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रचित विजयकर का सुयश


बैतूल – सीबीएसई केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित कक्षा बारहवीं के नतीजों के तहत लिटिल फ्लावर सीनियर सेकेंडरी स्कूल सदर बैतूल मध्य प्रदेश के रचित विजयकर पिता श्री आर. के.विजयकर, माता श्रीमती ज्योति विजयकर ने कक्षा 12वीं में विज्ञान संकाय 92% अंक लाकर कक्षा में अव्वल स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि पर एस. एम्पलाई वेलफेयर सोसाइटी मध्य प्रदेश बैतूल के पदाधिकारियों ने उनके निज निवास पर पहुंचकर छात्र की सफलता पर पुष्पगुच्छ भेंट करते हुए उनका अभिनंदन एवं स्मृतिचिन्ह स्वरूप “विजिटिंग डायरी विद स्मार्ट पेन” भेंट किया। छात्र से अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और गुरुजनों एवं कड़ी मेहनत और परिश्रम को दिया। छात्र रचित विजयकर सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष श्री आर.के.विजयकर (आदिवासी विकास बैतूल) के कनिष्ठ पुत्र हैं इस अवसर पर अपने शुभकामना संदेश में सजाक्स संगठन के जिलाध्यक्ष एस. ब्राह्मणे ने छात्र रचित के उज्जवल सुखद और स्वर्णिम भविष्य के लिए अनंत अपार शुभकामनाएं दी।
बधाई देने वालों में श्री हेमराज पाटिल श्री गजानंद पंडाग्रे, श्रीमती माला खातरकर, श्रीमती उषा सातनकर, श्रीमती निर्मला भटनाकर, श्री सुरेश गायकवाड, श्री सतीश जोंधलेकर, श्री देवेंद्र बरथे आदि पदाधिकारियों ने छात्र की सफलता पर छात्र एवं उनके माता पिता को बधाई और शुभकामनाएं दी है साथ ही उज्जवल भविष्य की कामना की है।

21 सरहदों पर जाएगी बैतूल की बहनों की हाथ से बनी राखियां


21 सरहदों पर जाएगी बैतूल की बहनों की हाथ से बनी राखियां, करगिल युद्ध के बाद से जारी है राष्ट्र रक्षा मिशन का संकल्प

बैतूल। जिले की बहनें रक्षा बंधन के एक महीने पहले से फौजी भाईयों के लिए राखी बनाने में जुट गई है। यह राखियां देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों के लिए बनाई जा रही है। बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के राष्ट्र रक्षा मिशन को यह राखियां अलग-अलग संगठनों एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी छात्राओं द्वारा भेंट की जाएगी।

जिले के अग्रणी कोचिंग संस्थान दृष्टि एजुकेशन की छात्राओं ने भी सैकड़ों राखियां देश की सीमाओं पर तैनात फौजियों के लिए बनाई गई है। यह राखियां पूर्व सैनिक विजय नरवरे, संजय नरवरे एवं कोचिंग संचालक श्री कमलेश निरापुरे के मार्गदर्शन में तैयार की गई है। अंतिम सांस तक चलेगा राष्ट्र रक्षा मिशन करगिल युद्ध के बाद से देश की 20 सरहदों पर बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के सदस्य प्रत्यक्ष रुप से पहुंचकर रक्षा बंधन का पर्व मनाते आए है। वर्ष 2020 में कोरोना की वजह से बैतूल की बेटियां सरहदों पर भले ही नहीं पहुंची लेकिन सैनिकों की कलाई उन्होंने सूनी नहीं रहने दी। गत वर्ष 20 सरहदों पर राखियां पोस्ट की गई थी और इस वर्ष भी संस्था द्वारा आमला सहित 21 सरहदों पर सैनिकों के लिए राखियां भिजवाई जाएगी। संस्था प्रमुख गौरी भारत पदम ने बताया कि राष्ट्र रक्षा मिशन अंतिम सांस तक चलता रहेगा। संस्था के इस मिशन से पूरा बैतूल जुड़ा है। हर बैतूलवासी को बैतूल की इन बेटियों पर नाज है जिन्होंने मुश्किल से मुश्किल हालात में सेना की हौसला अफजाई के लिये लिया संकल्प निभाया है।

दृष्टि एजुकेशन की छात्राओं ने बनाई सैकड़ों राखियांसदर क्षेत्र में संचालित दृष्टि एजुकेशन कोचिंग संस्थान के छात्र-छात्राओं में सेना के प्रति अटूट जज्बा है। इस संस्थान का संचालन में भी पूर्व सैनिकों द्वारा ही श्री निरापुरे को मार्गदर्शन किया जा रहा है। जब कोचिंग संचालक एवं पूर्व सैनिकों ने हाथ से बनाई राखियां सैनिकों के लिए भेंट करने की मंशा जाहिर की तो राष्ट्र रक्षा मिशन की बहनों ने सहर्ष राखियां सरहद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमेशा की तरह ली। इस वर्ष भी देश की सरहदों पर तैनात हजारों सैनिकों की कलाई पर बैतूल की राखी सजेगी। कोचिंग की छात्रा भारती राऊत, विशाखा यादव, टीना दीवान, हर्षलता खाकरे, साक्षी माकोड़े, शिवानी धुर्वे, सरस्वती काकोड़िया, प्रियंका गीद, स्वाती निरापुरे ने मिलकर सैकड़ों राखियां फौजियों के लिए बनाई है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में करेंगे पोस्टराष्ट्र रक्षा मिशन का दल प्रयासरत है कि कोरोना गाईडलाईन का पालन करते हुए उन्हें सरहद पर जाने की अनुमति मिल जाए। गत वर्ष अनुमति न मिलने और रेल यातायात बंद होने की वजह से आमला में एयर फोर्स के जवानों को राखियां सौंपी गई थी। इस वर्ष हमेशा की तरह प्रत्यक्ष रुप से जाने के प्रयास किए जा रहे है।

समिति की कोषाध्यक्ष जमुना पंडाग्रे ने बताया कि जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में सभी राखियां सरहदों के लिए पोस्ट कर दी जाएगी। गत वर्ष कुछ सरहदों पर राखियां देर से पहुंची थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। उन्होंने अनुरोध किया है कि जो भी बहने राखियां भेंट करना चाहती है वह संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से सम्पर्क कर सकती है। 

प्रदीप डिगरसे मुलतापी समाचार बैतूल 9584390839

ज़िंदगी है तो इम्तिहान भी होंगे साहब,वरना मुर्दों के तो सिर्फ़ श्राद्ध होते है


एक पुलिस अधिकारी कि कलम से… ✍🏼

मुलतापी समाचार

मध्यप्रदेश: आजकल सोशल मिडीया पर पुलिस की सख़्ती दिखाते विडीयो किसी के लिए मनोरंजन का साधन हैं तो किसी के लिए क्रूरता की हद। …सबका अपना-अपना गणित व व्याकरण है , सबकी अलग अलग सोच। परंतु कितने लोग सोच रहे हैं कि हम किन हालातों से गुज़र रहे हैं? हमारा कलेजा मुँह को आ जाता है जब हमारे बच्चे पुछते हैं कि पापा घर कब आओगे? आपको बीमारी नहीं होगी ना?आँखें भर आती हैं जब पत्नी रुँधे गले से फ़ोन पर बोलती है-अपना ध्यान रखना और यह कहते ही बिना जवाब सुने फ़ोन काट देती है क्योंकि वह नहीं चाहती कि हमें पता लगे कि वो रो रही है।

मैं मध्य प्रदेश पुलिस की तरफ से आपको बता देना चाहता हूँ कि पूरे भारत की पुलिस, सुरक्षा को ठेंगा दिखाने वालों पर सख़्ती सिर्फ़ इसलिए कर रही है कि उनका अपना परिवार सुरक्षित रह सके। ये समाज सजीव रह सके। संसार के मानचित्र पर हमारे महान देश का अस्तित्व बना रहे।


याद कीजिए हड़प्पा एवं मेसोपोटामिया सभ्यता को। दोनों सभ्यताएं अपने समय में चरम पर एवं पूर्णत: उन्नत अवस्था में थी। परंतु आज ?? …… हड़प्पा/मोहनजोदड़ो या सिन्धु घाटी सभ्यता को अकाल या कोरोना जैसी ही कोई महामारी खा गई थी। जिसके अवशेष मात्र कहीं-कहीं खुदाई में मिलते हैं तो मेसोपोटामिया को सिकंदर की हठधर्मिता का निवाला बनना पड़ा । और नतीजन; उस सभ्यता का वजूद ही न रहा।

अब आप सोचिए कि आपको अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को मिट्टी में मिलाकर अवशेष मात्र बनाना है या कोरोना महामारी से बचाकर अपनी भावी पिढ़ियों को फलते-फूलते देखना है? आपको हठधर्मी बनकर रसना के स्वादपूर्ति व व्यापार विस्तार हेतु गलियों-सड़कों पर घुमकर अपना, परिवार का व सम्पूर्ण राष्ट्र का नामों-निशाँ कोरोना के माध्यम से नेस्तनाबूद करना है या अपने महान राष्ट्र को विश्वगुरु बनाना है? फैंसला आपको करना है। याद रखिए- हम उस महान हिंद के निवासी हैं जो इतिहास बनाते हैं न कि इतिहास बनते हैं। संक्रमण की उस परिधि में जहाँ ज़रा-सी चुक निश्चिततः मौत है।

हमारे चिकित्सा जगत, बैल्ट के साथी व अन्य कई विभागों के साथी दिन रात एक करके आप लोगों की सुरक्षा में लगे हैं। हमारे जीवन की कोई गारंटी नहीं है पर हम आपको गारंटी दिलाते हैं कि आप सब अपने घरों में रहिए और माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार व प्रशासन द्वारा दी गई हिदायतों का पालन कीजिए। आपके जीवन की सुरक्षा हम करेंगे। एक बात और कहना चाहूँगा देशवासियों कि-

ज़िंदगी है तो इम्तिहान भी होंगे साहब,
वरना मुर्दों के तो सिर्फ़ श्राद्ध होते है

salute corona_fighter
SatyHome – StaySafe

Best of luck for corona fighter

Mp police betul

शिवा पवार मुलतापी समाचार बैतूल

Shiva pawar

चैत्र नवरात्रि: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने से मिलेगी ऊर्जा


मुलतापी समाचार मनोज कुमार अग्रवाल

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शक्ति के तीसरे रूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है! बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है! 10 भुजाओ वाली देवी के हर हाथ में अलग-अलग शस्त्र विभूषित हैं! मान्यताओं के अनुसार, मां का यह स्वरूप आभामंडल से युक्त है, जो भक्तों को ऊर्जा प्रदान करता है, और उन्हें प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाता है!

मुलतापी समाचार

भारत पर निर्भर है कोरोना का भविष्य, पहले भी ऐसे दुश्‍मनों को हराया-WHO


WHO के निदेशक डॉ. माइकल जे रायन ने कहा है कि कोरोना वायरस(COVID19) का भविष्य में कैसा असर रहेगा यह भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देशों की कार्रवाई पर तय होगा।…

वाशिंगटन,ANI। कोरोना वायरस को हराने में भारत समेत सभी देशों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। भारत में अभी तक कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन की स्‍टेज नहीं आई है। इस बीच विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के निदेशक डॉ. माइकल जे रायन ने कहा है कि कोरोना वायरस(COVID19) का भविष्य में कैसा असर रहेगा यह भारत जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देशों की कार्रवाई पर तय होगा। उन्होंने कहा, ‘चीन की तरह भारत बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश है। कोरोना वायरस के दूरगामी परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि बड़ी जनसंख्या वाले देश इसे लेकर क्या कदम उठाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि भारत जनस्वास्थ्य के स्तर पर कड़े और गंभीर निर्णय अपनी लोगों के लिए लेना जारी रखे।’
रायन ने कहा कि भारत ने दो मूक हत्यारों- स्मॉल पॉक्स और पोलियो के उन्मूलन में दुनिया का नेतृत्व किया। भारत में जबरदस्त क्षमता है, सभी देशों में जबरदस्त क्षमता है। जब समुदायों और समाजों को जुटाया जाता है, तो कोई भी लक्ष्‍य हासिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत ने पोलियो से लंबी लड़ाई लड़ी और कुछ साल ही भारत पोलिया मुक्‍त हो गया है।

बता दें कि भारत में अभी कोरोना वायरस के 471 मामले सामने आए हैं। भारत में अभी यह महामारी सिर्फ दूसरे चरण तक पहुंची है। हमारी यह कोशिश है कि यह तीसरे चरण यानि कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन (जहां पता ही नहीं चलता कि वायरस किसकी वजह से किसी शख्‍स में आया) तक नहीं पहुंच है। भारत पूरी ताकत के साथ कोरोना वायरस के साथ जंग लड़ रही है और डब्‍ल्‍यूएचओ समेत सभी इसकी तारीफ कर रहे हैं।

भारत में अभी तक कोरोना वायरस के कहर को काफी हद तक रोक रखा है। दिल्‍ली में पिछले 24 घंटों में कोई भी कोरोना वायरस से संक्रमित मामला सामने नहीं आया है। हां, महाराष्‍ट्र में स्थिति कुछ चिंताजनक नजर आ रही है। वहां, मरीजों की संख्या 101 हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पुणे में तीन नए मामले सामने आए हैं और संतारा में एक मामले की पुष्टि हुई है। यहां अभी तक दो लोगों की मौत हो गई है। इधर, नॉर्थ-ईस्‍ट में भी अभी सिर्फ एक मामला मणिपुर में सामने आया है।

अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से अगर भारत की तुलना की जाए, तो अंतर साफ नजर आता है कि कोरोना वायरस की रफ्तार हिंदुस्‍तान में काफी धीमी है। इटली और अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्‍या हजारों में पहुंच गई है। इसकी एक वजह भारत सरकार के द्वारा उठाए गए कुछ कड़े कदम भी हैं। इसके अलावा राज्‍य सरकारें भी बेहद सख्‍ती के साथ कोरोना वायरस के मद्देनजर नियमों का पालन न करने वालों से निपट रही हैं। विभिन्‍न राज्‍यों में सैकड़ों लोगों के खिलाफ लॉकडाउन का उल्‍लंघन करने पर एफआइआर दर्ज की गई है।

इस बीच अस्‍पतालों में हमारा मेडिकल स्‍टाफ भी पूरी शिद्दत के साथ मरीजों का इलाज करने में जुटा हुआ है। इसी का नतीजा है कि 25 के आसपास लोग कोरोना वायरस को मात देकर अस्‍पतालों से अपने घर पहुंच गए हैं। हालांकि, डॉक्‍टर्स और प्रशासन का अभी यही कहना है कि लोगों को दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

शिवा पवार मुलतापी समाचार बैतूल