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विश्व परिवार दिवस अवसर पर कविता प्रस्तुत- अशोक श्री


विश्व परिवार दिवस
पहाड़ों पर बैठकर तप करना आसान है!
लेकिन परिवार में सबके बीच में रहकर
धीरज रखना कठिन है !
और यही सबसे बड़ा तप है!
परिवार का हर छोटा या बड़ा सदस्य
हथेली में रखा हुआ एक नाजुक फूल है!
उसकी हिफाज़त ही हमारा उसूल है!
परिवार में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है!
कि हम आने वाली पीढ़ी के लिए
एक अच्छे आदर्श पूर्वज कहलाए!
जैसे बूढ़े बरगद की छाया
और बड़े बुजुर्गों की छत्रछाया!!
परिवार की शान
जीवन में सुख समृद्धि वैभव आलीशान

कवि अशोक श्री, बैतूल