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रुकेंगे कर्मचारियों के वेतन-भत्ते सत्र नहीं चला तो


सरकारी कर्मचाियों का फरवरी माह का वेतन अभी तक नहीं डला खाते में रोश

मुलतापी समाचार

भोपाल। प्रदेश में सियासी उठापटक के चलते वर्ष 2020-21 का बजट खटाई में पड़ गया है। विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई है। भाजपा कमलनाथ सरकार के अल्पमत में होने का दावा करते हुए पहले फ्लोर टेस्ट की मांग कर रही है। ऐसे में इस बात की संभावना कम ही है कि सदन में कोई अन्य कार्य हो सके। इसके चलते एक अप्रैल से सरकार के पास जरूरी खर्च करने के लिए भी बजट नहीं होगा क्योंकि विधानसभा ने 31 मार्च 2020 तक के लिए ही बजट पारित किया है। इस स्थिति में न तो लेखानुदान लाया जा सकता है और न ही अध्यादेश। बताया जा रहा है कि यदि बजट पारित नहीं हुआ तो अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते के साथ पेंशनर्स की पेंशन भी अटक जाएगी।वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा बजट 31 मार्च 2020 तक के लिए है। एक अप्रैल से वेतन-भत्ते सहित अन्य जरूरी खर्च के लिए विधानसभा की मंजूरी जरूरी है। इसके मद्देनजर ही 18 मार्च को सदन में बजट प्रस्तुत करना प्रस्तावित किया गया था। 26 मार्च तक विभागवार चर्चा कराकर इसे विधानसभा से पारित कर राज्यपाल लालजी टंडन को मंजूरी के लिए भेजा जाता।मंजूरी मिलते ही एक अप्रैल के पहले विनियोग विधेयक की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर विभागों को बजट आवंटन कर दिया जाएगा लेकिन प्रस्तावित प्रक्रिया सियासी घटनाक्रम में पूरी होती नजर नहीं आ रही है। बिना चर्चा बजट पारित कराने के लिए गिलोटिन भी लाया जा सकता है पर इसके लिए सदन चलना जरूरी है।26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित है और इसके बाद भी सामान्य कामकाज हो पाएगा, इसके आसार दूर-दूर तक नहीं है। ऐसे में न तो विनियोग विधेयक लाया जा सकता है और न ही लेखानुदान। विधानसभा चल रही है इसलिए अध्यादेश लाना भी संभव नहीं है। ऐसी सूरत में वित्त विभाग के पास कोई विकल्प नहीं बचा है।इसके मायने यह हुए कि गतिरोध समाप्त नहीं होता है तो एक अप्रैल से विभागों के पास खर्च के लिए बजट ही नहीं होगा। न तो विभाग अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन-भत्ते मिलेंगे और न ही पेंशनर्स को पेंशन। सरकार ने विभिन्न् वित्तीय संस्थाओं और बाजार से जो कर्ज लिया है, उसकी किश्त और ब्याज का भुगतान भी अटक जाएगा। हालांकि, कर्ज सरकार की सिक्योरिटी पर मिलता है, इसलिए इसमें कोई वैधानिक स्थिति तो नहीं बनेगी पर साख प्रभावित होती है।