Category Archives: कविता

विश्व परिवार दिवस अवसर पर कविता प्रस्तुत- अशोक श्री


विश्व परिवार दिवस
पहाड़ों पर बैठकर तप करना आसान है!
लेकिन परिवार में सबके बीच में रहकर
धीरज रखना कठिन है !
और यही सबसे बड़ा तप है!
परिवार का हर छोटा या बड़ा सदस्य
हथेली में रखा हुआ एक नाजुक फूल है!
उसकी हिफाज़त ही हमारा उसूल है!
परिवार में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है!
कि हम आने वाली पीढ़ी के लिए
एक अच्छे आदर्श पूर्वज कहलाए!
जैसे बूढ़े बरगद की छाया
और बड़े बुजुर्गों की छत्रछाया!!
परिवार की शान
जीवन में सुख समृद्धि वैभव आलीशान

कवि अशोक श्री, बैतूल

Holi होली स्पेशल कविता- बैतूल की होली 2021


अशोक श्री

मुलतापी समाचार

होली स्पेशल
इतने ना आओ हमारे पास
पहले लगाओ मुंह पर माक्स
बुरा न मानो होली है
कोरोना से बचना और बचाना है जरूरी
हाथ धोना, मार्क्स पहनना, दो गज की दूरी है मजबूरी
तभी तो हम सभी रह सकेंगे संग संग
होली की खुशियां ना होंगी बेरंग
हर वर्ष मनाएंगे होली सातों रंगों के संग
खुशियों से भर दो अपनों की झोली
घर पर ही मनाओ अबकी बार होली
2 गज की दूरी मास्क है जरूरी

होली की हार्दिक हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

बैतूल की होली 2021
गंज टिकारी सदर
आज ना होगी कोई गदर
क्योंकि कोरोना का है सब को डर
ना नशा ना कीचड़, ना कोई गाली
हाथ में होगी सिर्फ गुलाल की थाली
अच्छे आचार विचार और व्यवहार
घर में ही मनाओ होली का त्यौहार
होली आने पवित्र त्यौहार
हाथ धोना मार्क्स पहनना 2 गज की दूरी
आज है हमारी मजबूरी
होली की हार्दिक हार्दिक बधाई

अशोक श्री बैतूल