगले सत्र में नवंबर से पहले शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह से सत्र काफी पिछड़ चुका है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अधिकारी भी अगले साल अप्रैल में परीक्षा होना संभव नहीं बता रहे हैं।null

तैयार होगी नई रणनीति

फाइनल ईयर व सेमेस्टर को छोड़कर अब हर कोई यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग कर रहा है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू कर दिया है। यहां तक एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। जबकि अब सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के बजाए जनरल प्रमोशन पर चर्चा कर रहे हैं। बताया जाता है कि विभाग ने भी इस पर सोचना शुरू कर दिया है। इसे लेकर अगले महीने तक नई रणनीति बन सकती है। शिक्षाविद से राय बुलाई जा रही है। निजी कॉलेज प्राचार्य संघ के डॉ. राजीव झालानी ने बताया कि फर्स्ट-सेकंड ईयर की परीक्षा पर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों के पिछले रिजल्ट और वर्तमान वर्ष के इंटरनल व प्रोजेक्ट मार्क्स और नए असाइनमेंट का आकलन किया जा सकता है। about:blankhttps://d7a1918710374632583424c944e1e019.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-37/html/container.html

कक्षाओं का समय बढ़ाया जाए

चार महीने पिछड़ चुके सत्र को पटरी पर लगाने के लिए भी सुझाव विभाग तक पहुंच रहे हैं। जानकारों ने अगले सत्र में कोर्स कम करने की बात कही है। कोर्स को समय पर पूरा करने के लिए प्रत्येक विषय से एक-एक यूनिट हटाने का सुझाव दिया है। शिक्षाविद डॉ. मंगल मिश्र का कहना है कि यूजी कोर्स वार्षिक परीक्षा प्रणाली है। विभाग को इसमें बदलाव नहीं करना चाहिए। सत्र को समय पर करने के लिए कॉलेजों को प्रयास करने होंगे। 45 मिनट के पीरियड को एक घंटे का किया जाए। इससे बीए, बीकॉम और बीएससी व अन्य कोर्स का पाठ्यक्रम 50-70 दिन में पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा किसेमेस्टर सिस्टम में 90 दिन का समय रहता है। इसके बाद परीक्षा करवाई जा सकती है। साथ ही सेमेस्टर ब्रेक की छुट्टियां भी कम हो सकती हैं।