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देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी अब हमारे बीच नहीं रहे, आज होगा उनका अंतिम संस्कार


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

कटनी: गृहस्थ संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी का रविवार रात लगभग 8:30 बजे देवलोक गमन हो गया, वे 81 साल के थे ।दद्दा जी किडनी और लीवर की बीमारी से पीड़ित थे।

देश की कई नामी हस्तियों के आध्यात्मिक गुरु और गृहस्थ संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी ने 1980 से पार्थिव शिवलिंग निर्माण प्रारंभ किया, इसके बाद इसने अभियान का स्वरुप ले लिया।

दद्दा जी का जन्म अनंत चतुर्दशी के दिन 1939 में कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील के ग्राम कूड़ा में हुआ था। उनके पिता का नाम गिरधारी दत्त शास्त्री था। उनकी पत्नी का नाम कुंती देवी था। उनके परिवार में तीन पुत्र दो पुत्रियां नाती, नातिन सहित पूरे भारत में शिष्य है। उनका वर्तमान आश्रम घनश्याम बाग कूड़ा में है। उन्होंने राष्ट्र कल्याण के उद्देश्य से 1980 से जबलपुर से पार्थिव शिवलिंग निर्माण कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने अपने जीवन काल में सवा करोड़ शिवलिंग निर्माण के 108 से अधिक आयोजन किए।

पूर्व राज्य मंत्री व विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा व हास्य कलाकार राजपाल यादव दद्दा जी के अनन्य भक्तों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह उनकी पत्नी साधना सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, अर्चना चिटनिस, रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला, कैलाश विजयवर्गीय, समेत कई विधायक और मंत्री उनके शिष्य रहे हैं।

मुलतापी परिवार की तरफ से दद्दा जी को श्रद्धा सुमन अर्पित

कटनी, शहडोल, सागर सहित अन्य जिलों के 58 मजदूरों को बसों से घर भेजा


लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को मिला सहारा।

हरदा। बसों से घर की ओर रवाना होते मजदूर।

नासिक से आए प्रेमलाल केवट परिवार सहित कटनी के लिए हुए रवाना।

हरदा। मंगलवार सुबह घर जाने के लिए हंगामा करने वाले मजदूरों को जिला प्रशासन ने उनके घर पहुंचा दिया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रदेश के अनेक जिलों के मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई और विभिन्ना जिलों के 58 मजदूरों को दो बसों द्वारा रवाना किया गया। जिसमें कटनी के 26, मंडला के तीन,शहडोल के चार, उमरिया के तीन, सागर के पांच, सिवनी के चार, नरसिंहपुर के एक, दमोह के पांच एवं पन्नाा के सात व्यक्तियों को दो बसों द्वारा उनके गृह जिलों में भेजा गया है। इनमें से अधिकांश मजदूर महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों से हरदा पहुंचे थे। जिला प्रशासन द्वारा शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में इनके ठहरने एवं भोजन की व्यवस्था की गई थी। लेकिन मंगलवार को घर जाने की जिद करते हुए इन्होंने आश्रय स्थल का गेट तोड़कर हंगामा कर दिया था।

मप्र में कई स्थानों पर बेमौसम बारिश बैतूल, उमरिया, कटनी, सिवनी, दमोह, बालाघाट में जमकर बरसे ओले, फसलें चौपट


Rain in – Satpuda खेतों में खड़ी फसल को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही । सब्‍जी भाजी, पत्‍ता गोभी, टमाटर, चना, मटर जैसी फसले अधिक प्रभावित

मुलताई डहुआ। मुलताई तहसील के ग्राम डहुआ में किसान सुरेन्‍द्र पंवार के खेत में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह से ओलों की बारिश में चौपट हो गई।

बुधवार की देर रात मौसम का मिजाज बदला और तेज हवा के साथ ओलों की बारिश शुरू हो गई। करीब 30 मिनट तक आसमान से ओले बरसते रहे और उसके बाद तेज हवा के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया। सुबह दुनावा मंडल के अंतर्गत आने वाले दो दर्जन से अधिक गांवों के खेतों में किसानों को बर्बादी बिखरी नजर आई। पेड़ पौधों की टहनियां जहां टूट गईं वहीं खेतों में लगी फसलें पूरी तरह से जमीन पर बिछ गईं। मुलताई तहसील के ग्राम डहुआ में किसान सुरेन्‍द्र पंवार के खेत में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह से ओलों की बारिश में चौपट हो गई एवं दुनावा क्षेत्र के ग्राम पारबिरोली में ओलों के कारण सबसे अधिक बर्बादी सामने आई है। गुरूवार की सुबह खेतों में लगी सब्जी और अन्य फसलें पूरी तरह से तबाह हो गईं थी। ग्राम पारबिरोली के किसान लक्ष्मण देशमुख ने बताया कि उनके 3 एकड़ खेत में गेहूं की फसल कल तक लहलहा रही थी लेकिन बुधवार की रात हुई ओलों की बारिश ने फसल को पूरी तरह से जमीन पर गिरा दिया है। जब वे अपनी पत्नी के साथ सुबह खेत पहुंचे तो फसल पूरी तरह से जमीन पर बिछी हुई थी। इसके साथ ही अन्य किसानों के खेतों में भी फसलें इसी तरह बर्बाद मिलीं। दुनावा क्षेत्र के किसान वैसे ही मौसम की मार से तरह तरह की बीमारियों की चपेट में हैं। किसान अपने मक्के की फसल की भरपाई भी नहीं कर पाया था कि गेहूं की फसल बर्बाद होने से किसानों में बड़ी मायूसी छाई हुई है। दुनावा मंडल के ग्राम डहुआ, सिपावा, सोनेगांव, रिधोरा, डहुआ, मोरखा, सांवरी, खैरवानी, छिंदी, खड़कवार समेत अन्य गांवों में ओलावृष्टि से अधिक क्षति पहुंची है। ग्राम डहुआ के किसान सुरेन्‍द्र पवार, ढिमर बुआडे, हेमन्‍त बारंगे, दिनसु बारंगे, मनोज बारंगे एवं पारबिरोली के हेमू देशमुख, कालूराम, गोरेलाल, शिवराज, उदल, रघुनाथ, मुन्नाा, कलसिंग, प्यारे, सुखराम, मंगरया, मेंहग्या समेत अन्य किसानों के खेतों में फसल पूरी बर्बाद हो गई है। किसानों ने जल्द सर्वे कर मुआवजा देने की गुहार लगाई है।

जबलपुर।  Rain in-Vindhya महाकोशल-विंध्य के जिलों में सर्दी के सितम के साथ बारिश-ओलों ने भी लोगों को हलाकान कर दिया। उमरिया, सिवनी, कटनी, दमोह, नरसिंहपुर, बालाघाट में बुधवार रात बारिश के साथ ही ओलावृष्टि ने फसलों को करीब-करीब चौपट ही कर दिया।

उमरिया के चंदिया में बुधवार रात 8 और फिर 12 बजे जमकर ओले गिरे। हालात यह रहे कि बड़े आकार के यह ओले लगभग 12 घंटे बाद घुल सके। सिवनी के करीब 100 से अधिक गांवों में भी खूब ओले गिरे, जिससे फसलों खासतौर से दलहनी फसलों व सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं बारिश से ठंड भी बढ़ गई है। शीतलहर ने भी लोगों को बेहाल कर रखा है।

खरीदी केंद्रों में पानी-पानी

अलग-अलग जिलों के खरीदी केंद्रों में बारिश से चारों तरफ पानी भर गया। जहां केंद्रों में किसानों की धान भीग कर गीली हो गई, वहीं अब बारिश के कारण कई जगहों पर खरीदी कार्य भी बंद कर दिया गया है।

अनूपपुर में दो दिनों में 161.3 मिमी बारिश

अनूपपुर में दो दिनों में 161.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश थमने तक जिले में कुल धान की खरीदी 1लाख 89 हजार 897 क्विंटल हो चुकी है। डिंडौरी में गुरुवार को भी दिनभर सुबह से रुक-रुककर रिमझिम बारिश होती रही। दोपहर में कुछ देर के लिए धूम निकली, जिससे राहत मिली।

बालाघाट: ओलावृष्टि-बारिश के बीच भी खरीदी

पिछले 48 घंटे से जिले में लगातार बारिश हो रही है। इस बीच ओले भी जमकर गिरे। बावजूद इसके कुछ केंद्रों पर धान खरीदी के आंकड़े चौंका रहे हैं। बुधवार को बारिश के बीच बैहर, बिरसा, लांजी, कटंगी, परसवाड़ा समेत कुछ 40 से 50 केन्द्रों में 40 हजार क्विंटल करीब 1 लाख बोरो की खरीदी की जा चुकी है। गुरुवार को धनकोषा, बोथवा केन्द्र में 202 क्विंटल की खरीदी की जा चुकी है।

जिलों में न्यूनतम तापमान

डिंडौरी- 2.0

शहडोल- 3.5

रीवा- 3.8

अमरकंटक- 4.0

अनूपपुर- 6.0

सतना- 8.4

मनमोहन पंवार (संपादक)

9753903839