Category Archives: शिक्षा

11 मई से होगा दूरदर्शन पर शैक्षिक कार्यक्रम ‘क्लास रूम’ का प्रसारण


बैतूल, भोपाल – स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिये लागू किये गए लॉक डाउन की अवधि में प्रदेश के विद्यार्थी अपने घर पर नियमित अध्ययन कर सकें, इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार 11 मई से विशेष शैक्षिक टीवी कार्यक्रम ‘क्लास रूम’ प्रारंभ किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रति सप्ताह 5 दिन सोमवार से शुक्रवार, दिन में दो बार प्रसारित होगा। जिससे प्रदेश के विद्यार्थी दूरदर्शन के माध्यम से, घर पर रहते हुए नियमित अध्ययन कर सकेंगे।

लोक शिक्षण संचालनालय ने इस कार्यक्रम को दूरदर्शन के सहयोग से, 10वीं एवं 12वीं कक्षाओं के लिये विषयगत अवधारणों पर तैयार किया है। जिसमें 1 घंटे की समयावधि में विषय की कठिन अवधारणाओं पर रोचक वीडियोज़ का समावेश होगा। प्रति दिन दोपहर 12 से 1 बजे तक कक्षा 10वीं के लिए तथा दोपहर 3 से 4 तक कक्षा 12वीं के लिए कार्यक्रम प्रसारित किये जायेंगे।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इन दूरदर्शन कार्यक्रमों के अलावा भी रेडियो, वाट्सएप एवं लोकल केबल टीवी के माध्यम से कक्षावार और विषयवार रोचक शैक्षिक सामग्री भी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही है।
विद्यार्थी इन सभी कार्यक्रमों के माध्यमों से अपनी पढ़ाई को नियमित रखें। साथ ही विभाग ने पालकों से भी अपेक्षा की है कि, वे कार्यक्रम प्रसारण के समय पर बच्चों को रेडियो, टी.वी., मोबाइल का उपयोग करने दें और बच्चों को घर पर भी अध्ययन के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएं।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

स्‍कूली बच्‍चों को घर घर राशन वितरण


मध्यान्ह भोजन में रसोइयों को भोजन बनाने के लिए पैसा

मुलतापी समाचार

मुलताई। कोरोना जैसी महामारी बीमारी को देखते हुए शासन ने मार्च-अप्रैल में स्कूल बंद हैं। जिसमें स्कूल के बच्चे को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन भी स्कूल बंद होने के साथ बंद हो चुका हैं। जिसके बाद राज्य शासन के निर्देशानुसार मध्यान्ह भोजन की जगह प्राइमरी स्कूल के बच्चो को अनाज में 2 किलो 700 ग्राम गेहूऔर 700 ग्राम चावल दिया गया। और जो मध्यान्ह भोजन में रसोइयों को भोजन बनाने के लिए पैसा दिया जायेगा , वहां पैसा भी सीधे बच्चों के खाते में 147 रुपये डाल दिया जा रहा है। इसके साथ ही माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों को 4 किलो 950 ग्राम अनाज एवं 221 रुपये राशि उनके खाते में डाली जा रही हैं। इसी क्रम में आज सोमवार को मुलताई में एक शाला एक परिषर भगत सिंह वार्ड प्रायमरी स्‍कूल की शिक्षि‍का कुमारी सवीता गायकी ने घर घर विद्यार्थियों को अनाज वितरण किया। कुमारी गायकी ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को लॉक डाउन की अवधि में सहायता हेतु बच्‍चों के घर घर राशन वितरित किया जाना है, जिसे पालन करते हए स्‍कूल प्रबंधन के माध्यम से विद्यार्थीयो को अनाज वितरित किया गया। अनाज वितरण में कार्यरत कुमारी सवीता गायकी शिक्षक, श्री राजेश कुमार शिक्षक, श्रीमती अरूणा जगताप एवं श्रीमती मनीषा भटकरें, बरखा स्‍वयं सहायता समुह के सदस्‍यों द्वारा घर घर राशन वितरित किया गया।

इस दौरान सभी विद्यार्थियों को बताया गया है कि वह बिना मतलब अपने घरों से ना निकले और अगर किसी आवश्यक कार्य से उन्हें अपने परिवार के किसी सदस्य निकलना पड़ता है तो उन्हें मास्क लगाने हेतु एवं सेनीटाइजर या साबुन से बार बार हाथ घोने की प्रेरणा दी। अनाज वितरण के दौरान विद्यालय प्रबंधन के माध्यम से सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया गया जिसमें देखने में मिला की 5 फीट की दूरी पर विद्यार्थियों ने खड़े होकर अनाज लिया।

5 अप्रैल को शाम 9 बजे, 9 मिनट लाइट बंद की खबर का विशलेेेेेेषण


भारत देश 5 अप्रैल को शाम 9 बजे, 9 मिनट लाइट बंद की खबर का विशलेेेेेेषण ि‍चित्र के माध्‍यम सेे समझाने का प्रयास

पूरे देश में 9 मिनट मोदी की अपील परजनता द्वारा लाइट बंद करने पर विश्लेषण

भारत देश के मध्‍यप्रदेश और महाराष्‍ट्र 5 अप्रैल को शाम 9 बजे, 9 मिनट लाइट बंद की खबर का विशलेेेेेेषण ि‍चित्र के माध्‍यम सेे समझाने का प्रयास

5 अप्रैल को शाम 9बजे , 9मिनट के लिए सभी घर के लाइट बंद करे साथ ही अन्य उपकरण चालू रखें , तकनीकी कारण पढ़े

मुलतापी समाचार

मध्‍यप्रदेश। महाराष्‍ट्र । मोदी जी के आपिल पर 5 अप्रैल को शाम 9 बजे, 9 मिनट के संदर्भ में प्रकाशित खबर का विश्लेषण किया गया है जिसका आज आप लोगो को उस जानकारी से रूबरू करााते है। ये फोटो है जिसमे माँग ग्राफ में दिखाया गया है कि 08:55 शाम को (डिमांंड) 114,455 MW है तथा 9:10 शाम को 85829 MW (डिमांंड) (लगभग 26800 MW (डिमांंड) का कम होने का अनुमान था ) और 28626 MW की (डिमांंड) कम हुई थी जिसके कारण परिस्थिति विकट होने की सम्भावना की गई थी परन्तु अनेक तरह के प्रयास से विधुत अभियन्ताओं की लगन और मेहनत और आम जन की जागरूकता से यह कठिन समय का सामना किया गया।

इसी तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की माँग ग्राफ है जिसमे दिखाया गया है कि तरह से माँग की कमी आयी थी।

मेरे इस प्यारे देश में, अभी बहुत कुछ बाकी है! कविता


सहृदय धन्यवाद मेरे प्यारे देश के सभी डॉक्टर नर्स पुलिस फोर्स और मोदी जी को……….

पुष्पा नागले
कविता का शीर्षक- मेरे इस प्यारे देश में, अभी बहुत कुछ बाकी है!

मेरे इस प्यारे देश में, अभी बहुत कुछ बाकी है,
मोदी जी का है यह नारा, स्वच्छ, स्वस्थ हो भारत हमारा
हमको मिलकर इस सपने को साकार कराना बाकी है
मेरे इस प्यारे देश में अभी बहुत कुछ बाकी है

उस मां की व्याकुलता ना पूछो
जो हर बचाव अपनाती है
यह न खाना, वहां न जाना
हमें वह रोज बतलाती हैं,
सुरक्षित रहे उपवन उसका,

कलियों का भविष्य बनाना बाकी है
मेरे इस प्यारे देश में अभी बहुत कुछ बाकी है!
उन नन्हे बच्चों के खेल खिलौने
जिन्हें छूने से वो डरते हैं,
बनना है, बहुत बड़ा उन्हें
रोज वे ऐसा कहते हैं
उनके सपनों को देख उनमें,

अभी पंख लगाना बाकी है
मेरे इस प्यारे देश में, अभी बहुत कुछ बाकी है
रुक गई है कलमे युवा पीढ़ी की,
मन ही मन घबराते हैं,
देख चीन, इटली का हाल वे भी
डरकर सहम से जाते हैं!
है, उनमें कई IAS,IPSअनेकों,

जो देश के रक्षक कहलाते हैं!
उनकी कलमो को चलाकर,

अभी देश बनाना बाकी है!
मेरे इस प्यारे देश में,

अभी बहुत कुछ बाकी है
हाल ना पूछो उन माता-पिता का,
जो बार -बार फोन लगाते हैं,
है ये बीमारी बहुत भयानक,
ये सोच कर डर वे जाते हैं,
जो बच्चे हैं घर से बाहर उनका घर आना बाकी है
मेरे इस प्यारे देश में,

अभी बहुत कुछ बाकी है
है, विनती सब से हाथ जोड़कर
कोई ना घूमे मोदी जी का नियम तोड़कर,
हम सबको मिलकर सुंदर अपनी,

दुनिया बनाना बाकी है
अपने इस प्यारे देश में अभी बहुत कुछ बाकी है……


पुष्पा नागले ग्राम सावंगा मुलताई

रामनवमी एवं चैत्र नवरात्रि पर घरों में दीपक प्रज्वलित किये, देश मे  लॉकडाउन समय सेवाकर्मीयों का धन्यवाद किया


रामनवमी के पावन अवसर पर घर के बाहर दीपक से सजाया

बैतूल -रामनवमी पर्व पर लोगो ने लॉक डाउन का पालन कर अपने घरों के सामने दीप जला कर मनाई । जब भगवान श्रीराम चन्द्र जी का जन्म हुआ तब पूरी अयोध्या नगरी में घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर खुशियाँ मनाई गई थी और जब प्रभु श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करके अयोध्या में लौटे थे तब भी घर-घर दीप प्रज्वलित कर उनका भव्य स्वागत किया गया था । आज श्रीराम नवमी के शुभ अवसर पर बैतूल जिले के गंज स्थित टैगोर वार्ड में भी घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर भारत को विश्वगुरु बनाने की मंगल कामना के साथ सभी के उत्तम स्वास्थ्य व आयु में वृद्धि  हेतु प्रभु श्रीराम जी से प्रार्थना की गई। युवा सेवा संघ बैतूल के जिलाध्यक्ष व समाजसेवी राजेश मदान ने बताया कि देश भर में सोशल मीडिया के माध्यम से सभी से श्रीराम नवमी की शाम को अपने अपने घर मे अपने परिजनों के ही साथ श्रीरामनवमी का पर्व हर्सोल्लास से मनाने व सभी की खुशहाली हेतु शाम को घर-घर दीप प्रज्ज्वलित करने की अपील की गई थी।

रामनवमी के पावन पर्व पर बच्चों ने दीपक जलाएं

संजय पवार ने बताया

सारनी। भगवान् राम जी और नवरात्रि नवमी के दिन दीपकों को प्रज्वलित कर महामारी का अंत और मानव जाति जीव जंतु पशु पक्षियों की वातावरण पर्यावरण संरक्षण व मानव संसाधन की रक्षा प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रार्थना करते हुए वर्तमान कोरोना वाईरस कोविड19 जैसी घातक बीमारी से पीड़ित इंसानों के सुधार और आगे यह महामारी न फैले जगत जननी भुवनेश्वरी मां दुर्गा और भगवान् विष्णु के अवतार राम भगवान् से प्रार्थना करते हुए संसार के प्राणियों की रक्षा के लिए और हमारे भारत देश की रक्षा के लिए समर्पित होकर दीपों की ज्योत जलाकर प्रार्थना की ।

जनता के दुःख में आँसू बहता है पत्रकार, तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की बात भी उठता है पत्रकार


हमने ये कैसी तरक़्क़ी की है ? दिख रहा है पर मदद नही कर पा रहे है

बिना स्वार्थ और लाभ के, जीवन दाँव पर लगा, जनता के आँसुओं को पोंछता और दर्द को बाँटता पत्रकार

गरीब ने बोला, फ़िल्म में बोला जाता तो करोड़ों कमा लेती

Multapi Samachar

नई दिल्ली/भोपाल/इंदौर/ (गजेन्द्रसिंह सोलंकी )

कोरोना के चलते दिल्ली से लोगों के पलायन का कवरेज करते एबीपी न्यूज का पत्रकार, खुद अपने आँसू नही रोक पाया, इससे समझा जा सकता है कि, हज़ारों परिवार के बच्चे, महिलाएँ और पुरुष किस स्थिति से गुज़र रहे होंगे ….जिसकी कल्पना करने से ही रूह काँप जाती है ….,भाषणों से जनता का पेट भरने वाले नेता गायब, पत्रकार और अफसर जान दाँव पर लगा, जनता को बचाने के प्रयास में लगे है…

अफसरों को तनख्वाह और साधन, सुविधाएँ मिलती है, पत्रकार जेब से लगा कर करता है जनसेवा । कई बार तो पुलिस के डंडे और नकचढ़े अफसरों की बदसलूकी भी झेलता है, फिर भी पीड़ित जनता की आवाज उठा कर, उन कानो तक पहुँचता है, जिनकी स्वयं ज़िम्मेदारी है, जनता की बात सुनने की। कोरोना (कोविड-19) के चलते अफसरों को तो मास्क, ग्लोबज, सेनेटाईज़र सहित कई सरकारी सुविधाएँ मिल रही है, या शासकीय व्यय से मिल जाती है, किन्तु पत्रकार अपने स्वयं के वाहनो से, स्वयं के व्यय से, जनता को जागरूक करने के लिए और उनके बचाव के लिए, सैनिकों की तरह अपनी जान को जोखिम में डाल कर डटा हुए है । दिल्ली, यु.पी. में उमड़ी भीड़ के बीच, पेदल अपने गाँवों की तरफ जाते ग्रामीणों के बीच नेता नही, पत्रकार पहुँच रहे है । अगर यह सवाल उठाया जाए क्या सरकार ने पत्रकारों को कोई सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध करवाई है ? तो जवाब मिलेगा नही ! यहाँ हालात ये है कि जिनके ऊपर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है, वो खुद सुरक्षा कर्मी लेकर घूमते है । जिन ठेकेदारों, उधोगपतियों और आलीशान बिल्डिंगों का निर्माण करने वालों ने गाँव से बुला कर गरीब मजदूरों को उनके हाल पर भूखा-प्यासा छोड़ दिया उनके खिलाफ सरकार ने कार्यवाही क्यों नही की ? क्या शहरों के विकास और निर्माण के लिए गाँवों से शहरो में आए, गरीब मजदूर के वोट, उन शहरों में नही होने के कारण, सरकारों ने उनकी सुध नही ली ? क्या गरीब मजदूर इस बात को समझते है, इसीलिए उन्होंने शहरों से सामूहिक पलायन करके, अपनी जान कोरोना के हवाले कर दी ? पत्रकार अपने दम पर इन मज़दूरों की आवाज बन रहे है, वर्ना शायद प्रशासन डंडे के जौर पर इन्हें कब का तितर-बितर कर देता…! जिन शासकीय कार्यालयों में लॉक डाउन के दौरान काम बंद है, उन शासकीय कार्यालयों के, फेक्ट्री के, ठेकेदारों के वाहनों से गरीबों को उनके गाँवों तक पहुचाने की और उन तक भोजन पहुचाने की सत् बुद्धि नेताओं और अगसरों को क्यों नही आई ? यह कई बार साबित हुआ है कि, पत्रकार वास्तव में सच्चा देश भक्त और समाजसेवी है, जो अपने दम पर, बिना शासकीय सुविधाओं को प्राप्त किए, जनसेवा करता है….सैनिकों की तरह देश की सीमा के अंदर अपनी जान की बाजी लगाता है, कोरोना जैसी महामारी में भी यही कर रहा है, नेता और अफसर इंटरव्यु देते हुए पत्रकारों को अपना ख़्याल रखने का तो कहते है, पर बचाव के साधन और सुविधाएँ नही देते है….

खास बात –

  • जनता के दुःख में आँसू बहता है पत्रकार, तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की बात भी उठता है पत्रकार –

सायकिल पर सोते हुए अपने छोटे से बच्चे को बैठा कर (बच्चा गिर न जाए इसलिए सायकिल के हेंडल से बाँध कर) दिल्ली से 500 किलो मीटर दूर, अपने गाँव की तरफ निकले मजदूर की स्टोरी दिखाते-दिखाते ABP न्यूज के रिपोर्ट की आँखे भर आई, इससे समझा जा सकता है पत्रकार भावनात्मक रूप से भी जनता के दर्द को झेलते और सहते है । पत्रकारों के लिए उनका पेशा सिर्फ वही तक सीमित नही है कि दिखाया, लिखा और भूल जाओ या आगे बढ़ जाओ, पत्रकार कई बार जनता के लिए, उसके हक की लड़ाई, हक दिलाने तक कलम और माईक थामे लड़ता है । बदले में पत्रकार को भ्रष्ट अफसरों, नेताओं, अपराधिधियों के गठजौड़ से कई बार धमकियाँ मिलती है, किन्तु झूठ के आगे पीड़ित जनता दुआ उसकी रक्षा करती है । यही कारण है कि सबसे ताकतवर समझी जाने वाली सर्वोच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों को भी अपनी पीढ़ा और माँग को लेकर मीडिया की शरण में आना पड़ा था, उनमें से एक भारत की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बन कर रिटायर्ड हुए और अब राज्यसभा के सदस्य है ।

खास बात –

सैनिकों की तरह देश की सीमा के अंदर अपनी जान की बाजी लगाता है, कोरोना जैसी महामारी में भी यही कर रहा है, नेता और अफसर इंटरव्यु देते हुए पत्रकारों को अपना ख़्याल रखने का तो कहते है, पर बचाव के साधन और सुविधाएँ नही देते है….

खास बात –

“ हमने ये कैसी तरक़्क़ी की है ? दिख रहा है पर मदद नही कर पा रहे है “

ऐसी में अगर यह कल्पना की जाए की आप और हम आर्थिक रूप से सक्षम नही है और पलायन करती भीड़ में अपने बच्चों के साथ फँसे है, न घर तक पहुचने का साधन है, न बच्चों को खिलाने के लिए खाना है, न पिलाने के लिए पानी। इस स्थिति में यह भी सोचना मत भूलना की हम और हमारी सरकारें ये सब देख रही है, पर ये कैसी तरक़्क़ी की है कि उन तक खाना, पानी तक नही पहुँचा पा रहे है, जबकि अभी तो वो भारत की राजधानी दिल्ली जैसे शहर की सीमा में ही है या उसके आस-पास है

गरीब ने बोला, फ़िल्म में बोला जाता तो करोड़ों कमा लेती –

जब पलायन कर रहे एक मज़दूर से यह पूछा गया की इतनी भीड़ में हो, कोरोना हो गया तो, उस ग़रीब का जवाब सुन कर घर बैठे आँसू आ गए उसने बड़ी मासूमियत से पत्रकार की कहा साहब यहाँ भूख से मर जाएँगे, गाँव पहुँच कर जीवन की उम्मीद तो है…, अगर यही बात किसी फ़िल्म में हीरों या हीरोईन कहती तो करोड़ों कमा लेती और ये बात उसे जीवन भर पहचान देती, पर यहाँ जीवन का सवाल था !

मुलतापी समाचार

आंसू बहाती गई, इतिहास रचता गया….


आत्‍मकथा

मैं अकेली थी और वे चार थे

आंसू बहाती गई इतिहास रचिता गया इस लंबे सफ़र में 2651 दिन घुट घुट के आंसू बहाती गई इतिहास रचता गया मैंने ठान रखा था

मैं टूटूगींं तो इन चारों हत्यारों को लेकर टूटूगींं निर्भया की सिसकती आहें मुझे सोने नहीं देती थी

मेरी तो अंतिम इच्छा ही यह थी मैं तो इन चारों हत्यारों को लेकर ही टूटूगींं आगे पढि़ए

आंसू बहाती गई इतिहास रचा गया

मैं अपने पुराने दिनों को याद करती हैं, तो आश्चर्य होता है कि जब में बिना पिये दो-चार कदम भी नहीं चल पाती थी. अब तो मैं समय के साथ-साथ इतनी बदल गई है, जैसे रेगिस्तान में ऊँट एक-एक माह का पानी एक साथ पीकर लगातार चलता जाता है।

वैसे में अपनी व्यथा क्या सनाऊँ मैं तो वो मनचली हूँ, जिसने मुझे थामा बस उसकी ही उंगलियों थामें उसके भविष्य को संवारने में लग जाती हूँ। मेरे लिये न तो कोई उम्र की सीमा है. ना जाति का बंधना मुझे न तो कोई अमीर से लगाव है और न गरीब से परहेज, मैं तो स्वच्छन्द विचारों वालों के हाथों की कठपुतली हूँ, जो उसकी खुशी, गम, जज़बात, भावना और विचारों के अनुसार नाचती, आँसू बहाती जाती हूँ और इतिहास रचती जाती हूँ।

अक्सर मुझे लोग अपने दिल से लगाकर रखते हैं, हर कोई अपने दिल-दिमाग को संतुलित कर मुझे अपने हाथों में थामे अपनी कहानी, व्यथा सुनाता जाता है और मैं उसकी उंगलियाँ थामे आँसू बहाती चलती जाती हूँ। मैं तो वह दिवानी हूँ, जिसकी पनाह में जाती हूँ, उसका ही अस्तित्व बनकर रह जाती हूँ। ऋषि-मुनियों के हाथों लगी तो वेद और शास्त्र बन गये। न्याय के पुजारी ने छुआ तो न्याय का इतिहास रचती चली गई। कमजोर गरीब असहाय की तो अर्जी बन न्याय का दरवाजा खट-खटाती चली आ रही हूँ। किसी कलाकार की इच्छा अनुसार उसकी कलाकृति, किसी शायर की मनचाही शायरी और किसी कवि की भावनात्मक कविता, कल्पना और साहित्यकार की रचना रचकर लोगों का दिल जीत रही हूँ। मजे की बात तो यह है कि मैं तो राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री, नेता, राजनेता, आई.ए.एस., आई.पी.एस. की वो ताकत हूँ, जिस रास्ते चली गई, गानों पत्थर की लकीर, तब तो लोग मुझे पूजते हैं, सम्मान देते हैं। नन्हें-मुन्ने बच्चे बड़े ही लगाव से अपनी नाजुक, नन्हीं-नन्हीं कोमल उंगलियों में थामे मुझे चलाने का प्रयास करते हैं और मैं उनका भविष्य संवारने में पूरा-पूरा सहयोग देती हूँ। गाँवों में कुछ महिला, बड़े-बूढ़े जब कभी पहली-पहली बार शर्माते हुए अपने हाथों में मुझे लेते हैं, तो उनके हाथ कांपने लगते हैं. तब मुझे बड़ा ही अजीब अहसास होता है। मुझे थामने वालों को, सभी को अपना सम्राट मानती हूँ और उसके इशारों पे नाचती हूँ, पर जब मैं लोगों को मेरे इशारे पर नाचता देखती हूँ तो मुझे बेहद खुशी के साथ-साथ पूर्ण तृप्ति मिलती है और मुझे अपनी अहमियत का पता चलता है। मेरी तो सदा उनके प्रति आस्था (श्रद्धा) रहती है, जो मुझे सही राह पर चलाते हैं।

मुझे अपने आप पर फक्र है, मैं टूटती भी हूँ तो पहले किसी हत्यारे के नाम मौत का पैगाम (Hanging till Death ) “हैगिंग टिल डैथ” लिख मेरे न्यायप्रिय सम्राट के हाथों मेरा रार-कलग कर दिया जाता है। वॉह रे मेरी किस्मत, मैं कोई और नहीं आपके हाथों की ही एक कलम हूँ।

कलमकार लेखक-श्रीवास अशोक (सम्राट), बैतूल

Mr Ashok Shrivash, Betul

महिलाओं को गुड टच और बेड टच की दी जानकारी


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Informed women about good touch and bed touch File photo

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सारनी। महिलाओं को हर छोटे बड़े अपराध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करना चाहिए। महिला यदि चाह ले तो घर परिवार से समय निकालने के बाद अपने आस-पड़ोस की छोटी-बड़ी हर गतिविधियों पर नजर रखकर ऊर्जा हेल्प डेस्क को सूचित कर के अपराध पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकती है। यह उद्गार थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान ने गुरुवार को ऊर्जा हेल्प डेस्क के अंतर्गत महिलाओं युवतियों को जागरूकता कार्यक्रम के तहत संबोधित कर बताया। उन्होंने महिलाओं को समाज के सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करने की अपील भी की साथी इस अवसर पर ऊर्जा हेल्प डेस्क के कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को बताया गया कि

वर्तमान समय में कोरोना वायरस बड़ी तेजी से फैल रहा है। ऐसी स्थिति में यदि कोई बच्चा सर्दी, खासी, जुकाम होता है तो उसे पास के प्राथमिकता स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर उसका गंभीरता से इलाज कराना चाहिए। साथ ही मुंह पर मास्क और बार-बार हाथ को धोते रहना चाहिए। जिससे यह वायरस फैलने से रुकता है। उर्जा डेट्स प्रभारी बीएस पठानिया ने महिलाओं को अच्छे और बुरे टच के संबंध में जानकारी दी साथ ही उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि उनकी सतर्कता की वजह से कई महिलाओं और युवतियों का जीवन बर्बाद होने से बड़ी आसानी के साथ बचाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं और युवतियों में जागरूकता का होना अति आवश्यक है।

उपनिरीक्षक अलका राय ने युवती और महिलाओं को कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया सबसे ज्यादा घातक है जिन बच्चियों का सोशल मीडिया में मित्रता होती है वह लोग ही युवकों के बहकावे में आकर घर छोड़ने का जो निर्णय लेती हैं वह घातक होता है। ऐसे निर्णय से युक्तियों को बचना चाहिए। इस अवसर पर आरक्षक दिनेश झरबड़े,आरक्षक रंजना राजपूत,पूनम तिवारी,भूपेंद्र पटेल सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

PM मोदी ने की ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील, बॉलीवुड से यूं आए रिएक्शन पीएम मोदी


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(PM MODI) ने रविवार के दिन यानी 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू (JANTA CURFEW)’ की अपील की तो बॉलीवुड से यूं आए रिएक्शन.

नई दिल्ली: 

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कोरोनावायरस (Coronavirus) को लेकर देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में पीएम मोदी (PM Modi) ने जहां 60 साल से ऊपर की आयु के लोगों को घरों में रहने के लिए कहा तो इसके साथ ही उन्होंने रविवार के दिन यानी 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू (Janta Curfew)’ का आह्वान किया. पीएम मोदी के इस ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील पर बॉलीवुड से रिएक्शन आ रहे हैं. शबाना आजमी (Shabana Azmi), महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) और रितेश ने ट्वीट कर अपनी राय पेश की है. 

शबाना आजमी (Shabana Azmi) ने एक ट्वीट का जवाब दिया था और ट्वीट करने वाले को फटकार लगाई थी क्योंकि इस ट्वीट में पीएम मोदी के 22 मार्च को शाम पांच बजे कोरोना से फाइट करने वालों के हौसले बढ़ाने के लिए अपनी बालकनी, दरवाजे या खिड़की पर खड़े होकर ताली या थाली बजाने की अपील की आलोचना की गई थी. शबाना आजमी ने कहा, ‘यह कोई बेवकूफी नहीं है. यह सभी भारतीयों को एक साथ लाने के लिए मास्टरस्ट्रोक है.’

cbse, Central School में होने वाली वार्षिक परीक्षा की तिथि बढ़ी


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सारणी। केंद्रीय विद्यालय संगठन भोपाल संभाग के अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालय में आयोजित होने वाले कक्षा छठवीं, नवमी और ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षा 19 और 21 मार्च को होनी थी। इस परीक्षा की तिथि को स्थगित किया गया है। इसको लेकर आयुक्त सुमित श्रीवास्तव के द्वारा 18 मार्च को पत्र जारी कर केंद्रीय विद्यालय में भेजकर सूचना दिया गया है। केंद्रीय विद्यालय सारणी के प्राचार्य एचपी धारकर ने बताया कि 19 और 21 मार्च को होने वाली परीक्षा को आगामी आदेश तक बढ़ा दिया गया है। इसकी जानकारी अभिभावक को भी दी जा चुकी है।