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12 घण्टे से पीएम कराने मृत बेटी को सीने से लगाकर अस्पताल में बैठे रही नाबालिग मां,लिखा पढ़ी में ढला दिन,


यह खबर आपको झकझोर देगी की किस तरह जिला अस्पताल प्रशासन की संवेदनाएं मर गई है ।

मुलतापी समाचार

बैतूल ।जिला अस्पताल में एक नाबालिग मां अपनी मृत बच्ची को सीने से लगाकर 12 घण्टे इन्तेज़ार करती रही कि कोई तो उसका पुरसाने हाल पूछेगा ।कोई तो मदद के लिए आएगा ।कोई तो मृत बच्ची ओर उसे उसके गांव तक छुड़वायगा । भूखे प्यासे उसने एक जगह बैठे बैठे ही पूरा दिन बिता दिया ।सिपाही आया तो वह भी 3 घण्टे तक डॉक्टरों को ही ढूंढता रहा । यह मामला आज का ही है ।जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के सामने बीते बारह घण्टे से अपनी मृत बच्ची को लेकर बुआ के साथ बैठी नाबालिग मां का है । आमला थाना क्षेत्र के की आदिवासी युवती के पिता ने मार्च में गांव के ही सजातीय युवक की थाने में शिकायत की थी कि उसकी बेटी के साथ युवक ने दुराचार किया है ।दुराचार की शिकायत के बाद युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जंहा से उसे जेल भेज दिया गया फिलहाल युवक जेल में है । इधर दुराचार की शिकार नाबालिग मां बन गई । युवती ने गांव में ही 4 दिन पूर्व बच्ची को जन्म दिया बच्ची 7 माह की थी इसलिए उसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती रखा गया जंहा आज सुबह लगभग 5 बजे मौत हो गई ।

सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे तक नाबालिग मां इस इन्तेज़ार में भूखे प्यासे अपनी बुआ के साथ बैठे रही । पीड़ित की बुआ ने बताया कि सुबह से बैठे है लेकिन कोई यह नही बता रहा कि हम को गांव कब और कौन छोड़ेगा ।यह पूछने पर की सुबह से खाना खाया या नही तो उनका जवाब था कि खाना तो आया था लेकिन लिखा पढ़ी में खाना नही ले पाए इस लिए भूखे ही बैठे हुए है सुबह चाय भर पी थी । मौके पर मौजूद प्रत्यक्ष दर्शी के मुताबिक डॉक्टरों ने मृत बच्ची का वजन किया आधार कार्ड अन्य कागज़ात देखे तब जाकर पूरी लिखा पढ़ी की गई शाम लगभग 5 बजे मृत बच्ची को पोस्टमार्टम के लिये भेजा गया ।तब तक भी किसी डॉक्टर या स्टाफ ने मानवता नही दिखाई किसी ने यह भी न पूछा कि सुबह से तुमने खाया या नही कुछ मिला या नही ।

इनका कहना है । मृत बच्ची का डीएनए टेस्ट होना था कागज़ी कार्यवाही में समय लगता है ।सिपाही डॉक्टर को नही ढूढ़ पाया यह उसकी गलती है ।ड्यूटी डॉक्टर की कोई लापरवाही नही है उसके लिए केसुअलटी पहली प्राथमिकता है ।इसमें प्रबंधन की कोई लापरवाही नही है ।

डा अशोक बारंगा सिविल सर्जन जिला अस्पताल बैतूलई