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बड़ी खबर देसी गाय के उत्पाद से निर्माण कर 5 से 10 हजार की आय प्राप्त कर सकते है प्रतिमाह


मुलतापी समाचार

मुलताई। गायत्री पाक्तिपीठ मुलताई में गौ विज्ञान, गौ संवर्धन, गो उत्पाद निर्माण, गौ नस्ल सुधार, गौ आधारित कृषि एवं स्यावलंबन प्रशिक्षण कार्यशाला रविवार जो आयोजित हुई। प्रशिक्षण का शुभारंभ स्वानंद गौशाला सॉसर जिला छिंदवाड़ा के संचालक एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक डा. जीतेंद्र भकने ने डॉ भाग्यश्री भकने एवं गायत्री ट्रस्ट मुलताई के मुख्य ट्रस्टी संपतराव धोटे ने गायत्री परिवार के सदस्यों एवं प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन कर किया। प्रशिक्षण के प्रारंभिक सत्र में डॉ भकने ने देशी गाय के महत्व को बताते हुए कहा कि केवल देशी गाय के गोबर और गोमूत्र का सही उपयोग किया जाए तो 5 से 10 हजार रुपए प्रति माह एक गाय से कमाया जा सकता है।गाय के गोमूत्र अर्क सेवन से हजारों बीमारियां दूर होती है। व्यक्ति जीवन में कभी बीमार नहीं हो सकता।

देसी गाय के रीढ़ की हइडी ने सूर्य नाड़ी होती है जो सूर्य से ऊर्जा लेकर स्वर्णकार का निर्माण करती है जिससे गाय के दूध का रंग पीला स्वर्ण युक्त एवं पौष्टिकता से भरपूर बनता है। इस प्रकार देशी गोवधा के नस्ल के सुधार के बारे में भी प्रशिक्षण देते हुए बताया कि जिस गाय के बछड़े को भरपूर दूध पीने को मिलेगा यह हष्ट पुष्ट होगा एवं बछिया भी हष्ट पुष्ट होकर ज्यादा दूध देने वाली गाय बनती है।इसलिए गाय के बछड़ों को भरपूर दूध पिलाना आवश्यक है। जिससे देशी गाय की नस्ल को सुधारा जा सकता है। उन्होंने गो उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण देते हुए दीपक, अगरबत्ती ,साबुन हवन कुंड, गणेशजी एवं राधा कृष्ण जी की मूर्तियां, गृह सज्जा की वस्तुएं शुभ लाभ जैसे छोटे-छोटे आकर्षक एवं सुंदर वस्तुओं का गाय के गोबर से निर्माण करना बताया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने भी स्वयं सामग्री बनाकर तैयार की। प्रशिक्षक डॉ भकने ने केयल गाय के गोबर से ही अनेक प्रकार के गृह सज्जा की वस्तुओं सहित धूपबत्ती अगरबत्ती निर्माण करना बताया साथ ही वस्तुओं के निर्माण हेतु सांचे बनाने का प्रशिक्षण दिया। गाय के गोबर से गोमय भस्म दंतमंजन, उबटन, गोमूत्र अर्क पयं कीटनाशक दवाई गोमूत्र से केचुआ खाद इत्यादि निर्माण करने का भी प्रशिक्षण दिया।


105 लोगो ने लिया प्रशिक्षण
गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी नारायण देशमुख ने बताया कि प्रशिक्षण में विकासखंड मुलताई पवं विकास खंड प्रभात पट्टन के 105 प्रशिक्षणार्थी भाई बहनों ने भाग लिया। जिसमें मुलताई, चौथिया, सांडिया, जामगांय, खेडीकोर्ट ,कुजया, घाट बिरोली, नरखेड भोपाल गोपालतलाई बघोड़ा,सिरसाबाड़ी, चंदोरा कला, मंगोना कला, पारडसिंगा,परमंडल खड़आमला, जाम,मासोद साईखेड़ा सहित करीब 40 ग्रामों के भाई बहनों ने भाग लिया। आगामी समय में ग्राम नरखेड में बनने वाले गा विज्ञान एवं स्वावलंबन प्रशिक्षण केंद्र में भी इसी प्रकार गौ आधारित प्रशिक्षण सत्र चलाकर किसानों एवं गौ पालकों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य गायत्री परिवार मुलताई डारा किया जाएगा। इस अवसर पर साधकों को गायत्री महामंत्र लेखन की पुस्तिका भी वितरित की गई

बड़ी खबर देशी गाय के उत्पाद से निर्माण कर 5 से 10 हजार की आय प्राप्त कर सकते है प्रतिमाह


मुलतापी समाचार

यह प्रशिक्षण आज के समय में व्याप्त बेरोजगारी को दूर करने महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं

मुलताई। गायत्री पाक्तिपीठ मुलताई में गौ विज्ञान, गौ संवर्धन, गो उत्पाद निर्माण, गौ नस्ल सुधार, गौ आधारित कृषि एवं स्यावलंबन प्रशिक्षण कार्यशाला रविवार जो आयोजित हुई। प्रशिक्षण का शुभारंभ स्वानंद गौशाला सॉसर जिला छिंदवाड़ा के संचालक एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक डा. जीतेंद्र भकने ने डॉ भाग्यश्री भकने एवं गायत्री ट्रस्ट मुलताई के मुख्य ट्रस्टी संपतराव धोटे ने गायत्री परिवार के सदस्यों एवं प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन कर किया। प्रशिक्षण के प्रारंभिक सत्र में डॉ भकने ने देशी गाय के महत्व को बताते हुए कहा कि केवल देशी गाय के गोबर और गोमूत्र का सही उपयोग किया जाए तो 5 से 10 हजार रुपए प्रति माह एक गाय से कमाया जा सकता है।गाय के गोमूत्र अर्क सेवन से हजारों बीमारियां दूर होती है। व्यक्ति जीवन में कभी बीमार नहीं हो सकता।

देसी गाय के रीढ़ की हइडी ने सूर्य नाड़ी होती है जो सूर्य से ऊर्जा लेकर स्वर्णकार का निर्माण करती है जिससे गाय के दूध का रंग पीला स्वर्ण युक्त एवं पौष्टिकता से भरपूर बनता है। इस प्रकार देशी गोवधा के नस्ल के सुधार के बारे में भी प्रशिक्षण देते हुए बताया कि जिस गाय के बछड़े को भरपूर दूध पीने को मिलेगा यह हष्ट पुष्ट होगा एवं बछिया भी हष्ट पुष्ट होकर ज्यादा दूध देने वाली गाय बनती है।इसलिए गाय के बछड़ों को भरपूर दूध पिलाना आवश्यक है। जिससे देशी गाय की नस्ल को सुधारा जा सकता है। उन्होंने गो उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण देते हुए दीपक, अगरबत्ती ,साबुन हवन कुंड, गणेशजी एवं राधा कृष्ण जी की मूर्तियां, गृह सज्जा की वस्तुएं शुभ लाभ जैसे छोटे-छोटे आकर्षक एवं सुंदर वस्तुओं का गाय के गोबर से निर्माण करना बताया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने भी स्वयं सामग्री बनाकर तैयार की। प्रशिक्षक डॉ भकने ने केयल गाय के गोबर से ही अनेक प्रकार के गृह सज्जा की वस्तुओं सहित धूपबत्ती अगरबत्ती निर्माण करना बताया साथ ही वस्तुओं के निर्माण हेतु सांचे बनाने का प्रशिक्षण दिया। गाय के गोबर से गोमय भस्म दंतमंजन, उबटन, गोमूत्र अर्क पयं कीटनाशक दवाई गोमूत्र से केचुआ खाद इत्यादि निर्माण करने का भी प्रशिक्षण दिया।


105 लोगो ने लिया प्रशिक्षण
गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी नारायण देशमुख ने बताया कि प्रशिक्षण में विकासखंड मुलताई पवं विकास खंड प्रभात पट्टन के 105 प्रशिक्षणार्थी भाई बहनों ने भाग लिया। जिसमें मुलताई, चौथिया, सांडिया, जामगांय, खेडीकोर्ट ,कुजया, घाट बिरोली, नरखेड भोपाल गोपालतलाई बघोड़ा,सिरसाबाड़ी, चंदोरा कला, मंगोना कला, पारडसिंगा,परमंडल खड़आमला, जाम,मासोद साईखेड़ा सहित करीब 40 ग्रामों के भाई बहनों ने भाग लिया। आगामी समय में ग्राम नरखेड में बनने वाले गा विज्ञान एवं स्वावलंबन प्रशिक्षण केंद्र में भी इसी प्रकार गौ आधारित प्रशिक्षण सत्र चलाकर किसानों एवं गौ पालकों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य गायत्री परिवार मुलताई डारा किया जाएगा। इस अवसर पर साधकों को गायत्री महामंत्र लेखन की पुस्तिका भी वितरित की गई