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अजब है एमपी गजब है एमपी


अजब है एमपी गजब है एमपी दिल टूटने पर चाय की दुकान खोल ली और चाय दुकान का नाम रखा “बेबफा चाय वाला” , दुकान की फोटो जमकर हो रही है वायरल


बैतूल- आपने दिल टूटने के काफी किस्से सुने होंगे दिल टूटने पर टूटे दिल का आशिक क्या नही कर बैठता टूटे दिल का आशिक ठीक जख्मी खूंखार शेर के माफिक हो जाता है, पर आज हम आपको एक ऐसे आशिक की कहानी बताने जा रहे हैं जिसका दिल टूट गया पर उसने अपना- संयम नहीं छोड़ा ओर एक चाय की दुकान खोली और उसका नाम रखा “बेवफा चाय वाला” ।

दिल टूटने पर चाय की दुकान खोल ले और नाम रख दे बेवफा चायवाला आपको भले ही आश्चर्य हो रहा होगा लेकिन यहां हकीकत है। शाहपुर क्षेत्र के नेशनल हाईवे 69 पर स्थित डोडरामोहर गांव में एक चाय की दुकान है जिसका नाम है बेवफा चायवाला इस दुकान की फोटो सोशल मीडिया पर इन दिनों जमकर वायरल हो रही है। यहां तक कि लोग चाय पीने जाते हैं तो सेल्फी खींचना भी नहीं भूलते हैं क्योंकि इस नाम का बड़ा ही आकर्षक लोगों में बना हुआ है । बताया जाता है कि डोडरामोहर गांव के पास रेलवे क्रॉसिंग के पास एक लड़का जिसका नाम मंगल है उसने चाय की गुमटी खोल रखी है दुकान का नाम बेवफा चायवाला स्पेशल चाय कार्नर है।  जब चाय पीने वाले लड़के से पूछते हैं कि अपने दुकान का नाम बेवफा चाय क्यों रखा तब उसने बताया कि वह गांव की लड़की से प्रेम करता था उसने उसे धोखा दे दिया और शादी कर ली इसके बाद से ही उसने कोई गलत कदम नहीं उठाते हुए उनकी याद में बेवफा के नाम पर अपनी चाय की गुमटी खोल ली और गुमटी का नाम बेवफा चायवाला रख लिया। मंगल करीब 6 महीने से चाय की दुकान चला रहा है और अपना एवं अपने परिवार का जीवन यापन कर रहा है।

भव्या फाऊडेंशन जयपुर द्वारा बैतूल जिले के पत्रकार रामकिशोर पंवार को मिला सम्मान


भव्या फाऊडेंशन जयपुर द्वारा बैतूल जिले के पत्रकार रामकिशोर पंवार को मिला सम्मान

बैतूल में ताप्ती जल संरक्षण एवं उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए बैतूल के सासंद द्वारा सम्मानित

बैतूल – बीते माह पिंक सिटी जयपुर में आयोजित भव्या फाऊडेशन के द्वारा आयोजित अंतराष्ट्रीय मैत्री सम्मेलन और रेड डायमंड एचीवर एवार्ड 2020 के कार्यक्रम में लाकडाऊन के कारण भाग लेन नहीं पहुंच सके। पत्रकार रामकिशोर पंवार को जयपुर से मिला सम्मान एवं एवार्ड बैतूल जिला मुख्यालय पर भाजपा सासंद श्री दुर्गादास उइके ने प्रदान किया। उत्कृष्ट पत्रकारिता एवं ताप्ती नदी के जल संरक्षण को लेकर को लेकर काम कर रहे पत्रकार रामकिशोर पंवार दो दशक से ताप्ती नदी के धार्मिक महत्व एवं उसके जल संरक्षण के लिए कार्यरत है। श्री पंवार बीते चार दशक से जिले में पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री पंवार को उक्त सम्मान भव्या फाऊडेशन की निर्देशक डाँ श्रीमति निशा व्यास की अध्यक्षता में बनी चयन समिति द्वारा चयनीत कर दिया गया।
श्री पंवार बैतूल जिले से एक मात्र पत्रकार है जिन्हे भव्या फाऊडेशन के द्वारा आयोजित अंतराष्ट्रीय मैत्री सम्मेलन और रेड डायमंड एचीवर एवार्ड 2020 द्वारा नवाजा गया।

खुल गया बैतूल, नए आदेश हुए जारी, विवाह में अधिकतम 50, अंतिम संस्कार में सिर्फ 10.


  1. जिले में समस्त सामाजिक राजनैतिक / खेल / मनोरंजन / सांस्कृतिक / धार्मिक आयोजन / मेले आदि जिनमें जनसमूह एकत्र होता है प्रतिबंधित रहेंगें ।
  2. 2- जिले में स्कूल , कॉलेज , शैक्षणिक / प्रशिक्षण / कोचिंग संस्थान बंद रहेंगें । ऑनलाईन क्लासेस चल सकेंगी ।

3- जिले में सभी धार्मिक / पूजा स्थल खुल सकेंगे किंतु एक समय में 06 से अधिक व्यक्ति उपस्थित नहीं रह सकेंगे तथा उपस्थित जनो को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना बंधनकारी होगा ।

4- जिले के समस्त शासकीय , अर्ध शासकीय , निगम , मण्डल के कार्यालय 100 % अधिकारियों 100 % कर्मचारियों की उपस्थिति में खुलेंगे ।

5- जिले के समस्त प्रकार की दुकाने , व्यवसायिक प्रतिष्ठान तथा निजी कार्यालय प्रात : 09:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक खुल सकेंगे । शॉपिंग मॉल , जिम भी उक्त समय में खुल सकेंगे तथापि सभी सिनेमाघर , थियेटर , स्वीमिंग पूल बंद रहेंगे । दुकान एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठान के संचालक एवं कार्यरत सभी कर्मचारियों को 10 दिवस के भीतर कोविड -19 से सुरक्षा हेतु टीकाकरण कराया जाना अनिवार्य होगा ।

6- जिले के समस्त वृहद , मध्यम , लघु एवं सूक्ष्म उद्योग अपनी पूर्ण क्षमता पर कार्य कर सकेंगे तथा निर्माण गतिविधियाँ सतत चल सकेंगी |

7- जिले के समस्त जिम एवं फिटनेस सेंटर रात्रि 08:00 बजे तक 50 % केपेसिटी पर कोविड प्रोटोकॉल की शर्त का पालन करते हुए खुल सकेंगे ।

8- जिले में समस्त खेलकूद के स्टेडियम खुल सकेंगे किन्तु खेल आयोजनों में दर्शक शामिल नहीं हो सकेंगे ।

9- जिले के समस्त रेस्टोरेंट एवं क्लब 50 % केपेसिटी से रात्रि 10:00 बजे तक खुल सकेंगे । समस्त होटल एवं लॉज पूर्ण क्षमता अनुसार खुल सकेंगे ।

10- विवाह आयोजनों में दोनो पक्षो के मिलाकर अधिकतम 50 लोगों की उपस्थिति की ही अनुमति होगी । इस प्रयोजन के लिए आयोजक द्वारा विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों की सूची आयोजन से पूर्व संबंधित अनुविभागीय मजिस्ट्रेट कार्यपालिक मजिस्ट्रेट सह इन्सीडेन्ट कमाण्डर को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा ।

11 – अंतिम संस्कार में अधिकतम 10 व्यक्तियों को सम्मिलित होने की अनुमति रहेगी ।

माटी का तिलक लगाऊं मैं- नरवरे बंधुआलेख प्रस्तुति- एस ब्राह्मणे


माटी का तिलक लगाऊं मैं- नरवरे बंधु
आलेख प्रस्तुति- एस ब्राह्मणे

“भारत माता का वीर सपूत हूं मैं
रणभूमि का तिलक लगाऊंगा मैं
मातृभूमि पर आंच नहीं आने दूंगा
चाहे तिरंगे में लपेटकर आऊंगा मैं
राष्ट्रभक्ति मेरा धर्म है निभाऊंगा में
वतन के लिए भले मिट जाऊं मैं
भारत माता का वीर सपूत हूं -मैं.”

आइए
मैं आपको वर्तमान समय में पूरा विश्व जब आज जीवन और मृत्यु के बीच में संघर्ष करते हुए नजर आ रहा है ऐसे समय में कुछ योद्धा अपने कर्तव्य के मार्ग पर डटे हुए हैं ऐसे योद्धाओं की व्याख्या मेरे शब्दों के द्वारा, मेरे विचारों के द्वारा , मेरी लेखनी के द्वारा किया जा रहा है
क्योंकि किसी ने कहा है
“कुछ योद्धाओं की चमक नहीं जाती
कुछ यादों की कसक नहीं जाती कुछ लोगों से होता है गहरा रिश्ता दूर रहकर भी उनकी महक नहीं जाती”……
एक ऐसे राष्ट्र प्रेमी ,देशभक्त अदम्य साहस और वीरता के पर्याय जिन्होंने सेना में अपनी सेवाएं देते हुए देश प्रेम की भावना का का पालन किया , जांबाज योद्धा स्वरूप सेवाएं दी और सेना में नौकरी करने के बाद जब उनकी योद्धा के बतौर घर सकुशल वापसी हुई , रिटायरमेंट के बाद अपने लोगों के बीच में हुई तो वे कहां चुप बैठने वाले थे, उनके पास अदम्य साहस और वीरता वाला पराक्रम ,हिम्मत ,हौसला देश प्रेम की भावना ,लोगों की मदद करना ,लोगों के सुख दुख में काम आना ,बिना किसी स्वार्थ के बिना किसी लोभ प्रलोभन के ,वे देशभक्ति की खातिर ,राष्ट्रप्रेम के खातिर ,निरंतर सेवा भाव से जनता की सेवा में लगे हुए हैं , वे आज भी कोरोना काल में पुलिस प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर डटे हुए हैं साथ ही स्वास्थ्य विभाग में जहां दल बल की आवश्यकता होती है वे अपना योगदान दे रहे हैं वे निरंतर वैक्सिंग के लिए लोगों को तैयार कर रहे हैं और सेंटरों पर व्यवस्था बनाए हुए हैं लोगों को रक्त दान देने के लिए भी हमेशा आगे खड़े रहते हैं
आइए मैं उनसे आपका परिचय करवाते हुए मैं आपको बताना चाहूंगा की किस तरह से दो फौजी भाइयों की कर्मठता , देश प्रेम वीरता साहस पराक्रम जन सेवा, राष्ट्र सेवा ,मानव सेवा जिनके दिलों में हो, ऐसे जांबाज योद्धा के बारे में दो शब्द लिखकर मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझता हूं ,धन्यवाद का पात्र समझता हूं आज दो भाइयों की वीरगाथा को अपने शब्दों में बयां करने का जो सौभाग्य मिला है ऐसा लगता है मानो मेरी लिखनी ने आज अमरत्व को प्राप्त कर लिया है .
आइए इन दोनों भाइयों की वीर गाथा को बयां करने से पहले उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि से मैं तुम्हें अवगत कराना चाहूंगा

इन दोनों भाइयों के नाम विजय नरवरे एवं संजय नरवरे है इनके पिता जी का नाम_ लखनलाल नरवरे, माता का नाम_ श्रीमती काशीबाई नरवरे है एक मध्यम एवं साधारण परिवार में जन्म लेने के पश्चात परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण माता पिता ने दोनों बच्चों को शिक्षा प्राप्त करवाई माता-पिता से प्रेरणा लेकर दोनों ही बेटों में एक जुनून एक जज्बा हिम्मत हौसला देश के प्रति अपनी जवाबदेही निश्चित की सबसे पहले सेना में भर्ती हुए
एक ही दिन दोनों भाइयों की जॉइनिंग हुई 2003 में हुई लेकिन जज्बा जुनून और जन सेवा बिल्कुल किसी बहादुर योद्धा से कम नहीं था और सफलता भी हाथ लगी देश प्रेम की भावना इनकी दिलों मे विराजमान थी दोनों ही बेटे विजय ( बेटा) भारतीय सेना में शामिल होकर अपने परिवार के लिए इतिहास बना दिया ,
बड़े भाई विजय नरवरे के बारे में बात करते हैं तो हमें जानकारी प्राप्त होती है कि इन्होंने अपने स्कूली जीवन में ही एनसीसी लेकर बीएलसी मे लीडरशिप प्राप्त की और 12वीं क्लास में मात्र 17 वर्ष 6 महिने की आयु में सेना ज्वाइन कर ली, सरल सहज मिलनसार व्यवहार कुशल के साथ-साथ अनुशासन के पक्ष में अपने जीवन को व्यतीत करने वाले बेदाग छवि और कर्तव्य पालन के साथ-साथ अनुशासन का पालन करते रहे हमेशा दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में कभी पीछे नहीं रहे, इन्होंने दुश्मनों की कई बार छक्के छुड़ाए है इसी प्रयास में एक बार आतंकवादी हमले की शिकार हुए थे लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था स्वस्थ होकर अपने कर्तव्य मार्ग पर डटे रहे
अब मैं उनके छोटे बेटे संजय नरवरे के व्यक्तित्व के बारे में बताना चाहूंगा हष्ट पुष्ट आकर्षण युक्त व्यक्तित्व सादगी और सरलता के पुजारी अनुशासन का अपने जीवन में कड़ाई से पालन कर अपने जीवन को बड़े ही सहज रूप से जीने वाले संजय बचपन से ही मेधावी छात्रों के रूप में अपना विशिष्ट स्थान रखते थे परिवार की आर्थिक ना होने के कारण , देश के प्रति उनकी लगन और समर्पण भाव को देखते हुए सेना में भर्ती हो गए आप भी बड़े सहज सरल आकर्षक सुडोल व्यक्तित्व वाणी की मिठास विशिष्ट कार्य शैली से लोगों के दिलों पर राज करने वाले जांबाज योद्धा के रूप में सेना में नौकरी की और आप बचपन से ही स्काउट के शौकीन रहे है और कई जगह कैंप लगाए और लोगों की मदद की स्कूली जीवन में ही मात्र ग्यारहवीं क्लास पढ़ते पढ़ते 16 वर्ष 6 महीने की आयु में आपने सेना ज्वाइन कर ली
यह अजीब संयोग है, इसे ईश्वर का संयोग ही कहा जा सकता है, देश प्रेम की भावना दोनों ही भाइयों में कूट-कूट कर भरी हुई थी साथ ही जनसेवा एवं परमार्थ के कार्य को करने में इन्हें जो आनंद मिलता है उसे शब्दों में बयां कर पाना बड़ा मुश्किल है ,लेकिन हां
2003 में दोनों ही भाइयों ने एक ही दिन एक ही साथ सेना में भर्ती होकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे
2010 में दोनों ही सैनिक योद्धाओं की शादी भी एक ही दिन हुई,
इनके दोनों पुत्रों का जन्म भी एक ही दिनांक को हुआ
इसके अलावा सेना से सेवानिवृत्ति भी एक ही दिन हुई,

दोनों ही भाइयों की कार्य करने की इच्छा शक्ति, विशिष्ट शैली से और लोगों की मदद करना, लोगों के काम आना, बिना किसी स्वार्थ के बिना , बिना किसी प्रलोभन के लोगों के लिए एक आदर्श स्थापित करते हुए इन दोनों भाइयों का जो व्यक्तित्व लोगों के बीच में उभर कर सामने आया है निसंदेह हुआ तारीफ के काबिल है , हम सब के लिए गौरव का विषय है, गर्व महसूस होता है, आज भी इन दोनों जांबाज योद्धाओं के दिलों में देश के लिए, समाज के लिए ,राष्ट्र के लिए, मानव समाज एवं जन कल्याण, मातृभूमि की रक्षा के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना, इनके दिलों में है
के दर्शन हमें तब होते हैं जब उनके द्वारा किए जाने वाले सृजनात्मक एवं रचनात्मक कार्यों की गतिविधियों पर हम प्रकाश डालते हैं
अवगत है कि बैतूल पुलिस ग्राउंड में बीते साल से 5:30 बजे से सुबह सुबह 7:30 तक महिलाओं एवं बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला सशक्तिकरण (नारी शक्ति) अभियान चलाते हैं एवं उन्हें शारीरिक प्रशिक्षण देते हैं साथ ही गांव एवम शहर के युवा नौजवान हो, जो सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहता है , उनके व्यक्तित्व के निर्माण के लिए, रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य को लेकर रोज शारीरिक शिक्षा जो कि सेना में भर्ती होने के लिए मुख्य परीक्षा कहलाती है को प्रशिक्षित करते हैं, इसके अलावा भी अनेक जनकल्याणकारी, सृजनात्मक एवं रचनात्मक कार्यों को करते है महिलाओं को उनके अधिकार एवं उनके कर्तव्य नारी का मान सम्मान और अभिमान को लेकर उनके ऊपर हो रहे अत्याचार , अन्याय एवं शोषण घरेलू हिंसा, दुराचार ,बालिका शिक्षा को बढ़ावा के साथ-साथ समय-समय पर जागरूकता रैली, उनके लिए योग शिक्षा को बढ़ावा ,आत्मरक्षा के गुर सिखाना आदि उपायों की जानकारी शिविर के माध्यम से उनको देना ,उन्हें जागरूक करते आ रहे हैं ,आज के इस वैश्विक महामारी के दौर में जब लोग अपने अपने घरों में आराम से रह कर के अपने जीवन चर्या को सीमित कर रहे हैं लेकिन आज भी “नरवरे- बंधु” दोनों भाई कोरोना योद्धा की तरह कोरोना कॉल में भी शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनसेवा में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निडरता, साहस, हौसला ,हिम्मत के साथ कर्तव्य मार्ग पर डटे है, लोगों की मदद के लिए, सेवा के लिए ,लोगों के सुख दुख में काम आने के लिए, लोगों को जागरुक करने के लिए ,दृढ़ संकल्प के साथ-साथ जनसेवा , मानव सेवा की भावना का सम्मान करते हुए बिना किसी लोभ या प्रलोभन के पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने राष्ट्र धर्म का पालन कर रहे हैं देशभक्ति की भावना जो इनके दिलों में है वह काबिले तारीफ है उन्हें अपने परिवार की चिंता नहीं है उन्हें चिंता है देश की दुनिया की, हम लोगों की, इसीलिए रात दिन 24 घंटे अनवरत रूप से जन सेवा कर रहे हैं, मानव की सेवा कर रहे हैं, मानव धर्म के साथ राष्ट्र धर्म का पालन कर रहे हैं, इसके अलावा” रक्तदान” है महादान अभियान के तहत भी समय-समय पर इनके द्वारा लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से रक्त कैंप का आयोजन भी किया जाता रहा है कई बार इन्होंने जिन्हें रक्त की आवश्यकता होती है उस समय इन्होंने लोगों को रक्तदान करके उनकी जिंदगी यूं को संवारा है बचाया है, धन्य है ऐसे वीर योद्धा जिनके जन्म से हमारा जिला हमारा शहर हमारा बैतूल अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता है बैतूल की धरती मां उनका अभिनंदन करती है ऐसे सेना के जांबाज योद्धाओं को इनकी सकारात्मक सोच ,देश प्रेम की भावना ,त्याग, तपस्या, संकल्प के साथ ,राष्ट्र धर्म का पालन करते हैं पूरी निडरता से बेबाक तरीके से बिना किसी की चिंता किए बिना, परिवार की चिंता किए बिना आज कोरोना योद्धा के रूप में वॉलिंटियर्स के रूप में निरंतर कल्याणकारी एवं जन उपयोगी कार्य करते हुए नजर आ रहे हैं वंदन करते हैं अभिनंदन करते हैं ऐसे वीर पुत्रों को मेरे शब्दों के द्वारा उनका सम्मान किया जाना उनकी कार्यशैली का सम्मान किया जाना उनकी देशभक्ति का सम्मान उनके साहस पराक्रम का सम्मान उनकी लगन कर्तव्य परायणता का सम्मान किया जाना बहुत नितांत आवश्यक है क्योंकि किसी कवि ने कहा है ..
“वह खून कहो किस मतलब का जिसमें उबाल का नाम नहीं ,
वह इंसान भी किसी मतलब का नहीं
जिसमें स्वदेश के प्रति प्यार नहीं”

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि इन दोनों सैनिक बंधुओं से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए, हमें इनसे सीखना चाहिए, देशभक्ति का पाठ , मानव सेवा ,जन कल्याण के कार्य ,सतत सेवा भाव आदि को अपने जीवन में उतार कर हम अपने जीवन को सार्थक और कामयाब बना सकते हैं, मातृभूमि की रक्षा के लिए हम काम आ सकते हैं ,देश की शहादत में, देश की एकता और अखंडता में हम देश के सच्चे सपूत होने का हमें गौरव प्राप्त हो सकता है, बस शर्त यह है कि हम पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे ,वंदन करता हूं ,अभिनंदन करता हूं ,समाज ,राष्ट्र एवं जन कल्याण के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए प्रयासों को मैं प्रणाम करता हूं
पंडित श्रीकृष्ण सरल कवि के द्वारा रचित इन भावों के साथ अपनी लेखनी को यहां पर विराम देते हुए कहता हूं, इन दोनों सैनिक बंधुओं से…
मत ठहरो ,सैनिक बंधुओं तुमको आगे चलना है
वतन की राह पर चलने से तुम्हें नहीं डरना है
तुम चलो आगे और जमाना अपने साथ चलाओ
जो पिछड़ गए हैं प्रेरित कर उन्हें आगे बढ़ाओ
तुमको प्रतीक बनना है विश्व शांति और प्रगति का
तुमको जनहित के सांचे में ढलना है
मत ठहरो सैनिक बंधुओं तुम्हें आगे बढ़ना है”
आगे बढ़ने से तुमको नहीं डरना है
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना हैह

आलेख एवं संकलन-
एस.ब्राह्मणे “सरल”
लेखक साहित्यकार कवि एवं चिंतक, मानस नगर बैतूल
मोबाइल नंबर 78282 86 568
Syamdevbrahmane0404@gmai

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

जिले में फिर बढ़ी कोरोना कर्फ्यू की अवधि


मुलतापी समाचार

बैतूल

जिले में कोरोना कर्फ्यू की अवधि 24 मई 2021 सोमवार के प्रातः 6 बजे तक बढाई गई .
कर्फ्यू अवधि में खाद, बीज एवं कृषि संबंधी अन्य अत्यावश्यक सामग्री का थोक व्यापारी अनुमति लेकर फुटकर व्यापारियों को कर सकेंगे परिवहन.

समाजसेवी लोग कोरोनाकाल में बन रहे है सहारा


समाजसेवीयों ने की मरीजों के परिजनों के निशुल्क ठहरने व भोजन की व्यवस्था साथ ही ड्यूटी पर तैनात पुलिस व सैनिकों को बांटे जा रहे हैं चाय और बिस्किट

जिलें में 9 अप्रैल से लगातार लॉकडाउन चल रहा है फिर भी कोरोना का बढ़ता प्रकोप रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है ऐसे में दूर दराज गांव से आए मरीजों के परिजनों को ठहरने एवं उनके खाने पीने की निशुल्क व्यवस्था नगर के

किरार मंगल भवन में समाजसेवी राजा सूर्यवंशी – 7000944756, 9301810022, हरीश गडेकर – 9425 656729, भरत सूर्यवंशी – 9826641933, मायवाड जी – 9009955112, दीपक सोलकी – 898272973, द्वारा की गई है साथ ही हॉस्पिटलों में जाकर मरीजों एवं उनके परिजनों को निशुल्क भोजन वितरण भी किया जा रहा है।

इतना ही नहीं जहां नगर में तैनात
पुलिस प्रशासन चौक चौराहे पर दिन रात Covid 19 का नियमों का पालन करवा रहे हैं ऐसे में समाजसेवी व्यापारी श्याम हीरानी भी पुलिस प्रशासन की सेवा करने के लिए आगे आए देखा जा रहा है कि हिरानी जी नगर में तैनात पुलिस प्रशासन को चौक चौराहों पर जाकर रोज सुबह शाम चाय और बिस्किट से सहायता दे रहे हैं हैं।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही तब सामने आ रही, जीवित मरीज को मरा बताया, किसी की बॉडी किसी परिवार को दी, मरीजो की संख्या बढ़ी


स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही तब सामने आई, जब एक मरीज को 2 बार मृत घोषित कर दिया गया। साथ ही किसी अन्य मरीज का शव परिजनों को बताने की कोशिश की गई। परिजनों ने जब शव को देखा तो वह हैरान रह गए, क्योंकि यह शव किसी और व्यक्ति का था । मामला सुल्तानिया के रहने वाले कोरोना पॉजिटिव गौरेलाल कौरी का है ।

अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेजकोरोना पॉजिटिव को दो बार मृत बताया।

दरअसल, गौरेलाल की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद इलाज के लिए उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान एक दिन पहले जहां रात के समय रोगी की स्थिति गंभीर बताई। फिर इसके बाद 13 अप्रैल की देर रात गौरेलाल को मरा हुआ बताया गया। गौरेलाल की मौत की खबर लगते ही हड़बड़ाहट में जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो बताया गया कि उनके मरीज की सांसे चल रही हैं। परिजनों ने डाक्टरों से मरीज के अच्छे इलाज की मांग की, लेकिन 14 अप्रैल बुधवार की सुबह साढ़े 8 बजे डाक्टर का एक बार फिर फोन आया। इस बार भी डाक्टर ने मरीज की मौत की खबर परिजनों को सुनाई।

शव देखा तो नहीं और कोई निकला

मरीज के बेटे ने जब शव देखने की जिद की तो पता चला कि यह किसी और का शव था। जांच पड़ताल की गई तो उनके मरीज की हालत गंभीर थी और वह आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे, जबकि मंगलवार की रात में ही स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों के अच्छे इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को

चेस्ट किया था। इस मसले पर अब कई सारे सवाल खड़े हो

गौरेलाल के बेटे कैलाश ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने हमें काफी देर तक गफलत में डाल दिया, जब डेड बॉडी को देखा तब जाकर सच सामने आया। अभी उनके पिता की हालत गंभीर है, और वह संक्षेपण वार्ड में भर्ती हैं। कैलाश ने बताया कि इस मामले की शिकायत भी की गई लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो सका। कैलाश ने बताया कि उनके पिता गौरेलाल भोपाल में रेलवे डाक विभाग में पोस्टमैन हैं।

मेडिकल कॉलेज के डॉ। । गंभीर आरोप लगे

मरीज के बेटे ने बताया कि दो दिन पहले उनका तबीयत बहुत बुरा बता रहा था। इसके बाद हमें बताया गया कि हमारे पिता की मृत्यु हो गई है, और नर्स ने 10 मिनट बाद कहा कि रोगी की सांस चल रही है। मैंने कहा कि डॉ से आप अच्छे से इलाज करते हैं, लेकिन डॉक्टरों की यही लापरवाही चल रही है और फिर शाम को बताया जा रहा है। कि मरीज के गले का ऑपरेशन किया जाएगा। फिर बाद में शाम 6 बजे ऑपरेशन के दौरान अपडेट आता है कि उनका ऑपरेशन करते-करते मौत हो गई है। जब हमने आकर देखा की मृत्यु प्रमाण पत्र घोषित कर दिया गया है। हमारे परिजन मरीज को देखने गए तो मरीज वेंटिलेटर पर भर्ती था। हमें डेड बॉडी भी दी जाने लगी । जब हमने कहा कि डेड बॉडी का चेहरा देख लें। चेहरा देखने के लिए गए, तो हमारे मरीज का नहीं था, जबकि हमारा मरीज जीवित है।

लड़खड़ाते बोले डीन

सुनील नंदेश्वर मेडिकल कॉलेज के डीन का कहना है कि कोरोना के चलते आपाधापी बढ़ गई है। कहीं रोगी वेंटिलेटर पर हैं, तो दूसरे की सांस फूल रही है, तीसरे का यह हो रहा है, तो थोड़ा सा हो जाता है। डीन ने कहा कि मरीज वेंटिलेटर पर ही थे। उनके हृदय की गति रुक गई थी, तो इस बार किसी नर्स ने बताया कि उनकी मृत्यु हो गई है, लेकिन हृदय की गति रूकती है तो उसके बाद में डॉ। हृदय को दोनों हाथों से दबाकर हृदय को पुनः चालू करने की कोशिश करता है। जिसमें एक से दो घंटे लगभग लग जाते हैं।

डीन ने कहा,

हमारे यहां के डॉक्टरों ने उन्हें रिवाइज किया और फिर रिवाइज करने के बाद ब्लने वापस आई। और उन्हें फिर हमने वेंटिलेटर पर रखा था। इस कारण से यह थोड़ा सा कन्फ्यूजन हो गया। हमने उनके परिजनों को बता दिया है कि मरीज वेंटिलेटर पर है ।

बैतूल जिले में आज कोरोना ने लगाई डबल सेन्चुरी


बैतूल जिले में आज कोरोना ने लगाई डबल सेन्चुरी

कलेक्टर के आग्रह पर प्रशासन की मदद के लिए पूर्व सैनिक संघ भी उतरा मैदान में,

बैतूल जिले में 9 दिनों का संपूर्ण लॉकडाउन जारी किया गया जिसे बाद में जनता कर्फ्यू में बदल दिया गया। कोरोना के कहर को देखते हुए पुलिस बल के सैनिक चौक चौराहों पर तैनात है। और आवश्यक कार्य के लिए आने जाने वाली जनता से कर्फ्यू का पालन करवाने के निर्देश दे रही है। जिले में पिछले पाँच दिनों में रिकॉर्ड 766 कोरोना मरीज मिले है जबकि आज कोरोना ने डबल सेन्चुरी करते हुए 208 मरीज मिले है। जिलें में अब तक कोरोना से 92 लोगों की मौत हो चुकी है।

ऐसे में जिले के कलेक्टर अमनबीर सिंह बैस द्वारा पूर्व सैनिकों को विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में बैतूल जिले में नियुक्त किया गया है ताकि लोगों को कोरोना गाईडलाईन का पालन करवाने में मदद मिल सके।

जिसमें पूर्व सैनिकों ने नगर के कारगिल चौक एसपी ऑफिस चौराहा गेंदा चौक ऐसे कई चौराहों पर प्रशासन की मदद करने के लिए तैनात हो चुके हैं पूर्व सैनिक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष हरिशंकर सावनेर जी बताते हैं कि हमारे सैनिक जब सेवा में होते हैं तब भी देश के लिए मर मिटने को तैयार होते हैं तथा सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके अंदर देश भावना हमेशा रहती है जब भी देश पर कोई आपत्ति आती है तब हम लोग ऐसे ही एकजुट होकर एकता का प्रतीक बन जाते हैं

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

बैतूल जिले में आज शाम से 10 दिन का टोटल लॉक डाउन


बैतूल।। ब्रेकिंग।।

मुलतापी समाचार

जिले में बढ़ते कोरोना संक्रमण देखते हुए कलेक्टर अमनबीर सिंह बैस ने लॉकडाउन के आदेश जारी किए।।

बैतूल जिले में 9 अप्रेल शुक्रवार को शाम 6 बजे से 19 अप्रैल सुबह 6 बजे तक जिले के समस्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लॉकडाउन।।

जिले के सभी सरकारी कार्यालयों के कार्यदिवस सप्ताह में 5 दिन ( सोमवार से शुक्रवार ) निर्धारित।।

जिले के धार्मिक स्थलों पर आमजन का आना – जाना प्रतिबंधित रहेगा।।

लॉकडाउन के दौरान ये रहेंगे बंधनमुक्त अन्य राज्यों से माल , सेवाओं का आवागमन, कैमिस्ट , अस्पताल , पेट्रोल पंप , बैंक एवं एटीएम। एम्बुलेंस एवं फायर ब्रिगेड सेवाएं ।टीकाकरण हेतु आवागमन कर रहे नागरिक एवं कर्मी । ” रेल्वे स्टेशन से आने एवं जाने वाले नागरिक ।

खाद्य एवं अत्यावश्यक सामग्री की दुकानें से होम डिलेवरी के माध्यम से सामग्री घर तक पहुंचाई जाएगी।।

औद्योगिक मजदूरों , उद्योगों हेतु कच्चा / तैयार माल , उद्योगों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवागमन की छूट , परिचय पत्र दिखाने पर दी जावेगी।।

बिग ब्रेकिंग न्यूज़ 1 तारीख शाम 7:00 बजे से 4 तारीख सोमवार सुबह 6:00 बजे तक स्वैच्छिक बंद रखने की घोषणा 3 दिन रहेगा बैतूल जिला बंद जिला क्राइसेस मेनेजमेंट का फैसला,तीन दिन के लिये स्वेच्छा से बाजार होंगे बन्द व्यापारी संगठनों ने दि सहमति


1 तारीख शाम 7:00 बजे से 4 तारीख सोमवार सुबह 6:00 बजे तक  स्वेच्छा से बंद रखने की घोषित 3 दिन रहेगा बैतूल जिला बंद जिला क्राइसेस मेनेजमेंट का फैसला,तीन दिन के लिये स्वेच्छा से बाजार होंगे बन्द  व्यापारी संगठनों ने दि सहमति

दो, तीन एवं चार अप्रैल को स्वेच्छा से रखा जाएगा बाजार बंद
सामान्य दिनों में सायं 7 बजे के पूर्व करना होगी दुकानें बंद
धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की जाएगी, परन्तु भीड़-भाड़ नहीं
सब्जी बाजार के स्थान पर होम डिलेवरी होगी
जिला क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में लिये निर्णय
बैतूल, 31 मार्च 2021
जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते हुए मामलों के दृष्टिगत बुधवार को आयोजित जिला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में व्यापारी संगठनों की सहमति से आगामी दो, तीन एवं चार अप्रैल अर्थात् शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार को बाजार बंद करने का निर्णय लिया गया है। रविवार का लॉकडाउन यथावत् प्रभावी रहेगा। ग्रुप द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी दिनों में सायं 7 बजे के पूर्व बाजार की सभी दुकानें बंद कर ली जाएंगीं। धार्मिक स्थलों पर आगामी दस दिन पूजा-अर्चना होगी, परन्तु बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे नहीं हो सकेंगे। ग्रुप की बैठक में विधायक आमला डॉ. योगेश पण्डाग्रे, पुलिस अधीक्षक सुश्री सिमाला प्रसाद, पूर्व विधायक श्री हेमन्त खण्डेलवाल, ग्रुप सदस्य श्री अरूण गोठी, श्री ब्रजआशीष पाण्डे, डॉ. अरूण जयसिंह सहित व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि एवं निजी चिकित्सालयों के संचालक मौजूद थे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिले में लगने वाले साप्ताहिक सब्जी हाट बाजार आगामी एक सप्ताह तक स्थगित रखे जाएंगे। इसके स्थान पर सब्जी की होम डिलेवरी की व्यवस्था की जाएगी। जिला अस्पताल में अनावश्यक भीड़ न हो, इस बात के दृष्टिगत निर्णय लिया गया कि वहां समय-समय पर निगरानी रखकर मरीज के साथ सिर्फ एक सहायक को जाने की अनुमति दी जाए। बुजुर्गों को भी यह सलाह दी गई कि वे अनावश्यक बाजार में न जाएं एवं भीड़ का हिस्सा न बने। विवाह समारोहों एवं अन्य समारोहों में 50 से अधिक लोगों की उपस्थिति की अनुमति नहीं होगी। अंतिम संस्कार में 20 लोग से अधिक नहीं जा सकेंगे।