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रामायन की सीता के लिए कई ऑडिशन्स के बाद मिला था रोल -Deepika Chikhaliya


Ramayan me Sheeta ji Rol Play -Deepika Chikhaliya

Multapi Samachar

इन दिनों दूरदर्शन पर Ramayan का प्रसारण सुबह और रात को रोजाना हो रहा है। लॉकडाउन के बीच लोग इस पौराणिक सीरियल का लुत्फ ले रहे हैं। सीरियल में निभाया गया हर किरदार उसे निभाने वाली की जिंदगी से जुड़ गया और आज भी उन्हें देखकर लगता है सच में वो किरदार जिंदा है। फिर से टेलिकास्ट हो रहे इस सीरियल ने टीआरपी के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ऐसा ही एक किरदार है माता Sita का। रामायण में यह किरदार Deepika Chikhaliya ने निभाया था। हालांकि, इसके बाद दीपिका ने जैसे छोटे पर्दे को अलविदा ही कह दिया।

हालांकि, रामायण में काम के पहले दीपिका ने कई टीवी शो में काम किया था। दीपिका ने रामानंद सागर के ही सीरियस ‘विक्रम बेताल’ में कई कहानियों में रानी का रोल किया है। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें रामायण में सीता का रोल पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालांकि, उन्हें वो पहचान मिल चुकी थी जिसकी वजह से उन्हें काफी काम मिलने लगा था लेकिन इसके बावजूद उन्हें ऐसा रोल नहीं मिला था जो उनकी तकदीर बदल दे।

एक इंटरव्यू में में दीपिका ने कहा था ”जब उन्हें स्क्रीनप्ले राइटर ने बताया कि रामानंद सागर ‘रामायण’ बना रहे हैं और मुझे इसके लिए स्क्रीन टेस्ट देना चाहिए। यह जानकर मैंने सागर साहब से बात की। रामानंद सागर मुझसे बोले कि आपने पहले कहा था सीता के लिए लेकिन तब रामायण नहीं बन रही थी लेकिन अब काम चल रहा है तो आकर स्क्रीन टेस्ट दे दो। इसके साथ ही सागर जी ने कहा कि वो तब तक सीता का कैरेक्टर तय नहीं करेंगे जब तक मैं उस हिसाब से ड्रेस और डायलॉग फ्रीज नहीं कर देती।”

बता दें कि दीपिका के अलावा 20-25 लड़कियों ने उस समय सीता के किरदार के लिए स्क्रीन टेस्ट दिया था। इसके लिए सभी को 4-4 पेज दिए गए थे जिसमें डायलॉग्स थे। दीपिका ने बताया ”रामानंद सागर डायलॉग बोल रहे थे और हमें चलकर सामने से आना था। उन्होंने कहा कि अब ऐसे आओ जैसे राम वनवास को जा रहे हैं। इसी वक्त वो हर चीज का मॉक टेस्ट भी ले रहे थे। इतने सब के बाद जब रामानंद सागर ने सब खत्म किया तब अंत में कहा कि यही हमारे सीरियल के लिए सीता होगी।”

CAA पर विरोध के बीच पुरी के शंकराचार्य बोले- भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए


पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा कि भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए।

नागरिकता संशोधित कानून (CAA) को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी विरोध के बीच पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कहा कि भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए। पुरी में गोवर्धन मठ में अपने निवास में पत्रकारों से बात करते हुए, सरस्वती ने कहा कि दुनिया के कुल 204 देशों में से कई को मुस्लिम और ईसाई देश घोषित किया गया है, जबकि हिंदुओं के लिए ऐसा कोई देश नहीं है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में हिन्दू राष्ट्र नहीं हैं। ऐसे में पहले चरण में भारत, नेपाल और भूटान को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा है कि बाकी देशों में सताए जा रहे हिन्दुओं को इन तीन देशों में पुनर्वासित किया जाना चाहिए।   शंकराचार्य ने कहा कि यदि कोई मुस्लिम किसी अन्य देश में खुद को उपेक्षित महसूस करता है और किसी विशेष राष्ट्र को छोड़ना चाहता है, तो उसे किसी भी मुस्लिम राष्ट्र में पुनर्वासित किया जाना चाहिए।

नागरिकता संशोधित कानून पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान में हुए हिंसा और अशांति से बचा सकता था अगर इसको लाने से पहले उचित परामर्श, चर्चा और लोगों के बीच जागरूकता के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए होते। बता दें कि ओडिशा के कुछ हिस्सों कटक और नियाली क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया। शंकराचार्य की टिप्पणी उस समय आई है जब केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सीएए का विरोध करने के लिए ओडिशा समेत 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। 

नागरिक संशोधन अधिनियम के समर्थन में संसद में मतदान करने वाले बीजू जनता दल ने आज राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के समर्थन में कहा कि इसमें कुछ भी नहीं है। BJD के प्रवक्ता प्रताप देब ने कहा कि 2020 का NPR, एनपीआर 2010 जैसा ही है। देश के लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आकलन करना आवश्यक है। राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को प्रमुख जनगणना अधिकारियों के रूप में नामित करके जनगणना कार्यों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी तरह, इसने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों को जिला जनगणना अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया।

मुलतापी समाचार न्‍युज नेटवर्क