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ग्रोप्योर एग्रो कृषि प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का हुआ शुभारंभ


बैतूल जिले के ग्राम अमदर में ग्रोप्योर एग्रो कृषि प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के कार्यालय और दुकान का हुआ शुभारंभ।

बैतूल ग्रोप्योर एग्रो कृषि प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड बैतूल में सरकारी योजना 10,000 किसान उत्पादक संगठन के अंतर्गत एसएफएसी के द्वारा कृषि विकास सहकारी समिति लिमिटेड, निगरानी समिति के माध्यम से बने एफपीओ का शुभारंभ अमदर ग्राम में हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि श्री के पी भगत उपसंचालक कृषि विभाग बैतूल, आर एस राजपूत एसडीओ, श्रीमती अलका कोडा़पे एएसएडीओ, श्री विजेंद्र वाईकर आत्मा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर क्षेत्र के सभी कृषक बंधु सहित एफपीओ संस्था के चेयरमैन सुभाष कालभोर, एफपीओ के सीईओ कैलाश लोखंडे, कृषक बंधु केशोराव जी लिखितकर, नगेंद्र जी लिल्लोरे, दयाल हारोड़े, अशोक काले, अयोध्या प्रसाद दुबे, मुंशीलाल देशमुख, ईश्वर चंद पाटनकर, बलिराम पवार, बद्री प्रसाद, रिंकू डिगरसे, संतोष हिंगवे, बलवंत पवार, गौदन हजारे, कृष्ण कुमार डोंगरदिए, लक्ष्मण सातपुते प्रदीप डिगरसे, अशोक बारंगे, मदन महाजन, सुरेश पडाड़े सहित ग्रामीण क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।

इस योजना की जानकारी विभागीय अधिकारी द्वारा सभी किसान भाइयों को दी गई और कृषि को उन्नत बनाने की तरीके भी बताया गए। साथ ही वित्तीय संस्था के शुभारंभ पर एफपीओ संस्था के सभी कृषक भाइयों को बधाई और शुभकामनाएं दी अंत में एपीओ के चेयरमैन सुभाष कालभोर द्वारा सभी किसान भाइयों और संस्था सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया।

श्री देवनारायण उत्सव सीमिती द्वारा देवनारायण जी की भव्य महाआरती एंव भजन कीर्तन का आयोजन किया गया…


भोपाल – श्री देवनारायण उत्सव सीमिती द्वारा कल गुर्जर भवन भोपाल में देवनारायण जी की छठ के उपलक्ष्य में बैरसिया गायक विक्रम सिंह गुर्जर एव उन की सहमत टीम द्वारा श्री देवनारायण जी की भव्य महाआरती भजन कीर्तन भोजन प्रसादी आयेाजन किया गया जिसमें जिसमें धर्मेंद्र जी गुर्जर जिला अध्यक्ष आनंद गुर्जर जी जिला कार्यकारी अध्यक्ष अनुराग पटेल ज़िला उपाध्यक्ष अमित गौर जी राम गुर्जर जी राजू गुर्जर जी एडवोकेट बैजनाथ सिंह गुर्जर जी कन्हैया गुर्जर जी लाखन सिंह गुर्जर जी दीप गुर्जर जी ब्रजेश गुर्जर जी लक्ष्मी गुर्जर जी एव देवनारायण समिति के सभी साथी द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे मुख्य रूप से उपस्थित वरिष्ठ समाजसेवी भारत सरकार केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य आदरणीय हाकम सिंह गुर्जर जी मध्यप्रदेश कांग्रेस के महासचिव अभिषेक परमार जी अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के अध्यक्ष करन गुर्जर जी धर्मेंद्र सिंह गुर्जर जी समाज सेबी खुमान सिंह गुर्जर समाज के अन्य वरिष्ठ समाजसेवी एवं सभी युवा साथी उपस्थित रहे….

टीका लगाने वालों को लगेगा ‘आई एम वैक्सीनेटेड’ का स्टाम्प


मध्यप्रदेश। प्रदेश में 25 एवं 26 अगस्त को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा कवच देने के लिये टीकाकरण महा-अभियान चलाया जायेगा। महा-अभियान के दौरान वैक्सीन लगवाने आये प्रत्येक नागरिक के हाथ के पंजे के पीछे की तरफ एक टिक और दो टिक के निशान वाला वैक्सीनेट स्टाम्प वैक्सीन लगवाने के बाद लगाया जायेगा।

एक टिक वाले स्टाम्प का अर्थ होगा कि व्यक्ति को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है। दो टिक वाले स्टाम्प के मायने यह होंगे कि व्यक्ति को वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके हैं और वह वैक्सीनेट हो चुका है। ऐसे व्यक्ति अपने हाथ पर लगे दो टिक वाले स्टाम्प को अपनी दो ऊँगलियों से वी (V) बनाते हुए सेल्फी के द्वारा यह संदेश देंगे कि ‘आई एम वैक्सीनेटेड’।

टीकाकरण महा-अभियान में किये जा रहे इस नवाचार में वैक्सीनेट हुए व्यक्तियों की वैक्सीनेट स्टाम्प के साथ फोटो ली जाकर सोशल मीडिया पर शेयर की जायेगी। इससे आमजन में वैक्सीन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। आम नागरिक वैक्सीन लगवाकर सीएम ईवेंट पोर्टल पर भी अपने फोटो अपलोड कर सकेंगे। इसके लिये मार्गदर्शिका जारी की गई है।

जिले में धूमधाम से मना गया भुजलिया पर्व


फोटो – ग्राम भडूस में मनाया भुजलिया पर्व।

बैतूल। बैतूल जिले में प्रतिवर्ष के अनुसार इस वर्ष भी धूमधाम से भुजलिया पर्व मनाया गया और भुजलिया का विसर्जन पारंपरिक रूप से किया गया।

फोटो – ग्राम खेड़ीसाँवलीगढ़ में मनाया भुजलिया पर्व।

भुजलिया पर्व रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसे शहर से लेकर गांव तक में बडी़ धूमधाम से मनाया जाता है और भुजलिया विसर्जन के लिये महिलाओ में खूब हर्षोल्लास रहता है।

महिलाओं के द्वारा भुजलिया विसर्जन से पूर्व भुजलिया की आरती की जाती है और अपनी कामनाओं के साथ भुजलिया का विसर्जन किया जाता है। जिसके लिए माताएं-बहनें भारी संख्या में जुड़ती है और अपनी पारंपरिक रूप से भुजलिया का विसर्जन किया जाता है। महिलाओं के द्वारा एक दूसरे के ऊपर पानी की बौछार की जाती है और एक दूसरे को भुजलिया देकर सुख समृद्धि की कामना की जाती है।

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी का 75 वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन


मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार!

  1. देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! यह दिन हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष और उल्लास का दिन है। इस वर्ष के स्वाधीनता दिवस का विशेष महत्व है क्योंकि इसी वर्ष से हम सब अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई!
  2. स्वाधीनता दिवस हमारे लिए पराधीनता से मुक्ति का त्योहार है। कई पीढ़ियों के ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमारी आज़ादी का सपना साकार हुआ था। उन सभी ने त्याग व बलिदान के अनूठे उदाहरण प्रस्तुत किए। उनके शौर्य और पराक्रम के बल पर ही आज हम और आप आज़ादी की सांस ले रहे हैं। मैं उन सभी अमर सेनानियों की पावन स्मृति को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।
  3. अनेक देशों की तरह हमारे राष्ट्र को भी, विदेशी हुकूमत के दौरान बहुत अन्याय और अत्याचार सहने पड़े। परंतु भारत की विशेषता यह थी कि गांधीजी के नेतृत्व में हमारा स्वाधीनता आंदोलन सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित रहा। उन्होंने तथा अन्य सभी राष्ट्र-नायकों ने भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने का मार्ग तो दिखाया ही, साथ ही राष्ट्र के पुनर्निर्माण की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने भारतीय जीवन-मूल्यों और मानवीय गरिमा को पुनः स्थापित करने के लिए भी भरपूर प्रयास किए।
  4. अपने गणतन्त्र की विगत 75 वर्षों की यात्रा पर जब हम नजर डालते हैं तो हमें यह गर्व होता है कि हमने प्रगति पथ पर काफी लंबी दूरी तय कर ली है। गांधीजी ने हमें यह सिखाया है कि गलत दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने से अच्छा है कि सही दिशा में धीरे ही सही लेकिन सधे हुए कदमों से आगे बढ़ा जाए। अनेक परम्पराओं से समृद्ध भारत के सबसे बड़े और जीवंत लोकतन्त्र की अद्भुत सफलता को विश्व समुदाय सम्मान के साथ देखता है।

प्यारे देशवासियो,

  1. हाल ही में संपन्न टोक्यो ओलंपिक में हमारे खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है। भारत ने ओलंपिक खेलों में अपनी भागीदारी के 121 वर्षों में सबसे अधिक मेडल जीतने का इतिहास रचा है। हमारी बेटियों ने अनेक बाधाओं को पार करते हुए खेल के मैदानों में विश्व स्तर की उत्कृष्टता हासिल की है। खेल-कूद के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और सफलता में युगांतरकारी परिवर्तन हो रहे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों से लेकर सशस्त्र बलों तक, प्रयोगशालाओं से लेकर खेल के मैदानों तक, हमारी बेटियां अपनी अलग पहचान बना रही हैं। बेटियों की इस सफलता में मुझे भविष्य के विकसित भारत की झलक दिखाई देती है। मैं हर माता-पिता से आग्रह करता हूं कि वे ऐसी होनहार बेटियों के परिवारों से शिक्षा लें और अपनी बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें।
  2. पिछले साल की तरह, महामारी के कारण, इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े पैमाने पर नहीं मनाए जा सकेंगे लेकिन हम सबके हृदय में हरदम भरपूर उत्साह बना हुआ है। हालांकि महामारी की तीव्रता में कमी आई है लेकिन कोरोना-वायरस का प्रभाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। इस वर्ष आई महामारी की दूसरी लहर के विनाशकारी प्रभाव से हम अभी तक उबर नहीं पाए हैं। पिछले वर्ष, सभी लोगों के असाधारण प्रयासों के बल पर, हम संक्रमण के प्रसार पर काबू पाने में सफल रहे थे। हमारे वैज्ञानिकों ने बहुत ही कम समय में वैक्सीन तैयार करने का कठिन काम सम्पन्न कर लिया। इसलिए, इस वर्ष के आरंभ में हम सब विश्वास से भरे हुए थे क्योंकि हमने इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया था। फिर भी, कोरोना-वायरस के नए रूपों और अन्य अप्रत्याशित कारणों के परिणाम-स्वरूप हमें दूसरी लहर का भयावह प्रकोप झेलना पड़ा। मुझे इस बात का गहरा दुख है कि दूसरी लहर में बहुतेरे लोगों की प्राण रक्षा नहीं की जा सकी और बहुत से लोगों को भारी कष्ट सहने पड़े। यह अभूतपूर्व संकट का समय था। मैं, पूरे देश की ओर से, आप सभी पीड़ित परिवारों के दुख में, बराबर का भागीदार हूं।
  3. यह वायरस एक अदृश्य व शक्तिशाली शत्रु है जिसका विज्ञान द्वारा सराहनीय गति के साथ सामना किया जा रहा है। हमें इस बात का संतोष है कि इस महामारी में हमने जितने लोगों की जानें गंवाई हैं, उससे अधिक लोगों की प्राण रक्षा कर सके हैं। एक बार फिर, हम अपने सामूहिक संकल्प के बल पर ही दूसरी लहर में कमी देख पा रहे हैं। हर तरह के जोखिम उठाते हुए, हमारे डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य कर्मियों, प्रशासकों और अन्य कोरोना योद्धाओं के प्रयासों से कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पाया जा रहा है।
  4. कोविड की दूसरी लहर से हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे पर बहुत दबाव पड़ा है। सच तो यह है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं समेत, किसी भी देश का बुनियादी ढांचा, इस विकराल संकट का सामना करने में समर्थ सिद्ध नहीं हुआ। हमने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए युद्ध-स्तर पर प्रयास किए। देश के नेतृत्व ने इस चुनौती का डटकर सामना किया। केंद्र सरकार के प्रयासों के साथ-साथ राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं, गैर सरकारी संगठनों तथा अन्य समूहों ने सक्रिय योगदान किया। इस असाधारण अभियान में, कई देशों ने, उदारता से, अनिवार्य वस्तुएं उसी तरह साझा कीं, जैसे भारत ने बहुत से देशों को दवाइयां, उपकरण और वैक्सीन उपलब्ध कराई थी। इस सहायता के लिए मैं विश्व समुदाय का आभार प्रकट करता हूं।
  5. इन सभी प्रयासों के परिणाम-स्वरूप, काफी हद तक, सामान्य स्थिति बहाल हो गई है और अब हमारे अधिकांश देशवासी राहत की सांस ले रहे हैं। अब तक के अनुभव से यही सीख मिली है कि अभी हम सबको लगातार सावधानी बरतने की जरूरत है। इस समय वैक्सीन हम सबके लिए विज्ञान द्वारा सुलभ कराया गया सर्वोत्तम सुरक्षा कवच है। हमारे देश में चल रहे विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 50 करोड़ से अधिक देशवासियों को वैक्सीन लग चुकी है। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे प्रोटोकॉल के अनुरूप जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगवा लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

मेरे प्यारे देशवासियो,

  1. इस महामारी का प्रभाव अर्थव्यवस्था के लिए उतना ही विनाशकारी है, जितना लोगों के स्वास्थ्य के लिए। सरकार गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों की समस्याओं के विषय में भी चिंतित रही है। सरकार, उन मजदूरों और उद्यमियों की जरूरतों के प्रति भी संवेदनशील रही है जिन्हें लॉकडाउन और आवागमन पर प्रतिबंधों के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। उनकी जरूरतों को समझते हुए सरकार ने पिछले वर्ष उन्हें राहत प्रदान करने के लिए बहुत से कदम उठाए थे। इस वर्ष भी सरकार ने मई और जून में करीब 80 करोड़ लोगों को अनाज उपलब्ध कराया। अब यह सहायता दीपावली तक के लिए बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, कोविड से प्रभावित कुछ उद्यमों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने हाल ही में 6 लाख 28 हजार करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। यह तथ्य विशेष रूप से संतोषजनक है कि चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए एक वर्ष की अवधि में ही तेईस हजार दो सौ बीस करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
  2. मुझे इस बात की खुशी है कि सभी बाधाओं के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में – विशेष रूप से कृषि के क्षेत्र में – बढ़ोतरी जारी रही है। हाल ही में, कानपुर देहात जिले में स्थित अपने  पैतृक गांव परौंख की यात्रा के दौरान, मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन को सुगम बनाने के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की मनोवैज्ञानिक दूरी अब पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। मूलतः, भारत गांवों में ही बसता है, इसलिए उन्हें विकास के पैमानों पर पीछे नहीं रहने दिया जा सकता। इसीलिए, प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि सहित, हमारे किसान भाई-बहनो के लिए विशेष अभियानों पर बल दिया जा रहा है।
  3. ये सभी प्रयास आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना के अनुरूप हैं। हमारी अर्थव्यवस्था में निहित विकास की क्षमता पर दृढ़ विश्वास के साथ सरकार ने रक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, विद्युत तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश को और अधिक सरल बनाया है। सरकार द्वारा पर्यावरण के अनुकूल, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के नवीन प्रयासों की विश्वव्यापी प्रशंसा हो रही है। जब ‘ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस’ की रैंकिंग में सुधार होता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव देशवासियों की ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ पर भी पड़ता है। इसके अलावा जन कल्याण की योजनाओं पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए 70,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना की बदौलत, अपना खुद का घर होने का सपना अब साकार हो रहा है। एग्रीकल्चरल मार्केटिंग में किए गए अनेक सुधारों से हमारे अन्नदाता किसान और भी सशक्त होंगे और उन्हें अपने उत्पादों की बेहतर कीमत प्राप्त होगी। सरकार ने प्रत्येक देशवासी की क्षमता को विकसित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं जिनमें से कुछ का ही उल्लेख मैंने किया है।

प्यारे देशवासियो,

  1. अब जम्मू-कश्मीर में नव-जागरण दिखाई दे रहा है। सरकार ने लोकतंत्र और कानून के शासन में विश्वास रखने वाले सभी पक्षों के साथ परामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मैं जम्मू-कश्मीर के निवासियों, विशेषकर युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से अपनी आकांक्षाओं को साकार करने के लिए सक्रिय होने का आग्रह करता हूं।
  2. सर्वांगीण विकास के प्रभाव से, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का कद ऊंचा हो रहा है। यह बदलाव, प्रमुख बहुपक्षीय मंचों पर हमारी प्रभावी भागीदारी में तथा अनेक देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने में परिलक्षित हो रहा है।   

प्यारे देशवासियो,

  1. पचहत्तर साल पहले जब भारत ने आजादी हासिल की थी, तब अनेक लोगों को यह संशय था कि भारत में लोकतंत्र सफल नहीं होगा। ऐसे लोग शायद इस तथ्य से अनभिज्ञ थे कि प्राचीन काल में, लोकतंत्र की जड़ें इसी भारत भूमि में पुष्पित-पल्लवित हुई थीं। आधुनिक युग में भी भारत, बिना किसी भेद-भाव के सभी वयस्कों को मताधिकार देने में अनेक पश्चिमी देशों से आगे रहा। हमारे राष्ट्र-निर्माताओं ने जनता के विवेक में अपनी आस्था व्यक्त की और ‘हम भारत के लोग’ अपने देश को एक शक्तिशाली लोकतंत्र बनाने में सफल रहे हैं।
  2. हमारा लोकतन्त्र संसदीय प्रणाली पर आधारित है, अतः संसद हमारे लोकतन्त्र का मंदिर है। जहां जनता की सेवा के लिए, महत्वपूर्ण मुद्दों पर वाद-विवाद, संवाद और निर्णय करने का सर्वोच्च मंच हमें उपलब्ध है। यह सभी देशवासियों के लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारे लोकतंत्र का यह मंदिर निकट भविष्य में ही एक नए भवन में स्थापित होने जा रहा है। यह भवन हमारी रीति और नीति को अभिव्यक्त करेगा। इसमें हमारी विरासत के प्रति सम्मान का भाव होगा और साथ ही समकालीन विश्व के साथ कदम मिलाकर चलने की कुशलता का प्रदर्शन भी होगा। स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस नए भवन के उदघाटन को विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक प्रस्थान बिन्दु माना जाएगा।
  3. सरकार ने इस विशेष वर्ष को स्मरणीय बनाने के लिए कई योजनाओं का शुभारम्भ किया है। ‘गगनयान मिशन’ उन अभियानों में विशेष महत्व रखता है। इस मिशन के तहत भारतीय वायु सेना के कुछ पायलट विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। जब वे अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगे, तो भारत मानव-युक्त अंतरिक्ष मिशन को अंजाम देने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इस प्रकार, हमारी आकांक्षाओं की उड़ान किसी प्रकार की सीमा में बंधने वाली नहीं है।
  4. फिर भी, हमारे पैर यथार्थ की ठोस जमीन पर टिके हुए हैं। हमें यह एहसास है कि आज़ादी के लिए मर-मिटने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में हमें अभी काफी आगे जाना है। वे सपने, हमारे संविधान में, ‘न्याय’, ‘स्वतन्त्रता’, ‘समता’ और ‘बंधुता’ इन चार सारगर्भित शब्दों द्वारा स्पष्ट रूप से समाहित किए गए हैं। असमानता से भरी विश्व व्यवस्था में और अधिक समानता के लिए तथा अन्यायपूर्ण परिस्थितियों में और अधिक न्याय के लिए, दृढ़तापूर्वक प्रयास करने की आवश्यकता है। न्याय की अवधारणा बहुत व्यापक हो गयी है जिसमें आर्थिक और पर्यावरण से जुड़ा न्याय भी शामिल है। आगे की राह बहुत आसान नहीं है।  हमें कई जटिल और कठिन पड़ाव पार करने होंगे, लेकिन हम सबको असाधारण मार्गदर्शन उपलब्ध है। यह मार्गदर्शन विभिन्न स्रोतों से हमें मिलता है। सदियों पहले के ऋषि-मुनियों से लेकर आधुनिक युग के संतों और राष्ट्र-नायकों तक हमारे मार्गदर्शकों की अत्यंत समृद्ध परंपरा की शक्ति हमारे पास है। अनेकता में एकता की भावना के बल पर, हम दृढ़ता से, एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। 
  5. विरासत में मिली हमारे पूर्वजों की जीवन-दृष्टि, इस सदी में, न केवल हमारे लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए सहायक सिद्ध होगी। आधुनिक औद्योगिक सभ्यता ने मानव जाति के सम्मुख गम्भीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। समुद्रों का जल-स्तर बढ़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है। इस प्रकार, जलवायु परिवर्तन की समस्या हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत ने, न केवल पेरिस जलवायु समझौते का पालन किया है, बल्कि जलवायु की रक्षा के लिए तय की गई प्रतिबद्धता से भी अधिक योगदान कर रहा है। फिर भी मानवता को विश्व स्तर पर अपने तौर-तरीके बदलने की सख्त जरूरत है। इसीलिए भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर दुनिया का रुझान बढ़ता जा रहा है; ऐसी ज्ञान परंपरा जो वेदों और उपनिषदों के रचनाकारों द्वारा निर्मित की गई, रामायण और महाभारत में वर्णित की गई, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध तथा गुरु नानक द्वारा प्रसारित की गई, और महात्मा गांधी जैसे लोगों के जीवन में परिलक्षित हुई।
  6. गांधीजी ने कहा था कि प्रकृति के अनुरूप जीने की कला सीखने के लिए प्रयास करना पड़ता है, लेकिन एक बार जब आप नदियों और पहाड़ों, पशुओं और पक्षियों के साथ संबंध बना लेते हैं, तो प्रकृति अपने रहस्यों को आप के सामने प्रकट कर देती है। आइए, हम संकल्प लें कि गांधी जी के इस संदेश को आत्मसात करेंगे और जिस भारत भूमि पर हम रहते हैं, उसके पर्यावरण के संरक्षण के लिए त्याग भी करेंगे।
  7. हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों में देश-प्रेम और त्याग की भावना सर्वोपरि थी। उन्होंने अपने हितों की चिंता न करते हुए हर प्रकार की चुनौतियों का सामना किया। मैंने देखा है कि कोरोना के संकट का सामना करने में भी लाखों लोगों ने अपनी परवाह न करते हुए मानवता के प्रति निस्वार्थ भाव से दूसरों के स्वास्थ्य और प्राणों की रक्षा के लिए भारी जोखिम उठाए हैं। ऐसे सभी कोविड योद्धाओं की मैं हृदय से सराहना करता हूं। अनेक कोविड योद्धाओं को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। मैं उन सबकी स्मृति को नमन करता हूं।
  8. हाल ही में, ‘कारगिल विजय दिवस’ के उपलक्ष में, मैं लद्दाख स्थित ‘कारगिल युद्ध स्मारक – द्रास’ में अपने बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए जाना चाहता था। लेकिन रास्ते में, मौसम खराब हो जाने की वजह से, मेरा उस स्मारक तक जाना संभव नहीं हो पाया। वीर सैनिकों के सम्मान में, उस दिन मैंने बारामूला में ‘डैगर वॉर मेमोरियल’ पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वह मेमोरियल उन सभी सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है जिन्होंने अपने कर्तव्य-पथ पर सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन जांबाज़ योद्धाओं की वीरता और त्याग की सराहना करते हुए मैंने देखा कि उस युद्ध स्मारक में एक आदर्श-वाक्य अंकित है: “मेरा हर काम, देश के नाम।

यह आदर्श-वाक्य हम सभी देशवासियों को मंत्र के रूप में आत्मसात कर लेना चाहिए तथा राष्ट्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा व समर्पण से कार्य करना चाहिए। मैं चाहूंगा कि राष्ट्र और समाज के हित को सर्वोपरि रखने की इसी भावना के साथ हम सभी देशवासी, भारत को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए एकजुट हो जाएं।

मेरे प्यारे देशवासियो,

  1. मैं विशेष रूप से भारतीय सशस्त्र बलों के वीर जवानों की सराहना  करता हूं, जिन्होंने हमारी स्वतंत्रता की रक्षा की है, और आवश्यकता पड़ने पर सहर्ष बलिदान भी दिया है। मैं सभी प्रवासी भारतीयों की भी प्रशंसा करता हूं। उन्होंने जिस देश में भी घर बसाया है, वहां अपनी मातृभूमि की छवि को उज्ज्वल बनाए रखा है।
  2. मैं एक बार फिर आप सभी को भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बधाई देता हूं। यह वर्षगांठ मनाते हुए मेरा हृदय सहज ही आज़ादी के शताब्दी वर्ष 2047 के सशक्त, समृद्ध और शांतिपूर्ण भारत की परिकल्पना से भरा हुआ है।
  3. मैं यह मंगलकामना करता हूं कि हमारे सभी देशवासी कोविड महामारी के प्रकोप से मुक्त हों तथा सुख और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ें।   

एक बार पुनः आप सभी को मेरी शुभकामनाएं!

धन्यवाद,

जय हिन्द!

रोटी बैंक के पदाधिकारियों ने दिव्यांगों को बांटे वस्त्र


बैतूल- रोटी बैंक के पदाधिकारियों ने आज निशक्त पति पत्नी एवं उनके बच्चों के लिए नए वस्त्र खरीद कर बांटे गए। सोसाइटी के श्री देवेंद्र बरथे ने कहा की भूखे को रोटी रहने को मकान और पहनने को वस्त्र यदि मिल जाए तो उसका जीवन धन्य हो जाता है।आज भी मानव समाज में ऐसे निशक्त एवं असहाय लोग है जिन को दो वक्त की रोटी तन पर कपड़े और रहने के लिए मकान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है संभवत सोसाइटी के माध्यम से भूखे को रोटी उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी है। जिला मुख्यालय पर पुलिस ग्राउंड से लगा हुआ गोकुल सेन परिवार पूर्णत निशक्त है, रोटी और कपड़ों के लिए लगातार उनका संघर्ष जारी है, रहने को छत नहीं है, ऐसी स्थिति में रोटी बैंक द्वारा उन्हें प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जाता है, आज पूरे परिवार को नए वस्त्र श्री आर के विजयकर, श्री एस ब्राह्मणे, श्रीमती माला खातरकर, श्रीमती उषा सातनकर श्री महेंद्र सोनकर, श्री रमेश पद्माकर आदि पदाधिकारियों के विशेष उपस्थिति में वस्त्र वितरित किया गए आगे भी सोसाइटी के माध्यम से गरीब असहाय लोगों की मदद के लिए हमेशा वचनबद्ध हैं कटिबद्ध है।

सरकार अन्नोत्सव नहीं प्रचारोत्सव मना रही – विधायक निलय डागा


बैतूल – प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सरकार द्वारा प्रदेश में अन्न उत्सव कार्यक्रम का आयोजन कर पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न बांंटा गया। इस आयोजन को विधायक निलय डागा ने आडे़ हाथोंं लेेेते हुए कहा कि यह अन्नोत्सव नहीं प्रचारोत्सव है। पात्र हितग्राही को जब पहले से ही राशन मिल रहा है तो यह पाखंड रचने की क्या आवश्यकता है। श्री डागा ने आरोप लगाया कि प्रचार की मंशा से सरकार ने अन्नोत्सव के तहत मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री की फोटो लगे बेग में राशन वितरण किया। इन बेगों की छपाई में लाखों रूपये खर्च हुए हैं। सभी सोसायटीयों पर टेन्ट लगाना अनिवार्य किया किया गया। इसमें भी हजारों रुपये खर्च हुए होंगे। अमूमन 40 से 50 हजार रुपये प्रति सोसायटी पर खर्च हुए। जनता की गाड़ी कमाई के लाखों रूपये का मोदी कम्पनी अपने प्रचार के लिए दुरूपयोग कर रही है। इसके साथ-साथ हर सोसायटी पर बारिश के समय में रंग रोगन के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए गए।

विधायक का कहना कि जब प्रदेश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा था, जनता दाने दाने के लिए मोहताज थी तब सरकार द्वारा किसी भी प्रकार की कोई सहायता आमजन को नहीं की गई। लेकिन अब प्रधानमंत्री एवं उनकी पार्टी द्वारा अपना प्रचार- प्रसार करने के लिए अन्न उत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय मद का दुरुपयोग किया जा रहा है। विधायक का आरोप है कि 5 रुपये का गेहूं देने के लिए 50 रुपये का थैला तैयार किया गया। जिसमें प्रधानमंत्री एवं शिवराज सिंह चौहान ने अपनी फोटो चस्पा कर अपना प्रचार करने का माध्यम बना दिया है। पहली व दूसरी लहर के दौरान जब आमजन मौत की लड़ाई लड़ रहा था तब राष्ट्रीय मद में कमी की बात की जा रही थी। लेकिन अब प्रचार- प्रसार करने के लिए राष्ट्रीय मद का उपयोग किया जा रहा है। विधायक ने कहा एक दिन अन्न दे देने से सिर्फ एक दिन का गुजारा हो सकता है, लेकिन रोजगार प्रदान करने से व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर बनेगा अपना पालन पोषण कर सकेगा। विधायक ने कहा जिनके कार्ड नहीं हैं उन्हें भी अनाज प्रदान किया जाए।  पात्रता पर्ची नहीं होने के कारण सैकड़ों हितग्राही राशन दुकानों से अनाज लिए बिना ही वापस लौटने को विवश हो रहे हैं। नए बीपीएल कार्ड धारी परिवार को कूपन नहीं मिलने के कारण मुफ्त अनाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अन्नोत्सव का कोई औचित्य नहीं है।

रोंढा में सिर्फ 50 हितग्राहियों को बाँटा गया राशन, बाकी लौटे बैरंग


बैतूल- प्रदेशभर सहित जिलेभर में शनिवार को अन्नोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों में पात्र हितग्राहियों को 10-10 किलो अनाज के बेग वितरित किए गए। इनमें चावल, गेहूं सहित अन्य खाद्यान्न दिए गए।

प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि देश-प्रदेश में कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। इसी को लेकर देशभर मेें अन्नोत्सव मनाया जा रहा है। यह आयोजन लगातार जारी रहेगा औैर सभी हितग्राहियों को अनाज वितरित किया जाएगा।

इसी योजना के अन्तर्गत बैतूल जिले के समीपस्थ ग्राम रोंढा में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति के हिसाब से गेहूं का वितरण किया गया। जिसमें शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक परिवार को 10 किलो गेहूं का वितरण प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के सचित्र बैगों में बाँटा गया। प्रधानमंत्री की गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राही भारी संख्या में राशन दुकान पर पहुंचे। स्थानीय जनप्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे और जनप्रतिनि़धियों की मौजूदगी में पात्र हितग्राही परिवारों को 10 किलो गेहूं का वितरण किया गया।

प्रशासन के निर्देशों के अनुसार 100 परिवारों को राशन वितरित किया जाना था परन्तु केवल 50 परिवार को ही राशन वितरित किया गया और अन्य पात्र हितग्राही को बैरंग वापस लौटना पड़ा। पात्र हितग्राहियों का कहना है कि वह सुबह 9:00 बजे से राशन दुकान पर पहुंचे थे और दोपहर 2:00 बजे तक बैठे रहने के पश्चात भी उन्हें बिना राशन लिए वापस लौटना पड़ा। साथ ही राशन प्राप्त कर चुके लाभार्थियों का कहना है कि हमें केवल 10 किलोग्राम अनाज प्राप्त हुआ है जबकि शेष अनाज कब मिलेगा इसके अभी फिलहाल कोई जानकारी नही है।

कार्यक्रम में इस अवसर पर ग्राम पंचायत की प्रधान श्रीमती मालती बाई, वर्तमान जनपद सदस्य ललित बारंगे, पूर्व जनपद सदस्य दशरथ कोड़ले, सोसाइटी प्रबंधक प्रदीप मालवी, ग्राम पटवारी संदीप चौरगडे़, ग्राम रोजगार सहायक ऊषा मालवी, राशन दुकान संचालिका ललिता इवने सहित ग्राम के जनप्रतिनिधि और राशन हितग्राही मौजूद रहे।

भोयर पवार समाज का शिष्टमंडल मिला केंद्रीय मंत्री गडकरी एवं वीरेंद्र कुमार से


नागपूर – 3 अगस्तः- केंद्र सरकार के ओबीसी सूची से पवार नाम हट जाने से उत्पन्न हुई समस्या का हल निकालने एवं नाम पुनःसम्मिलित करने हेतू भोयर पवार समाज के प्रतिनिधि मंडल ने हाल ही मे दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी और मा. केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्रकुमार से मुलाकात कर समस्या की जानकारी दी।

सुधीर दिवे इनके माध्यम से समाज के प्रतिनिधी श्रावण फरकाडे, मोरेश्वर भादे, अजय फरकाडे इन्होने भंडारा के सासंद सुनिल मेंढे, बालाघाट सिवनी के सांसद ढालसिंग बिसेन, सासंद रामदास तडस इनसे दिल्ली निवास स्थान पर मुलाकात कर जानकारी दी। निवेदन में पवार समाज का पवार जातीय नाम केंद्र के ओबीसी सूची से हट जाणे के संदर्भ में मंत्री को तथा सभी सांसद को ने जानकारी दी और इस समस्या का समाधान करने की अपील की गयी। इस पर सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सुब्रम्णनेम इनसे मंत्री महोदय ने चर्चा करके इस संदर्भ में विस्तृत अहवाल सोंपने के निर्देश दिये। पवार समाज की इस समस्या का समाधान जल्दी ही करेंगे ऐसे आस्वस्त किया। प्रतिनिधि मंडल द्वारा पंतप्रधान कार्यालय एवं राष्ट्रपति कार्यालय को निवेदन सौपा गया इस अवसर पर रुचित पांडे,आदित्य कुमार, प्रणव जोशी, अविनाश बैंगणे (महाराष्ट्र सदन दिल्ली ) इनका सहकार्य प्राप्त हुआ।

विधायक धरमुसिंग सिरसाम फिल्म जंगल सत्याग्रह मे बतौर अभिनेता के रूप मे निभाएंगे किरदार


बैतूल- बगडोना बस्ती में सामुदायिक भवन में द्वितीय ऑडिशन संपन्न किया गया, फिल्म के लेखक एवं निर्देशक प्रदीप उइके ने बताया कि मध्यभारत (गोंडवाना प्रांत) वर्तमान मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी क्षेत्र मे जन्मे सरदार गंजन सिंग कोरकू और सरदार विष्णुसिंग उइके हजारों आदिवासी के साथ मिलकर अंग्रेजो से लोहा लेकर देश के आजादी में अमूल्य योगदान दिया, नमक सत्याग्रह के समतुल्य आदिवासी नेतृत्व ने पुरे देश में घास पर लगे कर के विरोध मे जंगल सत्याग्रह कर अंग्रेजों को दांतो तले चने चबाने के लिए मजबूर कर दिया था, शराब दुकान लूटना, रेल्वे जलाना अनेक आंदोलन किये।

इस पर जंगल सत्याग्रह फिल्म बनाया जाना है, उसके लिए ऑडिशन रखे जा रहे है, निर्देशक लेखक प्रदीप उइके ने ये भी बताया कि विधायक धरमु सिंग सिरसाम भी फिल्म मे अहम भूमिका निभाते दिखाई देंगे, 150 से अधिक नागपुर, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद, हरदा, बैतूल के कलाकारों ने हुनर पेश किया, फिल्म में 20-25 मुख्य कलाकार दिखाएंगे अपनी भूमिका उन्ही कि तलाश में कर रहे जगह जगह ऑडिशन, ऑडिशन मे जिले के वरिष्ठ जन विधायक धरमु सिंग सिरसाम, पूर्व जिला सदस्य श्यामू परते, जनपद अध्यक्ष आठनेर रामचरण इरपाचे, जनपद अध्यक्ष भैंसदेही संजय मावस्कर, जनपद उपाध्यक्ष घोड़ाडोंगरी, मिश्री परते, डॉ राजा धुर्वे, सरवन परते, सुभाष उइके, जयचंद सरियाम, इंजी. राजा धुर्वे, मुकेश धुर्वे मौजूद थे,

ऑडिशन समापन पर विधायक धरमुसिंग सिरसाम ने अपने वक्तव्य में कहाँ कि 1947 से आज प्रयन्त तक आदिवासियों के इतिहास को उजागर नहीं किया, मेरे बेटे तुल्य प्रदीप उइके ने आदिवासी क्रांतिकारियों पर फिल्म लिख इतिहास रच दिया, उन्हें फिल्म बनाने के लिए आर्थिक सहयोग किया जायेगा, श्यामू परते ने कहाँ कि गीत के माध्यम से बैतूल जिला आज भी गौरवान्वित महसूस करता है पहली बार हमारे इतिहास पर फिल्म बन रही है हमें गर्व महसूस हो रहा है सपना सच होते दिखाई दे रहा है, रामचरण इरपाचे ने बताया कि हमारे क्षेत्र आठनेर के जुगरु गोंड आष्टी के रहने वाले थे, उनके मित्र गंजन, विष्णु थे और इन्होने मिलकर इतिहास रच दिया, इससे युवावों को प्रेरणा लेनी चाहिए, तन, मन और धन से पूर्ण सहयोग किया जायेगा, संजय मावस्कार ने कहाँ कि कोरकू समुदाय आर्थिक पिछड़ा जरूर है मगर आज भी एकता मजबूत है, हमारे पूर्वजों ने विरासत में ये गुण हमें दिये, मिश्री परते जी सम्बोधन करते हुये कहने लगे ये दिन देखने के लिए हम राह देख रहे थे, कोई तो समाज में पैदा होगा जो समाज पर फिल्म लेखन कर बनायेंगा, देर है पर अंधेर नहीं, सुभाष उइके ने कलाकारों का हौशल बढ़ाते हुये कहाँ कि कोई कलाकार छोटा और बड़ा नहीं होता, सभी को लगन से काम करने कि जरूरत, इंजी. राजा धुर्वे ने थिएटर एक्टर कि कहानी बताते हुये कहाँ शुरुआत एक बंद कमरे से होती है और पहचान पुरे देश में मिलती है, ये फिल्म आपकी किस्मत बदलकर ऊँचाई पर ले जाएंगी, अंतिम मे श्यामू परते ने सभी कलाकारों को उनके उज्जवल भविष्य कि शुभकामनायें दी।