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जिले में खेतों में पककर खड़ी है गेहूं की फसल नहीं मिल रही कटाई मशीन, प्रशासन को नहीं फिक्र


खेतों में बारूद बनकर खड़ी गेहूं की फसलें,

कृषि विभाग के अफसरों ने नहीं बनाई कोई व्यवस्था, कागजी दावे करने में जुटे अफसर

सांसद और विधायक भी नहीं फिक्रमंद, कमिश्नर से किसानों ने मांगी मदद

मुलतापी समाचार

बैतूल। लॉकडाउन के कारण जिले में गेहूं की फसल कटाई खासी प्रभावित हो रही है। खेतों में सूखकर बारूद जैसी स्थिति में पहुंच चुकी गेहूं की फसल काटने के लिए न तो हार्वेस्टर मिल पा रहे हैं और न ही मजदूर। लगातार बढ़ता तापमान और खेतों में लग रही आग की घटनाओं से किसान दहशत में एक- एक दिन हार्वेस्टर मिलने के इंतजार में काट रहे हैं। हद तो यह है कि जिले के कृषि विभाग ने किसानों को फसल कटाई में मदद करने की न तो अब तक कोई योजना बनाई है और न ही उसे यह पता है कि जिले में कितने हार्वेस्टर हैं और कितने कटाई करने में जुटे हुए हैं। जबकि प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन में भी किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें फसल कटाई में पूरा सहयोग देने के लिए प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। किसानों की फसल कटाई के लिए अब तक सांसद और विधायकों द्वारा कोई मदद नहीं की गई है जिससे आहत होकर किसानों ने अब नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर से मदद करने की गुहार लगाई है।

जिले में इस बार 2.26 लाख हेक्टेयर से भी अधिक रकबे में गेहूं की फसल की बोवनी हुई है। अब तक करीब 60 प्रतिशत क्षेत्र में ही गेहूं की फसलों की कटाई का काम पूरा हो पाया है। लॉकडाउन के कारण जिले में आसपास के जिलों के अलावा पंजाब, राजस्थान एवं महाराष्ट्र से हार्वेस्टर पहुंच नहीं पाए। जिला प्रशासन ने भी लॉकडाउन के प्रारंभ होने के बाद जिले में हार्वेस्टरों की उपलब्धता के लिए कोई प्रयास नहीं किए, जिससे केवल स्थानीय लोगों के पास मौजूद हार्वेस्टरों पर ही पूरी कटाई की जिम्मेदारी आ गई है।

हार्वेस्टर संचालक जहां अपनी मनमानी पर उतारू हो गए हैं वहीं मनमाना दाम भी वसूलने लगे हैं। किसानों को कटाई का आश्वासन देने के बाद भी 8 से 10 दिन बीत जाने पर उनके खेतों में कटाई करने नहीं पहुंच रहे हैं। ग्राम उमनबेहरा के किसान पंकज चौधरी ने बताया कि अब तक वे एक दर्जन हार्वेस्टर संचालकों से संपर्क कर चुके हैं। सब आश्वासन दे रहे हैं लेकिन कटाई कोई भी नहीं कर रहा है। इटारसी में भी अपने रिश्तेदारों से संपर्क कर वहां से हार्वेस्टर भेजने की गुहार लगाई जा रही है लेकिन कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ग्राम सिंगनवाड़ी के किसान राजीव वर्मा ने बताया कि गेहूं की कटाई के लिए वे भी पिछले 11 दिन से लगातार हार्वेस्टर की तलाश कर रहे हैं लेकिन अब तक नहीं मिल पाया है और फसल खेत में खड़ी हुई है। किसानों की माने तो संकट के इस दौर में कृषि विभाग के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। कृषि विभाग के मुखिया को यह तक नहीं पता है कि जिले में अब तक कितने क्षेत्र में कटाई हो चुकी है। फसल कटाई के लिए कितने हार्वेस्टर चल रहे हैं और कहां पर किसान एक पखवाड़े से इंतजार कर रहे हैं। यही स्थिति विभाग के मैदानी अमले की भी हो रही है, उनके अनुसार विभाग की ओर से कोई निर्देश ही जारी नहीं किए गए हैं।

डीडीए को किसानों के फोन का इंतजारः ‘नवदुनिया’ ने जब उप संचालक कृषि केपी भगत से जिले में गेहूं की कटाई के संबंध में चर्चा की तो उन्होंने दावा कर दिया कि मात्र 20 प्रतिशत कटाई बाकी है और हार्वेस्टर चल रहे हैं। किसानों को हार्वेस्टर न मिलने के संबंध में उन्होंने यह दावा किया कि आज तक एक भी किसान ने उनसे संपर्क ही नहीं किया। कुल कितने हार्वेस्टर जिले में चल रहे हैं इसके संबंध में उन्होंने कहा कि वे पता करके बता देंगे।

अब तक दो दर्जन खेतों में राख हो गई फसलें: जिले में अब तक दो दर्जन से अधिक खेतों में आग लगने के कारण फसलें राख होने की घटनाएं घटित हो चुकी हैं। किसानों की मानें तो कटाई के लिए न तो मजदूर मिल पा रहे हैं और न ही हार्वेस्टर वाले कटाई करने के लिए तैयार हो रहे हैं। अज्ञात कारणों से आग लगने की घटनाएं हो रही हैं और किसानों के सामने कोई विकल्प ही नहीं है। शाहपुर से सचिन शुक्ला ने बताया कि क्षेत्र में 20 प्रतिशत फसल कटाई अब भी बाकी रह गई है। घोड़ाडोंगरी से विनोद पातरिया ने बताया कि ब्लॉक में 40 प्रतिशत खेतों में फसल खड़ी हुई है, हार्वेस्टर नहीं मिल रहे हैं जिससे किसान हैरान-परेशान हो रहा है। मुलताई से राकेश अग्रवाल ने बताया कि आमला ब्लॉक में 40 प्रतिशत खेतों में फसल लगी हुई है जबकि मुलताई और प्रभातपट्टन ब्लॉक में 30 प्रतिशत कटाई बाकी रह गई है।

किसान हो रहा परेशान गेहू भरने तक बारदाने उपलब्ध नहीं करा रही – जनहितैषी सरकार


मूलतापी समाचार

किसान के पास गेहूं रखने के लिए बोर तक नहीं मिलरहे

कोरोना वायरस से भी ज्यादा डर इस समय यह है कि पकी हुई गेहूं की फसल के साथ कोई हादसा ना हो जाए
ना सरकार फसल खरीद रही है ना ही बारदाना उपलब्ध करा रही है किसान करे तो क्या करें

महोदय जिले का किसान हूँ। अपने खेत का गेंहू भरने के लिए बारदाना की आवश्यक्ता है। कृपया जिले के वारदाना विक्रेता की दुकानों के लिए निर्देश जारी करने की कृपा करें।

शहर में छोटे किसान स्वयं साइकिल अथवा दोपहिया वाहन से विक्रय कर सकते हैं सब्जी


किसान समृद्धि बाजार में मंहगी सब्जी बेचने की शिकायतों पर बदली व्यवस्था

मुलतापी समाचार

बैतूल-जिला संकट प्रबंधन समूह की बैठक में नगरीय क्षेत्र बैतूल में सब्जी प्रदाय की व्यवस्था पर विचार किया गया। नगर पालिका बैतूल में सब्जी वितरण की व्यवस्था पर अनुविभागीय राजस्व अधिकारी, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा समिति को जो राय दी है उसके क्रम में समिति द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि किसान समृद्धि बाजार के वाहनों की संख्या बढ़ाई जाये एवं वर्तमान में दूध वितरण का समय सुबह 6 बजे से 8 बजे तक है, उस समय में यदि छोटे किसान स्वयं साइकिल अथवा दोपहिया वाहन से सब्जी विक्रय करते हैं तो इसकी अनुमति रहेगी। समय का कड़ाई से पालन किया जावे। इस व्यवस्था में भी आपस में पर्याप्त दूरी बनाई रखी जावेगी। अपर कलेक्टर श्री जेपी सचान ने बताया कि समिति ने यह भी विचार किया कि दोनों व्यवस्थाओं यथा किसान समृद्धि बाजार एवं कृषकों द्वारा स्वयं सब्जी लाकर बेचने में यह प्रेरित किया जावेगा कि पूर्व से पैकेट बनाकर आगामी कुछ दिनों में वितरण व्यवस्था सुनिश्चित की जावे। पैकेट इस प्रकार बनाए जावे कि सभी वर्ग के  लोग इसको अपनी क्षमता से क्रय कर सकें, जैसे 25 रूपए, 50 रूपए या 100 रूपए। इससे समय भी बचेगा एवं विक्रय व्यवहार के समय भीड़ एवं दूरी के उद्देश्य भी पूरा हो सकेगा। जिले के समस्त नगरीय क्षेत्र हेतु कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सह इंसिडेंट कमाण्डर, संबंधित सहयोगी अधिकारी के साथ नियमानुसार उपरोक्त व्यवस्था लागू कराते रहेंगे।

कोरोना का कहर : खेतों से घरों तक पहुंच गई फसलें, कब खुलेंंगी मंडी और कब से होंंगा गेंहू का उपार्जन ?


अब खर्च के लिए रुपए तक नहीं कि सानों के पास, कि सान बोले-मंडी खुलने से ही खत्म होगी परेशानी

अनाज से भरे कि सानों के घर, जेब में रुपए नहीं, बढ़ रही परेशानियां

जिलेभर के कि सानों की एक सी स्थिति, कोरोना से बचाव के बीच परेशानी में गुजर रहे दिन, समर्थन मूल्य पर 15 अप्रैल से शुरू होगी खरीदी

के प्शन- घरों में जगह नहीं होने के कारण कि सानों ने घरों के बाहर ही लगा रखे हैं उपज के ढेर। नईदुनिया।

केप्शन- ग्राम कु चड़ौद में खेत-खलिहान में रखी लहसुन फसल, मंडी खुलने का इंतजार कर रहे कि सान। .

मुलतापी समाचार

बैैैैैैैैतूल। रबी सीजन की फसलों की कटाई के बाद उपज कि सानों के घरों में पहुंच गई है। लेकि न मंडियां बंद होने के कारण कि सानों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। घर उपज से भरे हैं पर जेबों में रुपए नहीं हैं। फसल की बोवनी से अब तक कि सान ने खर्च ही कि ए हैं, अब फसल विक्रय के बाद ही सभी खर्च निकलेंगे। फसल नहीं बेच पाने के कारण कई कि सान अपने खेतों में काम करने वाले मजदूरों को रुपए भी नहीं दे पा रहे हैं। कि सानों का कहना है कि खर्च के लिए रुपए भी नहीं हैं। एक-एक दिन बहुत दिक्कतों के साथ निकल रहा है। खेतों से सीधे मंडी में उपज पहुंचाने वाले कि सानों को दोहरी परेशानियां हो रही हैं, घरों में उपज रखने की जगह भी नहीं और मंडी खुलने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। इसके कारण कई कि सानों ने घरों के बाहर ही उपज के ढेर लगा रखे हैं। गेहूं के कि सानों के लिए राहत की बात यह है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 15 अप्रैल से शुरू हो रही है।

कुओं में पर्याप्त पानी एवं मौसम भी अनुकूल बना रहने से इस साल रबी सीजन में गेहूं, मेथी, लहसुन सहित सभी फसलों का बंपर उत्पादन हुआ है। बोवनी से लेकर फसल कटाई और उपज को घर व खलिहानों तक पहुंचाने के लिए कि सानों ने अब तक खर्च ही कि या है। सभी खर्च उपज विक्रय से ही निकलता है। लेकि न कोरोना से बचाव के लिए लगाए गए लॉक डाउन के कारण मंडियां बंद हैं। इसके कारण कि सानों की परेशानियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। कई कि सानों ने मजदूरों से फसल कटवाई है, अभी उनके पास मजदूरों को देने के लिए रुपए भी नहीं हैं। इसके अलावा खर्च तक के रुपए नहीं बचे हैं। सब कु छ फसल विक्रय पर ही निर्भर है। एक तरफ कि सानों के घर अनाज से भरे पड़े हैं लेकि न जेब खाली है, जिससे कारण दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। कि सानों का कहना है कि प्रशासन मंडी को चालू करे और जिले के बाहर से आने वाली उपज पर रोक लगाई जाए।