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PM मोदी ने की ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील, बॉलीवुड से यूं आए रिएक्शन पीएम मोदी


Multapi Samachar

(PM MODI) ने रविवार के दिन यानी 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू (JANTA CURFEW)’ की अपील की तो बॉलीवुड से यूं आए रिएक्शन.

नई दिल्ली: 

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कोरोनावायरस (Coronavirus) को लेकर देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में पीएम मोदी (PM Modi) ने जहां 60 साल से ऊपर की आयु के लोगों को घरों में रहने के लिए कहा तो इसके साथ ही उन्होंने रविवार के दिन यानी 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू (Janta Curfew)’ का आह्वान किया. पीएम मोदी के इस ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील पर बॉलीवुड से रिएक्शन आ रहे हैं. शबाना आजमी (Shabana Azmi), महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) और रितेश ने ट्वीट कर अपनी राय पेश की है. 

शबाना आजमी (Shabana Azmi) ने एक ट्वीट का जवाब दिया था और ट्वीट करने वाले को फटकार लगाई थी क्योंकि इस ट्वीट में पीएम मोदी के 22 मार्च को शाम पांच बजे कोरोना से फाइट करने वालों के हौसले बढ़ाने के लिए अपनी बालकनी, दरवाजे या खिड़की पर खड़े होकर ताली या थाली बजाने की अपील की आलोचना की गई थी. शबाना आजमी ने कहा, ‘यह कोई बेवकूफी नहीं है. यह सभी भारतीयों को एक साथ लाने के लिए मास्टरस्ट्रोक है.’

Corona वायरस की संदिग्ध महिला को ससुराल व मायके से भगाया


गिरिडीह ,दिल्ली से लौटी एक महिला को कोरोना वायरस का संदिग्ध मरीज समझकर अफरातफरी मच गई। गिरिडीह में सुसराल पहुंचने पर सर्दी-खांसी देख उसे कथित रूप से भगा दिया। इसके बाद वह मायके देवरी स्थित भलवाई पहुंची तो मायकेवाले भी डर गए और फौरन इलाज करवाने की सलाह देते हुए अपने से दूर कर दिया। पति के साथ रहने पर भी उसे अपनों ने घर में नहीं रहने दिया। अब स्वास्थ्य विभाग उसे खोज रहा है।

इधर, दिल्ली से लौटी महिला की तबीयत खराब होने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। देवरी की स्वास्थ्य इकाई ने महिला की खोज कर उसे 108 एम्बुलेंस से गिरिडीह भेजा। वहां प्राथमिक उपचार या जांच की व्यवस्था होती, इससे पहले ही वह एम्बुलेंस कर्मी को चकमा देकर अपने पति संग बाइक से फरार हो गई। महिला के फरार होने की घटना से देवरी स्वास्थ्य विभाग परेशान हो गया।

इस दौरान सूचना मिली कि महिला राजधनवार में एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रही है। हिन्दुस्तान ने उसके पति से फोन पर बात की तो उसने पत्नी को सुसराल से भगाने की बात को झूठा बताया। कहा कि उसे चक्कर और उलटी की शिकायत थी, जिस कारण बाइक से राजधनवार इलाज कराने लाए हैं। 

एसपी ने सूचना दी थी कि दिल्ली से एक महिला आई है, उसे सर्दी-खांसी है। जब टीम ने महिला से सम्पर्क का प्रयास किया तो वह बाइक से किसी के साथ फरार हो गई। -डॉ. एस सान्याल, आरसीएच पदाधिकारी सह प्रभारी सीएस।

पीड़िता भलवाई देवरी की है। वह दिल्ली से शनिवार रात लौटी थी। उसे 108 एम्बुलेंस से भेजा गया। इस बीच वह राजधनवार में इलाज कराने की बात कहकर चली गई। उसकी खोज की जा रही है। -सत्येन्द्र सिंह, चिकित्सा प्रभारी देवरी।

श्रीमती निशा हजारे आईंआईटी दिल्ली अवार्ड से सम्मानित


निशा हजारे

दिल्ली। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुलताई में सेवारत श्रीमती निशा हजारे को जीरो व्यय पर नवाचार और शिक्षण सहायक सामग्री निर्माण किये जाने पर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित व पुरस्कृत किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र में आपके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किए जाने पर सुखवाड़ा और राष्ट्रीय भर्तृहरि-विक्रम-भोज पुरस्कार समिति भारत आपको बधाई व हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।
सुखवाड़ा और
राष्ट्रीय भर्तृहरि-विक्रम-भोज पुरस्कार समिति भारत

SANJAY hajare multapi samchar 9977211939

दिल्ली चुनाव: बीजेपी ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची की जारी, तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को बनाया प्रत्याशी


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मुलतापी समाचार

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने सोमवार-मंगलवार की रात उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी कर दी है। बीजेपी की इस सूची में तेजिंदरपाल बग्गा को हरि नगर से टिकट दिया गया है। बता दें कि इससे पहले बीजेपी ने पहली सूची जारी की थी जिसमें 57 उम्मीदवारों के नाम शामिल थे। 

बीजेपी की ओर से जारी की सूची में नांगलोई जाट सीट से सुमनलता शौकीन, राजौरी गार्डन से रमेश खन्ना, हरि नगर से तेजेंद्रपाल बग्गा, दिल्ली कैंट से सुनील यादव, कस्तूरबा नगर से रविंद्र चौधरी, महरौल सीट से कुसुम खत्री, कालकाजी सीट से धर्मवीर सिंह, कृष्ण नगर सीट से अनिल गोयल और शाहदार सीट से संजय गोयल को उम्मीदवार घोषित किया है।

इधर बिहार में मिलकर सरकार चला रहे भाजपा और जदयू अब दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी एकसाथ लड़ेंगे। इन दोनों पार्टियों के बीच दिल्ली विस चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा हो चुकी है। अरसे बाद बिहार के बाहर के किसी राज्य में इन दोनों दलों का गठबंधन हुआ है। गठबंधन के तहत भाजपा ने दिल्ली की दो सीटें जदयू के लिए छोड़ी है। इनमें संगम बिहार और बुराड़ी की सीटें हैं।

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जदयू स्टार प्रचारकों की सूची जारी
दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर जदयू ने स्टार प्रचारकों की सूची सोमवार को जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार समेत कई नेताओं के नाम शामिल है। हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और पूर्व सांसद पवन वर्मा का नाम इस सूची में नहीं रखा गया है। गौरतलब हो कि सीएए को लेकर इन दोनों नेताओं का बयान चर्चा में रहा था। जदयू स्टार प्रचारकों की सूची में 20 नाम हैं। इनमें केसी त्यागी, आरसीपी सिंह, वशिष्ठ नारायण सिंह, ललन सिंह, रामनाथ ठाकुर, अशोक चौधरी, संजय कुमार झा, अफाक अहमद खान, दयानंद राय, श्रवण कुमार, जयकुमार सिंह, महाबली सिंह, महेश्वर हजारी, दिलेश्वर कामत, आरपी सिंह, सुनील कुमार पिंटू, कविता सिंह, चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी और राज सिंह मान शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट : निजी संपत्ति पर कब्जा करने वाला उसका मालिक नहीं हो सकता


Supreme Court

नई दिल्ली। मुलतापी समाचार न्यूज़ नेटवर्क

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में व्यवस्था दी है कि किसी संपत्ति पर अस्थायी कब्जे करने वाला व्यक्ति उस संपत्ति का मालिक नहीं हो सकता। साथ ही टाइटलधारी भूस्वामी ऐसे व्यक्ति को बलपूर्वक कब्जे से बेदखल कर सकता है, चाहे उसे कब्जा किए 12 साल से अधिक का समय हो गया हो। 

शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ऐसे कब्जेदार को हटाने के लिए कोर्ट की कार्यवाही की जरूरत भी नहीं है। कोर्ट कार्यवाही की जरूरत तभी पड़ती है जब बिना टाइटल वाले कब्जेधारी के पास संपत्ति पर प्रभावी/ सेटल्ड कब्जा हो जो उसे इस कब्जे की इस तरह से सुरक्षा करने का अधिकार देता है जैसे कि वह सचमुच मालिक हो।

जस्टिस एनवी रमणा और एमएम शांतनागौडर की पीठ ने फैसले में कहा कि कोई व्यक्ति जब कब्जे  की बात करता है तो उसे संपत्ति पर कब्जा टाइटल दिखाना होगा और सिद्ध करना होगा कि उसका संपत्ति पर प्रभावी कब्जा है। लेकिन अस्थायी कब्जा (कभी छोड़ देना कभी कब्जा कर लेना या दूर से अपने कब्जे में रखना) ऐसे व्यक्ति को वास्तविक मालिक के खिलाफ अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा प्रभावी कब्जे का मतलब है कि ऐसा कब्जा जो पर्याप्त रूप से लंबे समय से हो और इस कब्जे पर वास्तविक मालिक चुप्पी साधे बैठा हो। लेकिन अस्थायी कब्जा अधिकृत मालिक को कब्जा लेने से बाधित नहीं कर सकता। 

पीठ ने कहा कि संपत्ति पर कभी कभार कब्जा कर लेना या उसमें घुस जाना, जो स्थायी कब्जे में परिपक्व नहीं हुआ है, उसे वास्तविक मालिक द्वारा हटाया जा सकता है और यहां तक कि वह आवश्यक बल का भी प्रयोग कर सकता है। कोर्ट ने कब्जेदार का यह तर्क भी ठुकरा दिया कि लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 64 के तहत मालिक ने कब्जे के खिलाफ 12 वर्ष के अंदर मुकदमा दायर नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि यह समय सीमा प्रभावी / सेटल्ड कब्जे के मामले में ही लागू होती है और अस्थायी कब्जे के मामले में नहीं। 

यह है मामला
बाड़मेर में पूनाराम ने जागीरदार से 1966 में कुछ संपत्ति खरीदी थी जो एक जगह नही थी। जब संपत्ति के लिए स्वामित्व घोषणा का वाद दायर किया गया तो कब्जा मोतीराम के पास मिला। मोतीराम कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया और ट्रायल कोर्ट ने सपंत्ति पर मकान बनाने के लिए पास किए नक्शे के आधार पर मोतीराम को 1972 में बेदखल करने का आदेश दिया। मोती हाईकोर्ट गया और राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला पलट दिया। इसके खिलाफ मालिक सुप्रीम कोर्ट आया था।