Category Archives: उपचुनाव मध्यप्रदेश

28 विधानसभा क्षेत्रों में हुए उप चुनाव के मतदान


देवास विधानसभा क्षेत्रों में निर्वाचन कार्यलय के बाहर लंबी कतार में खडे मतदाता अपने वोट डालने का इंताजर करते हुए,सभी मतदाता ने सोसल डिस्‍टेंस का पालन करते हएु दुगज दूरी माक्‍स है जरूरी का पालन किया

फिर आयेगी चुनकर सरकार मध्‍यप्रदेश में किसकी ?

मध्‍यप्रदेश में फिर हुए उप चुनाव

मप्र में सफल मतदान उप चुनाव

मुलतापी समाचार

भोपाल। प्रदेश के 19 जिलों के 28 विधानसभा क्षेत्रों में विधानसभा निर्वाचन 2018 में 72.93 और लोकसभा निर्वाचन 2019 में 66.22 प्रतिशत मतदान हुआ था। धानसभा निर्वाचन 2018 में इन 28 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इस प्रकार रहा। जौरा में 72.3, सुमावली में 71.83, मुरैना में 63.92, दिमनी में 70.34, अम्‍बाह में 59.32, मेहगांव में 63.82, गोहद में 59.33, ग्‍वालियर में 63.37, ग्‍वालियर पूर्व में 58.18, डबरा में 68.64, भांडेर में 69.55, करेरा में 73.62, पोहरी में 75.92, बमौरी में 79.63, अशोकनगर में 74.46, मुंगावली में 75.02 प्रतिशत, सुरखी में 75.77, मलहरा में 72.13, अनूपपुर में 76.63, सॉची में 75.37, ब्‍यावरा में 80.78, आगर में 83.11, हाटपिपल्‍या में 85.57, मांधाता में 78.98, नेपानगर में 77.77, बदनावर में 86.14, सांवेर में 80.97 और सुवासरा में 82.67 प्रतिशत मतदान हुआ था।

देवास विधानसभा क्षेत्रों में निर्वाचन कार्यलय के बाहर लंबी कतार में खडे मतदाता अपने वोट डालने का इंताजर करते हुए,सभी मतदाता ने सोसल डिस्‍टेंस का पालन करते हएु दुगज दूरी माक्‍स है जरूरी का पालन किया


इसी प्रकार लोकसभा निर्वाचन 2019 में इन 28 विधानसभा क्षेत्रों मतदान का प्रतिशत इस प्रकार रहा। जौरा में 56.88, सुमावली में 55.36, मुरैना में 56.32, दिमनी में 57.04, अम्‍बाह में 58.11, मेहगांव में 50.72, गोहद में 50.36, ग्‍वालियर में 58.53, ग्‍वालियर पूर्व में 54.83, डबरा में 63.85, भांडेर में 61.92, करेरा में 63.56, पोहरी में 66.50, बमौरी में 74.56, अशोकनगर में 72.43, मुंगावली में 70.22, सुरखी में 63.06, मलहरा में 66.27, अनूपपुर में 74.05, सॉची में 69.63, ब्‍यावरा में 73.72, आगर में 80.22, हाटपिपल्‍या में 81.89, मांधाता में 76.04, नेपानगर में 79.16, बदनावर में 82.94, सांवेर में 78.02 और सुवासरा में 78.62 प्रतिशत मतदान हुआ था।

किसकी होंगी जीत ओर किसकी होंगी हार ‘कमल’ या ‘कमल नाथ’ की होंगी सरकार, जनता का फैसला मंगलवार को


मुलतापी समाचार

प्रदेश की सत्ता का भविष्य तय करने वाले 19 जिलों की 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए मंगलवार को मतदान किया जाएगा। इसमें 63 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार के जरिये तय करेंगे कि प्रदेश में ‘कमल’ की सरकार बरकरार रहेगी या कमल नाथ को ताज मिलेगा। कोरोना संकट के कारण मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक किया जा सकेगा। इस बार एक घंटे का समय बढ़ाया गया है।

अंतिम एक घंटे में सामान्य मतदाताओं के अलावा कोरोना पॉजिटिव या असामान्य तापमान वाले मतदाताओं को मतदान का अलग से अवसर दिया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। कोरोना गाइडलाइन का पालन करवाने की व्यवस्था की गई है। शाम तक 12 मंत्रियों सहित 355 प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में कैद हो जाएगा।

40 फीसद मंत्रियों का भविष्य दांव पर

MP Assembly By Elections:  'कमल' की सरकार या कमल नाथ को ताज, जनता का फैसला मंगलवार को

12 मंत्रियों सहित 355 प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में होगा कैद – कोरोना संकट के कारण सुबह सात से शाम छह बजे तक होगा मतदान।

MP Assembly By Elections भोपाल

उपचुनाव में शिवराज सरकार के 34 में से 40 फीसद मंत्रियों का भविष्य दांव पर है। दो पूर्व मंत्रियों (गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट) को छह माह में विधायक नहीं बन पाने के संवैधानिक प्रविधान की वजह से इस्तीफा देना पड़ा, वे चुनाव मैदान में हैं।

साथ ही 12 गैर विधायक मंत्री भी चुनाव मैदान में हैं। उपचुनाव के नतीजों से इन सभी का राजनीतिक भविष्य तय होगा। दरअसल, इन सभी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़ी थी और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। सत्ता का समीकरण साधने के लिए भाजपा ने 14 पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया और 

तिल तिल मरते लोग, तड़पते लोग, फिर भी नहीं डरते लोग


यह है मध्य प्रदेश की जनता सब कुछ जानने लगी है

एक कदम सतर्कता एवं स्वच्छता की ओर

साथ ही पहचानने लगी है आए देखें चुनावी दंगल

मुलतापी समाचार

देर से ही सही समझ में आ रहा है जन मानस के

कोरोना ने छीनी हमारी खुशियां रोज़गार और तोड़े हमारे सपने।
मौत के आंकड़े धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे, सौ से पहुंचे हज़ार और हज़ार से लाख में, यह सिलसिला बदस्तूर अब भी जारी है।आश्चर्य इस बात का है, जब लॉक डाउन की जरूरत नहीं थी तब सरकार ने लॉक डाउन लगाएं। 25 मार्च 2020 को भारत में केवल 571 कोरोना के मामले सामने आए थे, सरकार ने ताबड़तोड़ तरीके से पूरे भारत में एक साथ लॉकडाउन लगा दिया था, आज की स्थिति यह है, रोज़ तकरीबन 50 हज़ार से 60 हज़ार मामले दर्ज हो रहे हैं, कोरोना वायरस के कारण एक लाख नौ हज़ार लोगों ने अपनी जान‌ गवाई।
कोरोना वायरस संक्रमण ने पूरे भारत को अपनी चपेट में ले चुका है। हर रोज़ मौत के आंकड़े सैकड़ों की संख्या में बढ़ते जा रहे हैं, हज़ारों की संख्या में संक्रमितों के। इन सबके बीच उम्मीद की बात सिर्फ़ इतनी है कि बहुत से मामलों में लोग ठीक भी हुए हैं।
कोरोना वायरस से संक्रमित हर शख़्स का एक अलग अनुभव है, कुछ में इसके बेहद सामान्य या फिर यूं कहें कि बेहद कम लक्षण नज़र आते है, तो कुछ में यह काफी गंभीर, कुछ तो ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें लक्षण वो थे ही नहीं जिनके बारे में स्वास्थ्य विभाग सचेत करता रहा है, लेकिन एक बार ये पता चल जाए कि आप संक्रमित हैं, तो अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है।
पर चुनाव के समय हमारे नेताओं को इन सब बातों से कोई लेना-देना नहीं, उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना कोरोना से हमें कोई लेना देना नहीं।
कोरोना वायरस के बीच देश में पहला चुनाव और उप चुनाव होने जा रहा है, महामारी के बीच चुनाव आयोग की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि चुनाव टाले जाएं या नहीं, महामारी में बड़े उतार-चढ़ाव दिख रहे है, फिर भी चुनाव की तारीख घोषित कर दी गई। मघ्य प्रदेश में उपचुनाव के दौरान सरकार ने नया फरमान जारी कर दिया पहले केवल 100 लोग चुनावी सभा में शामिल हो सकते थे, अब नए फरमान के अनुसार जितने लोग चाहें वह चुनावी रैलियों में जा सकते हैं, नेता जी के भाषण पर खूब तालियां बजा सकते हैं, बस सामाजिक दूरी का ध्यान रखना होगा। जब हमारे नेता सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखते, तो आम जनता से क्या उम्मीद लगा सकते हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के नेता उप चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं, सामाजिक दूरी का मखौल उड़ाते नेता, फिर से नेताओं की नौटंकी शुरू हो गई, लोगों को रिझाने के लिए नोट बाटे जा रहे हैं, लोगों के पैर छू छू कर वोटों की भीख मांग रहे हैं नेता। ऐसा लगता है,इन नेताओं से कोरोना वायरस डरता है, नेताओं के चेहरे से मास्क गायब, मास्क नहीं लगाने की मजबूरी नेताजी बड़े भोले अंदाज में बताते हैं, अगर जनता चेहरा नहीं देखेगी तो वोट कैसे देगी। नेताजी भूल गए कोरोना वायरस को।
गरीब जनता को खूब गले लगा रहे हैं, गरीबो के बच्चों को गोद में लेकर उनके गालों को चूम रहे हैं, बच्चे की बहती नाक अपने रुमाल से पोछ कर अपना प्यार जनता पर लुटा रहे हैं। चुनाव हारने का डर नेताजी से ज्यादा उनकी पत्नी यानि मेमसाब को है, मेम साहब की रातों की नींद उड़ गई है, रात में बुरे बुरे सपने आते हैं, कि नेताजी चुनाव हार गए हैं, मेम साहब के ऐशो आराम खत्म हो गए हैं , मेम साहब की एक आवाज़ पर नौकर और नेताजी के चमचे दौड़कर मेमसाब की सेवा में लग जाते हैं, मेम साहब की एक आवाज़ पर चार चार गाड़ियां खड़ी हो जाती है, मेम साहब को रात में नेताजी के साथ नोट गिनने की मशीन पर नोट गिनने में बहुत मजा आता है, अगर नेताजी चुनाव हार जाएंगे, तो यह सब ऐशो आराम खत्म, इसलिए यह सब नौटंकी चुनाव के समय गरीब जनता के सामने की जाती है। यह प्यार केवल चुनाव जीतने तक सीमित रहता है। चुनाव जीतने के बाद नेताजी को गरीब जनता से एलर्जी हो जाती है, जब जनता नेताजी के पास पंहुचती है, तो नेता जी पहचान ने से इनकार कर देते हैं।
प्रदेश में उप चुनाव को लेकर नेताजी, लोगों को जोड़ने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं । कोई नोट बांट रहा हैं, कोई जनता के पैर पड़ कर माफी मांग रहा हैं, कोई मास्क और सैनिटाइजर बांट रहा हैं, इन हथकंडो के सहारे वोट जुटाने की जुगत में लग गए हैं। भागवत कथा, यज्ञ और भंडारे में लोगों को खास तवज्जो मिल रही है। कोई खिचड़ी बंटवा रहा, तो कोई दाल-बाफले की पार्टी दे रहा है। इतना ही नहीं साड़ी बंटवाने से लेकर धार्मिक यात्राएं के वादे भी किए जा रहे है। उपचुनाव में जबर्दस्त घमासान की उम्मीद है।
एक नेता जी ने लोगों के लिए प्रसाद से लेकर साबूदाने की खिचड़ी तक की व्यवस्था की है।
पर नेताजी कोरोना की बीमारी को भूल गए हैं, सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाई जा रही है नेताजी के साथ उनके चमचों का हुजूम चल रहा है, जिनको रोज़ के ₹500 मिलते हैं, ना नेताजी के चेहरे पर मास्क होता है और ना ही उनके चमचों के।
वहीं आम जनता अगर गलती से बगैर मास्क के बाहर निकलती है, तो उनके ऊपर चालानी कार्रवाई की जाती है, रात 8:00 बजे पुलिस की गाड़ियों के सायरन बजना शुरू हो जाते हैं, छोटी-छोटी दुकानों से लेकर रोज़ कमाने खाने वाले ठेले वालों की जबरन दुकानें बंद करवाते हैं और ठेले हटवाते हैं, कोरोना का डर दिखाते हैं। ऐसा लगता है रात 8:00 बजे के बाद ही कोरोना वायरस के कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं, इसीलिए पुलिस प्रशासन 8:00 बजे से पहले दुकानें बंद करवाना शुरू कर देते है, जितनी सख्ती आम लोगों के साथ और गरीब व्यापारियों के साथ होती है, उतनी सख्ती उप चुनाव के समय नेताओं के साथ हो तो माने के इंसाफ सबके लिए बराबर है ।

उपचुनाव में हमने देखा,
एक नेता जैसा आदमी ।
एक गरीब के पैर पर पड़ा
था, मुझे आश्चर्य हुआ
पता चला वह,
चुनाव में खड़ा था।। *जय हिंद जय भारत* *डॉ जाकिर शेख सब एडिटर मध्य प्रदेश*