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कोटा से बैतूल के भी 20 विद्यार्थी वापस लाए


मुलतापी समाचार

बैतूल। राजस्थान के कोटा शहर में विभिन्ना परीक्षाओं के लिए कोचिंग कर रहे जिले के 20 विद्यार्थी भी लॉकडाउन में एक महीने से फंसे हुए हैं। प्रदेश सरकार ने कोटा में फंसे विद्यार्थियों को वापस लाने बसें भिजवाई हैं।

इनसे जिले के यह 20 विद्यार्थी और 1 विद्यार्थी की मां भी वापए लाए जाएंगे। यह सभी गुरुवार बैतूल पहुंचेंगे। इन सभी को 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रखा जाएगा।

कोटा में मौजूद विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए 21 अप्रैल को बसें कोटा पहुंच चुकी हैं। बुधवार को बसें वहां से रवाना हो जाएंगी। बसों में भी सभी को फिजिकल डिस्टेंस के साथ लाया जाएगा। यही कारण है कि इतने कम बच्चों को 2 बसों से लाया जाएगा। कोटा से लौटने वाले सभी विद्यार्थियों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव की दृष्टि से 14 दिन तक होम आयसोलेशन में रहने की हिदायत दी जाएगी। बैतूल आने पर इनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा।

कोटा के जेके लोन अस्पताल में 34 दिन में 106 बच्चों की मौत हुई, शुक्रवार को 2 बच्चियों ने दम तोड़ा, मानवाधिकार आयोग ने सरकार से मांगी रिपोर्ट


Kota News : इस बीच केन्द्र सरकार की टीम भी राजस्थान पहुंच गई है और शनिवार को अस्पताल का दौरा कर स्थितियों का जायजा लेगी।
  • जिन मासूमों की मौत हुई, उनके परिजन बोले- जेके लोन अस्पताल में मंत्री के लिए ग्रीन कारपेट बिछाने से क्या बीत रही, हमसे पूछें
  • भास्कर ने राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा से पूछा था- जयपुर से कोटा 4 घंटे दूर, वहां अब तक क्यों नहीं गए; मंत्री बोले- जयपुर से ही सिस्टम सुधार रहा हूं

कोटा (राजस्थान). जेके लोन सरकारी अस्पताल में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। शुक्रवार सुबह यहां एक और नवजात ने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची की मौत हुई, उसका 15 दिन पहले ही जन्म हुआ था। माता-पिता उसका नाम भी नहीं रख पाए थे। जयपुर से 4 घंटे की दूरी होने के बावजूद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने गुरुवार तक इस अस्पताल का दौरा नहीं किया था। शुक्रवार को वे अस्पताल पहुंचे तो प्रशासन ने रातों-रात अस्पताल का कायाकल्प कर दिया। सभी वार्ड में सफाई और पुताई हो गई। बेड पर नई चादरें बिछा दी गईं। मंत्री के स्वागत में ग्रीन कारपेट बिछा दिया गया। लेकिन जब किरकिरी हुई तो इसे हटा लिया। इस बीच, मंत्री के निरीक्षण के बाद अस्पताल में एक और बच्ची की मौत हो गई। इस तरह 34 दिन में 106 बच्चों की मौत हो चुकी है।

अस्पताल का कायाकल्प हुआ
अस्पताल में सुबह 8 बजे ही सभी डॉक्टर अपने कमरों में पहुंच गए थे। मरीजों और उनके परिजन से कहा गया कि वे स्वास्थ्य मंत्री के सामने सबकुछ अच्छा ही बताएं। मंत्री की आवभगत के लिए अस्पताल के मेन गेट पर बिछाए गए ग्रीन कारपेट पर मरीजों और उनके परिजन ने आपत्ति जताई। मरीजों का कहना था कि मंत्रीजी यहां किसी उद्घाटन समारोह में आ रहे हैं या अस्पताल की समस्याएं दूर करने? जिन मासूमों की मौत हुई, उनके परिजन बोले- जेके लोन अस्पताल में मंत्री के लिए ग्रीन कारपेट बिछाने से क्या बीत रही, हमसे पूछें। जेके लोन कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला इसी क्षेत्र से सांसद हैं। मंत्री रघु शर्मा के दौरे के चलते 10 भाजपा कार्यकर्ता विरोध के लिए अस्पताल पहुंचे थे, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। वहां कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे। 

बच्ची की दादी ने कहा- डॉक्टर कहते रहे कि सही कर देंगे
शुक्रवार सुबह जिस बच्ची की मौत हुई, उसकी दादी अनारा देवी ने बताया, ”बेटे ओम प्रकाश और बहू रेखा के घर 15 दिन पहले बेटी हुई थी। बच्ची का जन्म पास के गांव रूपाहेड़ा में ही हुआ था। तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उसे जेके लोन अस्पताल में रेफर किया गया था। बच्ची का ठीक से इलाज नहीं हुआ। इस अस्पताल में न जाने कितने ही बच्चे मर गए। डॉक्टर फिर भी कहते रहे कि सही कर देंगे। फिर भी सही नहीं हुई। बीमारी के बारे में हम तो जानते नहीं। डॉक्टर ही जानता है।” जब भास्कर ने डॉक्टरों से इस बारे में पूछा तो उनका कहना था कि बच्ची प्री-मैच्योर थी।

मंत्री के दौरे के बाद एक और बच्ची की मौत हुई
स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद जिस एक और बच्ची की मौत हुई, वह दोसा की रहने वाली थी। उसका नाम टीना था और वह 5 महीने की थी। उसके पिता लालाराम ने बताया कि बच्ची को पहले बूंदी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां उपचार नहीं होने पर उसे कोटा रेफर कर दिया गया। जेके लोन अस्पताल में वे उसे सुबह 11 बजे लेकर आए थे। शाम 5:30 बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। 

दौरे के बाद मंत्री ने राहुल-प्रियंका को टैग कर ट्वीट किए

Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINCFollowFollow @RaghusharmaINCMore

आज कोटा में जेकेलोन अस्पताल का दौरा किया और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग कर पूरे मामले की विस्तार से जानकारी ली। दिसंबर माह में कुल 1438 बच्चे भर्ती हुए जिसमे से 100 बच्चों की मृत्यु हुई। @RahulGandhi @priyankagandhi @ashokgehlot51 @avinashpandeinc (1/4)

6:35 AM – 3 Jan 2020

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  1. Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINC 1h1 hour agoMoreजिन बच्चों की मृत्यु हुई उनमे से 70 न्यू बोर्न इंटेंसिव केअर यूनिट(NICU) में भर्ती हुए इनमें से ज्यादातर बच्चों का वजन जन्म के समय 2.5 किलो से कम था, उनमें से 49 बच्चे अत्यंत गंभीर थे। एक भी बच्चे की मृत्यु होना हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इस पर राजनीति होना गलत है। (2/4)5 replies16 retweets30 likesReply 5 Retweet 16 Like 30
  2. Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINC 1h1 hour agoMore15 जनवरी तक सेंट्रलाइज्ड ऑक्सिजन लाइन लगाने के हमने निर्देश दे दिए हैं साथ ही अस्पताल प्रशासन के पास 6 करोड़ का पर्याप्त बजट उपलब्ध था अधिकांश इक्विपमेंट्स को सुधार दिया गया है और बाकी को तुरंत सुधरवाने या नए लेने के निर्देश दे दिए हैं।(3/4)4 replies24 retweets55 likesReply 4 Retweet 24 Like 55
  3. Dr. Raghu Sharma‏Verified account @RaghusharmaINC 1h1 hour agoMoreजिन भी लोगों ने लापरवाही बरती है उन पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। मौके पर प्रभारी मंत्री श्री प्रताप सिंह खाचरियावास जी और एमएलए श्री दानिश अबरार जी साथ में मौजूद रहे। (4/4)7 replies22 retweets58 likesReply 7 Retweet 22 Like 58

पिछले महीने जेके लोन अस्पताल में बच्चे लगातार दम तोड़ते रहे, लेकिन मंत्री रघु शर्मा खुद कोटा जाने की बजाए जयपुर में बयानबाजी कर पिछली भाजपा सरकार के वक्त बच्चों की मौतों का आंकड़ा बताते रहे। जब 25 दिसंबर के बाद आंकड़ा अचानक बढ़ने लगा तो उन्होंने सिर्फ एक जांच कमेटी को कोटा भेजकर इतिश्री कर ली। इसकी रिपोर्ट पर सिर्फ कुछ डॉक्टरों को इधर-उधर किया गया। गुरुवार को भास्कर ने जब रघु शर्मा से पूछा कि जयपुर से कोटा 4 घंटे की दूरी पर है, अब तक क्यों नहीं गए? तो जवाब था- जयपुर से ही सिस्टम में सुधार कर रहा हूं। कोटा तो कभी भी चला जाऊंगा।


भास्कर पड़ताल : जिन अस्पतालों में बच्चों का होता है इलाज, वहां 44 वेंटीलेटर, 1430 वार्मर खराब
प्रदेश में हर साल 28 दिन से कम उम्र में ही 34 हजार से ज्यादा बच्चे दम तोड़ देते हैं। यदि एक वर्ष तक की उम्र में जाएं तो यह आंकड़ा 41 हजार से अधिक तक चला जाता है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के लिए काम आने वाले 230 में से 44 वेंटीलेटर तो खराब हैं। वहीं प्रदेश भर में 1430 वार्मर खराब हैं। नतीजतन हर उम्र के प्रति सप्ताह 490 से अधिक बच्चेदम तोड़ रहे हैं।

सरकारी अस्पतालकितने वेंटीलेटर खराब
बीकानेर6
अजमेर4
भरतपुर5
जयपुर6
जोधपुर7
उदयपुर5
काेटा11

(आंकड़ा 21 दिसंबर 19 तक)

हर दिन 180 बच्चे रेफर हो रहे
जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में सुविधाएं नहीं होने की वजह से मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर) में हर दिन औसतन 180 बच्चे रेफर होकर आते हैं। प्रदेश के एक करोड़ 72 लाख बच्चों के लिए 124 डॉक्टर्स की सख्त जरूरत है। सरकारी अस्पताल संचालक मशीनों के खराब होने की जानकारी ई-उपकरण पोर्टल पर नहीं देते। वजह यह कि निजी लैब संचालकों से उनकी सांठगांठ होती है। कई सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी का एक भी डॉक्टर नहीं है। किसी बच्चे को कार्डियो, न्यूरो और नेफ्रो सम्बन्धी बीमारी होती है तो उसके लिए इलाज संभव नहीं है।