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छोटे अख़बारों को विज्ञापन की संजीवनी जरुरी-ललिता यादव


मूलतापी समाचार

पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उठाई समाचार पत्रों की समस्या
छतरपुर। कोरोना काल में स्वास्थ्य और पुलिसकर्मियों की तरह अपना फर्ज निभा कर शासन की सटीक सूचनाएं आमजन तक पहुंचा रहे स्थानीय समाचार पत्र भी कोरोना योद्धा से कम नहीं हैं। पूर्व मंत्री श्रीमती ललिता यादव ने इन समाचार पत्रों को संबल प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर उन्हें विज्ञापन रूपी संजीवनी देने की मांग की है।

पूर्व मंत्री श्रीमती ललिता यादव ने कहा कि जिला स्तर पर निकलने वाले समाचार पत्र मध्य प्रदेश सरकार व केन्द्र सरकार से विज्ञापन न मिलने के कारण बेहद दयनीय स्थिति से गुजर रहे हैं। टीव्ही व बड़े समाचार पत्रों को तो बहुत बड़ी राशि के विज्ञापन हर समय दिये जाते है। छोटे व जिला स्तर पर निकलने वाले समाचार पत्र विज्ञापन न मिलने से बेेहद तंगी का सामना कर रहे हैं। क्योंकि इन्हें बड़े समाचार पत्रों की तरह न तो प्राइवेट विज्ञापन और नगर पालिका, नगर निगमों के विज्ञापन मिलते हैं और न ही जनसम्पर्क व डीएवीपी से मिल रहे है। इतना ही नहीं इन समाचार पत्रों के विज्ञापन भुगतान भी लम्बे समय से न होने से ठण्डे बस्ते में पड़े हैं। जिसके कारण समाचार पत्र के संचालकों को समाचार पत्रों में कार्य करने वालो को वेतन व सामग्री खरीदने के लाले पड़े है।
उन्होंने बताया कि इसके पहले कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने भी ज्यादातर विज्ञापन राज्य स्तर पर निकलने वाले समाचार पत्रों में ही दिये जिसके कारण जिला स्तर से निकलने वाले समाचार पत्र डीएवीपी व प्रदेश की विज्ञापन सूची में शामिल होने के बाद भी विज्ञापनों से वंचित रहे।

पूर्व मंत्री श्रीमती ललिता यादव ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार होने से समाचार पत्रों के प्रकाशकों को उम्मीद बढ़ी है कि अब बिना भेदभाव के पूर्व की तरह सभी समाचार पत्रों को विज्ञापन मिलेंगे। अभी कोरोना के भयावह प्रकोप के दौरान स्थानीय समाचार पत्र प्रतिदिन प्रकाशित होकर जिला स्तर पर राज्य सरकार व केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों को जन-जन तक पहुंचाने का बहुत अच्छा कार्य कर रहे है।
पूर्व मंत्री श्रीमती ललिता यादव ने अनुरोध किया कि जिला स्तर पर निकलने वाले विज्ञापन सूची के समाचार पत्रों को भी अन्य सभी समाचार पत्रों की तरह ही प्रदर्शन विज्ञापन दिलाए जायें। साथ ही ऐसे समाचार पत्रों को भी विज्ञापन समय-समय पर दिये जावे जो सूची में नहीं है लेकिन मापदण्डों के तहत समाचार पत्रों का प्रकाशन कर रहे है। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार द्वारा समाचार पत्रों को कोरोना योद्धा मानकर भरपूर विज्ञापन देने के साथ पूरा भुगतान किया गया है जिसकी चारों तरफ प्रशंसा हो रही है। उन्होंने मध्य प्रदेश में भी यही रणनीति अपनाने पर जोर दिया है।