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डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए दिया मकान,घर को क्वारंटाइन सेन्टर बनाया


मुलतापी समाचार

समीर पाठक

घोड़ाडोंगरी। लॉक डाउन में जनता और सरकार की मदद के लिए अनेकों दानवीर भामाशाह के रूप में सामने आ रहे हैं इसी कड़ी में घोड़ाडोंगरी के युवा समाजसेवी समीर पाठक ने अपना बजरंग कॉलोनी स्तिथ सर्वसुविधा से युक्त 7 कमरो सहित बड़े हॉल और टॉयलेट युक्त घर स्वास्थ्य विभाग को क्वारंटाइन सेन्टर के रूप में उपयोग करने के लिए निशुल्क उपलब्ध कराया है।

मुख्यालय का सरकारी अस्पताल जो कि इन दिनों साफ-सफाई और अच्छे इलाज के लिए जिले में चर्चित है अपने कुशल प्रबंधन और कार्यशैली से अस्पताल को नई रौनक देने वाले डॉक्टर संजीव शर्मा द्वारा कोरोना संक्रमण के इलाज मैं लगे डॉक्टरों को उनके परिवार की सुरक्षा के चलते घोड़ाडोंगरी में ही एक अलग निवास स्थान रहने के लिए चयनित किया गया है ताकि कोरोना मरीजों के इलाज के बाद उन्हें इस घर में परिवार से अलग रखा जाए ताकि डॉक्टरों का परिवार संक्रमण से पीड़ित ना हो जाए। वही ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी संजीव शर्मा द्वारा बताया गया कि कल से हमारी तैयारी प्रारंभ कर दी जावेगी उक्त घर को कर्मचारियों के रहने के लिए चिन्हित किया गया है। युवा समाजसेवी समीर पाठक ने कहा कि जनसेवा के लिए धन की नही आत्म बल की आवश्यकता होती है।

मुलताई गणेश मंडल के सदस्यों ने परिजनों को दी आर्थिक मदद


मुलतापी समाचार

मुलताई। मुलताई के पारेगांव रोड निवासी रमन शर्मा का लंबी बीमारी के चलते मंगलवार को निधन हो गया था। स्व. रमन शर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में बुधवार को गांधी चौक गणेश उत्सव मंडल द्वारा स्व. रमन शर्मा के परिवार को 8100 रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की। मंडल के नवनीत चंदेल, सुमित शिवहरे, प्रशांत भार्गव, पंकज अग्रवाल, विनय खंडेलवाल, मोनू मिश्रा, पवन जैन, रोहित मिश्रा, अमन शर्मा, सौरभ खंडेलवाल, गुड्डू रस्तोगी ने राशि एकत्रित कर पीडि़त परिवार को प्रदान करते हुए आगे भी यथासंभव सहायता का आश्वासन दिया। गांधी चौक के गणेश मंडल द्वारा हमेशा ही जन सेवा के प्रकल्प चलाए जाते है। मंडल द्वारा इसके पूर्व एक महिला को मदद दी गई थी, उसका मकान आगजनी में जलकर खाक गया था, तब मंडल के सदस्यों ने एक बड़ी राशि देकर महिला की मदद की थी। एक बार फिर मंडल के सदस्य जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए आगे आया है। परिजनों ने मंडल के सदस्यों का आभार व्यक्त किया है।

बैतूल बना मिसाल,बैतूल में जन सहयोग की कमी नही – my betul group




बैतूल: आप सभी को जान कर खुशी होगी कि इस विपदा की घड़ी में जहा,अन्य शहरों मे पलायन,अनाज की कमी की तस्वीर मीडिया में दिख रही है – वही हमारे बैतुल में जन सहयोग की कमी नही है

कल दिनांक 27 मार्च 2020 से चालू हुई दीनदयाल रसोई में अब तक 1400 लोगो का भोजन बन चुका है।।
जिसके लिए समाजसेवी कमलेश अमरुते बैतुल स्टोन हाउस के संचालक द्वरा 1 लाख रुपये
हेमन्त खंडेलवाल जी द्वारा 1 लाख रुपये
अतीत पवार एवं राजेश आहूजा जी द्वारा 50-50 हजार रुपये
श्री जी शुगर मिल द्वारा 700 पैकेट चावल-दाल(5KG)लगभग 1 लाख मूल्य की
एवं अन्य लोगो द्वरा 5000 रुपये की राशि की अब तक मदद की जा चुकी है।।

साथ ही 25 स्वयंसेवक युवा भाई अपना पूरा समय दे कर भोजनालय में पैकिंग व्यवस्था एवं भोजन वितरण व्यवस्था का मोर्चा संभाले हुए है।।

आज के प्रमुख पल –

  • विभीन्न अस्पताल में मरीज के साथ रह रहे परिजन।।
  • पुलिस ग्राउंड में भवन निर्माण में कार्यरत 52 लोग
  • न्यू बैतुल ग्राउंड में हरियाणा से आये 45 लोग
  • प्रमुख मार्गों में जीवन यापन करते 38 लोग
  • एवं बाहर से लोक डाउन में फंसे ट्रक वाले
  • शहर की विभिन्न झुग्गी व गंज ओजा ठाना में रह कर मजदूरी करते हैं।
  • 160 परिवार ये वो लोग है जिनके पास खाने की व्यवस्था नही है।

आगे आने वाले समय मे निरंतर ये संख्या बढ़ेगी अतः आम जन से अनुरोध है इनकी मदद के लिये आगे आ कर जनसहयोग प्रदान करे।।

अतः ये लोग अब से  लोकडाउन रहने तक दीनदयाल रसोई के आश्रित है।।

शिवा पवांर बैतूल
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My betul

Jeevan buwade

Shiva pawar

शिवा पवार मुलतापी समाचार बैतूल

बेसहारा लोगों को कराया भोजन देश में लॉकडाउन के समय


मुलताई के पुलिस विभाग के अधिकारियों द्वारा और मुलतापी समाचार द्वारा बे सहारा लोगों को भोजन कराते हुए

मुलतापी समाचार

मुलताई के पुलिस विभाग के अधिकारियों द्वारा और मुलतापी समाचार द्वारा बे सहारा लोगों को भोजन कराते हुए,। शारदा राम मनमोहन शैक्षणिक एवं समाज सेवा समिति द्वारा सेवा प्रदान की गई।

पूरा देश कोरोना वायरस जैसी बीमारी से जूझ रहा है इसके बावजूद भी मुलताई के पुलिस विभाग के अधिकारियों द्वारा और मुलतापी समाचार के संपादक द्वारा बे सहारा लोगों को भोजन कराने का कराया किया और अपनी इन्सानियत का फर्ज अदा किया।

वहीं पाथाखेड़ा सारणी बगडोना शोभापुर में कोरोना कर्फ्यू के चलते बेचारे गरीब लोग भूखे रह रहे हैं ऐसे में मैंने अपने घर से खाना बनवा कर उन गरीब तक पहुंचाने का काम किया और हमेशा करते रहूंगा मैं !! मुझे आज एक गरीब का फोन आया बोलते हैं भैया हमने सुबह से कुछ खाया नहीं है तो मैं तुरंत अपने घर से खाना बनवा कर पैकेट बनाकर देकर आया वह बहुत खुश हुए और कहे भैया आप हमेशा मदद करते हो मैंने कहा मेरे से जितना बनेगा मैं करूंगा!!
मैंने उनसे कहा अपने हाथ धोते रहना गंदगी से दूर रहना और घर से बाहर न निकलना उन्होंने कहा ठीक है भैया हम 21 दिन तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जैसा कहा है वैसा करेंगे और पुलिस प्रशासन सफाई कर्मी का साथ भी देंगे!!

!! इस पोस्ट से मैं जनता को और नेताओं को कहना चाहता हूं कि इस समय में गरीबों की मदद करिए यह नेतागिरी का टाइम अभी नहीं है जो व्यक्ति रोज ठेला मेहनत मजदूरी कर अपना पेट भरता था आज वह अपना पेट नहीं भर पा रहा है तो आप अपने तरफ से जो भी सहयोग हो आप हर तरह का सहयोग उस गरीब तक करिए जिस गरीब के पास एक वक्त का दाना नहीं हो !!

युद्ध से भी ज्यादा जीवन में साहस की जरुरत


Multapi samachar

भंडारे ,लंगर लगाना उतने साहस का काम नहीं, जितना बूढ़े माता-पिता को भोजन कराना

धार्मिक स्थानों पर सफाई करना उतने साहस का काम नहीं, जितना घर की साफ सफाई करना और बर्तन मांजना

उपदेश देना उतने साहस का काम नहीं जितना उसे आचरण में उतारना
भोपाल। परिस्थितियों के साथ साहस की परिभाषा भी बदलती रहती है। भीड़ में सबके साथ जूठी पत्तल उठाना और जूठे बर्तन साफ करने से ज्यादा साहस का काम घर में माता-पिता के बर्तन साफ करना होता है। पटृपूर्ति, हरिद्वार या धार्मिक- सार्वजनिक स्थानों पर सेवाएं देना साहस का काम नहीं, सास द्वारा बहू की घर में थाली धो देना उससे भी बड़ा साहस का काम है

गुरुद्वारे और धार्मिक स्थानों पर जूते -चप्पल साफ करना उतना साहस का काम नहीं है जितना कि अपने घर के सदस्यों के जूते चप्पल साफ कर देना।

बाहर झाड़ू लगाते हुए फोटो खिंचवा कर डीपी पर डालना उतना साहस का काम नहीं है जितना घर में झाड़ू लगाना।

धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई करना उतना साहस का काम नहीं है जितना घर में छोटे बच्चे द्वारा की गई गंदगी को साफ करना।

मृत्यु भोज को बंद करने पर भाषण देना उतने साहस का काम नहीं है जितना मृत्युभोज में भोजन न करना।

अस्वस्थ्य पत्नी को अस्पताल में भर्ती कर देना और हाटेल का भोजन करा देना उतने साहस का काम नहीं जितना कि स्वयं उसकी सेवा करना और स्वयं भोजन पका कर खिलाना । पति पत्नी दोनों सेवारत होने पर घर के काम भी पत्नी द्वारा ही कराना उतने साहस का काम नहीं जितना कि पति द्वारा उसे काम में सहयोग करना।

दहेज प्रथा पर निबंध लिखना या भाषण देना उतने साहस का काम नहीं है जितना कि दहेज न लेना।

पिछले दिनों एक अमीर व्यक्ति द्वारा गुरुद्वारे में जूते चप्पल साफ करते हुए वीडियो वायरल हुआ था जिसमें महंगी गाड़ी में उसे आते हुए दिखाया जाता है। गुरुद्वारे में उसे अपने बॉडीगार्ड के जूते चप्पल साफ करते हुए वीडियो वायरल हुआ है। गुरुद्वारे में जूते चप्पल साफ करना इतना साहस का काम नहीं है जितना कि उसका अपनी फैक्ट्री के मजदूरों के जूते चप्पल साफ करना। यदि वह अमीर जिस दिन अपनी फैक्ट्री के मजदूरों के जूते चप्पल साफ करने लगेगा उस दिन धार्मिक स्थल और गुरुद्वारे में जूते- चप्पल साफ करना उसके लिए अर्थहीन हो जाएगा।

इस तरह का साहस दिखाने पर जो अहंकार गलता है और जो विनम्रता ह्रदय में घर करती है उससे मिलने वाली खुशी, संतोष और आनंद किसी मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे और चर्च में मिलने वाली खुशी, संतोष और आनंद से भी बड़ा होता है।