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आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने में महिला स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में महिला स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार द्वारा उन्हें  विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए आगामी समय में 1433 करोड़ रूपए के कार्य दिलाए जाएंगे। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अपने गांव और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार स्थानीय वस्तुओं का निर्माण करें। उन्हें बाजार उपलब्ध कराने में सरकार उनकी मदद करेगी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय से वीडियो कान्फ्रेंसिंग एवं वैब लिंकिंग के माध्यम से प्रदेश के महिला स्व-सहायता समूहों की लगभग 10 लाख महिलाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वीसी के माध्यम से जिलों के एनआईसी केन्द्रों में उपिस्थत स्व-सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत भी की। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मनोज श्रीवास्तव उपस्थित थे।  

उप चुनाव में 24 सीटों पर ताल ठोकेंगे आरवीपी के कंडीडेट


राष्ट्रीय अध्यक्ष यादव ने की पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा

मुलतापी समाचार
भोपाल। एमपी में 24 सीटों पर होने वाले चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस पार्टी की तरह राष्ट्रीय वंचित पार्टी भी अपने कंडीडेट्स को चुनाव में पूरी दमखम के साथ उतारेगी। पार्टी ने अंदर ही अंदर चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार यादव ने हालही में मीडिया से रुबरू होते हुए कहा कि हम सभी सीटों पर अपने कंडीडेट्स उतारेंगे।अब एमपी की जनता दोनों ही शीर्ष दलों से उब चुकी है। सूबे की जनता को विकल्प की तलाश है, और वे विकल्प है राष्ट्रीय वंचित पार्टी।क्योंकि आज जो अवसरों और मूलभूत सुविधाओं से दूर हैं, वे सब वंचित हैं। चर्चा में
यादव ने कहा दो साल हो गए पार्टी को एमपी में काम करते हुए । जनता से सतत सम्पर्क करते हुए। इसबार के उप चुनाव में पार्टी जनता से जुड़े नेताओ को चुनाव में उतरेगी। उन्हे ही वंचितों का चेहरा बनाएगी। यादव ने कहा कि कांग्रेस के बागी विधायकों का चुनाव जीतना अब मुश्किल है। तो वहीं बीजेपी से नाराज नेता किसी दूसरी पार्टी को अपना समर्थन दे सकते हैं। कांग्रेस में भी गुटबाजी हावी है नेता अपनी -अपनी चलाएंगे तो विरोध होगा ही।
यादव ने कहा पार्टी को इस का लाभ पूरा-पूरा मिल सकता है । जनता ने साथ दिया तो चुनाव के दौरान हमारी पार्टी कांग्रेस और बीजेपी के लिए सिर दर्द बन सकती है।

MP : ज्योतिरादित्य सिंधिया मंत्रिपद के लिए अमित शाह से मिले


मुलतापी समाचार

मध्‍यप्रदेश । जनसेवा के लिए राजनीति करने का दावा करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले कुछ दिनों में कई बार बयान दिया है कि लॉक डाउन के कारण वह जनता के बीच नहीं आ पा रहे हैं, महाराजा सिंधिया इन दिनों दाढ़ी बढ़ाकर अपने ही घर में कैद हैं लेकिन अब खबर आई है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवराज सिंह के मंत्रिमंडल में अपने समर्थकों को आधी सीटें दिलाने के लिए अमित शाह से मुलाकात की है। 

खबर है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अमित शाह से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों के बीच मंत्रिमंडल के गठन को लेकर चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे सभी नेताओं को मिनिस्‍टर बनाने की वकालत की है। तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभु राम चौधरी, इमरती देव और प्रद्युम सिंह तोमर को मंत्री बनाना चाहते हैं

MP In ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक और फूट की आशंका


Madhy Pradesh Congress Cameti

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ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों सहित 22 विधायकों के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी में एक और फूट की आशंका बन गई है। इस बार बुंदेलखंड के चार विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के लगातार संपर्क में हैं। हालांकि राज्यसभा चुनाव टल जाने से इस फूट से कांग्रेस को कुछ समय की राहत जरूर मिल सकती है। कांग्रेस में एक महीने के भीतर एक साथ 22 विधायकों के कांग्रेस छोड़ने से जिस तरह सरकार गिरी है, उससे पार्टी को फिलहाल राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। बताया जाता है कि बुंदेलखंड के चार विधायक कभी-भी पार्टी को छोड़ सकते हैं। इनमें से तीन विधायक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं और एक ब्राह्मण हैं। इनमें से एक सिंधिया समर्थक बताए जाते हैं, जिन्हें विधानसभा का टिकट दिलवाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी। दो विधायक कमल नाथ के समर्थक माने जाते हैं। दो विधायक पिछले दिनों हुई राजनीतिक उठापटक में भाजपा नेताओं से मेल मुलाकात करते हुए भी नजर आ चुके हैं।

बुंदेलखंड में झटका लगेगा : बुंदेलखंड के सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर जिलों की 26 सीटों में से कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में 10 सीटें जीतें थीं, जो ग्वालियर-चंबल के बाद बड़ा हिस्सा थीं। मगर गोविंद सिंह राजपूत के पार्टी छोड़ने के बाद अभी यहां कांग्रेस के नौ विधायक बचे हैं। चार विधायकों के पार्टी छोड़ने पर बुंदेलखंड में भी कांग्रेस की विंध्य जैसी स्थिति बन जाएगी, जहां उनके पास कमलेश्वर पटेल जैसे गिनेचुने नेता बचे हैं।

22 में से ज्यादातर विधायक ग्वालियर-चंबल के

कांग्रेस के बागी 22 विधायकों में 15 ग्वालियर-चंबल के हैं। इनमें प्रद्मुम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसौदिया, एदल सिंह कंषाना, रघुराज सिंह कंषाना, गिर्राज डंडौतिया, कमलेश जाटव, ओपीएस भदौरिया, रणवीर जाटव, मुन्नालाल गोयल, रक्षा सरोनिया, जसमंत जाटव, सुरेश धाकड़, जजपाल सिंह जज्जी और बृजेंद्र सिंह यादव हैं। जबकि मालवा के चार हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव, मनोज चौधरी और तुलसीराम सिलावट हैं तो बुंदेलखंड के गोविंद सिंह राजपूत, महाकोशल के बिसाहूलाल सिंह, भोपाल क्षेत्र के डॉ. प्रभुराम चौधरी हैं। होली पर इनके इस्तीफों से पड़ी फूट का नुकसान कांग्रेस को सबसे ज्यादा ग्वालियरचंबल में हुआ है।

अब क्या होंगा? कमलनाथ सरकार ने स्पीकर का दांव और कोरोना बन गयी की ढाल,


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मध्य प्रदेश की सियासत में सोमवार का दिन काफी अहम रहा. हर किसी की नज़र इसपर थी कि क्या कमलनाथ की सरकार विधानसभा में बहुमत साबित कर पाएगी. लेकिन विधानसभा स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति की तरफ से विधानसभा की कार्यवाही को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया. सदन की कार्यवाही को स्थगित करने के लिए कोरोना वायरस का कारण बताया गया है. हालांकि, बीजेपी ने बहुमत परीक्षण करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है.

जब विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को शुरू हुई तो राज्यपाल लालजी टंडन ने अपना अभिभाषण दिया. लेकिन उन्होंने सिर्फ भाषण की पहली और आखिरी लाइन ही पढ़ी. उसके बाद उम्मीद थी कि विधानसभा स्पीकर की तरफ से फ्लोर टेस्ट की इजाजत दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कार्यवाही स्थगित हुई. अब मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही 27 मार्च को शुरू होगी.

साफ है कि ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी के पास अपने विधायकों को मनाने और सरकार बचाने के अन्य रास्ते अपनाने के लिए वक्त मिल सकता है. बता दें कि अभी विधानसभा में कांग्रेस गठबंधन के पास 99 सीटें हैं, जबकि बीजेपी के पास 107 सीटें हैं.