Category Archives: सामाजिक

भोयर पवार समाज का शिष्टमंडल मिला केंद्रीय मंत्री गडकरी एवं वीरेंद्र कुमार से


नागपूर – 3 अगस्तः- केंद्र सरकार के ओबीसी सूची से पवार नाम हट जाने से उत्पन्न हुई समस्या का हल निकालने एवं नाम पुनःसम्मिलित करने हेतू भोयर पवार समाज के प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही मे दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी और मा. केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्रकुमार से मुलाकात कर समस्या की जानकारी दी।

सुधीर दिवे इनके माध्यम से समाज के प्रतिनिधी श्रावण फरकाडे, मोरेश्वर भादे, अजय फरकाडे इन्होने भंडारा के सासंद सुनिल मेंढे, बालाघाट सिवनी के सांसद ढालसिंग बिसेन, सासंद रामदास तडस इनसे दिल्ली निवास स्थान पर मुलाकात कर जानकारी दी। निवेदन में पवार समाज का पवार जातीय नाम केंद्र के ओबीसी सूची से हट जाणे के संदर्भ में मंत्री को तथा सभी सांसद को ने जानकारी दी और इस समस्या का समाधान करने की अपील की गयी। इस पर सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुब्रम्णनेम इनसे मंत्री महोदय ने चर्चा करके इस संदर्भ में विस्तृत अहवाल सोंपने के निर्देश दिये। पवार समाज की इस समस्या का समाधान जल्दी ही करेंगे ऐसे आस्वस्त किया। प्रतिनिधि मंडल द्वारा पंतप्रधान कार्यालय एवं राष्ट्रपति कार्यालय को निवेदन सौपा गया इस अवसर पर रुचित पांडे,आदित्य कुमार, प्रणव जोशी, अविनाश बैंगणे (महाराष्ट्र सदन दिल्ली ) इनका सहकार्य प्राप्त हुआ।

बेटी ने माता-पिता की वर्षगांठ पर भेंट किए सैनिटाइटर और मास्क


बेटी ने माता पिता के वर्ष वर्षगांठ पर पेस की अनूठी मिसाल

बैतूल। जिले में जन्मदिन और सालगिरह जैसे आयोजनों को यादगार बनाने के लिए विभिन्न सेवाकार्य करने की परंपरा बन चुकी है। इसी तारतम्य में समाजसेवी माधुरी साबले ने अपने माता-पिता की वर्षगांठ पर कोरोना काल में फ्रंटलाइन वारियर की भूमिका का निर्वहन कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए आवश्यक सामग्री दान करने की पहल की।

माधुरी साबले ने पुलिसकर्मियों के लिए पानी की बोतलें, सैनिटाइजर और मास्क पुलिस नियंत्रण कक्ष में रक्षित निरीक्षक मनोरमा बघेल को सौंपे ताकि इन्हें जवानों को वितरित किया जा सके।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वास्तविक स्नेह प्रशंसा से नहीं बल्कि सेवा से दर्शाया जाता है। इस अवसर पर समाजसेवी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता संजय (पप्पी) शुक्ला, मनीष मिसर, अखिलेश वाघमारे और अमन राने भी उपस्थित थे।

मुलताई एवं प्रभात पट्टन को मिली जीवन रक्षक, मशीनें, उपकरण, कीट


कोरोना संक्रमित मरीजों के सहायता केलिए आगे आए समाज सेवक


पूरे क्षेत्र में फैली कोरोना वैश्विक महामारी तथा मुलताई विधान सभा क्षेत्र में मरीजों की आवश्यकताओं को देखते हुए एवं कोरोना बीमारी की रोकथाम व मरीजों के उपचार हेतु आईकेम इंजिनियरिंग कम्पनी प्रायवेट लिमिटेड, अमरावती रोड अंभोरी तहसील मुलताई द्वारा डेड बॉडी शुट 40 नग, पी.पी.ई. कीट 200 नग, बी पैप (छोटा वेंटीलेटर) मशीन 2 नग एवं ऑक्सीजन कंसंटे्रटर 2 नग आदि चिकित्सीय उपकरण ब्लाक चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुलताई एवं प्रभात पट्टन को सौंपे गये।
इस नेक कार्य के लिए आइकेम इंजिनीयरिंग कम्पनी के प्रति आभार व्यक्त करता हु
यही मानवता की सेवा करने का उत्तम अवसर है मैं सभी सक्षम लोगों से भी मदद करने की अपील करता हु। जिससे गंभीर मरीजों के उपचार में सहायता हो

गायों को हरा चारा, भूखों को भोजन पैकिट वितरण – कैलाश मंथन


भूखों को भोजन कराना ही सबसे बड़ा मानव धर्म

story.. Kailash Manthan

मुलतापी समाचार

गुना। प्राणी मात्र की सेवा ही सच्चा मानव धर्म है। भूखों को भोजन, प्यासों को पानी पिलाने एवं मूक प्राणियों एवं गौ की सेवा करनना ही मानव मात्र का सच्चा धर्म है। चिंतन मंच, जनसंवेदना के तहत अंचल सड़कों पर विचरण करने वाले गौवंश को प्रतिदिन हरा चारा खिलाया जा रहा है।

विराट हिन्दू उत्सव समिति एवं चिंतन मंच प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि लॉकडाउन के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए इस बात का प्रयास किया गया कि अंचल की पिछड़ी एवं गरीब बस्तियों में कोई भी प्राणी भूख न सोये। साथ ही गौवंश के लिए चारे पानी की भी उचित व्यवस्था हो। मानव धर्म के मकसद से मार्च माह से ही की जा रही गौसेवा एवं भूखों को भोजन पैकेट वितरण का कार्यक्रम अनवरत जारी है।

वहीं मूक प्राणियों की प्यास बुझाने के लिए प्रमुख स्थलों पर पानी की टंकियां रखी गई हैं। प्रतिदिन कार्यकर्ताओं के ग्रुप मोहल्लों एवं बस्तियों एवं प्रमुख सड़कों पर विचरण करने वाले पशुओं को चारा पानी की व्यवस्था करते हैं। वहीं चिन्हित पिछड़ी बस्तियों में जरूरतमंदों को राशन एवं भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए जाते हैं।

हिउस प्रमुख कैलाश मंथन के मुताबिक चिंतन मंच के तहत नि:शुल्क गीता वितरण अभियान एवं नाम संकीर्तन आदि कार्यक्रमों के माध्यम से देशभक्ति एवं धार्मिक कार्यक्रमों को प्रमुखता दी जा रही है। साथ ही उन सभी सहयोगियों का आभार पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है जिन्होंने विपत्तिकाल में मानवता की सेवा कर तन मन धन से सेवा कर रहे हैं।

बैतूल जिले के पंवारों का इतिहास


क्षत्र‍िय पवार समाज संगठन बैैैैैतूल द्वारा राजा भोज जयंती एंव बसंंत पंचमी का कार्यक्रम बैतूल में मनाया सभी सममान्‍नीय सामाजिक बंधु गंण उपस्‍थ‍ि‍त हुए

मनमोहन पंवार

मुलतापी समाचार

बैतूल जिले में भाट के मतानुसार पंवार समाज के पूर्वज लगभग विक्रय संवत 1141 में धारा नगरी धार से बैतूल आए थे। जिले में लगभग पंवारों के 200 गांव है। पंवारों की संख्या लाखों में है। बैतूल जिले के पंवार अग्निवंशी है, इनका गोत्र वशिष्ठ है, प्रशाखा प्रमर या प्रमार है। ये पूर्ण रूप से परमार (पंवार) राजपूत क्षत्रिय है। वेद में इन जातियों को राजन्य और मनोस्मृति में बाहुज, क्षत्रिय, राजपुत्र तथा राजपूत और ठाकुरों के नाम से संबोधित किया है। सभी लोग अपने भाट से अपने वास्तविक इतिहास की जानकारी अवश्य लें ताकि आने वाली पीढ़ी को भविष्य में यह पता रहे कि वे कौन से पंवार है उनका गोत्र क्या है? हमारे वंश के महापुरूष कौन है। जब मालवा धार से पंवार मुसलमानों से युद्ध करते हुए नर्मदा तट तक होशंगाबाद पहुंचे वहां उस समय कि परिस्थितियों के कारण सभी लोगों ने अपने जनेऊ उतारकार नर्मदा में डाल दिए थे।

भाट लोगों के अनुसार ये सभी परमार शाकाहारी थे, मांस मदिरे का सेवन नहीं करते थे। वेदिक सोलह संस्कारों को अपनाते थे किंतु समय और विषम परिस्थितियों के कारण सेना के इस समूह की टुकडिय़ां क्रमश: बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, भिलाई, दुर्ग तथा महाराष्ट्र के नागपुर, भंडारा गोंदिया, तुमसर, वर्धा, यवतमाल, अमरावती, बुलढाना आदि जिलों में जाकर बस गए। बैतूल और छिंदवाड़ा के पंवारों को उस समय यहां रहने वाली जातियों के लोगों ने अपनी बोली से भुईहर कहा जो अपभ्रंस होकर भोयर कहलाये। उस समय की भोगौलिक परिस्थिति तथा आर्थिक मजबूरियों के कारण ये समस्त पंवार अपने परिवार का पालन पोषण करने के चक्कर में अपने मूल रीति रिवाज और मूल संस्कार भूलते चले गए। सभी ओर क्षेत्रीय भाषा का प्रभाव बढ़ गया इसलिए इन सभी क्षेत्रों में वहां की स्थानीय भाषा का अंश पंवारों की भाषा में देखने आता है

किंतु आज भी पंवार समाज की मातृभाषा याने बोली में मालवी भाषा और राजस्थानी भाषा के अधिकांश शब्द मिलते है। सैकड़ों वर्षो के अंतराल के कारण लोगों ने जो लोकल टाइटल (पहचान) बना ली थी वो कालांतर में गोत्र के रूप में स्थापित हो गई। आज प्रचलित सरनेम को ही लोग अपना गोत्र मानते है जबकि गोत्र का अभिप्राय उत्पत्ति से है और सभी वर्ण के लोगों की उपत्ति किसी न किसी ऋषि के माध्यम से ही हुई है। हमें गर्व है कि हमारी उत्पत्ति अग्निकुंड से हुई है। और हमारे उत्पत्ति कर्ता ऋषियों में श्रेष्ठ महर्षि वशिष्ठ है, इसलिए हमारा गोत्र वशिष्ठ है।

बैतूल जिले के पंवार मूलत: कृषक है। अब युवा पीढ़ी के लोग उद्योग धंधे में तथा नौकरियों में आ रहे है। शिक्षा के अभाव के कारण यहां के पंवार समाज के अधिकांश लोग आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए है। इस समाज में पहले महिलाएं शिक्षित नहीं थी किंतु अब महिला तथा पुरूष दोनों ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों पर आसीन है। समाज के उच्च शिक्षित लोग सभी क्षेत्र में बड़े-बड़े महत्वपूर्ण पदों पर और विदेशों में भी समाज का गौरव बढ़ा रहे है। कृषक भी आधुनिक विकसित संसाधनों से उन्नत कृषि व्यवसाय में लगे हुए है।

बैतूल जिले के पंवारों के गांव की सूची

बैतूल क्षेत्र के गांव

1. बैतूल नगरीय क्षेत्र 2. बैतूलबाजार नगरीय क्षेत्र, 3. बडोरा 4. हमलापुर, 5. सोनाघाटी, 6. दनोरा, 7. भडूस, 8. परसोड़ा 9. ढोंडबाड़ा, डहरगांव, बाबर्ई, डोल, महदगांव, ऊंचागोहान, रातामाटी, खेड़ी सांवलीगढ़, सेलगांव, रोंढा, करजगांव, नयेगांव, सावंगा, कराड़ी, भोगीतेढ़ा, भवानीतेढ़ा, लोहारिया, सोहागपुर, बघोली, सापना, मलकापुर, बाजपुर, बुंडाला, खंडारा, बोड़ीबघवाड़, ठेसका, राठीपुर, खेड़ी भैंसदेही, शाहपुर, भौंरा, घोड़ाडोंगरी,सलैया, पाथाखेड़ा, शोभापुर, सारणी क्षेत्र, भारत भारती, जामठी, बगडोना, झगडिय़ा, कड़ाई, मंडई, गजपुर, बाजपुर, पतरापुर, सांपना, खेड़लाकिला, चिखल्या (रोंढा), कोरट, मौड़ी, कनाला, बयावाड़ी

https://www.facebook.com/Youth-PAWAR-in-MP-759383064192000

मुलताई क्षेत्र के गांव – मुलताई नगरीय क्षेत्र, थावर्या, कामथ, चंदोराखुर्द, करपा, परसठानी, देवरी, हरनया, मेलावाड़ी, बूकाखेड़ी, चौथिया, हरदौली, शेरगढ़, मालेगांव, कोल्हया, हथनापुर, सावंगा, डउआ, घाट बिरोली, बरखेड़, पिपरिया, डोब, सेमरिया, पांडरी सिलादेही, जाम, खेड़ी देवनाला, चिचंडा, निंबोरी चिल्हाटी, कुंडई, खंबारा, मल्हारा, कोंढर, जूनापानी, सेमझर, डहरगांव, चैनपुर, तुमड़ी, डोल, मल्हाराखापा, पिपरपानी, नीमदाना, व्हायानिडोरनी, छोटी अमरावती, छिंदखेड़ा, गाडरा, सोमगढ़, झिलपा, नंदबोही, दुनावा, दुनाई, गांगई, मूसाखापा, खल्ला, सोनेगांव, सिपावा, भैंसादंड, मलोलखापा, बालखापा, घाट पिपरिया, सरई, काठी, हरदौली, लालढाना, खामढाना, लीलाझर, बिसखान, मयावाड़ी, थारी, मुंडापार, चिखलीकला, कपासिया, लाखापुर, हिवरा, पारबिरोली, खैरवानी, सावंगी, लेंदागोंदी, मोरखा, तरूणाबुजुर्ग, डुडरिया, पिडरई, जौलखेड़ा, मोही, हेटीखापा, परमंडल, नगरकोट, दिवट्या, बुंडाला, हेटी, खतेड़ाकला, हरनाखेड़ी, अर्रा, बरई, जामुनझिरी, टेमझिरा, बाड़ेगांव, केकड्या, ऐनस, निर्गुण, सेमझिरा, पोहर, सांईखेड़ा, बोथया, ब्राम्हणवाड़ा, खेड़लीबाजार, बोरगांव, बाबरबोह, महतपुर, माथनी, छिंदी, खड़कवार, केहलपुर, तरोड़ा बुजुर्ग, सोड्ंया, रिधोरा, सोनोरी, सेमरया, जूनावानी, चिचंडा, हुमनपेट, बानूर, खेड़ी बुजुर्ग, उभारिया, खापा, नयेगांव, ससुंद्रा, पंखा, अंधारिया,

आमला नगरीय क्षेत्र – जंबाड़ा, बोडख़ी, नरेरा, छिपन्या, पिपरिया, महोली, उमरिया, सोनेगांव, बोरदेही, चिचोली, भैंसदेही, गुबरैल, डोलढाना आदि।

बैतूल जिले के वर्तमान में पंवारों के भिन्न-भिन्न सरनेम, उपनाम जिसे आज ये लोग गोत्र कहते है।

परिहार या पराड़कर, पठाड़े, बारंगे, बारंगा, बुआड़े, देशमुख, खपरिए, पिंजारे, गिरहारे, चौधरी, चिकाने, माटे, ढोंडी, गाडरी, कसारे, कसाई, कसलिकर, सरोदे, ढोले, ढोल्या, बिरगड़े, उकड़ले, रोलक्या, किरणकार, किनकर, किरंजकार, घाघरे, रबड़े, रबड्या, भोभाट, दुखी, बारबुहारे, मुनी, बरखेड्या, बागवान, देवासे, देवास्या, फरकाड्या, फरकाड़े, नाडि़तोड़, भादे, भाद्या, कड़वे, कड़वा, कोडले, रमधम, राऊत, रावत, करदात्या, करदाते, हजारे, हजारी, गाड़क्या, गाकरे, खरफुस्या, खौसी, खवसे, कौशिक, पाठेकर, पाठा, मानमोड्या, मानमोड़े, हिंगवे, हिंगवा, डालू, ढालू, डहारे, डोंगरदिए, डोंगरे, डिगरसे, गोहिते, ओमकार, उकार, टोपल्या, टोपले, गोंदर्या, धोट्या, धोटे, ठावरी, ठूसी, लबाड़, ढूंढाड्या, ढोबारे, गोर्या, गोरे, काटोले, काटवाले, आगरे, डोबले, कोलया, हरने, ढंडारे, ढबरे, तागड़ी, सेंड्या, खसखुसे, गढढे, वाद्यमारे, सबाई।

सिवनी, बालाघाट, गोंदिया, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ में प्रचलित सरनेम – अम्बूल्या, आमूले, कटरे, कटरा, कोलहया, गौतम, चौहान, चौधरी, चैतवार, ठाकुर, टेम्भरे, टेम्भरया, डाला, तुरूस, तुरकर, पटले, पटलया, परिहार, पारधी, कुंड, फरीद, बघेला, बिसन, बिसेन, बोपच्या, बोपचे, भगत, भैरव, भैरम, भोयर, ऐड़ा, रंजाहार, रंजहास, रंदीपा, रहमत, राणा, राना, राउत, राहंगडाले, रिमहाईस, शरणागत, सहारत, सहारे, सोनवान्या, सोनवाने, हनवत, हिरणखेड्या, छिरसागर।

लेखक शंकर पवार पत्रकार

पंवारों का मूल गौत्र तो वशिष्ठ ही है ऊपर दिए गए सभी सरनेम या उपनाम है।

उपरोक्त जानकारी प्रकाशन दिनांक तक प्राप्त ग्रामों के नाम तथा सरनेम इस लेख में दिए गए है।

मनमोहन पंवार, मुलतापी समाचार, प्रधान संपादक

Mo. 9753903839

पवार समाज के युवाओं नें मास्क वितरण एवं ग्रामों में सैनिटाइज़र का किया छिडकाव कर समाज सेवा की


Multapi Samachar

Multai : क्षत्रिय पंवार समाज बैतूल के युवाओं द्वारा मुलताई तहसील के ग्राम माथनी एवं सेन्द्रिया में मास्क वितरण का कार्य एवं सैनिटाइज़र का कार्य किया गया तथा ग्रामवासियों को कोरोना वायरस रोकथाम के लिए उपायोंं बताये साथ ही इस वैश्‍यविक माहामारी से बचाव के लिए जानकारीयां दी गयी, जिसमें सभी युवाओं ने उत्साह पूर्वक भाग लिया जिसमें प्रमुख रूप से मधुकर पंवार, जीवन बुवाड़े,आशीष कोड़ले ,राहुल पंवार, चंद्रकिशोर देशमुख, अंकित बोबड़े,योगेश खपरिये, प्रवीण पंवार, राजेन्द्र पंवार,अरविंद पंवार, राजू पंवार,नीलेश पंवार, विवेक पंवार,सुनील पंवार की उपस्थिति रही

मुलतापी समाचर

मनमोहन पंवार ( प्रमुख संपादक)

जिला छत्रिय पवार समाज संगठन छिंदवाड़ा द्वारा 61000 दान किए गए


दान संगठन के पास जमा राशि से नहीं ,अपितु समाज के दानदाताओं द्वारा दी गई

Multapi Samachar

स्वयं दान देकर समाज संगठन का नाम करने वालों की विनम्रता महानता को नमन
छिंदवाड़ा। लाकडाउन के दौरान छिंदवाड़ा शहर के गरीबों की भोजन व्यवस्था के लिए नगर निगम कमिश्नर श्री राजेश साही को रुपए 61,000 की सहयोग राशि जिला छत्रिय पवार समाज संगठन छिंदवाड़ा की ओर से दान की गई।
दीनदयाल रसोई हेतु संगठन के पदाधिकारियों द्वारा निम्नानुसार राशि दी गई-
श्री हेमंत पवार 10,500
श्री यशवंत पवार 10,000
श्री मुन्ना पवार 10,000
श्री देवेन्द्र डोबलेकर 8000
श्री एन आर डोंगरे 5000
श्री महेश डोंगरे 5000
श्री बलवंत कड़वेकर 5000
श्री गोपीचंद पवार 5000
श्री देवीलाल घागरे 2500
आप सभी सदस्यों की संवेदनशीलता और दानशीलता को नमन करते हुए आपके उज्ज़्वल भविष्य की कामना करता है। आपके इस कार्य से समाज का गौरव बढ़ा है। भगवान आपको सदैव स्वस्थ सुखी संपन्न और दीर्घायु बनाए रखें।
स्रोत-श्री रामदास पवार

वालीवाल खेलते देख बने राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी शैलेन्द्र बारंगे


फोटो : शैलेन्द्र बारंगे

राष्ट्रीय वालीवाल प्रतियोगिता में कर चुके हैं दो बार सहभागिता

नेट क्लियर कर यूजीसी स्केल पाने की राह की आसान, पीएससी क्लियर कर ,बने कालेज में क्रीड़ा अधिकारी

मुलतापी समाचार

बैतूल, पाथाखेड़ा। कब कोई किससे प्रेरित होकर जीवन में सफलता प्राप्त कर जाता है कहना मुश्किल है। ऐसे ही हैं श्री शैलेन्द्र बारंगे जिनकी कक्षा बारहवीं तक वॉलीबॉल क्लब में वॉलीबॉल खेलते देख खेल के प्रति रुचि जागृत हुई।

आपने 4 वर्ष तक नरसिंहपुर खेल छात्रावास में रहकर अभ्यास किया । फिजिकल एजुकेशन कॉलेज ग्वालियर से बीपीएड , एमपीएड किया। और वर्ष 2012 में नेट तथा वर्ष 2018 में एमपीपीएससी क्लियर कर बन गए कालेज में क्रीड़ा अधिकारी।

इसके पूर्व आप 2004 और 2006 में दो बार राष्ट्रीय स्तर वालीबाल प्रतियोगिता में सहभागिता कर चुके हैं।

आपने पटियाला से खेल में डिप्लोमा भी हासिल किया है तथा खेल मंत्रालय के स्पोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया गांधीनगर गुजरात में वालीवाल के कोच के रूप में सेवाएं भी दी हैं। वर्तमान में आप भैंसदेही कालेज में सेवारत हैं।

हमें श्री शैलेंद्र बारंगे की उपलब्धि पर गर्व है। समाज के युवा उनकी इस यात्रा से प्रेरित- प्रोत्साहित हो सके तो सुखवाड़ा का यह प्रयास सार्थक सिद्ध हो सकेगा।
स्रोत: श्री जगन्नाथ पाठेकर भैंसदेही, बैतूल।

रामायण बंद करवाने मांग की थी, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी, ऐसे फसा विरोधी, समझें प्रशांत भूषण ने


Multapi Samachar

Prashant-Bhushan-Ramayana

Ramayan DD Prasharan

Delhi: भगवान राम के नाम से कई तरह के दानव भयभीत हो जाते है, परन्तु कांग्रेस, वामपंथी और कुछ अन्न लोग भी आजकल रामायण से परेशान है और जब से लोग रामायण सीरियल को टीवी पर उसी उत्साह से देख रहे है जैसे 1990 के ज़माने में देखा करते थे, तब से रामायण विरोधी तत्व भारी दिक्कत में आ गए है।

इसी सिलसिले में वकील प्रशांत भूषण टीवी पर रामायण सीरियल के खलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया, प्रशांत भूषण ने रामायण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और रामायण को बंद करवाने की मांग की। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से प्रशांत भूषण को झटका मिला है, इसकी घटिया याचिका को कोर्ट ने ख़ारिज कर प्रशांत भूषण को ही फटकार दिया है।

प्रशांत भूषण की याचिका पर कोर्ट ने कहा है की टीवी पर कोई भी किसी भी कार्यक्रम को देखने के लिए स्वतंत्र है, चैनल अपने मन मुताबिक कार्यक्रम टेलीकास्ट करने के लिए स्वतंत्र है। इस से पहले लॉक डाउन के शुरुवात में दूरदर्शन ने रामायण को फिर से टेलीकास्ट करने का निर्णय लिया था और ये टेलीकास्ट इतना हिट रहा की अब रामायण ने वर्ल्ड रिकॉर्ड ही बना दिया, 16 अप्रैल को रामायण को 7 करोड़ 70 लाख लोग एक साथ देख रहे थे और ये नया वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

Rebroadcast of Ramayana on Doordarshan smashes viewership records worldwide, the show becomes most watched entertainment show in the world with 7.7 crore viewers on 16th of April.

अब वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ गुजरात के राजकोट में दर्ज की गई एक FIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भूषण को किसी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई से राहत दी है। प्रशांत भूषण के खिलाफ यह एफआईआर कथित रूप से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है।

यह एफआईआर पूर्व सैन्य अधिकारी जयदेव रजनीकांत जोशी ने दर्ज कराई थी। जोशी ने आरोप लगाया है कि प्रशांत भूषण ने पूरे देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत के दोबारा प्रसारण के खिलाफ ट्वीट कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

जोशी ने अपनी इस शिकायत में प्रशांत भूषण पर आरोप लगाा कि उन्होंने 28 मार्च को एक ट्वीट में रामायण और महाभारत के लिए अफीम शब्द का इस्तेमाल करके हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है। कोर्ट ने प्रशांत भूषण को किसी प्रकार की कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कहा, ‘कोई भी व्यक्ति टीवी पर कुछ भी देख सकता है।’ इसके साथ ही पीठ ने सवाल कि

आपको बता दे की दूरदर्शन पर दिखाए जा रहे रामायण सीरियल ने इतिहास रच दिया है। रामायण के 16 अप्रैल के एपिसोड को दुनियाभर में 7.7 करोड़ लोगों ने देखा। इस तरह वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम करते हुए Ramayan दुनिया में एक दिन में सबसे ज्यादा देखा जाने वाले मनोजन प्रोग्राम बन गया है। प्रसार भारती ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

जानकारी हो की कोरोना वायरस महामारी से कारण लॉकडाउन लगने के बाद मांग उठी थी कि रामायण और महाभारत का पुनः प्रसारण किया जाए। इसके बाद से करोड़ों लोग रामायण सीरियल देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस सीरियल और इससे जुड़े पात्रों की लगातार चर्चा है।

हर घड़ी हर क्षण साथ हूं अपनी जनता जनार्दन के–निलय डागा


डागा फाउंडेशन के डायरेक्टर और बैतूल विधायक निलय डागा

बैतूल – कोरोना रूपी इस महामारी से जहां पूरा प्रदेश और देश बड़े ही साहस और धैर्य के साथ उसका सामना कर रहा है, वही मैं अपने बैतूल वासियों के अभी तक के अमूल्य सहयोग के लिए कृतज्ञ हूं और अंतर्मन से उन सभी साहसी जनता के लिए को साधुवाद देता हु, जिन्होंने इन विषम परिस्थितियों में अपना और अपने समाज का साथ दिया हैं, अभी तक के ताजा हालात में हमारा बैतूल वाकई सुरक्षित है, ताप्ती मैया से मेरी विनती है कि हम सबकी इस महामारी से रक्षा करें और इसके लिए आप सबका आगे भी ऐसा ही सहयोग चाहिए।

मैंने स्वयं एवं अपने सहयोगियों के माध्यम से क्षेत्र वासियों को हो रही समस्याओं का जमीनी विश्लेषण किया और पाया कि सबसे ज्यादा हमारे गरीब, किसान,दिहाड़ी मजदूर और आदिवासी भाई इस महामारी से प्रभावित है उन्हें हो रही समस्याओं के निदान के लिए मैंने डागा फाउंडेशन एवं अपने समस्त सहयोगियों, कार्यकर्ताओं के जरिए ऐसे प्रभावित जनता के लिए राशन एवं बचाव कार्य के प्रयास करने शुरू किये हमारे सहयोगी द्वारा कुछ क्षेत्रों में राशन एवं अन्य जरूरी दिनचर्या के सामग्रियों की आपूर्ति भी लगातार की जा रही थी बहुत हद तक हम अपने उन गरीब भाइयों तक पहुंच पाए जिन्हें राशन की सबसे ज्यादा समस्या हो रही थी,कतिपय कारणवश शासन एवं प्रशासन द्वारा फिलहाल ऐसे जन सहयोग की स्वीकृति आगे नहीं मिल पा रही है,

मेरा स्वयं का यह पूरा प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द हम प्रशासनिक अमले से बात कर अपनी इस मुहिम को फिर से शुरू करें ताकि एक बड़ा वर्ग जिसे वर्तमान में राशन एवं दिनचर्या की अन्य वस्तुओं की समस्याएं हो रही हैं उन तक भी हम पहुंच पाए मैं अपने क्षेत्र की समस्त जनता जनार्दन को यकीन दिलाता हूं कि जल्द से जल्द डागा फाउंडेशन द्वारा एवं हमारे सहयोगियों द्वारा आपके घर-घर तक शासन प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए राशन पानी की व्यवस्था आगे भी की जाएगी आप सब बिल्कुल भी ना घबराए बड़े ही धैर्य एवं साहस के साथ इस दुर्गम समय का सामना करें, हम आपकी जमीनी समस्याओं से अवगत हैं और लगातार उस पर नजर भी बनाए हुए हैं जल्द से जल्द डागा फाउंडेशन के माध्यम से मैं और मेरे सहयोगी आप तक जरूर पहुंचेंगे तब तक आप सब से मेरी विनम्र विनती है अपने घरों में ही रहें अपने बच्चों को, अपने बुजुर्गों को अपने तमाम रिश्तेदारों को परिचितों को घर में ही रहने का संदेश दें ताकि हम इस महामारी को मुंहतोड़ जवाब दे सकें। मैं निलय विनोद डागा अपनी समस्त जनता जनार्दन के सामने दृढ़ संकल्पित हूं की उन्हें हो रही हर समस्याओं के समाधान के लिए हर पल हर क्षण मैं उनके साथ ही खड़ा नजर आऊंगा सिर्फ आपको हमारा इतना सहयोग करना है कि शासन-प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन करें और इस महामारी को हराने में अपना सहयोग दें।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल