Category Archives: शिक्षा

CS Exam 2020 : सीएस विद्यार्थियों को सौगातें, बदल सकेंगे सेंटर, मॉड्यूल और मीडियम


इदौर।कोरोना महामारी के कारण जहां हर ओर चिंता व भय का माहौल है, वहीं कंपनी सेक्रेटरी बनने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए कई राहत भरी सुविधाएं इंस्टीट्यूट द्वारा दी जा ही है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज (आइसीएसआइ) के इतिहास में पहली बार कई ऐसे निर्णय लिए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए फायदे का सौदा साबित होंगे। सबसे बड़ा निर्णय तो परीक्षा की तारीख जून से बढ़ाकर अगस्त करने का लिया गया था। इसके अलावा परीक्षा केंद्र बदलने की छूट, अगस्त के बजाय दिसंबर में होने वाली परीक्षा में शामिल होने की आजादी सहित कई रियायत विद्यार्थियों को दी गई है।

इंस्टीट्यूट में इस वर्ष अपना रजिस्ट्रेशन कराने वाले विद्यार्थियों की संख्या पर नजर डालें तो देशभर के करीब 3 लाख विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें इंदौर के करीब 6 हजार विद्यार्थी शामिल हैं। ओल्ड सिलेबस वाले विद्यार्थियों को यह आखरी मौका मिलने वाला था जब वे अटेम्प्ट में शामिल हो सकें पर अब ऐसा नहीं है। अगस्त के साथ अब दिसंबर में भी ओल्ड सिलेबस की परीक्षा वे दे सकेंगे। मतलब उन्हें दोहरा मौका मिल गया है। यही नहीं यदि कोई अपना ग्रुप भी बदलवाना चाहता है तो उसे भी आजादी मिलेगी। ग्रुप ही नहीं बल्कि विद्यार्थी अब मीडियम भी बदल सकते हैं। यदि कोई अपना मीडियम हिंदी से अंग्रेजी या अंग्रेजी से हिंदी कराना चाहता है तो उसे उसकी भी आजादी दी जा रही है। इसकेअलावा कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

अब कहीं भी दे सकेंगे परीक्षा

पुराने नियमों के मुताबिक विद्यार्थी परीक्षा देने के लिए जो सेंटर चुनते थे उसे बदलने की अनुमति उन्हें नहीं होती थी लेकिन इस बार यह सुविधा भी उन्हें दी जा रही है। विद्यार्थी आवेदन कर अपने परीक्षा केंद्र को बदलने की मांग कर सकते हैं। अब वे जिस शहर में हैं और यदि उस शहर में एग्जाम सेंटर है तो परीक्षा वहीं दे सकेंगे भले ही विद्यार्थी ने रजिस्ट्रेशन किसी भी शहर में करा रखा हो। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि संक्रमण के इस दौर में स्टूडेंट्स को परीक्षा के लिए लंबी दूरी तय नहीं करना पड़े।

परीक्षा फीस भी हो सकेगी कैरी फॉरवर्ड

एक अहम निर्णय यह भी लिया गया है कि जो विद्यार्थी अगस्त में होने वाली परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते वे दिसंबर में होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए उन्हें इंस्टीट्यूट को सूचित करना होगा। अभी तक यह नियम था कि यदि कोई विद्यार्थी तय तिथि पर परीक्षा नहीं देता है और दूसरी बार होने वाली परीक्षा में शामिल होता है तो उसे दोबारा परीक्षा फीस देना पड़ती थी। पर इस वर्ष इस नियम को भी शिथिल किया गया है। अभी जिन्होंने परीक्षा फीस जमा कर दी थी और अब वे अगस्त के बजाय दिसंबर में परीक्षा देना चाहते हैं उनकी परीक्षा फीस दिसंबर के लिए कैरी फॉरवर्ड हो जाएगी। स्टूडेंट्स को दोबारा फीस जमा नहीं करना होगी। पर इसके लिए भी स्टूडेंट्स को इंस्टीट्यूट को सूचित करना होगा।

हर तरह से स्टूडेंट्स के हित का रखा ध्यान

इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएस आशीष गर्ग के अनुसार तमाम तरह के परिवर्तन इसलिए किए गए हैं ताकि सभी विद्यार्थी परीक्षा दे सकें। परीक्षा की तारीख आगे बढ़ने से विद्यार्थियों को तैयारी करने का और भी मौका मिल गया है साथ ही इसका फायदा उन्हें भी होगा जो एक साथ ही कई ग्रुप की परीक्षा देना चाहते हैं। इससे वे अपना वर्ष भी बचा सकते हैं। यही नहीं जो विद्यार्थी अगस्त में होने वाली परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सकेंगे वे दिसंबर में होने वाली परीक्षा में शामिल होकर वर्ष बचा सकेंगे। इंस्टीट्यूट द्वारा जो भी सुविधा विद्यार्थियों को दी जा रही है यदि वे उसका लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें 30 जून तक संबंधित बदलाव व रजिस्ट्रेशन इंस्टीट्यूट में कराना होगा। यह कार्य ऑनलाइन प्रकिया से हो रहा है ऐसे में विद्यार्थियों को घर से बाहर निकलने की भी जरूरत नहीं।

MPBSE की हेल्पलाइन पर आ रहे कॉल, कब आएगा 10वीं-12वीं का रिजल्ट?


MPBSE Exam Result : भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जुलाई में घोषित होगा। 10वीं का रिजल्ट जुलाई के पहले सप्ताह में और 12वीं का जुलाई के तीसरे सप्ताह में जारी हो सकता है। रिजल्ट को लेकर मंडल की हेल्पलाइन में कॉल की संख्या चार गुनी हो गई है। अभी हर रोज करीब 2000 कॉल आ रहे हैं।

10वीं व 12वीं के विद्यार्थी एक ही सवाल कर रहे हैं कि रिजल्ट किस तारीख को जारी होगा। वहीं कई विद्यार्थियों ने पूछा है कि कुछ पेपर अच्छे नहीं गए हैं तो फेल होने की आशंका है। इस पर काउंसलर ने समझाया कि घबराएं नहीं, बल्कि फिर से तैयारी में जुट जाएं। अभिभावकों को भी सलाह दी जा रही है कि बच्चों का ध्यान रखें। उनका अंकों से आंकलन न करें। ज्ञात हो कि 1 जनवरी से अब तक हेल्पलाइन में 91 हजार कॉल आए है।

हेल्पलाइन प्रभारी ने बताया कि लॉकडाउन में विद्यार्थियों में परीक्षा को लेकर तनाव अधिक था। उस दौरान तीन माह में 60 हजार विद्यार्थियों के कॉल आए। इन सभी की काउंसिलिंग की गई।

कोरोना के चलते मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के हित में लिया बड़ा फैसला


◾मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan ने विद्यार्थियों के हित में लिया बड़ा निर्णय

◾स्नातक प्रथम, द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षाथियों को अगली कक्षा में दिया जाएगा प्रवेश

◾गत वर्ष/सेमेस्टर के अंकों के आधार पर होगा मूल्यांकन।
परीक्षा देने का भी रहेगा विकल्प

कोरोना संकट के मद्देनजर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। अब स्नातक प्रथम एवं द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षार्थियों को, बिना परीक्षा दिए, उनके गत वर्ष/सेमेस्टर के अंकों/आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/सेमेस्टर में प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षार्थियों के पूर्व वर्षों/ सेमेस्टर्स में से सर्वाधिक अंक प्राप्त परीक्षा परिणाम को प्राप्तांक मानकर अंतिम वर्ष/सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम घोषित किये जाएंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो परीक्षा देकर अपने अंकों में सुधार चाहते हैं, उनके पास परीक्षा देने का विकल्प भी रहेगा। वे आगामी घोषित तिथि पर ऑफलाइन परीक्षा दे सकेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में कोरोना के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के संचालन तथा शालाओं को प्रांरभ करने के संबंध में आयोजित बैठक ले रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी आदि उपस्थित थे।

शालाएं खोलने के संबंध में 31 जुलाई को समीक्षा उपरांत निर्णय

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में शालाओं को खोलने के संबंध में 31 जुलाई को समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा। 12वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी जो किसी कारणवश 12वीं की परीक्षा नहीं दे पाए हैं उनके लिए एक बार फिर परीक्षा आयोजित होगी। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि अगले हफ्ते से बच्चों को किताबों का वितरण कराने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रदेश में स्नातक, स्नातकोत्तर के 17 लाख 77 हजार परीक्षार्थी

प्रदेश में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर कुल 17 लाख 77 हजार परीक्षार्थी हैं। इनमें स्नातक प्रथम वर्ष में 5 लाख 25 हजार 200, स्नातक द्वितीय वर्ष में 5 लाख 7 हजार 269, स्नातक तृतीय वर्ष में 4 लाख 30 हजार 298, स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर में 01 लाख 72 हजार 634, स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर में 01 लाख 41 हजार 599 परीक्षार्थी हैं। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में परीक्षार्थियों की कुल संख्या 03 लाख 47 हजार 554, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर में 2 लाख 63 हजार 05, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में 01 लाख 83 हजार 37, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में 2 लाख 25 हजार 197, महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय छतरपुर में 01 लाख 52 हजार 230, देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय में 3 लाख 55 हजार 379, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में 01 लाख 97 हजार 901 तथा छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में 54 हजार 697 विद्यार्थी हैं।

10वीं एवं 12वीं के परिणाम जुलाई में अपेक्षित

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि प्रदेश में 10वीं एवं 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी है, 10वीं के परिणाम जुलाई के प्रथम सप्ताह में तथा 12वीं के परिणाम जुलाई के तृतीय सप्ताह में अपेक्षित है। प्रदेश में लॉकडाउन की अवधि में रेडियो, टी.वी. एवं मोबाइल के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हैं।

मप्र में स्नातक प्रथम, द्वितीय तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षाथियों को अगली कक्षा में प्रवेश


भोपाल। कोरोना संकट के मद्देनजर मध्‍य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। अब स्नातक प्रथम एवं द्वितीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षार्थियों को, बिना परीक्षा दिए, उनके गत वर्ष/सेमेस्टर के अंकों/आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/सेमेस्टर में प्रवेश दिया जाएगा।

साथ ही स्नातक अंतिम वर्ष एवं स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर के परीक्षार्थियों के पूर्व वर्षों/ सेमेस्टर्स में से सर्वाधिक अंक प्राप्त परीक्षा परिणाम को प्राप्तांक मानकर अंतिम वर्ष/सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम घोषित किये जाएंगे। ऐसे परीक्षार्थी जो परीक्षा देकर अपने अंकों में सुधार चाहते हैं, उनके पास परीक्षा देने का विकल्प भी रहेगा। वे आगामी घोषित तिथि पर ऑफलाइन परीक्षा दे सकेंगे।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंत्रालय में कोरोना के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के संचालन तथा शालाओं को प्रांरभ करने के संबंध में आयोजित बैठक में यह जानकारी दी। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती रश्मि अरूण शमी आदि उपस्थित थे।

शालाएं खोलने के संबंध में 31 जुलाई को समीक्षा उपरांत निर्णय

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में शालाओं को खोलने के संबंध में 31 जुलाई को समीक्षा कर निर्णय लिया जाएगा। 12वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी जो किसी कारणवश 12वीं की परीक्षा नहीं दे पाए हैं उनके लिए एक बार फिर परीक्षा आयोजित होगी। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि अगले हफ्ते से बच्चों को किताबों का वितरण कराने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रदेश में स्नातक, स्नातकोत्तर के 17 लाख 77 हजार परीक्षार्थी

प्रदेश में वर्तमान शैक्षणिक सत्र में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर कुल 17 लाख 77 हजार परीक्षार्थी हैं। इनमें स्नातक प्रथम वर्ष में 5 लाख 25 हजार 200, स्नातक द्वितीय वर्ष में 5 लाख 7 हजार 269, स्नातक तृतीय वर्ष में 4 लाख 30 हजार 298, स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर में 01 लाख 72 हजार 634, स्नातकोत्तर चतुर्थ सेमेस्टर में 01 लाख 41 हजार 599 परीक्षार्थी हैं। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में परीक्षार्थियों की कुल संख्या 03 लाख 47 हजार 554, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर में 2 लाख 63 हजार 05, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में 01 लाख 83 हजार 37, रानी दुर्गावतीविश्वविद्यालय जबलपुर में 2 लाख 25 हजार 197, महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय छतरपुर में 01 लाख 52 हजार 230, देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय में 3 लाख 55 हजार 379, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में 01 लाख 97 हजार 901 तथा छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में 54 हजार 697 विद्यार्थी हैं।

10वीं एवं 12वीं के परिणाम जुलाई में अपेक्षित

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने बताया कि प्रदेश में 10वीं एवं 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी है, 10वीं के परिणाम जुलाई के प्रथम सप्ताह में तथा 12वीं के परिणाम जुलाई के तृतीय सप्ताह में अपेक्षित है। प्रदेश में लॉकडाउन की अवधि में रेडियो, टी.वी. एवं मोबाइल के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हैं।

युनिवर्सिटी मध्यप्रदेश : अब विशवविद्यालयो मे दी जाएगी डिजिटल डीग्री और अंकसूची


यूनिवर्सिटी मध्यप्रदेश: विश्वविद्यालय अब देंगे डिजिटल डिग्री और अंकसूची

Universities in Madhya Pradesh : विश्वविद्यालय अब देंगे डिजिटल डिग्री और अंकसूची

Updated: | Thu, 18 Jun 2020 08:28 AM (IST)Universities in Madhya Pradesh : अब तक छात्रों को प्रिंटेड (छपाई वाली) डिग्री और मार्कशीट दी जाती है।

Universities in Madhya Pradesh : भोपाल। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के सरकारी विश्वविद्यालय अब छात्रों को डिजिटल डिग्री और अंकसूची देंगे। अब तक छात्रों को प्रिंटेड (छपाई वाली) डिग्री और मार्कशीट दी जाती है। राजभवन के निर्देश के बाद अब डिजिटल मार्कशीट और डिग्री देने की व्यवस्था दी जाने की तैयारियां शुरू की गई हैं। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की डिग्री और मार्कशीट एक ही सॉफ्टवेयर के जरिए मिल सकेगी। इसके लिए सॉफ्टवेयर एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था अगले सत्र से लागू कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से छात्रों को मार्कशीट और डिग्री के लिए विश्वविद्यालय नहीं आना होगा।

नई व्यवस्था के लागू होने से डिग्री और मार्कशीट के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। फर्जी डिग्री और मार्कशीट नहीं बन सकेगी। इसके साथ ही मार्कशीट और डिग्री का वेरिफिकेशन न सिर्फ आसानी से हो सकेगा बल्कि इसमें तेजी भी आएगी। डिग्री और मार्कशीट अंग्रेजी के साथ ही हिंदी भाषा में भी रहेगी।

हालांकि कुछ विश्वविद्यालयों ने दो भाषा में डिग्री और मार्कशीट देने की व्यवस्था लागू भी कर दी है। सॉफ्टवेयर तैयार करने की जिम्मेदारी राजीव गांधी विश्वविद्यालय को दी गई है। इस मामले में आरजीपीवी के कुलपति प्रो सुनील कुमार का कहना है कि अब सॉफ्टवेयर की प्रक्रिया चल रही है। जल्द इसके फायदे सभी को मिलने लगेंगे। गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से कॉलेजों में परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। उधर डिग्री और विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों के अन्य काम भी रूक कर गए हैं। डिजिटल डिग्री दिए जाने से विद्यार्थियों को इसे प्राप्त करने में आसानी होगी।

MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र


संक्रमण फैलने के डर से उच्च शिक्षा विभाग ने यूजी फाइनल ईयर और पीजी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। परीक्षाएं स्थगित होने से प्रवेश प्रक्रिया फिर दो महीने के लिए टल चुकी है। इससे अगला शिक्षा सत्र अक्टूबर-नवंबर के पहले शुरू होता नहीं दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, सत्र 2020-21 चार महीने पिछड़ चुका है, जिसका असर पूरे सत्र में पड़ेगा। यही वजह है कि अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।

जुलाई से होने वाली परीक्षाएं महीनेभर के लिए स्थगित की गई हैं। 31 जुलाई के बाद विभाग नई तारीख घोषित करेगा। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा का टाइम टेबल दोबारा बनाना होगा। यहां तक कि विद्यार्थियों को आने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में परीक्षाएं 15 अगस्त से पहले होना संभव नहीं है। बीए, बीकॉम और बीएससी समेत अन्य यूजी कोर्स फाइनल ईयर व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने में 45 दिन लगेंगे। इसके चलते सत्र 2020-21 के लिए फर्स्ट ईयर में प्रवेश अक्टूबर से पहले शुरू होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन लगेंगे। ऑनलाइन आवेदन बुलाने के साथ ही फीस जमा करनी होगी। जुलाई में लगने वाली क्लासेस अगले सत्र में नवंबर से पहले शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह से सत्र काफी पिछड़ चुका है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अधिकारी भी अगले साल अप्रैल में परीक्षा होना संभव नहीं बता रहे हैं।

तैयार होगी नई रणनीति

फाइनल ईयर व सेमेस्टर को छोड़कर अब हर कोई यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग कर रहा है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू कर दिया है। यहां तक एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। जबकि अब सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के बजाए जनरल प्रमोशन पर चर्चा कर रहे हैं

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MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

Updated: | Wed, 17 Jun 2020 08:16 AM (IST)MP Higher Education Exam 2020 : अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।null

MP Higher Education Exam 2020 : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। संक्रमण फैलने के डर से उच्च शिक्षा विभाग ने यूजी फाइनल ईयर और पीजी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। परीक्षाएं स्थगित होने से प्रवेश प्रक्रिया फिर दो महीने के लिए टल चुकी है। इससे अगला शिक्षा सत्र अक्टूबर-नवंबर के पहले शुरू होता नहीं दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, सत्र 2020-21 चार महीने पिछड़ चुका है, जिसका असर पूरे सत्र में पड़ेगा। यही वजह है कि अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।

1 जुलाई से होने वाली परीक्षाएं महीनेभर के लिए स्थगित की गई हैं। 31 जुलाई के बाद विभाग नई तारीख घोषित करेगा। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा का टाइम टेबल दोबारा बनाना होगा। यहां तक कि विद्यार्थियों को आने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में परीक्षाएं 15 अगस्त से पहले होना संभव नहीं है। बीए, बीकॉम और बीएससी समेत अन्य यूजी कोर्स फाइनल ईयर व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने में 45 दिन लगेंगे। इसके चलते सत्र 2020-21 के लिए फर्स्ट ईयर में प्रवेश अक्टूबर से पहले शुरू होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन लगेंगे। ऑनलाइन आवेदन बुलाने के साथ ही फीस जमा करनी होगी। जुलाई में लगने वाली क्लासेस अगले सत्र में नवंबर से पहले शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह से सत्र काफी पिछड़ चुका है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अधिकारी भी अगले साल अप्रैल में परीक्षा होना संभव नहीं बता रहे हैं।null

तैयार होगी नई रणनीति

फाइनल ईयर व सेमेस्टर को छोड़कर अब हर कोई यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग कर रहा है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू कर दिया है। यहां तक एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। जबकि अब सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के बजाए जनरल प्रमोशन पर चर्चा कर रहे हैं। बताया जाता है कि विभाग ने भी इस पर सोचना शुरू कर दिया है। इसे लेकर अगले महीने तक नई रणनीति बन सकती है। शिक्षाविद से राय बुलाई जा रही है। निजी कॉलेज प्राचार्य संघ के डॉ. राजीव झालानी ने बताया कि फर्स्ट-सेकंड ईयर की परीक्षा पर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों के पिछले रिजल्ट और वर्तमान वर्ष के इंटरनल व प्रोजेक्ट मार्क्स और नए असाइनमेंट का आकलन किया जा सकता

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MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

MP Higher Education Exam 2020 : परीक्षा स्थगित होने से चार महीने पीछे हुआ नया सत्र

Updated: | Wed, 17 Jun 2020 08:16 AM (IST)MP Higher Education Exam 2020 : अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।null

MP Higher Education Exam 2020 : इंदौर | संक्रमण फैलने के डर से उच्च शिक्षा विभाग ने यूजी फाइनल ईयर और पीजी चौथे सेमेस्टर की परीक्षा को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। परीक्षाएं स्थगित होने से प्रवेश प्रक्रिया फिर दो महीने के लिए टल चुकी है। इससे अगला शिक्षा सत्र अक्टूबर-नवंबर के पहले शुरू होता नहीं दिख रहा है। जानकारों के मुताबिक, सत्र 2020-21 चार महीने पिछड़ चुका है, जिसका असर पूरे सत्र में पड़ेगा। यही वजह है कि अब सभी यूजी कोर्स के फर्स्ट और सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग उठने लगी है।

1 जुलाई से होने वाली परीक्षाएं महीनेभर के लिए स्थगित की गई हैं। 31 जुलाई के बाद विभाग नई तारीख घोषित करेगा। सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा का टाइम टेबल दोबारा बनाना होगा। यहां तक कि विद्यार्थियों को आने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना जरूरी है। ऐसे में परीक्षाएं 15 अगस्त से पहले होना संभव नहीं है। बीए, बीकॉम और बीएससी समेत अन्य यूजी कोर्स फाइनल ईयर व अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने में 45 दिन लगेंगे। इसके चलते सत्र 2020-21 के लिए फर्स्ट ईयर में प्रवेश अक्टूबर से पहले शुरू होता नजर नहीं आ रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन लगेंगे। ऑनलाइन आवेदन बुलाने के साथ ही फीस जमा करनी होगी। जुलाई में लगने वाली क्लासेस अगले सत्र में नवंबर से पहले शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह से सत्र काफी पिछड़ चुका है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के अधिकारी भी अगले साल अप्रैल में परीक्षा होना संभव नहीं बता रहे हैं।null

तैयार होगी नई रणनीति

फाइनल ईयर व सेमेस्टर को छोड़कर अब हर कोई यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर में जनरल प्रमोशन की मांग कर रहा है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर भी अभियान शुरू कर दिया है। यहां तक एनएसयूआइ और युवक कांग्रेस ने भी समर्थन किया है। जबकि अब सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए परीक्षा के बजाए जनरल प्रमोशन पर चर्चा कर रहे हैं। बताया जाता है कि विभाग ने भी इस पर सोचना शुरू कर दिया है। इसे लेकर अगले महीने तक नई रणनीति बन सकती है। शिक्षाविद से राय बुलाई जा रही है। निजी कॉलेज प्राचार्य संघ के डॉ. राजीव झालानी ने बताया कि फर्स्ट-सेकंड ईयर की परीक्षा पर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों के पिछले रिजल्ट और वर्तमान वर्ष के इंटरनल व प्रोजेक्ट मार्क्स और नए असाइनमेंट का आकलन किया जा सकता है। about:blankhttps://d7a1918710374632583424c944e1e019.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-37/html/container.html

कक्षाओं का समय बढ़ाया जाए

चार महीने पिछड़ चुके सत्र को पटरी पर लगाने के लिए भी सुझाव विभाग तक पहुंच रहे हैं। जानकारों ने अगले सत्र में कोर्स कम करने की बात कही है। कोर्स को समय पर पूरा करने के लिए प्रत्येक विषय से एक-एक यूनिट हटाने का सुझाव दिया है। शिक्षाविद डॉ. मंगल मिश्र का कहना है कि यूजी कोर्स वार्षिक परीक्षा प्रणाली है। विभाग को इसमें बदलाव नहीं करना चाहिए। सत्र को समय पर करने के लिए कॉलेजों को प्रयास करने होंगे। 45 मिनट के पीरियड को एक घंटे का किया जाए। इससे बीए, बीकॉम और बीएससी व अन्य कोर्स का पाठ्यक्रम 50-70 दिन में पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा किसेमेस्टर सिस्टम में 90 दिन का समय रहता है। इसके बाद परीक्षा करवाई जा सकती है। साथ ही सेमेस्टर ब्रेक की छुट्टियां भी कम हो सकती हैं।

CGBSE Result 2020 : 10वीं-12वीं बोर्ड के परिणाम इसी हफ्ते होंगे जारी


छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ( माशिमं) की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम इसी हफ्ते जारी होंगे। कोरोना के कारण 10वीं-12वीं बोर्ड के बचे हुए पेपर नहीं होंगे।

माशिमं के सचिव प्रो. वीके गोयल के मुताबिक जिन स्कूलों में प्री बोर्ड परीक्षा हुई थी उसके आधार पर ही बचे हुए प्रश्न पत्रों में अंक मिलेंगे। जहां प्री बोर्ड परीक्षा नहीं हो पाई थी वहां छमाही परीक्षा के अंक को भी आधार बनाया जा सकता है। दोनों परीक्षाओं में करीब सात लाख परीक्षार्थी शामिल हुए हैं।

माशिमं की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले खिलाड़ियों को बोनस अंक मिलते हैं। इस साल तीन हजार 522 छात्र-छात्राओं को बोनस अंक दिया जाएगा। पिछले साल तीन हजार 385 छात्र-छात्राओं को इसका फायदा मिला था। इस साल 137 परीक्षार्थियों को अधिक फायदा होगा

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में परीक्षा की जगह होगा मासिक मूल्यांकन


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मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में परीक्षा की जगह होगा मासिक मूल्यांकन

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में परीक्षा की जगह होगा मासिक मूल्यांकन

भोपाल | कोरोना के संक्रमण और लॉकडाउन के कारण पढ़ाई का पूरा सिस्टम ही बिगड़ गया है। पढ़ाई का सिस्टम कब तक बिगड़ा रहेगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। इस साल पहली से लेकर कॉलेज तक के बच्चों की पढ़ाई ठप है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन उसकी हकीकत भगवान ही जाने। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ऐसी योजना बना रहा है कि जब स्कूल ही नहीं खुले हैं और पढ़ाई नहीं हुई तो बच्चों की तिमाही और छमाही परीक्षा कैसे ली जाएगी। इसलिए अब सरकारी स्कूलों के बच्चों का मासिक मूल्यांकन होगा।

उल्लेखनीय है कि हर साल एक अप्रैल से स्कूलों में शिक्षण सत्र शुरू हो जाता है, जो 22 अप्रैल तक जारी रहता है। इसके बाद गर्मियों की छुट्टी शुरू हो जाती है। 16 जून से फिर स्कूल खुल जाते हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण स्कूल नहीं खुले और आगे भी स्कूल खुलने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में न तो बच्चों के एडमिशन नहीं और न ही पढ़ाई हुई। ऐसी स्थिति देखकर स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं। लॉकडाउन के कारण स्कूल नहीं खुले। इस कारण बच्चों का कोर्स पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में तिमाही व छमाही परीक्षाएं कराना स्कूलों में मुश्किल होगा। वहीं ऑनलाइन कक्षाओं का फायदा बच्चे कितना उठा पा रहे हैं, इसका अंदाजा भी मासिक मूल्यांकन से लगाया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग इस संबंध में जल्द ही मूल्यांकन संबंधी कार्ययोजना बनाकर जारी करेगा। मासिक मूल्यांकन के अंकों को प्रोग्रेस रिपोर्ट कार्ड में भी शामिल किया जाएगा।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जहां पहली से आठवीं कक्षा के लिए शैक्षणिक रेडियो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वहीं 9वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थयों के लिए डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम (डिजिलेप) के तहत और दूरदर्शन के माध्यम से सभी विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है। इसके साथ ही वाट्सएप ग्रुप केमाध्यम से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसमें शिक्षक विद्यार्थियों को दिया गया कार्य (असाइनमेंट) भी दे रहे हैं। विद्यार्थियों को इन असाइनमेंट को बनाकर रखना है, जब स्कूल खुलेंगे तो उनके असाइनमेंट की जांचकर उन्हें अंक भी दिए जाएंगे। विद्यार्थियों को सभी विषयों में प्रोजेक्ट भी दिए जाएंगे। खासतौर पर 10वीं व 12वीं के विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट वर्क दिए जाएंगे।

कक्षा 12 वीं की परीक्षा में 131 रहे अनुपस्थित


बैतूल। कक्षा 12 वीं की बोर्ड परीक्षा के तहत शुक्रवार को व्यय अर्थशास्त्र और पशुपालन विषय के प्रश्न पत्र 2 पालियों में हुए। सुबह की पाली में व्यय अर्थशास्त्र का प्रश्न पत्र हुआ। इसमें 1620 परीक्षार्थियों को शामिल होना था, लेकिन 51 विभिन्ना कारणों से गैरहाजिर रहे और 1569 ने परीक्षा दी। इसी तरह दोपहर की पाली में पशुपालन विषय का प्रश्न पत्र हुआ। इसमें 2094 परीक्षार्थियों को शामिल होना था, लेकिन 80 परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे और 2014 ने परीक्षा दी। दोनों ही प्रश्न पत्रों में कोई नकल प्रकरण नहीं बना।

दसवीं की परीक्षा के शेष बचे पेपर नहीं होंगे – मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान


मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएँ कहा दसवीं की परीक्षा के शेष बचे पेपर नहीं होंगे।


मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan ने आज प्रदेश के विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित की जाने वाली कक्षा 10वीं की परीक्षा के शेष बचे पेपर की परीक्षा नहीं ली जायेगी। जिन विषयों की परीक्षा हो चुकी है, उन्हीं के अंक के आधार पर मैरिट तैयार की जायेगी। बचे हुए विषय के आगे ‘पास’ लिखा जायेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 12वीं की परीक्षा बच्चों के भविष्य के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। बारहवीं का परीक्षा परिणाम उनका भविष्य निर्धारित करता है। बारहवीं की परीक्षा के जो पेपर बचे हुए हैं, उनकी परीक्षा 8 जून, 2020 से 16 जून, 2020 के मध्य आयोजित की जायेगी। सीबीएसई की परीक्षा की तिथियाँ भी घोषित हो गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि निजी स्कूल विद्यार्थियों से केवल ट्यूशन फीस ले सकेंगे। प्रदेश में 19 मार्च से लॉकडाउन रहने के कारण लॉकडाउन समाप्त होने की अवधि तक निजी विद्यालय बंद रहे हैं, इसलिए ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं ले सकेंगे। विद्यालय चल सके इसलिए ट्यूशन फीस ली जा सकेगी। इसके अतिरिक्त लायब्रेरी, बस, स्पोर्ट्स और अन्य कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। स्कूल खुलने के बाद विद्यालय अपना फैसला करेंगे।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल